राज्य
नीति

अंडमान-निकोबार

2. लक्षित क्षेत्र

स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों और प्राकृतिक लाभों के आधार पर उद्योगों के संवर्धन के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है:

  1. मत्स्य पालन
  2. :

    अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की 1912 किलोमीटर लंबी तटरेखा है जिस पर मत्स्य पालन विकास के लिए प्रचुर संभावनाएं हैं। यहां 6 लाख वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) है जो भारत के संपूर्ण विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का 30 प्रतिशत है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के समुद्र में मछलियों की 1100 से अधिक प्रजातियों को चिह्नित किया गया है, वर्तमान में जिनमें से लगभग 30 प्रजातियों का वाणिज्यिक दोहन किया जाता है। अनुमानित वार्षिक दोहन योग्य स्टॉक लगभग 1.6 लाख टन है जिसकी तुलना में इस समय केवल 26,000 टन का ही दोहन किया जा रहा है। यह क्षेत्र अभी-भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भेजने के‍ लिए मछलियों के दोहन से वंचित है। अंडमान-निकोबार प्रशासन मत्स्य पालन, मत्स्य प्रसंस्करण और अन्य अनुषंगी उद्योगों जैसे फिश पिकलिंग, केनिंग, फिश मील, फिश ऑयल आदि के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में संवर्धन पर विशेष बल देता है। प्रशासन ने नील, हैवलॉक, रंगत और डिगलीपुर जैसे विभिन्न द्वीपों में अनेक शीत भांडारागारों, बर्फ संयंत्रों और मत्स्य प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना करके एक प्रशीतन श्रृंखला की स्थापना का प्रस्ताव किया है। पोर्ट ब्लेयर में एक शत-प्रतिशत मत्स्य प्रसंस्करण इकाई प्रारंभ की गई है।

  3. पर्यटन:

    अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण के रूप में उभरा है। पर्यटन विकास को एक संवेगी क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है क्योंकि यह बड़ी संख्या में रोज़गार सृजित करता है। प्रशासन ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटक संरचनाओं के विकास के लिए अनेक परियोजनाएं और उपाय प्रारंभ किए हैं। इस क्षेत्र के संवर्धन और इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए, प्रशासन ने पर्यटन और इससे संबंधित गतिविधियों को उद्योग के रूप में मान्यता दी है और प्रशासन द्वारा सामान्यत: उद्योगों को दी जाने वाली सभी सुविधाएं और प्रोत्साहन इसे प्रदान किए जाएंगे।

  4. केन और बांस:

    प्रतिवर्ष लगभग 33,00,000 रनिंग मीटर (आरएम) कुल दोहन योग्य केन में से प्रतिवर्ष लगभग 12,50,000 आरएम केन लघु केन उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति और सामान्य उपभोग के लिए उपलब्ध है। औद्योगिक उपयोग के लिए केन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के‍ लिए कच्ची केन के निर्यात पर संपूर्ण रोक लगा दी गई है। केन आधारित औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए बारातंग, रंगत, मायाबंदर, डिगलीपुर, हॅट बे और कच्छल संभावित क्षेत्र हैं। प्रतिवर्ष कुल 10,00,000 बांसों की मात्रा अंडमान-निकोबार के वनों, जो दक्षिणी अंडमान, रंगत, मायाबंदर, डिगलीपुर, हॅट बे, कच्छल और कमोरटा में स्थित हैं, में उपलब्ध है। यह मात्रा बांस आधारित 50 अतिरिक्त हस्तशिल्प इकाइयों की स्थापना के लिए पर्याप्त है। उद्योग निदेशालय, अंडमान-निकोबार प्रशासन द्वारा बकुलतला (मध्य अंडमान) में स्थित औद्योगिक क्षेत्र को एक केन और बांस क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

  5. कॅयर और नारियल:

    नारियल का प्रमुख उत्पादन और खेती द्वीपसमूह के दक्षिणी अंडमान, कैंपबैल बे, कार निकोबार और कच्छल द्वीपों पर केंद्रित है। अनुमान है कि औद्योगिक दोहन के लिए प्रतिवर्ष 280 मिलियन नारियल गिरी उपलब्ध होती है। ये गिरियां नारियल पर आधारित निम्नलिखित अनेक उद्योगों के विकास के लिए प्रयोग की जा सकती हैं:

    1. खोपरा का उत्पादन
    2. नारियल तेल निर्माण
    3. नारियल चूरा का उत्पादन जो मिठाइयों, कन्फेक्शनरी, करी, सुगंध निर्माण आदि में प्रयोग किया जाता है।
    4. नारियल खोल के पाउडर का उत्पादन जो थर्मोस्टेट मोल्डिंग पाउडर जैसे फिनॉल फॉर्मलडीहाइड और सिंथेटिक रेज़िन ग्लू के निर्माण के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
    5. हस्तशिल्प वस्तुओं, खिलौनों और नारियल खोल से बाउल का उत्पादन
    6. एक्टिवेटिड कार्बन का उत्पादन

    अनुमान है कि इस द्वीपसमूह में औद्योगिक उपयोग के लिए प्रतिवर्ष 56000 मीट्रिक टन नारियल का रेशा उपलब्ध होता है किंतु वर्तमान में नारियल रेशे की केवल 120 मीट्रिक टन नगण्य मात्रा का उपयोग कॅयर उत्पादों के लिए किया जा रहा है और शेष या तो व्यर्थ हो जाता है अथवा घरेलू ईंधन के रूप में प्रयोग कर लिया जाता है। रंगाचांग और बर्मनल्लाह क्षेत्र में कुछ लघु कॅयर रोप निर्माण इकाइयां हैं और हाटी टापू, दक्षिणी अंडमान में एक कर्ल्ड कॅयर इकाई है। दक्षिणी अंडमान, कार निकोबार, कच्छल, नानकोरी और कैंपबैल बे में गद्दे, डोरमैट, सोफा सैट, कुशन, रबराइज्ड कॅयर आदि के उत्पादन के लिए कॅयर आधारित उद्योगों की स्थापना हेतु अच्छी संभावना है।

  6. रबर:

    अंडमान-निकोबार के लगभग 1000 हैक्टेयर में रबर पौधरोपण है। वन और पौधरोपण विकास निगम लिमिटेड कच्छल में अपनी पौधशाला में प्रतिवर्ष लगभग 450-500 मीट्रिक टन रबर का उत्पादन करता है किंतु यहां कोई रबर आधारित उद्योग नहीं है। इस समय रबर शीट बनाकर मुख्यभूमि पर भेज दी जाती हैं और इस प्रकार मूल्य वर्धित उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इसलिए कच्छल और दक्षिणी अंडमान में रबर के दस्ताने, रबर थ्रैड, सीट कुशन, गद्दे आदि जैसे मूल्य वर्धित लेटेक्स रबर उत्पादों का उत्पादन करने वाले कुछ उद्योगों की स्थापना के लिए संभावना है।

  7. नाव निर्माण/मरम्मत:

    लकड़ी पर आधारित नाव निर्माण उद्योग के लिए इस समय सीमित संभावनाएं हैं। किंतु लकड़ी के अलावा अन्य कच्चे माल पर आधारित नावों के निर्माण और लकड़ी की नावों सहित अन्य नावों की मरम्मत और सर्विसिंग के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। बीच सुविधाओं और पर्याप्त टाइडल फ्लक्चुएशन के अभाव के कारण इस द्वीपसमूह में शिप ब्रेकिंग उद्योग का संवर्धन नहीं किया जा सकता।

  8. कृषि आधारित उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग:

    कृषि के अंतर्गत कुल क्षेत्र लगभग 45,500 हैक्टेयर (1993-94 की जनगणना) है और उगाई जाने वाली मुख्य फसलें धान, नारियल और सुपारी हैं। अंडमान द्वीपसमूह में धान मुख्य खाद्य फसल है, जबकि निकोबार द्वीपसमूह में नारियल और सुपारी प्रमुख नकदी फसलें हैं। अन्य फसलों में थोड़ी मात्रा में गन्ना, रैड ऑयल पाम, फल और सब्जियां भी उगाई जा रही हैं। दक्षिणी और उत्तरी अंडमान तथा ग्रेट निकोबार में कॉफी और लौंग, दालचीनी, जायफल और कालीमिर्च जैसे मसाले भी उगाए जाते हैं। इन्हें कृषि आधारित और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास में लाभदायकता के साथ प्रयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, नील, हैवलॉक, हॅट बे और डिगलीपुर में केला, आम, अनानास और पपीता आदि पर आधारित लघु सब्जी और फल प्रसंस्करण उद्योगों को स्थापित किया जा सकता है।

