राज्य
नीति

अरूणाचल प्रदेश

    अरूणाचल प्रदेश की औद्योगिक नीति 1994
    परिचय
    नीति संकल्प
    प्रशासनिक उपाय
    प्रभावी तिथि, परिभाषा और पात्रता मापदंड
    प्रोत्साहन
    सूचना स्रोत: अरूणाचल प्रदेश सरकार
     

    परिचय

    1. पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक क्षेत्रफल के संदर्भ में अरूणाचल प्रदेश सबसे बड़ा राज्य है जिसका क्षेत्रफल 83743 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 8.65 लाख है। औद्योगिक दृष्टि से, यह अब भी भारत का सबसे पिछड़ा राज्य है, यद्यपि इसने विभिन्न सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक प्रारंभ किया है। इन कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप जनता में एक नई जागरूकता उत्पन्न हुई है और साक्षरता दर भी बढ़नी प्रारंभ हो गई है और 1991 की जनसंख्या के अनुसार यह 32.8 है। इसीलिए, जहां तक संपूर्ण आर्थिक विकास का संबंध है, राज्य की जनता ने देश के अन्य राज्यों के लोगों के समकक्ष आने के लिए अपनी इच्छाएं व्यक्त करना प्रारंभ कर दिया है। राज्य के सामाजिक-आर्थिक संक्रमण के इस वर्तमान समय में एक सुसैद्धांतिक औद्योगिक नीति की अत्यधिक आवश्यकता अनुभव की जा रही है।
    2. आगामी अनुच्छेदों में प्रस्तुत औद्योगिक नीति संकल्प को निम्नलिखित कारकों जो विशेष रूप से अरूणाचल प्रदेश राज्य से संबंधित हैं, को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है:
      1. जहां तक वन, खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संबंध है, अत्यधिक संसाधन अक्षयनिधि।
      2. राज्य का अत्यधिक कठिन भूभाग जिसके परिणामस्वरूप परिवहन और संचार की बाधाएं स्पष्ट हैं।
      3. मध्यम आकार में हाइड्रोपावर की सरल उपलब्धता क्योंकि राज्य में दोहन के लिए हाइड्रोपावर हेतु विशाल संभावनाएं हैं जिसकी एक बड़ी परियोजना पहले ही निर्माणाधीन है।
      4. कृषि आधारित उद्योगों विशेषकर पौधरोपण क्षेत्र के लिए असीमित संभावनाएं हैं।
      5. पूर्वोत्तर क्षेत्र की संपूर्ण पर्यावरणीय व्यवस्था में राज्य का विशेष स्थान।

    3. यह नीति संकल्प अपने प्रकार का पहला है और इसे "अरूणाचल प्रदेश की औद्योगिक विकास नीति 1994" के नाम से जाना जाएगा। यह नीति संकल्प आवश्यक होने पर इसमें किए गए परिवर्तनों/संशोधनों के अध्यधीन इसकी घोषणा की तिथि से पांच वर्षों की अवधि के लिए वैध रहेगा।

    नीति संकल्प

    1. स्थानीय लोगों की वास्तविक इच्छाओं की पूर्ति के क्रम में, इसके प्राकृतिक संसाधनों के आर्थिक और वाणिज्यिक दोहन, जो इस प्रकार किया जाएगा कि राज्य में संपूर्ण पर्यावरणीय संतुलन पर स्थायी रूप से विघ्न न डाले और साथ ही समाज को इसका अधिकतम लाभ मिले, पर ज़ोर देते हुए औद्योगिक क्षेत्र के संपूर्ण विकास को प्राथमिकता दी जाएगी ।
    2. स्थानीय लोगों के संपूर्ण विकास, हितों को ध्यान में रखते हुए, औद्योगिक और अनुषंगी क्षेत्रों में रोज़गार अवसरों और लाभदायक स्वरोज़गार के मामले में उच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
    3. पौधरोपण, कृषि, बागवानी, औषधीय पादपों आदि पर आधारित उद्योग पूर्णत: अरूणाचल प्रदेश के आदिवासी उद्यमियों के लिए आरक्षित रहेंगे।
    4. प्राथमिक क्षेत्र के उद्योगों के विकास के लिए विशेष संवेग दिए जाएंगे। शुरूआत में, निम्नलिखित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों को प्राथमिक क्षेत्र के उद्योग माना जाएगा:
      1. कृषि आधारित उद्योग विशेषकर पौधरोपण आधारित जैसे चाय, कॉफी, रबर, आदि।
      2. ii. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल पर आधारित उद्योग।
      3. ऐसे उद्योग जो ऐसा सामान बनाते हैं जिनकी स्थानीय और पड़ोसी राज्यों में मांग है।
      4. औद्योगिक इकाइयां जो प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के पुनर्जीवन और उन्नयन के लिए कार्यरत् हैं।
      5. प्रदूषणरहित और धूलरहित पर्यावरण के दृष्टिकोण से इलैक्ट्रॉनिक उद्योग।
      6. राज्य के संपूर्ण पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए लघु वन उत्पादों पर आधारित उद्योग।

