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बार कोडिंग समानांतर शीर्ष रेखाओं (बार्स और स्पेस) की एक श्रृंखला है जिसे बार कोड स्कैनर द्वारा पढ़ा जा सकता है। उत्पाद पैकेज के भाग के रूप में, मूल्य टैग, कार्टन लेबल, क्रेडिट कार्ड बिलों में इनवॉयसों पर भी इसका विश्वव्यापी प्रयोग किया जाता है और जब इसे स्कैनर द्वारा पढ़ा जाता है तो यूजर्स पर बड़ी मात्रा में आंकड़े उपलब्ध करा दिये जाते हैं और जब इसे ईएएन.यूसीसी (यूरोपियन आर्टिकल नंबरिंग.यूनीफॉर्म कोड कौंसिल इंक.यूएसए) नंबरिंग सिस्टम के साथ पढ़ा जाता है तो बार कोड अद्वितीय और वैश्विक बन जाता है तथा दुनिया में कहीं भी इसकी पहचान की जा सकती है। बार कोडिंग आज एक अंतर्राष्ट्रीय अवधारणा है। यह अंतर्राष्ट्रीय प्रतीकों/नंबरिंग सिस्टम का प्रयोग करते हुए अद्वितीय उत्पाद पहचान करने, ब्रांड इमेज का संवर्धन करने की सुविधा प्रदान करता है तथा इससे उत्पाद सूचना को समय पर और ठीक रूप में प्राप्त करना संभव हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप बीजक लागतों को कम करने, समग्र आपूर्ति श्रृंखला लागतों को कम करने सहित व्यापक सीमा में लाभ प्राप्त होंगे तथा इस प्रकार भारतीय उत्पादों की लागत घटेगी, भारतीय उद्योग की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और उत्पाद विकास की रूपरेखा के माध्यम से कड़े गुणवत्ता आश्वासन मानदंडों का पालन किया जा सकेगा।
Fलघु उद्योग इकाइयों के समक्ष संसाधन संबंधी बाधाएं हैं किंतु उन्हें अपनी क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी टूल्स को व्यापक तौर पर अपनाने के साथ वैश्विक और घरेलू व्यवसाय अवसरों के लिए प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता है, क्योंकि बाज़ार तक पहुंच और लागत प्रभावोत्कता आज के समय में अनिवार्य व्यवसायिक आवश्यकता है। बार कोडिंग पूरे विश्व में पिछले 25 वर्षों से व्यापक तौर पर प्रयोग की जा रही है और अब उद्योग क्षेत्र के बाहर भी इसके प्रयोग में वृद्धि हो रही है। बार कोडिंग के महत्व को चिह्नित करते हुए विकास आयुक्त (लघु विकास) का कार्यालय, लघु उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने बार कोडिंग एवं ई-कॉमर्स एप्लीकेशनों में अंतर्राष्ट्रीय नंबरिंग सिस्टम को अपनाने के लिए 27 नवंबर, 2001 की अपनी अधिसूचना संख्या 10(6)/2000-ईपी एंड एम के अनुसार पंजीकृत लघु एवं अत्यंत लघु क्षेत्र के उद्योगों के लिए 1 जनवरी, 2002 से एक आकर्षक वित्तीय सहायता योजना अधिसूचित की है। योजना के अनुसार लघु उद्योग/अति लघु इकाइयां जिन्होंने 1 जनवरी, 2002 को या इसके बाद बार कोड को अपनाया है, अब ईएएन इंडिया को भुगतान किए जाने वाले एकमुश्त पंजीकरण शुल्क के 75 प्रतिशत की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं। यह भी निर्णय लिया गया है कि लघु उद्योग/अति लघु इकाइयां जो बार कोडिंग के लिए पिछले वर्ष अर्थात् 01.1.01 को अथवा उसके बाद पंजीकृत की गई हैं, वे भी एकमुश्त पंजीकरण शुल्क के 75 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की पात्र हैं।
संबद्ध पंजीकरण फॉर्मों के साथ विस्तृत लघु उद्योग योजना हमारी वेबसाइट www.smallindustryindia.com अथवा www.laghu-udyog.com तथा ईएएन इंडिया की वेबसाइट www.eanindia.com पर उपलब्ध हैं। सभी लघु उद्योग/अति लघु इकाइयों को इस वित्तीय सहायता का लाभ उठाने के लिए यथाशीघ्र आवेदन करने का परामर्श दिया जाता है।
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