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    स्थान परिवर्तन योजना
    उद्योग विभाग की संवर्धनात्मक गतिविधियां


    3.0 स्थान परिवर्तन योजना

    सिविल रिट पैटीशन संख्या 4677/85 एम.सी. मेहता विरुद्ध भारत संघ एवं अन्य में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि दिल्ली के मास्टर प्लान-2001 में निर्धारित कुछ शर्तों के अंतर्गत रिहायशी परिसरों में औद्योगिक गतिविधियां चलाने की अनुमति दी गई है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मास्टर प्लान के प्रावधानों जिसकी भारत का एक उच्च न्यायालय दिल्ली के मास्टर प्लान-2001 में निहित प्रावधानों के संबंध में रिहायशी/असंगत क्षेत्रों में इकाइयों के कार्य करने की अनुमेयता की जांच कर रहा है, का अनुपालन किया जाए, उन सभी उद्योगों जो उच्चाधिकार प्राप्त समिति से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने में असमर्थ रहे, को 01/01/1997 से रिहायशी क्षेत्रों में अपना संचालन बंद करना था।

    रिहायशी/असंगत क्षेत्रों में कार्यरत उद्योगों का स्थान परिवर्तन के उद्देश्य के लिए, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने 1300 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है जिसमें से बवाना और होलम्बी कलां गांवों में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 935 एकड़ भूमि का कब्जा ले लिया गया है। अधिग्रहण और औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में विकास के लिए बाकी 3000 एकड़ भूमि की पहचान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली सरकार के पास विभिन्न स्थानों पर विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में 102 एकड़ भूमि भी उपलब्ध है। इन स्थानों पर लगभग 5800 फ्लैटिड फैक्टरियों का निर्माण करने का प्रस्ताव है।

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार की स्थान परिवर्तन योजना के अंतर्गत औद्योगिक भूखंडों/फ्लैटों के आवंटन के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए थे। आवेदन पत्र प्राप्ति की अंतिम तिथि अर्थात् 31/12/1996 तक, उद्योग विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार को औद्योगिक भूखंडों/फ्लैटों के आवंटन के लिए 51,851 आवेदन पत्र प्राप्त हुए। आवेदन पत्रों की जांच का कार्य प्रगति पर है।

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने निर्णय किया है कि सभी इकाइयों जिन्होंने स्थान परिवर्तन योजना के अंतर्गत वैकल्पिक औद्योगिक स्थल के लिए आवेदन किया है, के नगर निगम लाइसेंसों को उस समय तक नवीकृत कर दिया जाए, जब तक नवनिर्मित/विकसित फ्लैटिड फैक्टरी कांपलेक्सों/औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों को विद्युत कनेक्शन के साथ वैकल्पिक औद्योगिक स्थल उपलब्ध नहीं हो जाते।

    4.0 उद्योग विभाग की संवर्धनात्मक गतिविधियां

    उद्योग विभाग दिल्ली में लघु उद्योगों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रौद्योगिकीय उन्नयन के साथ अपने उद्यम और उपक्रम स्थापना की प्रक्रिया में उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    1. संरचनात्मक सुविधाएं

    उद्योग विभाग द्वारा विकसित भूखंडों और फ्लैटिड फैक्टरियों के रूप में संरचनात्मक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। ओखला औद्योगिक क्षेत्र, बादली औद्योगिक क्षेत्र, इलैक्ट्रॉनिक्स के लिए कार्यरत औद्योगिक क्षेत्र ओखला, और कार्यरत औद्योगिक क्षेत्र पटपड़गंज में भूखंडों का विकास और आवंटन किया गया है। ओखला औद्योगिक क्षेत्र, बादली औद्योगिक क्षेत्र और भारत नगर तथा नन्दनगरी में शेडों का निर्माण और आवंटन किया गया है। ओखला फेज़-1 और रानी झांसी रोड में फ्लैटिड फैक्टरी कांपलेक्सों का निर्माण और आवंटन किया गया है। डीएसआईडीसी ने ओखला फेज-1 और झिलमिल, ताहिरपुर, वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र, लारेंस रोड औद्योगिक क्षेत्र, रोहतक रोड औद्योगिक क्षेत्र, कीर्ति नगर औद्योगिक क्षेत्र, मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक शेडों का निर्माण और नरेला औद्योगिक कांपलेक्स को विकसित किया है।