  9. ऑटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग:

    ऑटोमोबाइल डीलरों/ऑपरेटरों/प्रयोक्ताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, बॉडी बिल्डिंग/मरम्मत, प्लेटिंग, पेंटिंग और इलैक्ट्रिकल वर्क्स के लिए अनेक इंजीनियरिंग आधारित उद्योग स्थापित किए गए हैं। इस क्षेत्र के अंतर्गत चार लघु उद्योग इकाइयां पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं तथा कुछ और स्थापित होने वाली हैं। यद्यपि, चूंकि ट्रकों, बसों और अन्य वाहनों की मांग कई गुना बढ़ चुकी है, अत: बॉडी बिल्डिंग/निर्माण, मरम्मत, पेंटिंग, प्लेटिंग/टिंकरिंग आदि के लिए नई इकाइयों की स्थापना हेतु काफी गुंजाइश है।

  10. पैकिंग उद्योग:

    इस द्वीपसमूह में अधिकाधिक उद्योगों के आने के कारण, पैकेजिंग पॉलीथीन पैकेट और कॉरुगेटिड कार्टन्स जैसे अनुषंगी उद्योगों की मांग बढ़ रही है। इस उद्योग के लिए कच्चा माल मुख्यभूमि से प्राप्त करना पड़ता है जिसके लिए परिवहन सब्सिडी उपलब्ध है।

  11. खादी और ग्रामोद्योग कार्यक्रम में सम्मिलित इकाइयां:

    खादी और ग्रामोद्योग आयोग के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत अनेक ग्रामोद्योग कार्यक्रम हैं। उनमें से जिन योजनाओं को प्राथमिक क्षेत्र में चिह्नित किया गया है उनमें पापड़ बनाना, पॉपकॉर्न बनाना, बेकरी, गुड़ बनाना, चटाई बुनना, फोटो फ्रेमिंग, ईंट निर्माण और हॉलो ब्लॉक का निर्माण तथा लाइम शैल सम्मिलित हैं। 1996-97 से, खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र के अंतर्गत वैयक्तिक लाभार्थियों के लिए संकाय बैंक ऋण के अंतर्गत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

  12. इलैक्ट्रॉनिक उद्योग:

    अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह इलैक्ट्रॉनिक उद्योग के विकास के लिए धूलमुक्त आदर्श पर्यावरणीय स्थितियां प्रस्तुत करता है। स्थान की सीमित आवश्यकता, उच्च मूल्य वर्धित उत्पाद, स्थानीय रूप से उपलब्ध इलैक्ट्रिकल और इलैक्ट्रॉनिक्स स्नातक/डिप्लोमाधारकों इस उद्योग को इस द्वीपसमूह क्षेत्र के लिए उपयुक्त बना देते हैं। इस क्षेत्र में अभी तक केंद्रीय सरकार का कोई निवेश नहीं है और विशेष रूप से संयुक्त क्षेत्र में निर्यात के लिए इलैक्ट्रॉनिक क्षेत्र में उत्पादन-सह-एसेंबली इकाइयों के संवर्धन के लिए प्रयास किए जाएंगे। इस क्षेत्र में महिलाओं को रोज़गार देने के लिए अत्यधिक अवसर विद्यमान हैं।

  13. सेवा उन्मुख इकाइयां:

    जनसंख्या में वृद्धि और टेलीफोन नेटवर्क में सुधार के साथ इस द्वीपसमूह में जेरोक्स, फैक्स, एसटीडी/आईएसडी आदि जैसे उद्योगों के संवर्धन के लिए अच्छी संभावना है।

  14. संरचनात्मक विकास परियोजनाएं:

    विद्युत (ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों से विद्युत उत्पादन सहित) आवर्धन और जलापूर्ति (जल विलवणीकरण संयंत्रों सहित), परिवहन और पत्तन संरचनाओं (जहाज़रानी, होवरक्राफ्ट सेवाओं, पत्तनों, सड़कों और पुलों आदि सहित) के उन्नयन और विकास के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता का स्वागत किया जाएगा।

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