मानव संसाधन विकास
प्रस्तावना
जब क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने की सुदृढ़ता का प्रश्न आता है तो एक मज़बूत शैक्षिक प्रणाली परमावश्यक हो जाती है। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि गुजरात अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा वाले अनेक संस्थानों, जो उद्योगों को प्रशिक्षित श्रमशक्ति प्रदान करते हैं, का घर है। इसमें ज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सामान्य और उच्च दोनों प्रकार की शिक्षा सम्मिलित है। आज जबकि दुनिया की पहचान एक "वैश्विक गांव" के रूप में सिकुड़ रही है, औद्योगिक क्षेत्र को विभिन्न प्रकार के कौशलों की आवश्यकता है। गुजरात सरकार का दृढ़ विश्वास है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपने आधार को सुदृढ़ करने की योजना बनाने वाले किसी भी औद्योगिक उद्यम के लिए गुणवत्ता मूलमंत्र है और इसीलिए, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले अपने उत्पाद के लिए इसे उसी गुणवत्ता वाली श्रमशक्ति की आवश्यकता होगी। आधारभूत नीति को अग्रलिखित वाक्य में समाहित किया गया है - "स्कूल" से "कौशल" से "समाज" को योगदान। इसका अंतिम परिणाम एक व्यक्ति को समाज को अधिकतम योगदान देने योग्य बनाना होना चाहिए।
भारतीय प्रबंध संस्थान, राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, उद्यमिता विकास संस्थान, निरमा प्रबंध संस्थान, सीईपीटी, डीएआईआईसीटी जैसे कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों के अलावा, राज्य में 26 इंजीनियरिंग कॉलेज, 61 पॉलिटेक्निक, 26 प्रबंध अध्ययन संस्थान, कंप्यूटर अनुप्रयोग के लिए 25 कॉलेज, 219 औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान हैं।
अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को सर्वाधिक महत्व
आने वाले वर्षों में, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का सर्वाधिक महत्व होगा और विश्व व्यापार संगठन की व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में, उद्योगों के लिए "नया करो या खत्म हो जाओ" नई कहावत होगी। अत: उद्योग उपभोक्तावाद द्वारा तेज़ी से विशिष्ट गुणयुक्त होने वाले बाज़ार में गुणवत्ता के संदर्भ में तीक्ष्ण धार प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालयों के अनुभव और ज्ञान के विशाल भंडार का दोहन करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। उद्योग अपनी ओर से गुणवत्तापूर्ण संरचनाओं का विकास करने में और अपनी श्रमशक्ति संबंधी आवश्यकताओं के साथ विश्वविद्यालयों का संवेदीकरण करके शैक्षिक संस्थानों की सहायता करेंगे।
शैक्षिक संस्थानों और उद्योगों के मध्य सहक्रिया स्थापित करना
शैक्षिक संस्थानों और उद्योगों के मध्य संपर्कों को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित पहल की गई हैं:
- उद्योगों की आवश्यकतानुसार पाठ्यक्रम तैयार करना जिससे एक व्यक्ति समाज में उपयोगी योगदान दे सके।
- कुछ समय पश्चात् विशिष्ट क्षेत्रों के लिए विशेष पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। कुछ प्रमुख विचाराधीन पाठ्यक्रम निम्नलिखित हैं:
- पत्तन विकास और प्रबंधन
- नगरीय आयोजना और विकास
- समुद्री यांत्रिकी
- जल प्रबंधन
- खनन प्रबंधन
- अस्पताल प्रबंधन
- शिक्षा प्रबंधन
- पर्यटन संबंधी पाठ्यक्रम
- आपदा प्रबंधन
- समारोह प्रबंधन
- बायो-फार्मा
- उत्पाद डिज़ाइन प्रबंधन और वैश्विक महत्व के अन्य क्षेत्र।
औद्योगिक घरानों को शामिल करना
हाल ही के समय में, निजीकरण ने स्वयं को "संचालनों की दक्षता" में पथप्रदर्शक के रूप में स्थापित कर लिया है। गुजरात सरकार इस तथ्य को स्वीकार करती है और चूंकि सरकार अकेले ही गुणवत्तापूर्ण संरचनाओं का सृजन नहीं कर सकती तथा औद्योगिक घरानों की सहभागिता अनिवार्य है, अत: सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश की सुविधा के लिए कुछ उपाय प्रारंभ किए हैं।
शैक्षिक कांपलेक्सों की अवधारणा का संवर्धन
औद्योगिक संपदाओं की तर्ज़ पर और बहुसंख्या द्वारा उपयोग के लिए संसाधनों के दक्षतापूर्ण आवंटन के दर्शन को अपनाते हुए, सरकार ने पूरे राज्य में शैक्षिक कांपलेक्सों की स्थापना को प्रोत्साहित करने का निर्णय किया है। इन कांपलेक्सों में प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, इंजीनियरिंग वर्कशॉप, ड्राईंग हॉल, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं, सृजनात्मकता केंद्रों, प्रदर्शनी कक्षों, सभागार, मिनी थिएटरों, छात्रावासों, रेस्टोरेंटों, जिमखाना, कर्मचारियों के लिए आवास क्वार्टरों, परिवहन सुविधाओं जैसी और इसी प्रकार की अन्य सामान्य सुविधाएं होंगी। इस उद्देश्य के लिए, राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में एक स्थान का चयन किया जाएगा।