    2. आयातित, दुर्लभ कच्चे माल, ईंधन और अन्य निवेशों के प्रापण में सहायता

    उद्योग विभाग कच्चे माल, ईंधन और निवेशों जैसे पैराफिन वैक्स, रबर, कोयला, फर्नेन्स ऑयल आदि के प्रापण में लघु उद्योग इकाइयों की सहायता करता है। यह विभाग आयात लाइसेंस जारी करने के लिए अनिवार्यता प्रमाणपत्र जारी करता है। पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए, यह विभाग संबंधित एजेंसी को अनुशंसा करता है। स्वदेशी मशीनरी के संबंध में, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम को किराया-खरीद आधार पर मशीनरी की खरीद के लिए अनुशंसा की जाती हैं।


    राष्ट्रीय लघु उद्योग विकास निगम द्वारा प्रभारित पेशगी राशि, ब्याज दर और सेवा प्रभारों का विवरण अनुबंध-3 पर दिया गया है।

    3. परंपरागत उद्योगों को सहायता

    हथकरघा, हस्तशिल्प और खादी व ग्रामोद्योग क्षेत्र के संवर्धन के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के विशेष कार्यक्रम हैं।

    (क) हथकरघा

    निम्नलिखित अनुमोदित प्लान योजनाओं में संवर्धन, विकास और आधुनिकीकरण के लिए हथकरघा क्षेत्र को सहायता प्रदान की जा रही है:

      क. निम्नलिखित अनुमोदित प्लान योजनाओं में संवर्धन, विकास और आधुनिकीकरण के लिए हथकरघा क्षेत्र को सहायता प्रदान की जा रही है।

      ख. भारत नगर में बुनकर सेवा केंद्र और नन्दनगरी में डिज़ाइन कक्ष के माध्यम से बुनकरों को तकनीकी मार्गदर्शन।

      ग. भारत नगर और नन्दनगरी में वर्क-शेडों का निर्माण।

      घ. नन्दनगरी पुनर्वास कॉलोनी में वर्कशेड-सह-आवासों का निर्माण।

      ङ. थ्रिफ्ट फंड-सह-सेविंग सिक्युरिटी योजना और समूह बीमा योजना।

      च. करघों आदि के आधुनिकरण के लिए बुनकर सहकारी समितियों को ऋण और अनुदान।

      छ. राष्ट्रीय हथकरघा प्रदर्शनियों के दौरान हथकरघा वस्त्रों की बिक्री पर छूट।

      ज. विकेंद्रीकृत क्षेत्र में पावरलूम कामगारों के लिए समूह बीमा योजना।

      झ. अच्छा कार्य करने वाली प्राथमिक हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों को राज्य पुरस्कार की योजना।

      ञ. सहकारी क्षेत्र के हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प दस्तकारों के लिए परिवार पेंशन।

      ट. प्राथमिक हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों/शीर्ष फेडरेशनों में शेयर पूंजी निवेश।

      ठ. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार में हथकरघा और हस्तशिल्प के रेकॉर्डों का कंप्यूटरीकरण।

    (ख) हस्तशिल्प

    हस्तशिल्प क्षेत्र के संवर्धन, विकास और आधुनिकीकरण के लिए निम्न प्रकार से सहायता प्रदान की जा रही है:

      क. विभिन्न शिल्पों जैसे इनले वर्क, कृत्रिम आभूषण, क्ले मॉडलिंग, ज़री ज़रदोरी, संगमरमर मूर्तिकला, बीड का काम, मिनिएचर चित्रकला, पुरी चित्रकला और ब्लू आर्ट पॉटरी में मास्टर शिल्पकारों द्वारा प्रशिक्षुता प्रशिक्षण केंद्रों से शिल्पकारों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

      ख. हस्तशिल्पों की परंपरागत विरासत को बनाए रखने के लिए यह विभाग बुनकर कॉलोनी, भारत नगर, दिल्ली में निम्नलिखित प्रशिक्षण केंद्र भी चला रहा है:

      1. पेपर क्राफ्ट और पेपर मैके में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए लड़कियों के लिए पेपर क्राफ्ट और पेपर मैके केंद्र (दो वर्ष की अवधि)।
      2. कालीन बुनाई में प्रशिक्षण देने के लिए कालीन बुनाई और प्रशिक्षण केंद्र (एक वर्ष की अवधि)।
      3. इन पाठ्यक्रमों के सभी प्रशिक्षार्थियों को 250 रुपए की मासिक छात्रवृत्ति दी जाती है।

      ग. डीएसआईडीसी के माध्यम से विपणन सहायता भी दी जा रही है। प्रत्येक वर्ष दिसंबर माह में आयोजित होने वाले अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह के दौरान हस्तशिल्प वस्तुओं की बिक्री पर छूट दी जाती है।

      घ. उत्कृष्टता के संवर्धन के लिए प्रत्येक वर्ष मास्टर हस्तशिल्पियों को राजय पुरस्कार भी दिए जाते हैं। यह विभाग भारत सरकार को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए उत्कृष्ट हस्तशिल्प वस्तुओं को प्रायोजित भी करता है।

      ङ. हस्तशिल्प वस्तुओं की बिक्री के संवर्धन के लिए, नियमित अंतरालों पर हस्तशिल्प बाज़ारों का आयोजन किया जा रहा है।

    4. सामान्य सुविधा केंद्र

      क. चमड़ा उद्योग के लाभ के लिए वज़ीरपुर और रानी झांसी रोड पर चमड़े की वस्तुओं के लिए फ्लेटिड फैक्ट्री कांपलेक्स में एक सामान्य सुविधा केंद्र स्थापित किया गया है।

      ख. चमड़ा कांपलेक्स, वज़ीरपुर के लिए फ्लेटिड फैक्टरियों में जूते-चपल्लों और चमड़े की वस्तुओं के निर्माण में छ: माह का एक पाठ्यक्रम आयोजित किया जाता है।

    5. एकल खिड़की सूचना सेवा

    विभाग ने कश्मीरी गेट स्थित अपने कार्यालय में एक एकल खिड़की सूचना सेवा की स्थापना की है। यह एकल खिड़की सूचना सेवा निम्नलिखित के लिए सहायता प्रदान करती है:

      क. लघु उद्योग क्षेत्र के अंतर्गत पंजीकरण।
      ख. दिल्ली विद्युत बोर्ड से विद्युत लोड की स्वीकृति।
      ग. लघु उद्योग के रूप में अनंतिम पंजीकरण जारी करना।

    6. निर्यात कक्ष

    भारत सरकार की नीति के अनुसार, निर्यात कक्ष दिल्ली से निर्यातों को बढ़ावा देने के लिए निर्यातोन्मुख इकाइयों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करता है। इस कक्ष के अध्यक्ष संयुक्त उद्योग निदेशक (निर्यात) हैं जो निर्यातक समुदाय की विभिन्न समस्याओं के अंतर-विभागीय समाधान के समन्वय और सुविधा के लिए नोडल अधिकारी भी हैं। कठिनाइयों को पहचानने और एक उपयुक्त नीति/कार्य योजना लागू करने के लिए, उद्योग मंत्री, दिल्ली सरकार की अध्यक्षता में एक निर्यात परामर्शी समिति का गठन किया गया है। निर्यातों के संवर्धन और सफल उद्यमियों को मान्यता प्रदान करने के हमारे प्रयासों में, "निर्यात संवर्धन" की एक योजना प्रारंभ की गई है जिसके अंतर्गत लघु उद्योगों को राज्य निर्यात पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। विदेशों में आयोजित होने वाले व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में सहभागिता से भी विभाग द्वारा निर्यातकों को प्रोत्साहित किया जाता है। ऐसी गतिविधियों में भाग लेने के लिए उन्हें सब्सिडी प्रदान की जाती है। निर्यातों को बढ़ावा देने और सौम्य उच्च-प्रौद्योगिकीय उद्योगों के विकास के लिए एक निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क और प्रौद्योगिकी पार्क की स्थापना की एक नई प्लान योजना भी विभाग ने प्रारंभ की है।

