राज्य
नीति

अंडमान-निकोबार

10. मानव संसाधन विकास:

औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्र में मानव संसाधन विकास का संवर्धन औद्योगीकरण की प्रक्रिया में एक प्रमुख कार्य है। उद्यमी पैदाइशी होते हैं, बनाए नहीं जाते, यह भ्रम अधिक नहीं टिक पाएगा। औद्योगीकरण की प्रक्रिया को शुरू करने और उसमें तेज़ी लाने के लिए प्रेरणा और प्रशिक्षण ने एक प्रमुख भूमिका निभाई है। यद्यपि केवल उद्यमिता विकास प्रशिक्षण से ही सफलता नहीं प्राप्त की जा सकती, प्रशासन अपनी तकनीकी प्रशिक्षण गतिविधियों के विस्तार और नियमित अंतरालों पर उद्यमिता विकास कार्यक्रम (कम शिक्षित व्यक्तियों, शिक्षित बेरोज़गार व्यक्तियों, तकनीकी रूप से योग्य व्यक्तियों के लिए उपयुक्त), प्रेरणा कैंप, सम्मेलनों, कार्यशालाओं आदि की एक श्रृंखला के साथ इसका अनुपालन करने का प्रस्ताव करता है।

  1. विद्यमान प्रशिक्षण केंद्रों का आधुनिकीकरण:

    यह जानते हुए कि मानव संसाधन विकास औद्योगिक विकास के लिए एक प्रमुख कारक है, उद्योग विभाग के पास पोर्ट ब्लेयर में काष्ठ शिल्प, शैल शिल्प, काष्ठ नक्काशी, लुहारगिरी, शीट मेटल इलैक्ट्रोप्लेटिंग, दर्जीगिरी और परिधान निर्माण, केन और बांस शिल्प, बढ़ईगिरी, कॅयर प्रसंस्करण और कॅयर उत्पाद में प्रशिक्षण सुविधाएं हैं। विभाग पुरानी और अप्रचलित मशीनरी के स्थान पर आधुनिकी मशीनरी लगाकर विद्यमान प्रशिक्षण केंद्र के आधुनिकीकरण के लिए प्रभावी कदम उठा रहा है। इसके साथ-साथ यह विभाग हॅट बे, कच्छल, कैंपबैल बे और दक्षिणी अंडमान में चार नए प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्रों की स्थापना के लिए कदम उठा रहा है।

  2. मुख्य भूमि पर प्रशिक्षण:

    मुख्य भूमि पर औद्योगिक रूप से विकसित क्षेत्रों के दौरे आयोजित करके उद्यमियों को नई औद्योगिक संस्कृति का उच्छादन दिया जाएगा। कुछ चयनित व्यवसायों में उन्नत कौशल प्राप्त करने के इच्छुक उद्यमियों को मुख्य भूमि के संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

  3. उद्यमिता विकास संस्थान योजना:

    स्वरोज़गार के लिए कौशलोन्मुख उद्यमिता विकास कार्यक्रम तुलनात्मक रूप से एक नई अवधारणा है। इसका उद्देश्य युवाओं को स्वरोज़गार के लिए प्रोत्साहित करना है। द्वीप समूह तीव्र विकास का साक्ष्य कर रहे हैं किंतु उसी समय शिक्षित बेरोज़गारों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है क्योंकि सरकार में रोज़गार अवसरों की कमी होती जा रही है। इसलिए विशेष रूप से पहली पीढ़ी के तकनीकी रूप से योग्य उद्यमियों के लिए सुगठित औद्योगिक उद्यमिता कार्यक्रम प्रारंभ करने की आवश्यकता अनुभव की जा रही है।

  4. उद्योग निदेशालय नौंवी पंचवर्षीय योजना में एक उद्यमिता विकास संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव करता है।

    संस्थान का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित का आयोजन करना होगा:

    1. कौशलोन्मुख उद्यमिता विकास कार्यक्रम
    2. प्रधानमंत्री रोज़गार योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम
    3. प्रक्रिया और उत्पादोन्मुख उद्यमिता विकास कार्यक्रम
    4. उद्यमिता जागरुकता कार्यक्रम
    5. महिला उद्यमियों के लिए उद्यमिता विकास कार्यक्रम
    6. प्रबंधन विकास कार्यक्रम - (अकुशल प्रबंधकों के लिए)
    7. जनजातीय उद्यमियों के लिए उद्यमिता विकास कार्यक्रम
    8. प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

    यह संस्थान अन्य संगठनों जैसे एनकॉन, एमपीईडीए, समाज कल्याण बोर्ड, बैंकों आदि द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। यह संस्थान शैक्षिक, औद्योगिक, संवर्धनात्मक एजेंसियों जैसे लघु उद्योग शाखा संस्थान, खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड और वित्तीय संस्थानों से निकटतम समन्वय बनाए रखेगा।

  5. प्रक्रिया-सह-उत्पाद विकास केंद्र:

    विभिन्न औद्योगिक उत्पादों की प्रक्रिया-सह-उत्पाद विकास सहित प्रौद्योगिकीय सहायता की एक समेकित श्रृंखला प्रदान करने के लिए एक प्रक्रिया-सह-उत्पाद केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव है। इस केंद्र के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

    1. उत्पाद डिज़ाइन और नवाचार।
    2. उत्पाद और प्रक्रिया उन्नयन तथा उन्नत तकनीकों का विकास।
    3. सामान्य सुविधा केंद्र।
    4. श्रमशक्ति विकास/प्रशिक्षण।