उत्पादकता में वृद्धि के लिए क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन उपाय
जैसाकि पहले उल्लेख किया गया है, राज्य में 56,000 सीटों की क्षमता वाले 219 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और अन्य व्यावसायिक संस्थान हैं। इसके साथ-साथ, उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत कामगारों के कौशल उन्नयन के लिए चार उन्नत व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोकैड, इंस्ट्रुमेंटेशन और इलैक्ट्रॉनिक्स कौशल के लिए संसाधन केंद्र के रूप में स्थापित एक उच्च प्रौद्योगिकीय प्रशिक्षण केंद्र भी कार्यरत है।
इस समय, गुजरात के अधिकांश औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र उन परंपरागत व्यवसायों में पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहे हैं जिनकी उद्योगों को 60 और 70 के दशक में आवश्यकता होती थी। तब से, गुजरात ने अपने औद्योगिक आधार को सफलतापूर्वक परिवर्तित कर लिया था और अब कुछ अनावश्यक पाठ्यक्रमों को बंद करने तथा वर्तमान उद्योगों की आवश्यकतानुसार नए व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। पुन:, ये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान केवल एक ही व्यवसाय में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं जिससे रोज़गार संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। इसलिए अब मैकेट्रॉनिक्स, डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग, रत्न-विज्ञान, उन्नत सूक्ष्म मशीन टूल्स के संचालन जैसे बहु-कौशलीय पाठ्यक्रमों जो हाल ही में डीजीईटी द्वारा प्रारंभ किए गए हैं, में प्रशिक्षण प्रारंभ करने पर विचार किया जा रहा है। अपनी आवश्यकताओं पर आधारित नए पाठ्यक्रमों को चिह्नित करने में सरकार की सहायता करने हेतु उद्योगों को आगे आना चाहिए और इन पाठ्यक्रमों के संचालन में तकनीकी ओर वित्तीय दोनों रूपों में सहभागिता भी करनी चाहिए।
सरकार की नीति एकनिष्ठ रूप से औद्योगिक क्लस्टरों के लिए उनकी मांग पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करने की भी है। सरकार स्थानीय उद्योग संघों के अध्यक्षों की अध्यक्षता वाली संस्थान प्रबंधन समितियों के माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के प्रबंध में उद्योग की साझेदारी चाहती है।
ये कुछ नई पहल और उद्देश्य हैं। इन्हें इनकी पूर्ण क्षमता तक वास्तविक रूप देने के लिए, क्षेत्रीय स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी जिनमें विश्वविद्यालयों के उप-कुलपति और उस क्षेत्र के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा निदेशालय और प्रशिक्षण एवं रोज़गार निदेशालय के प्रतिनिधि भी होंगे। यह समिति विशेष रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर विचार करेगी:
- तकनीकी और प्रबंधकीय कर्मचारियों के लिए निचले और मध्यम स्तर सहित विभिन्न स्तरों पर उद्योगों की श्रमशक्ति-संबंधी आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना।
- विभिन्न स्तरों पर श्रमशक्ति की आवश्यकताओं पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना।
- क्षेत्रीय स्तर पर शैक्षिक संस्थानों को उद्योगों की तकनीकी और प्रबंधकीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह उद्योगों को अनुसंधान एवं विकास सहायता भी प्रदान करेगा।
- उद्योग विद्यार्थियों के लिए कार्य के दौरान प्रशिक्षण की व्यवस्था करेंगे और उन्हें कार्य आवश्यकताओं के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए समिति द्वारा उपयुक्त प्रशिक्षण प्रतिरूप तैयार किए जाएंगे।
राज्य स्तर पर, माननीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता तथा सचिव (शिक्षा), सचिव (उद्योग) और विश्वविद्यालयों के उप-कुलपतियों वाली एक समिति राज्य स्तरीय समितियों के कार्यों पर दृष्टि रखेगी और आवश्यकतानुसार हस्तक्षेप करेगी।
कुल मिलाकर यह अनुभव किया गया है कि विश्वविद्यालयों और उद्योगों के मध्य संपर्कों के इस गठजोड़ के सुदृढ़ीकरण की यह पहल अंतत: भविष्य के लिए अधिक समृद्ध और गतिमान पीढ़ी के सृजन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए राज्य को एक नए युग में ले जाएगी।
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