    5. कुछ अंतर्निहित समस्याओं जैसे कठिन भूभाग, परिवहन और संचार कठिनाइयों, कमज़ोर और बिखरे हुए बाज़ार, पर्याप्त संरचनात्मक ढांचे का अभाव आदि जो किसी भी औद्योगिक इकाई को एक अलाभदायी स्थिति में ले आती हैं, को दृष्टिगत करते हुए, सरकार ने सभी पात्र औद्योगिक इकाइयों के लिए प्रोत्साहनों का एक पैकेज तैयार किया है जिससे उन्हें वाणिज्यिक रूप से सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। इन प्रोत्साहनों का विवरण इस दस्तावेज के भाग IV में दिया गया है।
    6. राज्य यह स्वीकार करता है कि राज्य में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त संरचनात्मक ढांचा एक पूर्व अनिवार्यता है। औद्योगिक क्षेत्रों, औद्योगिक अभिवृद्धि केंद्रों आदि की स्थापना सहित वांछित संरचनात्मक ढांचे के विकास के लिए प्राथमिक आधार पर एक कार्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा।
    7. सरकार पौधरोपण आधारित उद्योगों जैसे चाय, कॉफी, रबर आदि पर विशेष ज़ोर देगी। इसी प्रकार ऐसे उद्योगों जो बागबानी, कृषि और अन्य पौधों जैसे औषधीय पौधे, सुगंधित घास आदि के प्रसंस्करण के लिए स्थापित किए जाते हैं, को राज्य संरक्षण और सुविधाओं के मामलों में विशेष ज़ोर और प्राथमिकता दी जाएगी।
    8. सभी प्रकार के खनिजों के भंडारों जैसे डोलोमाइट, लाइमस्टोन, ग्रेफाइट, कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस आदि जो प्रकृति द्वारा उदारतापूर्वक राज्य को प्रदान किए गए हैं, का अरूणाचल प्रदेश खनिज विकास और व्यापार निगम लिमिटेड के माध्यम से वाणिज्यिक दोहन किया जाएगा।
    9. हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों की सुदृढ़ता, उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की उच्च गुणवत्ता के साथ-साथ उच्च मात्रा (मूल्य और परिमाण दोनों में) को प्राप्त करने के लिए, सरकार के प्रयास डिज़ाइन विकास, कौशल विकास और उन्नयन, गुणवत्ता नियंत्रण, विपणन अनुसंधान और बाज़ार विस्तार, गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की समय पर उपलब्धता और हमारे शिल्पकारों और बुनकरों को ऋण सुविधाओं पर केंद्रित रहेंगे। इसी प्रकार के प्रयास रेशम-उत्पादन संबंधी गतिविधियों के साथ- साथ ग्रामीण और लघु उद्योगों के विकास के लिए किए जाएंगे।
    10. सरकार स्थानीय उद्यमीय, प्रबंधकीय और तकनीकी कौशलों के विकास के लिए विशेष प्रयास करेगी। इस उद्देश्य के लिए विभिन्न प्रशिक्षण और शैक्षिक संस्थानों के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण और शैक्षिक कार्यक्रमों को प्रारंभ किया जाएगा। ऐसे कार्यक्रमों में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। सर्वोत्तम परिणामों की प्राप्ति के लिए राज्य में स्थापित विद्यमान संस्थानों जिनमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और क्षेत्रीय उद्योग विकास केंद्र सम्मिलित हैं, को उन्नत और सुदृढ़ किया जाएगा।
    11. वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों सहित विद्यमान वित्तीय संस्थानों से नई औद्योगिक परियोजनाओं, ग्रामीण उद्योगों और ग्रामीण दस्तकारों के लिए ऋण के अबाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के क्रम में ऋण-जमा अनुपात को सुधारने के लिए कहा जाएगा। जिला उद्योग केंद्रों और वित्तीय संस्थानों से निकट संपर्क और सहयोग से कार्य कराया जाएगा। जब तक सभी क्षेत्र पर्याप्त रूप से बैंकिंग प्रणाली द्वारा कवर नहीं कर लिए जाते, तब तक राज्य का उद्योग विभाग लघु उद्यमियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराता रहेगा।
    12. राज्य सरकार आधारभूत औद्योगिक संरचनाओं जैसे ऊर्जा, संचार और उच्च- प्रौद्योगिकी वाले उद्योगों के विकास में विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी का स्वागत करेगी।
    13. राज्य सरकार राज्य में औद्योगिकीकरण को गति देने के लिए केंद्रीय सरकार के पैटर्न पर (उन मदों के अलावा जो भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए गए हैं और जिन्हें राज्य सरकार लाइसेंस के लिए उपयुक्त समझती है) सभी प्रकार के पर्यावरण-सापेक्ष उद्योगों के लिए उदारीकृत लाइसेंस नीति को आत्मसात करेगी।

