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राज्य मंत्री (लघु उद्योग एवं कृषि और ग्रामीण उद्योग) द्वारा 21 सितंबर 2000 को परियोजना का शुभारंभ किया गया।
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जुलाई 2000 में संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के साथ परियोजना दस्तावेज और ट्रस्ट फंड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए।
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टॉय सिटी, ग्रेटर नौएडा में खिलौना डिज़ाइन और विकास संस्थान की स्थापना के लिए ग्रेटर नौएडा प्राधिकरण द्वारा आवंटित 18,144.39 मीटर वर्ग के एक प्लॉट को पंजीकृत कराया गया और भूमि का वास्तविक कब्जा लिया गया।
खिलौना डिज़ाइन और विकास संस्थान को एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत कराया गया।
ग्रेटर नौएडा में खिलौना डिज़ाइन और विकास संस्थान की स्थापना के लिए तकनीकी परामर्श देने हेतु एआईजेयू, स्पेन के साथ अनुबंध किया गया।
आईएस:9873, भाग 1, 2 और 3 तथा ईएन-71 के रूप में खिलौनों के परीक्षण के लिए क्षेत्रीय परीक्षण केंद्र, नई दिल्ली और मुम्बई में परीक्षण सुविधाएं स्थापित की गईं।
राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान, अहमदाबाद और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली खिलौना उद्योग को आवश्यक डिज़ाइन निवेश प्रदान कर रहे हैं।
सीई प्रमाणन पर 15.01.2002 और 25.02.2002 को क्रमश: नई दिल्ली और मुम्बई में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
मई 2001 में दिल्ली और मुम्बई में खिलौनों की प्रौद्योगिकी और सुरक्षा आवश्यकताओं पर प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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वर्ष 2001 और 2002 में विपणन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय खिलौना संघ के सदस्यों ने न्यूयॉर्क में खिलौना मेले में भाग लिया।
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28 और 29 जुलाई 2002 को प्रगति मैदान में प्रदर्शनी सह क्रेता-विक्रेता सम्मिलन (टॉय बिज़ 2002) तथा 1 और 2 मार्च, 2003 को मुम्बई में टॉय बिज़ 2003 का आयोजन किया गया।
क्षेत्रीय परीक्षण केंद्र, नई दिल्ली में 25 अक्तूबर, 2002 को 'खिलौनों के लिए उन्नत प्लास्टिक प्रक्रिया' पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
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29.11.2002 को ट्राइडेंट होटल, चेन्नै में, 24 जनवरी 2003 को उदयपुर और 9 जनवरी 2003 को लघु उद्योग सेवा संस्थान कोलकाता में खिलौना उद्योग पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
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24 मार्च 2003 को क्षेत्रीय परीक्षण केंद्र, मुम्बई में गुणवत्ता उन्नयन और खिलौना परीक्षण पर सेमिनार तथा 25 मार्च 2003 को राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान, अहमदाबाद और टीएआईटीएमए के सहयोग से लघु उद्योग सेवा संस्थान, मुम्बई में टॉय डिज़ाइन क्लिनिक का आयोजन किया गया।
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खिलौनों के लिए उन्नत पैकेजिंग के विकास के संबंध में भारतीय पैकेजिंग संस्थान, मुम्बई ने मुम्बई और दिल्ली में खिलौना निर्माता इकाइयों का अध्ययन किया।
अभी तक अपर सचिव एवं विकास आयुक्त (लघु उद्योग) की अध्यक्षता में राष्ट्रीय खिलौना उद्योग विकास कार्यक्रम की संचालन समिति की पांच बैठकें और खिलौना डिज़ाइन तथा विकास संस्थान की गवर्निंग कौंसिल की दो बैठकें हो चुकी हैं।
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लघु उद्योग सेवा संस्थान, नई दिल्ली और मुम्बई में क्रमश: 23.05.2003 और 20.05.2003 को विशेषत: खिलौना उद्योग के लिए आईपीआर पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
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क्षेत्रीय परीक्षण केंद्र, नई दिल्ली में 7 अगस्त 2003 को भारतीय खिलौना उद्योग का प्रौद्योगिकी उन्नयन और निर्यात संवर्धन पर कार्यशाला आयोजित की गई। श्री एन. मोहंती, महानिदेशक, संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के प्रधान सलाहकार द्वारा कार्यशाला का उदघाटन किया गया।
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13 से 16 अक्तूबर, 2003 को प्रगति मैदान, नई दिल्ली में राष्ट्रीय खिलौना उद्योग विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 44 लघु खिलौना निर्माता इकाइयों ने स्पोर्ट्स गुड्स अवरडोर और टॉय फेयर-2003 में भाग लिया। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद्, खेल सामग्री निर्यात संवर्धन परिषद् और भारतीय खिलौना संघ के सहयोग से मेले का आयोजन किया। यह मेला भारतीय हस्तशिल्प और उपहार मेला, ऑटम 2003 के साथ-साथ आयोजित किया गया। मेले के दौरान कुल 121 हजार अमेरिकी डॉलर का व्यवसाय सृजित किया गया।
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भारतीय खिलौना संघ द्वारा 21-22 फरवरी, 2004 को मुम्बई में आयोजित टॉय-बिज़, प्रदर्शनी सह क्रेता-विक्रेता सम्मिलन में 53 लघु निर्माता इकाइयों ने सहभागिता की।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने टॉय सिटी, ग्रेटर नौएडा में खिलौना डिज़ाइन और विकास संस्थान के भवन के निर्माण के पहले चरण के लिए रुपये 1.25 करोड़ की राशि स्वीकृत की है।