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दिल्ली में उद्योगों का विकास

  1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली देश में लघु उद्योगों के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरा है। नीचे दी गई तालिका के आंकड़े वर्ष 1951-96 तक दिल्ली में औद्योगिक प्रगति को दर्शाते हैं। (ये अनुमान उद्योग विभाग और डीपीसीसी द्वारा संचालित सर्वेक्षणों पर आधारित हैं। पक्के और विश्वसनीय आंकड़ों के लिए एक प्रक्रिया चल रही है।)


वर्ष इकाइयों की संख्या निवेश
(करोड़ रुपए में)
उत्पादन
(करोड़ रुपए में)
रोज़गार  
1951 8160 18 35 69266
1978 40000 600 1100 350000
1988 76559 2089 3426 514238
1996 126218 2524 6310 1135962

  1. दिल्ली में औद्योगिक इकाइयों द्वारा विभिन्न प्रकार के उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। वर्ष 1988 में एक औद्योगिक गणना की गई थी। दिल्ली में औद्योगिक इकाइयों का उत्पाद-वार प्रोफाइल नीचे दिया गया है:

    क्रमांक उत्पाद-वार उद्योग संख्या
    1  खाद्य उत्पाद 3827
    2  बीवरेज, तंबाकू और तंबाकू उत्पाद 64
    3  कॉटन टैक्सटाइल 406
    4  ऊन, सिल्क, सिंथेटिक उत्पाद 2006
    5  जूट, हैम्प और जूट उत्पाद 33
    6  टैक्सटाइल उत्पाद (चप्पलों के अलावा पहनने हेतु परिधानों सहित) 15166
    7  लकड़ी और लकड़ी उत्पाद, फर्नीचर और फिक्सचर 2633
    8  कागज़ और कागज़ उत्पाद, प्रिंटिंग, मुद्रण व अनुषंगी उद्योग 5662
    9  चमड़ा और चमड़ा उत्पाद 1495
    10  रबर, प्लास्टिक, पैट्रोलियम, कोयला उत्पाद 4599
    11  रसायन और अनुषंगी उत्पाद 2025
    12  गैर-धात्विक खनिज उत्पाद 1387
    13  बेसिक मेटल और एलोय उद्योग 3114
    14  मशीनरी और परिवहन उपकरणों के अलावा धातु उत्पाद 5780
    15  मशीनरी, मशीनें, उपकरण, उपस्कर (इलैक्ट्रॉनिक्स सहित) 7280
    16  इलैक्ट्रिकल मशीनरी, उपकरण, उपस्कर (इलैक्ट्रिक सहित) 4032
    17  परिवहन उपकरण 2844
    18  अन्य निर्माण उद्योग 3014
    19  विविध और सेवा उद्योग 1292
    20  मरम्मत सेवाएं 10782
    21  अन्य 962
      योग 76559

    यह देखा जा सकता है कि परिधान, इलैक्ट्रिकल उपकरण, उपभोक्ता इलैक्ट्रॉनिक्स, मुद्रण और प्रकाशन इकाइयां, प्लास्टिक की वस्तुएं, धातु और मशीनरी पुर्जे तथा खाद्य प्रसंस्करण दिल्ली में औद्योगिक इकाइयों के प्रमुख उत्पाद हैं।

  1. दिल्ली सरकार ने 1982 में एक औद्योगिक नीति वक्तव्य जारी किया था। इस नीति वक्तव्य में ऐसे सौम्य उद्योगों पर विशेष बल दिया गया जो उत्पादन के लिए कम स्थान, विद्युत और कुशल व्यक्तियों के लिए रोज़गार सृजन संभावनाओं के उच्चतर स्तरों को प्राप्त कर सकें। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए, दिल्ली में प्रदूषण मुक्त और गैर-खतरनाक इकाइयों के प्रोत्साहन पर बल दिया गया था। वक्तव्य में यह भी स्वीकार किया गया है कि दिल्ली में लघु उद्योग क्षेत्र का विकास होना चाहिए। संरचनात्मक ढांचे पर पड़ते दबाव को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने घरेलू क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने की अनुमति दे दी है। सतसठ उद्योगों को चिह्नित किया गया है जिन्हें 1 किलोवॉट लोड के साथ आवासीय घरों में चलाया जा सकता है, बशर्ते कि उद्योग कोई प्रदूषण अथवा भीड़भाड़ पैदा न करें और 30 वर्ग मीटर के स्थान के भीतर संचालित किया जा सकें।

