अंडमान-निकोबार
7. औद्योगिक विकास में शामिल एजेंसियां:
- अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड (एएनआईआईडीसीओ) इस क्षेत्र के संतुलित और पर्यावरणीय दृष्टि से सुदृढ़ विकास के लिए क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के विकास और वाणिज्यिक दोहन हेतु द्वीपसमूह प्राधिकरण (आईडीए) की भांति 1988 में अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड की स्थापना की गई थी। यह निगम जो पूर्णत: सरकारी स्वामित्व वाला निगम है, एक छत के नीचे पर्यटन, मत्स्य पालन, आपूर्ति, विपणन उद्योग और वित्त जैसी अनेक विभागीय गतिविधियां चलाता है।
- पर्यटन:
पर्यटन प्रभाग का मूल उद्देश्य पर्यटन संरचनाओं का विकास, संचालन और उनका रखरखाव करना है। पर्यटक बिंदुओं/स्थानों पर पर्यटक लॉज़, मनोरंजन सुविधाओं के बेहतर रखरखाव और खरीदारी केंद्रों के विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। निगम का पर्यटन प्रभाग सार्थक विकास के लिए है और इसे अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर पर्यटन संरचनाओं के सृजन और रखरखाव में प्रेरक भूमिका निभानी है।
- मत्स्य पालन:
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध मछलियों के वाणिज्यिक दोहन और स्थानीय मछुआरों को बेहतर विपणन नेटवर्क प्रदान करने के लिए निगम ने इस प्रभाग को प्रारंभ किया है। निगम द्वारा एक सहायक कंपनी जिसका नाम मैसर्स अंडमान फिशरीज लिमिटेड है और जो अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाई है, का संवर्धन किया गया है जिसने हाल ही में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया है।
- आपूर्ति :
आपूर्ति प्रभाग का प्रमुख उद्देश्य आम लोगों/सरकारी विभागों को उचित मूल्य पर आवश्यक चीजें/वस्तुएं प्रदान करना है। निगम विशिष्ट खाद्य वस्तुओं जैसे दूध, पामऑयल आदि का प्रापण और वितरण करता है। आपूर्ति प्रभाग पैट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ इस्पात जैसे औद्योगिक कच्चे माल के वितरण का कार्य भी करता है।
- औद्योगिक वित्त
भारतीय औद्योगिक विकास बैंक ने इस निगम को राज्य वित्त संस्थान के रूप में अधिसूचित किया है। भारत सरकार द्वारा भी निगम को राज्य वित्त संस्थान घोषित किया जा रहा है। यह निगम भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) से पुनर्वित्त के आहरण का पात्र है। इसके अतिरिक्त, उद्योगों के संवर्धन के लिए निगम अपने वित्त का उपयोग भी कर रहा है। अति लघु और कुटीर उद्योगों को कम ब्याज दर पर ऋण की योजना के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों को सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी ऋण दोनों स्वीकृत किए जा रहे हैं।
- खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड:
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड की स्थापना वर्ष 1983 में अंडमान-निकोबार प्रशासन द्वारा की गई थी। यह बोर्ड ग्रामीण विकास में संलिप्त अन्य एजेंसियों के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और ग्रामोद्योगों के विकास के लिए कार्यक्रम की आयोजना, संवर्धन, संगठन और कार्यान्वयन में शामिल है।
वर्तमान में खादी और ग्रामोद्योग गतिविधियों के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण उद्योग हैं - बढ़ईगिरी, लुहारगिरी, लाइम शैल, सेवा उद्योग, कुटीर पॉटरी, कागज़ से बनी सभी प्रकार की लेखन सामग्री सहित अभ्यास-पुस्तिकाओं और रजिस्टरों की जिल्दसाजी, अगरबत्ती, केन और बांस, गुड़ और खांडसारी, फल और सब्जी संरक्षण, बेकरी, मसाला, पापड़ और पॉपकॉर्न बनाना, दर्जीगिरी और सिलेसिलाए परिधान बनाना, हॉलो ब्लॉक बनाना आदि।
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड इन उद्योगों में लगे दस्तकारों के लिए मुख्यभूमि पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग के संस्थानों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन और सहकारिता बनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित भी करता है। यह बोर्ड उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए खादी ग्रामोद्योग भवन के माध्यम से विपणन सहायता प्रदान करता है। इसके साथ-साथ अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड को खादी और ग्रामोद्योग के विकास और संचालन में संलिप्त संस्थानों अथवा व्यक्तियों को वित्तीय सहायता का कार्य भी सौंपा गया है। वर्ष 1995-96 से, संकाय बैंक वित्त के अंतर्गत लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यह बोर्ड जीवनक्षम ग्रामीण उद्योग परियोजना के लिए संस्थानों/ सहकारी समितियों के मामले में 25.00 लाख रुपए तक और वैयक्तिक/ उद्यमियों के मामले में 10.00 लाख रुपए तक वित्तीय सहायता प्रदान करता है। कुल परियोजना लागत का 5 प्रतिशत उद्यमियों को अपने अंशदान के रूप में जुटाना होता है। कुल परियोजना लागत के 30 प्रतिशत का मर्जिन उपलब्ध कराया जाएगा जो प्रारंभ में ब्याज मुक्त ऋण के रूप में जारी किया जाएगा और परियोजना के सफल कार्यान्वयन पर इसे अनुदान में बदल दिया जाएगा। कुल लागत का शेष 65 प्रतिशत संकाय बैंक ऋण के रूप में जारी किया जाएगा जिसका पुनर्भुगतान वार्षिक ब्याज की शीर्ष ऋण दर पर 6 वर्षों की अवधि में करना वांछित है।
- जिला उद्योग केंद्र:
जिला उद्योग केंद्र की स्थापना लघु, कुटीर और ग्रामीण उद्योगों के संवर्धन तथा विकास के लिए एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में 1978 में की गई थी। वर्ष 1994-95 से इस योजना को राज्य क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह केंद्र अब उद्योग निदेशालय का एक अंग है और विभाग के तकनीकी कक्ष के रूप में कार्यरत है। इस केंद्र के मुखिया एक महाप्रबंधक हैं जिनके साथ आर्थिक जांच, ऋण, ग्रामोद्योग, कच्चे माल और परियोजना प्रबंध के क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त चार कार्यशील/परियोजना प्रबंधक हैं। केंद्र के मुख्य कार्य उद्यमियों को प्रेरणा और उनका चिह्नांकन, उत्पाद चिह्नांकन और औद्योगिक संभावना सर्वेक्षण, परियोजना प्रोफाइल तैयार करना, परियोजना मूल्यांकन और औद्योगिक वित्त का प्रबंध, कच्चे माल की व्यवस्था, विपणन सहायता और विस्तार तथा तकनीकी सेवाएं प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त, यह केंद्र विभाग की विभिन्न विकासात्मक प्लान योजनाओं के कार्यान्वयन और प्रधानमंत्री रोज़गार योजना के कार्यान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए भी उत्तरदायी है।
- अन्य
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में औद्योगिक विकास में सम्मिलित अन्य संस्थानों में लघु उद्योग सेवा संस्थान, विपणन और विस्तार केंद्र, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), रबर बोर्ड, अंडमान-निकोबार परामर्शी संगठन, खादी और ग्रामोद्योग आयुक्त आदि शामिल हैं। अंडमान-निकोबार में उद्योगों के विकास में सम्मिलित एजेंसियों की एक सूची अनुबंध-4 पर दी गई है।
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