    प्रशासकीय उपाय

    1. राज्य सरकार औद्योगिक गतिविधियों के संवर्धन के लिए विद्यमान संस्थागत ढांचे की संपूर्ण व्याख्या करेगी और जहां आवश्यकता होगी, सुधारात्मक उपाय करेगी।.
    2. अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत अन्य संगठनों के साथ-साथ उद्योग विभाग के निष्पादन का भाग-2 में वर्णित नीति दिशानिर्देशों के संदर्भ में ध्यान से निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा। जहां-कहीं सलाहकारों की सेवाएं लेना आवश्यक पाया जाएगा, वहां उनकी सेवाएं ली जाएंगी।
    3. अरूणाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और सुझाव देने के लिए एक राज्य स्तरीय "औद्योगिक परामर्शी बोर्ड" जिसमें उद्योग, वित्त, कृषि, बागवानी और पशुपालन, ऊर्जा, वन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभागों के प्रमुख तथा बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों, परामर्शी संगठनों, स्वैच्छिक संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और उद्योग संघों आदि के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे, का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष उद्योग मंत्री होंगे और वर्ष में एक बार इसकी बैठक होगी।
    4. राज्य स्तरीय औद्योगिक परामर्शी बोर्ड की तर्ज पर, सभी जिलों में एक जिला स्तरीय औद्योगिक परामर्शी बोर्ड का गठन भी किया जाएगा।

    प्रभावी तिथि, परिभाषा और पात्रता मानदंड

    1. अरूणाचल प्रदेश सरकार सरकार की औद्योगिक नीति 1 अप्रैल, 1994 से प्रभावी होगी। उसमें प्रस्तुत प्रोत्साहनों का पैकेज जिसे "प्रोत्साहन योजना 1994" कहा गया है, इस नीति की घोषणा की तिथि से प्रभावी होगा।
    2. पात्रता:

      अरूणाचल प्रदेश के किसी भी स्थान पर स्थित 01-04-1994 को अथवा उसके बाद स्थापित होने वाली केवल नई इकाइयां और विद्यमान इकाइयां जो विस्तार, आधुनिकीकरण अथवा विविधिकरण कर रही हैं, 1994 की प्रोत्साहन योजना के लिए पात्र होंगी। यद्यपि, विद्यमान इकाइयों जिन्होंने 01-04-1994 को वाणिज्यिक उत्पादन के पांच वर्ष पूरे नहीं किए हैं, को नई इकाई के रूप में माना जाएगा। इकाई पंजीकृत होनी चाहिए। एक औद्योगिक इकाई जो 01-04-1994 को अथवा उसके बाद वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करती है, को नई इकाई के रूप में माना जाएगा। कोई इकाई जो 01-04-1994 से पहले किसी भी समय वाणिज्यिक उत्पादन में है/थी, को विद्यमान इकाई के रूप में समझा जाएगा और वह प्रोत्साहनों के लिए पात्र होगी, बशर्ते कि आधुनिकीकरण/विस्तार पर निवेश किसी भी स्थिति में विद्यमान इकाई के सकल स्थाई पूंजीगत निवेश से अधिक न हो। यहां उल्लिखित पूंजीगत निवेश कारखाने, भवन और संयंत्र तथा मशीनरी के संदर्भ में किया गया निवेश है। उन इकाइयों/कारखानों जिनके पंजीकृत कार्यालय अरूणाचल प्रदेश से बाहर स्थित हैं, को प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत प्रोत्साहनों के दावे करने के लिए अपने सभी संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां इकाई/कारखाने के परिसरों में रखनी होंगी।

    3. परिभाषा और पात्रता मानदंड जो स्पष्ट नहीं है और अतिरिक्त/पुन: कथन/व्याख्या उद्योग विभाग, अरूणाचल प्रदेश सरकार के पास सुरक्षित रहेगी।