राज्य
नीति

अंडमान-निकोबार

6. संरचनात्मक सहायता प्रणाली:

  1. भूमि विकास
    1. औद्योगिक क्षेत्र कार्यक्रम

      प्रशासन औद्योगिक क्षेत्र कार्यक्रम के अंतर्गत भूमि का अधिग्रहण करता है और औद्योगिक उपयोग के लिए उसे विकसित करता है। विभिन्न आकारों के भूखंडों/निर्मित शेडों को बहुत उचित पट्टा किराए पर प्रारंभ में 15/5 वर्षों (समय-समय पर बढ़ाया जाता है) के लिए उद्यमियों को पट्टे पर दिए जाते हैं। गाराचरमा (दक्षिणी अंडमान) में एक औद्योगिक क्षेत्र के अलावा, डॉलीगंज (दक्षिणी अंडमान), बकुलतला (मध्य अंडमान) और कैंपबैल बे (ग्रेट निकोबार) में तीन और औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों के अंतर्गत कुल 33 हैक्टेयर भूमि सम्मिलित की गई है जिसमें 100 से अधिक शेडों और 100 भूखंडों को निर्मित/विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। मीठाखारी, दक्षिणी अंडमान में केवल कॅयर उद्योग के लिए एक औद्योगिक क्षेत्र की योजना है जिसमें 5 हैक्टेयर भूमि विकसित की जा रही है। कॅयर और रबर उद्योग के लिए कच्छल में एक औद्योगिक क्षेत्र की योजना बनाई गई है जिसमें प्रशासन द्वारा 2.5 हैक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन स्लिपवेज़ विकसित करने का भी प्रस्ताव करता है जो पट्टा आधार पर पंजीकृत जहाज़ निर्माण/मरम्मत वाली औद्योगिक इकाइयों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

    2. एकीकृत संरचनात्मक विकास केंद्र

      एकीकृत संरचनात्मक विकास परियोजना भारत सरकार द्वारा औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में रोज़गार के अधिकतम अवसरों के सृजन के उद्देश्‍य से लघु और अति लघु इकाइयों के लिए संरचनात्मक सुविधाओं के विकास हेतु प्रारंभ की गई है। इसके लिए दक्षिणी अंडमान के विम्बरलीगंज में पहले ही 13 हैक्टेयर उपयुक्त भूमि का चयन कर लिया गया है। अनुमान है कि औद्योगिक इकाइयों को पट्टा आधार पर आवंटन के लिए 300 भूखंडों को विकसित किया जाएगा। विकसित भूखंडों के अलावा, कैप्टिव विद्युत, पानी, दूरसंचार, डाकघर, बैंक, सम्मेलन कक्ष, कच्चे माल के भंडारण की सुविधाएं, बहिस्रावी उपचार संयंत्र, सामान्य सेवा सुविधा केंद्र जैसी संरचनात्मक सुविधाएं प्रदान करने का भी प्रस्ताव है।

  1. विद्युत:

    वर्तमान में द्वीपसमूह पर केवल डीज़ल से विद्युत उत्पादन की सुविधा है जो अधिकतर घरेलू और वाणिज्यिक स्थापनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करती है। क्षेत्र की स्थापित क्षमता 28.4 मेगावॉट है, वास्तव में उपलब्ध विद्युत केवल 17.5 मेगावॉट है। इसलिए, यहां विद्युत की कमी है जो दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है। स्थानीय औद्योगिक इकाइयों द्वारा उपयोग की जा रही विद्युत, सकल विद्युत उत्पादन की लगभग 7 प्रतिशत है। बढ़ती हुई विद्युत मांग को पूरा करने के लिए, तापीय और जलीय दोनों प्रकार के नए विद्युत उत्पादन स्टेशनों की योजना बनाई गई है। समय के साथ-साथ, बढ़ती हुई विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विद्युत उत्पादन में निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित करना पड़ेगा। उच्च उपभोग वाले उद्योगों द्वारा कैप्टिव विद्युत उत्पादन भी समय की आवश्यकता है क्योंकि सरकार के पास बड़ी संख्या में परियोजनाओं में निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। प्रशासन ने लघु उद्योग इकाइयों को उनके अपने कैप्टिव विद्युत उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए ब्याज मुक्त ऋण और सब्सिडी प्रदान करने के लिए नई योजनाएं प्रारंभ की हैं जिनका विवरण नीति वक्तव्य के अध्याय-8 में दिया गया है।