    7. गुणवत्ता नियंत्रण कक्ष (इलैक्ट्रिकल)

    1. केंद्रीय सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत 12 नवंबर, 1981 को बिजली के घरेलू उपकरण (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 1981 अधिसूचित किया गया था। इस गुणवत्ता नियंत्रण आदेश का प्रमुख उद्देश्य बिजली के उपकरणों का प्रयोग करने वालों को खतरों से सुरक्षा और पूरा बचाव सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना है कि निर्माता भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित विशिष्ट मानकों का पालन करें। तदनुसार, बिजली के 33 घरेलू उपकरणों को इस गुणवत्ता नियंत्रण आदेश, 1981 के अंतर्गत लाया गया था। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में उद्योग आयुक्त को उपयुक्त प्राधिकारी मनोनीत किया गया है।
    2. बिजली उपकरणों के निर्माताओं द्वारा उत्पादित मदों/वस्तुओं की गुणवत्ता की जांच के लिए विभाग ने एक परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की है। निर्धारित परीक्षण शुल्कों के भुगतान पर निर्माताओं को परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है।
    3. उपरोक्त गुणवत्ता आदेश के प्रवर्तन के लिए विभाग द्वारा आवधिक सर्वेक्षण/निरीक्षण संचालित किए जाते हैं और नमूनों की जांच/परीक्षण किया जाता है।

      उपरोक्त के साथ-साथ, उद्योग विभाग द्वारा निम्नलिखित चार गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का भी कार्यान्वयन किया जा रहा है:

      • क. इलैक्ट्रिकल वायर्स, केबल्स, एप्लाएंसेज़ और एक्सेसरीज़ (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 1993

        ख. ऑयल प्रैशर स्टोव (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 1987

        ग. जनरल सर्विसेज़ इलैक्ट्रिकल लैंप (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 1989

        घ. नॉन प्रैशर स्टोव (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 1990

    4. विभाग एक प्लान योजना का कार्यान्वयन कर रहा है जो परीक्षण उपकरणों की खरीद के लिए बिजली के घरेलू उपकरण (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 1981 के अंतर्गत बिजली के उपकरणों के निर्माण हेतु वित्तीय सब्सिडी प्रदान करती है। सब्सिडी की राशि 10,000 रुपए अथवा खरीदे गए परीक्षण उपकरणों की कुल लागत का 25 प्रतिशत, जो भी कम हो, है।

    8. औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण

    1. प्रदूषण नियंत्रण यंत्रों/उपकरणों की स्थापना के लिए वैयक्तिक इकाइयों को अधिकतम 50,000 रुपए के अध्यधीन 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करने हेतु उद्योग विभाग द्वारा एक प्लान योजना का कार्यान्वयन किया जा रहा है। लघु और मध्यम उद्योग सब्सिडी अनुदान के लिए पात्र हैं।
    2. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में, संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों की सीईटीपी सोसायटियों द्वारा 15 सामान्य बहिस्रावी उपचार संयंत्रों की स्थापना की जाएगी। इनकी स्थापना संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों की सीईटीपी सोसायटियों द्वारा की जाएगी। इन संयंत्रों का निर्माण, संचालन और रखरखाव तथा निर्धारित मानदंडों में उद्योगों द्वारा निपटाए गए बहिस्रावों की गुणवत्ता नियंत्रण का उत्तरदायित्व इन सोसायटियों का होगा। इस उद्देश्य के लिए, दिल्ली सरकार ने 22.5 करोड़ रुपए और केंद्रीय सरकार ने 22.5 करोड़ रुपए जारी किए हैं जो इन सभी 15 सीईटीपी की पूंजीगत लागत का 50 प्रतिशत है। पूंजीगत लागत का शेष 50 प्रतिशत अर्थात् 45 करोड़ रुपए और उत्तरवर्ती वार्षिक संचालनात्मक तथा रखरखाव प्रभार इन सोसायटियों द्वारा वहन किए जाएंगे। यदि ये सोसायटियां चाहें तो आईडीबीआई अथवा अन्य किसी वित्तीय संस्थान से पूंजीगत लागत के 30 प्रतिशत तक ऋण ले सकती हैं।

