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6.0 प्रधानमंत्री रोज़गार योजना

प्रधानमंत्री रोज़गार योजना की रचना शिक्षित बेरोज़गार युवाओं को छोटे-छोटे उद्योगों की स्थापना द्वारा रोज़गार प्रदान करने के लिए की गई है। यह उद्योग सेवा और व्यवसाय मार्गों के माध्यम से स्वरोज़गार उद्यमों की स्थापना से संबंधित है।

पात्रता

  1. आयु: 18 से 35 वर्ष के बीच।
  2. योग्यता: मैट्रिक (उत्तीर्ण अथवा अनुत्तीर्ण) अथवा आईटीआई उत्तीर्ण अथवा न्यूनतम 6 माह की अवधि का सरकार द्वारा प्रायोजित तकनीकी पाठ्यक्रम।
  3. निवास: न्यूनतम 3 वर्षों से दिल्ली का स्थाई निवासी।
  4. पारिवारिक आय: 24000 रुपए वार्षिक तक।
  5. व्यतिक्रमी: किसी राष्ट्रीयकृत बैंक/वित्तीय संस्थान/सहकारी बैंक आदि का व्यतिक्रमी (डिफॉल्टर) नहीं होना चाहिए।

आरक्षण

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 22.5 प्रतिशत और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत।

सम्मिलित गतिविधियां

उद्यमी किसी व्यवसाय-उद्योग, सेवा अथवा व्यवसाय के लिए ऋण ले सकते हैं, यद्यपि, व्यवसाय क्षेत्र में 30 प्रतिशत से अधिक उद्यम नहीं होने चाहिए।

परियोजना लागत

वैयक्तिक मामलों में योजना के अंतर्गत 1 लाख रुपए तक की परियोजनाएं सम्मिलित की जाती हैं। यदि दो अथवा अधिक पात्र व्यक्ति साझेदारी में एक-दूसरे का साथ देते हैं तो उच्चतर लागत वाली परियोजना को भी सम्मिलित किया जा सकता है परंतु परियोजना लागत में प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा 1.00 लाख रुपए अथवा कम होगा। ऐसे मामलों में सकल परियोजना लागत 1 लाख रुपए से अधिक हो सकती है और इस पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है।

पेशगी राशि, बैंक ऋण और ब्याज दरें

उद्यमी को पेशगी राशि के रूप में परियोजना लागत का 5 प्रतिशत नकद अंशदान करना होता है।

बैंक ऋणों पर संपार्श्विक गारंटी

ऋणों के लिए किसी संपार्श्विक गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। केवल योजना के अंतर्गत सृजित परिसंपत्तियों को बैंक के पास बंधक रखा जाएगा।

    सब्सिडी

    भारत सरकार 7500 रुपए प्रति उद्यमी की सीमा के अध्यधीन परियोजना लागत की 15 प्रतिशत की दर पर सब्सिडी प्रदान करेगी। यदि एक से अधिक उद्यमी मिलकर साझेदारी में एक परियोजना स्थापित करते हैं तो 7500 रुपए (प्रति साझेदार) की सीमा के साथ परियोजना लागत में उसके हिस्से के 15 प्रतिशत की दर पर प्रत्येक साझेदार के लिए अलग-अलग सब्सिडी की गणना की जाएगी।

    पुनर्भुगतान योजना

    पुनर्भुगतान समय 6 से 18 माह के प्रारंभिक ऋण-स्थगन के बाद 3 से 7 वर्षों तक होगा।

    प्रशिक्षण

    ऋण की स्वीकृति के बाद योजना में उद्यमियों के लिए औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत 15 से 20 कार्यदिवसों और व्यवसाय तथा सेवा क्षेत्र के अंतर्गत 7 से 10 कार्यदिवसों की अवधि का अनिवार्य प्रशिक्षण शामिल है।

    कार्य-स्थल

    आवेदकों को दिल्ली के मास्टर प्लान-2001 में अनुमेय भू-उपयोग के अनुरूप अपने स्वयं के कार्य परिसर की व्यवस्था करनी होगी। आवासीय क्षेत्र में स्थित परिसरों में निर्माण गतिविधि की स्थापना के मामले में उच्चाधिकार समिति से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।