राज्य
नीति

अंडमान-निकोबार

13. बैंकों/वित्तीय संस्थानों से संपर्क:-

औद्यागिक विकास की धीमी गति का एक प्रमुख कारण औद्योगिक क्षेत्र में ऋण का अपर्याप्त प्रवाह है। द्वीपसमूह क्षेत्र में खराब ऋण-जमा अनुपात को देखते हुए, औद्योगिक वित्तपोषण प्रस्तावों के प्रति अधिक उदार रवैया अपनाने की आवश्यकता है। सभी वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों पर जिला ऋण योजना में प्रक्षेपित उनके वांछित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ज़ोर दिया जाएगा। ऋण प्रवाह को बढ़ाने के लिए, अंडमान-निकोबार एकीकृत विकास निगम (एएनआईआईडीसीओ) को इस क्षेत्र के लिए राज्य वित्त संस्थान के रूप में मनोनीत किया गया है और इसने औद्योगिक इकाइयों को सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी ऋण देना प्रारंभ कर दिया है।

औद्योगिक क्षेत्र में ऋण प्रवाह के समन्वय/निगरानी के लिए, सचिव (उद्योग) की अध्यक्षता में एक ऋण समिति के गठन का प्रस्ताव है। इस समिति के निम्नलिखित मुख्य कार्य होंगे:

    क. उद्यमियों को ऋणों की स्वीकृति और संवितरण की निकट से निगरानी।

    ख. सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी की स्वीकृति के लिए वित्तीय संस्थानों और वाणिज्यिक/सहकारी बैंकों के मध्य समन्वय।

    ग. ऋण की संयुक्त वसूली।

    औद्योगिक वित्तपोषण हेतु समन्वय, निगरानी और योजनाएं बनाने के लिए इस समिति की मासिक आधार पर बैठकें होंगी।

14. औद्योगिक रुग्णता:

औद्योगीकरण की प्रक्रिया में रुग्णता अपरिहार्य है। संघशासित क्षेत्र प्रशासन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी रुग्णता की परिभाषा का अनुपालन करता है। रुग्णता के कारण उत्पादन, रोज़गार की हानि और इन उद्यमों में निवेश की गई पूंजी व्यर्थ हो जाती है। यद्यपि, इस द्वीपसमूह में औद्योगिक रुग्णता की घटनाएं प्रचलित नहीं हैं, अंडमान-निकोबार प्रशासन औद्योगिक रुग्णता को रोकने और जीवनक्षम की संभावना वाली इकाई के पुनर्वास हेतु सभी संभव सहायता प्रदान करने हेतु कार्य करने के लिए वचनबद्ध है। औद्योगिक वित्त और पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर) मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए उपयुक्त पुनर्वास पैकेज का निर्णय करता है। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने रुग्ण इकाइयों की पहचान और उनके पुनर्वास के लिए जीवनक्षम पैकेज तैयार करने तथा रुग्ण इकाई के पुनर्वास कार्यक्रम में सहायता करने हेतु वित्तीय संस्थानों सहित विभिन्न निवेश एजेंसियों को अनुशंसा करने के लिए अधिसूचना संख्या 50-604/89-विकास.1 दिनांक 4 जून, 1992 द्वारा "राज्य स्तरीय पुनर्वास समिति" की स्थापना की है।