    9. लुब्रिकेटिंग ऑयल और ग्रीज़ के प्रसंस्करण का व्यवसाय चलाने के लिए लाइसेंस प्रदान करना

    उद्योग विभाग लुब्रिकेटिंग ऑयल और ग्रीज़ (प्रसंस्करण, आपूर्ति और वितरण विनियमन) आदेश, 1987 के अंतर्गत लुब्रिकेटिंग ऑयल और ग्रीज़ के प्रसंस्करण/व्यापार (केवल विक्रय गतिविधि के लिए) का व्यवसाय चलाने के लिए लाइसेंस जारी करता है। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए, आवेदक को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:

    1. व्यापारी/पुनर्विक्रेता: तैयार लुब्रिकेटिंग ऑयल/ग्रीज़ और विशेषज्ञताओं के व्यापारियों/पुनर्विक्रेताओं को निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना वांछित है।
    2. परिसर के वैध कब्जे का साक्ष्य।
    3. फर्म/कंपनी के संविधान की प्रति।
    4. 25 रुपए का ट्रेजरी चालान।
    5. प्रसंस्कर/निर्माता: लुब्रिकेटिंग ऑयल/ग्रीज़ के प्रसंस्करों/निर्माताओं को लघु उद्योग पंजीकरण पर अनुप्रयोज्य दस्तावों के साथ निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होता है। इसके साथ-साथ, उन्हें विस्फोटक नियंत्रक, भारत सरकार से प्रमाणपत्र/अनापत्ति प्रमाणपत्र भी प्राप्त करना होता है।

    10. प्रक्रियाओं का सरलीकरण

    1. जनता की शिकायतों का निवारण और सहायता।
    2. जनता की बात सुनने और उनकी शिकायतों/समस्याओं का निपटारा करने पर विशेष बल दिया जाता है। जन व्यवहार से संबंधित सभी अधिकारी सभी कार्यदिवसों में 1200 बजे से 1300 बजे तक जनता से मिलते हैं।

      उद्योग आयुक्त के कार्यालय के प्रवेश-द्वार पर एक सार्वजनिक संपर्क कार्यालय स्थापित किया गया है। इस कार्यालय में प्रतिदिन 1100 बजे से 1300 बजे तक संबंधित संयुक्त उद्योग निदेशक के संपूर्ण नियंत्रणाधीन सहायक उद्योग निदेशक स्तर का एक अधिकारी उपस्थित रहता है।

    3. निरीक्षण कर्मचारियों द्वारा निरीक्षणों को कम करना।

      पहले से लघु उद्योगों के रूप में पंजीकृत तथा और अधिक उत्पादों को शामिल करने की इच्छुक इकाइयों का सामान्यत: कोई निरीक्षण नहीं किया जाता है। विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों/एजेंसियों को निर्यातक इकाइयों के मामलों की अनुशंसा करने में भी निरीक्षणों की आवश्यकता नहीं है। जिन मामलों में निरीक्षण की आवश्यकता अनुभव की जाती है, विभाग ने इकाई को निरीक्षण की तिथि और समय की पूर्व सूचना (लिखित में) देने की परिपाटी प्रारंभ की है ताकि इकाई का एक उत्तरदायी कार्मिक निरीक्षण के दौरान वहां उपस्थित रहे। सभी निरीक्षणों को उप निदेशक, उद्योग और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों द्वारा प्राधिकृत किया जाता है।

    11. महिला उद्यमी कक्ष

    महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार की नीति को दृष्टिगत करते हुए, दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग ने एक विशेष महिला उद्यमी कक्ष की स्थापना की है।
    यह कक्ष महिला उद्यमियों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने में उनकी सहायता करता है। संक्षेप में, इस कक्ष के निम्नलिखित कार्य हैं और निम्नलिखित योजनाओं का कार्यान्वयन करता है:

    1. परिवार के आर्थिक स्तर को बढ़ाने की दृष्टि से, विभाग सामान्यत: महिला उद्यमियों द्वारा उनके घरों में चलाए जाने वाले उद्योगों को पंजीकरण प्रदान करता है। इस उद्देश्य के लिए 67 घरेलू उद्योगों को चिह्नित किया गया है।
    2. राष्ट्रीय पुरस्कारों सहित विभिन्न पुरस्कारों के लिए पात्र महिला उद्यमियों के नामों को प्रायोजित करना।
    3. दिल्ली वित्त निगम के माध्यम से महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए महिला उद्यमी निधि जैसी विशेष योजनाएं उपलब्ध हैं।
    4. उपरोक्त के अलावा, उद्योग विभाग महिलाओं के लिए फैशन डिज़ाइनिंग में छ: माह की अवधि का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्वरोज़गार हेतु एक सोसायटी चला रहा है। पेपर मैके केंद्र में केवल महिलाओं के लिए पेपर क्राफ्ट और पेपर मैके मदों में एक दो वर्षीय पाठ्यक्रम भी चलाया जा रहा है।
    5. उद्योग विभाग ने महिला उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के लिए नौवीं योजना के अंतर्गत निम्नलिखित योजनाएं प्रारंभ की हैं:
      • क. महिला उद्यमियों को उनकी अपनी लघु इकाई की स्थापना के लिए 50 प्रतिशत अनुदान के साथ 50,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है। इन लाभार्थियों को प्रशिक्षण सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

        ख. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में सहभागिता के लिए महिला उद्यमियों को सब्सिडी के रूप में सहायता प्रदान की जाती है। उत्कृष्ट महिला उद्यमियों को विशेष रूप से महिलाओं पर केंद्रित औद्योगिक विकास से संबंधित राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों, सम्मेलनों में भाग लेने में भी सहायता दी जाती है।

        ग. विभाग की ओर से विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए परियोजना प्रोफाइल तैयार किए जाते हैं और उभरते हुए उद्यमियों को तत्काल संदर्भ के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं।

        उपरोक्त सुविधाओं के अलावा, भारत सरकार द्वारा अपने विभिन्न खंडों/विभागों के माध्यम से निम्नलिखित योजनाएं/लाभ प्रदान किए जाते हैं:

        1. राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रदर्शनियों/व्यापार मेलों में महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों के प्रदर्शन के लिए स्थान आरक्षित है।
        2. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा "महिला उद्यमी निधि" योजना के अंतर्गत 1 प्रतिशत मामूली सेवा प्रभार पर महिला उद्यमियों को 3:1 के ऋण-इक्विटी अनुपात के साथ केवल 10.00 लाख रुपए की परियोजना लागत की अधिकतम 15 प्रतिशत इक्विटी प्रकार की सहायता प्रदान की जाती है।
        3. राज्य वित्त निगम के माध्यम से भारतीय औद्योगिक वित्त निगम द्वारा महिला उद्यमियों को 20,000 रुपए की सीमा के साथ एक बार ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है।
        4. राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड द्वारा महिला उद्यमियों को अपनी किराया-खरीद योजना के अंतर्गत रियायती ब्याज दर और सेवा प्रभार जो सामान्य श्रेणी से एक प्रतिशत कम है और सामान्य श्रेणी के लिए 20 प्रतिशत की पेशगी राशि की तुलना में 15 प्रतिशत पेशगी राशि के भुगतान पर संयंत्र और मशीनरी की आपूर्ति की जाती है।
        5. लघु उद्योग सेवा संस्थानों के अपने नेटवर्क के माध्यम से लघु उद्योग विकास संगठन द्वारा महिला उद्यमियों को कौशल विकास, उद्यमिता विकास, उत्पाद और प्रक्रिया उन्मुख प्रशिक्षण, प्रबंध प्रशिक्षण, विपणन प्रबंध कार्यक्रमों आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
        6. पहली पीढ़ी के उद्यमियों में से उत्कृष्ट के संवर्धन और मान्यता के लिए, उत्कृष्ट महिला उद्यमियों को विशेष पुरस्कार दिया जाता है जिसमें 1993 से लघु उद्यमियों को राष्ट्रीय पुरस्कार की योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 25,000 रुपए का नकद पुरस्कार और एक ट्रॉफी प्रदान की जा रही है।