  1. 67 घरेलू उद्योगों की एक सूची अनुबंध-1 पर दी गई है।

लघु उद्योग इकाइयों का पंजीकरण

    2.1 परिभाषा

    संयंत्र और मशीनरी में 60 लाख रुपए तक के निवेश वाले एक औद्योगिक उपक्रम को लघु उद्योग के रूप में परिभाषित किया गया है। यद्यपि, अनुषंगी उद्योगों के लिए यह सीमा 75 लाख रुपए है। निर्यात इकाइयों के मामले में यह सीमा 75 लाख रुपए है बशर्ते कि तीसरे वर्ष से उत्पादन का न्यूनतम 30 प्रतिशत निर्यात किया जाता हो। निवेश संबंधी ये सीमाएं तब भी लागू होंगी यदि संयंत्र और मशीनरी किराया-खरीद आधार पर हैं।

    2.2 अनंतिम पंजीकरण (केवल अनुकूल क्षेत्र में)

    अनंतिम पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की तिथि से 5 वर्षों की अवधि के लिए वैध है। जैसे ही इकाई वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करती है, अनंतिम प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो जाती है।

    2.3 अनंतिम पंजीकरण प्राप्ति के लिए संलग्न किए जाने वाले दस्तावेज

    1. स्वामियों/साझेदारों/निदेशकों, जो भी मामला हो, के पासपोर्ट आकार के तीन फोटोग्राफ
    2. साझेदारी इकाई की स्थिति में साझेदारी विलेख की छायाप्रति। साझेदारी को साझेदारी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है।
    3. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मामले में, निगमीकरण प्रमाणपत्र के साथ संगम-ज्ञापन और संगम-अनुच्छेद की प्रति। आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने और साक्षात्कार के लिए उपस्थित होने के लिए कंपनी के एक निदेशक को प्राधिकृत करने वाले कंपनी के संकल्प की प्रति।
    4. कानूनी कब्जे का साक्ष्य अर्थात् किराए की रसीद, स्वामित्व के साक्ष्य के साथ भूस्वामी का अनापत्ति प्रमाणपत्र, आवेदक को कनेक्शन धारक द्वारा अधिकृत पावर लोड।
    5. अनंतिम प्रमाणपत्र अनुमोदित औद्योगिक क्षेत्रों में इस विशिष्ट शर्त के साथ दिया जाएगा कि इकाई वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने से पूर्व डीपीसीसी से अनुमति प्राप्त करेगी।

    2.4 अनंतिम प्रमाणपत्र के लाभ

    अनंतिम पंजीकरण पर इकाई निम्नलिखित सुविधाएं प्राप्त कर सकती है:

    1. कारखाना भवन के निर्माण के लिए सामग्री।
    2. इकाई की स्थापना के लिए शेड निर्माण हेतु अनुमति के लिए निगम/स्थानीय निकायों को आवेदनपत्र देना।
    3. नगर निगम लाइसेंस और विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन देना।
    4. दिल्ली वित्त निगम/राष्ट्रीयकृत बैंकों आदि को वित्तीय सहायता के लिए आवेदन देना।
    5. किराया-खरीद आधार पर मशीनरी के प्रापण के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम/दिल्ली राज्य औद्योगिक विकास निगम/अन्य संस्थानों को आवेदन देना।
    6. कच्चे माल/कलपुर्जों और पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए आवेदन देना।

    2.5 स्थाई पंजीकरण (केवल अनुकूल क्षेत्र में)

    स्थाई पंजीकरण उन इकाइयों को प्रदान किया जाता है जो मास्टर प्लान के अनुसार अनुकूल क्षेत्रों में अस्तित्व में आई हैं। इसके लिए 30 किलोवॉट (अथवा 40 एचपी) की औद्योगिक विद्युत सीमा है। कुछ उद्योगों में सभी मशीनें एक साथ संचालित नहीं होती हैं। ऐसे मामलों में यदि उद्योग तीन गुना तक विद्युत लोड के विचलन का औचित्य देता है तो सीमा की अनुमति दे दी जाती है।

    स्थाई पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाली इकाइयों को निर्धारित आवेदनपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:

    1. परिसर के स्वामित्व का साक्ष्य अर्थात् आवंटन पत्र/कब्जा पत्र/ पट्टा विलेख/संपत्ति कर रसीद/नगर निगम लाइसेंस। यदि इकाई के पास स्वयं अपने नाम पर अथवा अपने स्वामी के नाम पर अथवा साझेदारों/ निदेशकों में से किसी के नाम पर, जो भी मामला हो, नगर निगम लाइसेंस है तो वैध कब्जे के किसी और साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है।

      यदि परिसर की व्यवस्था किराया आधार पर की गई है तो इकाई को वैध कब्जे का साक्ष्य अर्थात् भूस्वामी के स्वामित्व के साक्ष्य के साथ भूस्वामी से किराया रसीद और/अथवा अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए जीपीए के साथ किराया रसीद/किराया करार को भी स्वीकार किया जाता है बशर्ते कि जीपीए की नियुक्ति स्वामी/पट्टाधारक द्वारा एक पंजीकृत विलेख के माध्यम से की गई हो। उद्योग विभाग/दिल्ली राज्य औद्योगिक विकास निगम से संबंधित परिसरों के मामले में, आवेदक उद्योग विभाग/दिल्ली राज्य औद्योगिक विकास निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा।

    2. आवेदन किए गए प्रत्येक उत्पाद के बिक्री बिल की एक छायाप्रति।
    3. प्रत्येक कच्चे माल के खरीद बिल की एक छायाप्रति।
    4. स्थापित की गई मशीनरी के खरीद बिल।
    5. साझेदारी इकाई के मामले में साझेदारी विलेख की प्रति (इसका पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है)।
    6. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मामले में, स्थाई लघु उद्योग पंजीकरण देने हेतु आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने और साक्षात्कार के लिए उपस्थित होने के लिए कंपनी के एक निदेशक को प्राधिकृत करने वाले कंपनी के संकल्प की प्रति के साथ निगमीकरण के प्रमाणपत्र सहित संगम-ज्ञापन और संगम-अनुच्छेद की प्रति (निदेशकों में कोई परिवर्तन होने की स्थिति में, संकल्प की प्रति और प्रपत्र संख्या 32 में सूचना)।
    7. प्रदूषित इकाई के मामले में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति से वैध स्वीकृति पत्र की छायाप्रति।
    8. औद्योगिक विकास और विनियमन अधिनियम, 1951 के अंतर्गत लाइसेंस की आवश्यकता वाले उत्पाद के मामले में भारत सरकार से औद्योगिक लाइसेंस की प्रति।
    9. एचईए (क्यूसी) आदेश, 1981 और क्यू.सी. आदेश 1993 के अंतर्गत कवर किए गए बिजली के घरेलू उपकरणों के संबंध में बीआईएस/ गुणवत्ता नियंत्रण प्रमाणपत्र।
    10. निर्धारित स्वरूप के अनुसार इकाई की स्थिति, स्थापित मशीनरी, विद्युत आवश्यकताओं आदि बताते हुए 3 रुपए का नोटेरियल स्टाम्प चिपकाकर 2 रुपए के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर नोटेरी पब्लिक द्वारा विधिवत् सत्यापित एक शपथ-पत्र।

      उपरोक्त सभी दस्तावेज आवेदक द्वारा स्वयं सत्यापित होने चाहिए।

      आई.ए. संख्या 22/95 में सिविल रिट पैटीशन संख्या 4677/85, एम.सी. मेहता विरुद्ध भारत संघ और अन्य में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम निर्देशों के अनुपालन में, संबंधित प्राधिकरणों द्वारा अनुपालन किए जाने के लिए निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए हैं:

    1. इस तथ्य के बावजूद कि इकाई के पास नगर निगम लाइसेंस/ तदर्थ नगर निगम लाइसेंस/तदर्थ नगर निगम पंजीकरण है, गैर-अनुकूल क्षेत्रों में किसी इकाई को नए लघु उद्योग का पंजीकरण नहीं दिया जाएगा।
    2. इस तथ्य के बावजूद कि इकाई अनुकूल क्षेत्र में स्थित है, प्रदूषण गतिविधियों में लिप्त किसी इकाई को तब तक कोई लघु उद्योग पंजीकरण नहीं दिया जाएगा जब तक कि वह दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति से एक स्वीकृति प्रमाणपत्र/अनुमति प्रस्तुत न कर दे।