  2. पानी:

    यह द्वीपसमूह पूरी तरह वर्षा जल पर निर्भर है। पर्याप्त संख्या में जलस्रोतों की कमी के कारण, प्रशासन को उद्योगों को पानी की चिरस्थायी आपूर्ति को सुनिश्चित करने में कठिनाई हो रही है। पीने के पानी की वर्तमान आवश्यकता को धानी खारी बांध से पूरा किया जाता है। यद्यपि, विभाग के औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित लघु उद्योग इकाइयों को 20,000 किलोलीटर/ दिन तक पीने का पानी उपलब्ध है, लघु उद्योग इकाइयां आरसीसी की भंडारण टंकियों/जल वाहक पाइपों और वाटर लिफ्टिंग पंपों जैसे आंतरिक जल संचयन उपकरणों की स्थापना द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए मानसून के दौरान वर्षा जल का संचयन/एकत्र करके अपनी अतिरिक्त पानी की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती हैं। प्रशासन ने लघु उद्योग इकाइयों द्वारा जल संचयन उपकरणों की स्थापना के लिए ब्याज मुक्त ऋण और सब्सिडी की एक योजना प्रारंभ की है जिसका विवरण इस नीति वक्तव्य के अध्याय-8 में दिया गया है।

  3. परिवहन:

    1. सड़क परिवहन

      वर्ष 1995-96 की स्थिति के अनुसार द्वीपसमूह में 932 किलोमीटर लंबी बारहमासी सड़कें हैं। प्रशासन के पास 164 बसों का एक बेड़ा है जो उत्तर में डिगलीपुर से दक्षिण में कैंपबैल बे तक 11 प्रमुख द्वीपों में संचालित हो रहा है। 104 रूटों पर कुल रूट लंबाई 2189 किलोमीटर है जिस पर 16355 किलोमीटर प्रतिदिन कवर करते हुए औसतन 46,800 यात्रियों को लाया-ले जाया जाता है। निकट भविष्य में पोर्ट ब्लेयर और उत्तरी अंडमान में डिगलीपुर के मध्य एक सीधे सड़क संपर्क का प्रस्ताव है और इस परियोजना पर पहले ही कार्य प्रारंभ हो चुका है।

    2. जहाज़रानी

      ये द्वीपसमूह 5,000 मीट्रिक टन क्षमता के भारतीय जहाज़रानी निगम के मालपोत एम.वी. डिगलीपुर के अलावा, 4 यात्री-सह-माल पोतों के साथ समुद्री रास्ते के माध्यम से मुख्यभूमि से जुड़े हैं और 6,000 मीट्रिक टन की माल परिवहन क्षमता के साथ पोर्ट ब्लेयर और चेन्नै, कोलकाता तथा वाइज़ैग के मध्य नियमित रूप से आवागमन करते हैं। इसके अलावा 12,775 मीट्रिक टन की समेकित क्षमता के 14 निजी मालपोत भी इस क्षेत्र में संचालित हैं। विद्यमान माल परिवहन क्षमता मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त से अधिक है। यदि मांग हो तो निजी जहाज़रानी कंपनियां क्षमता को बढ़ाने की इच्छुक हैं। अंतरद्वीपीय सेवा क्षेत्र के अंतर्गत, प्रशासन के पास 1490 मीट्रिक टन माल परिवहन क्षमता के लगभग 18 पोत हैं। इन मार्गों पर निजी पोत भी चल रहे हैं। इस प्रकार 2005 तक इस क्षेत्र में नए कार्गो पोतों की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

    3. हवाई यात्रा

      एलाएंस एयर पोर्ट ब्लेयर और कोलकाता/चेन्नै प्रत्येक के बीच सप्ताह में तीन उड़ानें संचालित करती है। 49.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर पोर्ट ब्लेयर रनवे का 5000 फीट तक विस्तार कार्य 36 माह की अवधि में पूरा हो जाएगा। इससे ए-300 और ए-320 जैसे बड़े एयरक्रॉफ्टों के संचालन के लिए मार्ग प्रशस्त हो जाएगा जो इस द्वीपसमूह में पर्यटन के संवर्धन के लिए एक बड़ा कदम होगा। राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण खराब रोशनी की स्थितियों के दौरान भी हवाई जहाज़ों को उतरने में सक्षम बनाने के लिए उपकरण लैंडिंग प्रणाली आदि जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं स्थापित करने पर विचार कर रहा है। इन सुविधाओं की स्थापना के बाद, अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को उड़ान संचालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जिससे पर्यटन संवर्धन और पोर्ट ब्लेयर तथा अन्य राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्थानों के मध्य सामान के सीधे आवागमन में सुविधा होगी।

