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भारतीय प्रस्तर उद्योग के विकास के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम |
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विकास आयुक्त (लघु उद्योग) का कार्यालय, संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (आईसीएएमटी), प्रस्तर विकास केंद्र (सीडीओएस), जयपुर |
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कार्यक्रम के उद्देश्य:
विमितीय प्रस्तर वस्तुओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार के विकास सहित प्रस्तर उद्योग का प्रौद्योगिकीय उन्नयन।
परीक्षण, प्रमाणन और मानव संसाधन विकास के लिए सुविधाओं सहित एक राष्ट्रीय विमितीय प्रस्तर केंद्र का विकास करना।
पर्यावरण के प्रदूषण को कम करने और कामगारों के लिए स्वास्थ्य मानकों को बेहतर बनाने के लिए भी पत्थरों के खनन हेतु आदर्श खनन प्रौद्योगिकियों का विकास करना। |
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परियोजना लागत |
1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर |
भारत सरकार |
0.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर |
राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक
की राज्य सरकारें (प्रत्येक 0.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर) |
0.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर |
प्रस्तर उद्योग संघ |
0.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर |
संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन |
0.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर |
· वर्तमान स्थिति:
राज्य मंत्री (लघु उद्योग एवं कृषि और ग्रामीण उद्योग) द्वारा 17 नवंबर 2000 को परियोजना का शुभारंभ किया गया।
परियोजना के कार्यान्वयन के लिए प्रस्तर विकास केंद्र, जयपुर का नोडल एजेंसी के रूप में चयन किया गया है।
न्यूरेमबर्ग (जर्मनी) और कर्रारा (इटली) में मई/जून 2001 तथा वेरोना (इटली) में अक्तूबर, 2002 में अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तर मेलों में भारतीय प्रस्तर उद्योग की सहभागिता।
6 से 10 फरवरी, 2002 तक स्टोना 2002, विमितीय प्रस्तरों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, प्रस्तर उत्पादों पर क्रेता-विक्रेता समागम और शिल्प ग्राम का बंगलौर में आयोजन।
भारतीय प्रस्तरों के लिए राष्ट्रीय परीक्षण गृह की स्थापना के लिए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स, कोलार (कर्नाटक) का परामर्शदाता के रूप में चयन किया गया।
जून 2002 में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स द्वारा राजस्थान में पत्थर खनन पर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजन।
भारत में पत्थरों का सार-संग्रह प्रिंट और वेबसाइट पर जारी किया गया।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तर मेला "स्टोनमार्ट 2003" फरवरी, 2003 में जयपुर में आयोजित होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया www.icamt.org/stone.html पर जाएं।
भारत में पत्थरों के सार-संग्रह के लिए www.icamt.org/stone-compendium.html देखें।
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