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राज्य नीति |
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अंडमान-निकोबार
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह आज भी औद्योगिक विकास के शैशव काल में हैं और भारत सरकार द्वारा इन्हें श्रेणी-क के औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। मुख्यत: मुख्यभूमि से दूर स्थित होने और संरचनात्मक सुविधाओं के अभाव के कारण अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में औद्योगिक विकास की गति धीमी रही है। 31.3.96 की स्थिति के अनुसार इस संघशासित क्षेत्र में 1172 लघु उद्योग इकाइयां हैं और इनके भौगोलिक फैलाव को अनुबंध-1 में दर्शाया गया है। 1978 से औद्योगिक विकास को अनुबंध-2 में दर्शाया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में सृजित कुल रोज़गार लगभग 11000 है। इसके अतिरिक्त, पांच मध्यम क्षेत्र की इकाइयां हैं जिनमें से चार इकाइयां तकनीकी विकास महानिदेशक (डीजीटीडी) के साथ पंजीकृत हैं और इन्हें अनुबंध-3 में दर्शाया गया है। इस संघशासित क्षेत्र में कोई बड़ी औद्योगिक इकाई नहीं है। मध्यम इकाइयों में से तीन वीनीर और प्लाईवुड में संलिप्त हैं। एक इकाई लकड़ी चिराई का काम करती है और एक इकाई औद्योगिक गैसों यथा ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के उत्पादन में है। इनमें सरकारी क्षेत्र की चाथम आरा मिल भी शामिल है। 1. प्रस्तावना औद्योगीकरण आर्थिक प्रगति की अनिवार्य शर्त है। आधुनिक विश्व में अन्य कोई गतिविधि एक देश के विकास के साथ इतनी अधिक निकटता से जुड़ी हुई अथवा उसके स्तर को नहीं दर्शाती है। वर्ष 1991 में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई सुधार प्रक्रिया और औद्योगिक नीति ने उद्योग, वित्त, घरेलू और विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश सहित अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए आर्थिक उदारीकरण की ओर एक प्रमुख परिवर्तन को देखा है। इन सुधारों में एक बड़ी संख्या में उद्योगों से लाइसेंस समाप्ति, निजी निवेश के लिए विभिन्न क्षेत्रों को खोलने और अनेक क्षेत्रों में विदेशी निवेश के स्वयंमेव अनुमोदन जैसे बड़े नीतिगत परिवर्तन शामिल हैं। इन नई नीतिगत पहलों को राज्य सरकार से विविध क्षेत्रों में विदेशी और घरेलू निवेश को प्रेरित करने, नीति मानदंडों को पूरा करने के लिए राज्यों और संघशासित क्षेत्रों से संबंधित मामलों में सुधार प्रक्रिया में सुगमता लाने में एक प्रमुख भूमिका निभाने की आवश्यकता है। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने 1988 में एक औद्योगिक नीति तैयार की थी जिसने लघु और अति लघु क्षेत्र में निवेश सृजित करने में सहायता की थी। यद्यपि, नए औद्योगिक उद्यमों के लिए प्रोत्साहनों और रियायतों के आकर्षक पैकेज के अभाव में औद्योगिक विकास काफी धीमा था। आर्थिक परिदृश्य में नई प्रगति और परिवर्तनों के दृष्टिगत, अंडमान-निकोबार प्रशासन ने एक नई औद्योगिक नीति-1996 की घोषणा की है। नई औद्योगिक नीति के प्रमुख नीति संकल्प निम्नलिखित हैं: क्षेत्र के तुलनात्मक लाभ और हानियां
(क) लाभ: (ख) हानियां:
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