  4. बंदरगाह:

    अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की बंदरगाहें रणनीतिक रूप से तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के समीप स्थित है। ये 23 अधिसूचित बंदरगाहें हैं जो संपूर्ण अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में फैली हुई हैं। मोटे तौर पर इन्हें निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है:

  5. औद्योगिक मार्गदर्शन ब्यूरो:

    अंडमान-निकोबार प्रशासन परियोजनाओं की समयबद्ध स्वीकृतियों और तीव्रता से कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए प्रक्रियागत औपचारिकताओं के सरलीकरण के उद्देश्य से नौवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान एक पूर्णत: कंप्यूटरीकृत औद्योगिक मार्गदर्शन ब्यूरो की स्थापना का प्रस्ताव करता है। औद्योगिक मार्गदर्शन ब्यूरो कच्चे माल, विद्युत, जल, भूमि की उपलब्धता और भूमि नीति तथा विपणन से संबंधित डाटा/सूचना के लिए संपूर्ण नेटवर्किंग सुविधा के साथ एक सूचना बैंक के रूप में कार्य करेगा। यह सूचना के तीव्र गति से प्रचार-प्रसार की सुविधा प्रदान करेगा। यह ब्यूरो भावी/विद्यमान उद्यमियों को निर्माण के लिए सही उत्पादन के चयन और परियोजना की स्थापना में मार्गदर्शन प्रदान करेगा। औद्योगिक इकाइयों के समक्ष समस्याओं की आवधिक समीक्षा करने और विद्युत, जल, भूमि की उपलब्धता व परिवर्तन, भूमि नीति और साविधिक अनुमति आदि से संबंधित लंबित मामलों को सुलझाने के लिए सचिव (उद्योग) की अध्यक्षता के अंतर्गत एक सुविधा समिति का गठन किया जाएगा जिसके सदस्य औद्योगिक संवर्धन में संलिप्त विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधि होंगे।

  6. सामान्य परीक्षण सुविधाएं और अनुसंधान एवं विकास

    परिवर्तनशील मांग प्रारूपों की पूर्ति के लिए डिज़ाइन और निष्पादन दोनों में अपने उत्पादों को अद्यतन करने के निरंतर प्रयासों के बिना उद्योग जीवित और विकसित नहीं रह सकते हैं। इस उद्देश्य के लिए, यह आवश्यक है कि अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम को किसी भी औद्योगिक विकास कार्यक्रम के एक अभिन्न अंग के रूप में विकसित होना चाहिए। भारत सरकार, उद्योग मंत्रालय, नई दिल्ली ने अंडमान-निकोबार प्रशासन के अनुरोध पर लघु उद्योग सेवा संस्थान, पोर्ट ब्लेयर के शाखा कार्यालय के तत्वावधान में डॉलीगंज में एक सामान्य परीक्षण/मरम्मत सुविधा केंद्र की स्थापना का अनुमोदन कर दिया है। इस केंद्र के साथ एक अनुसंधान एवं विकास अनुभाग जोड़ने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। अपने अस्तित्व और विकास हेतु स्थानीय उद्योगों के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाना आवश्यक है। पात्र मामलों में, प्रशासन स्वयं अथवा अन्य एजेंसियों के माध्यम से प्रौद्योगिकी प्राप्त करने और अनेक लघु उद्योगों को उनका हस्तांतरण करने में उद्योगों की सहायता कर सकता है ताकि उसकी उच्च लागत के कारण वे नवीनतम प्रौद्योगिकी के लाभों से वंचित न रहें।

  7. परियोजना प्रोफाइल

    जिला उद्योग केंद्र के पास विभिन्न उत्पादों पर लगभग 1000 परियोजना प्रोफाइलों और प्रधानमंत्री रोज़गार योजना के अंतर्गत चिह्नित स्थान विशिष्ट उत्पादों पर विशेष रूप से तैयार किए गए 100 परियोजना प्रोफाइलों का भंडार है। ये सभी परियोजना प्रोफाइल संदर्भ और मार्गदर्शन के लिए विभाग के तकनीकी पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।