श्रम सुधार
सरकार दृढ़ता से अनुभव करती है कि संकल्पना प्राप्ति के लिए विभिन्न स्तरों पर कुशल श्रमशक्ति की उपलब्धता और एक अनुकूल वैधानिक ढांचा दोनों के संदर्भ में एक प्रेरक श्रम वातावरण का होना अत्यंत आवश्यक है।
गुजरात सरकार इस तथ्य को भी स्वीकार करती है कि नियम, विनियम और प्रक्रियाए उपयुक्त रूप से सही दिशा में प्रयास करने के लिए दिशानिर्देशों के रूप में हों और ये किसी भी रूप में औद्योगिक विकास में बाधा डालने वाले औज़ार नहीं होने चाहिए। इसलिए, विद्यमान नियमों की समीक्षा और सरलीकरण की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। निरीक्षण प्रणाली में अधिक पारदर्शिता की दृष्टि से और उद्यमियों को व्यापार संबंधी प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाने हेतु स्व-प्रमाणन प्रणाली का समर्थन करते हुए एक साहसी कदम उठाया गया है। बेरोज़गारी के मुद्दे पर बात किए बिना श्रम सुधार प्रक्रिया अधूरी रहेगी। इसलिए सरकार निजी रोज़गार एक्सचेंज को प्रेरित करने की योजना भी बना रही है।
नियमों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण
सरकार श्रम कानूनों में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है। जहां तक बीआरयू अधिनियम, बीआईआर अधिनियम, बम्बई दुकानें और स्थापनाएं अधिनियम आदि जैसे राज्य श्रम कानूनों का संबंध है, परिवर्तनशील वातावरण में इन अधिनियमों के औचित्य का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। श्रम विभाग स्वयं भी पहले ही अनेक प्रावधानों में संशोधन करने पर विचार कर रहा है।
विकास दौरे
श्रम विभाग पहले ही अपने नियंत्रणाधीन निरीक्षकों यथा श्रम अधिकारी, कारखाना निरीक्षक, बॉयलर निरीक्षक, रोज़गार अधिकारी, प्रशिक्षु सलाहकार आदि द्वारा किए जाने वाले सभी निरीक्षणों को तर्कसंगत बनाने का कार्य प्रारंभ कर चुका है। श्रम और रोज़गार विभाग ने अपने सकल संसाधनों के भीतर सहकार्य के मार्ग खोजने के लिए अपने नियंत्रणाधीन सभी प्रभागों की गतिविधियों पर सम्मेलनों की एक श्रृंखला भी आयोजित की है। अपने उत्तरदायित्व के दायरे में विभिन्न कानूनों के प्रवर्तन के लिए प्रत्येक प्रभाग द्वारा अलग-अलग कार्रवाई करने के बजाय, विभाग का संपूर्ण प्रतिनिधित्व करने के लिए सभी नियामक और गैर-नियामक प्रभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संयुक्त टीमें बनाने का निर्णय किया गया है। इन टीमों के दौरों को विकास दौरे कहा जाता है जिसमें सभी प्रभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम विभिन्न इकाइयों का दौरा करेगी। इसमें भाग लेने वाले अधिकारियों में स्थानीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य, रोज़गार अधिकारी, प्रशिक्षु सलाहकार, कारखाना निरीक्षक, श्रम अधिकारी और बॉयलर निरीक्षक होंगे। इससे औद्योगिक इकाइयों को इनमें से प्रत्येक से अलग-अलग निपटने में होने वाली असुविधा में कमी आएगी। पारदर्शिता के लिए, वर्ष में केवल एक बार होने वाले दौरे की योजना का निर्णय स्थानीय वाणिज्य और उद्योग चैंबर के परामर्श से श्रम आयुक्तालय और रोज़गार एवं प्रशिक्षण निदेशालय के क्षेत्रीय प्रमुखों द्वारा किया जाएगा। दौरे का उद्देश्य आक्रामक निरीक्षण नहीं है अपितु इस सूचना का आदान-प्रदान करना कि स्थानीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के पास उद्योग को प्रस्तुत करने के लिए क्या है, रोज़गार अभ्यर्थियों के उपलब्ध ऑनलाइन डाटाबेस तक नि:शुल्क पहुंच को लोकप्रिय बनाना, आवंटित प्रशिक्षु सीटों के उपयोग के लिए इकाइयों को प्रेरित करना, एवीटीसी और एचटीटीसी में इकाइयों के श्रमिकों को उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करना, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षार्थियों के लिए अंत:संयंत्र प्रशिक्षण की व्यवस्था करना, श्रम कानूनों के अनुपालन संबंधी दिशानिर्देश आदि प्रदान करना है। यदि श्रम कानूनों का उल्लंघन अनजाने में हुआ है तो विभाग उनसे अनुपालन भी कराएगा, किंतु जानबूझकर उल्लंघन के मामले में कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। यद्यपि औद्योगिक सुरक्षा संबंधी कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाएगा क्योंकि किन्हीं संभावित औद्योगिक दुर्घटनाओं के शमन के लिए कोई छूट नहीं दी जा सकती है। इस प्रकार श्रम और रोज़गार विभाग के अधिकारी मित्रों और पथप्रदर्शकों के रूप में इकाइयों का दौरा करेंगे।
वार्षिक समेकित रिटर्न
उद्योगों से बार-बार प्राप्त होने वाली शिकायतों में से एक ढेर सारे कानूनी प्रावधानों और रिटर्न भरने की अनुपालना की आवश्यकता है। श्रम विभाग ने एक वार्षिक समेकित रिटर्न भरना निर्धारित किया है। यह पिछले एक वर्ष से लागू है। सरकार निरीक्षण नीति को तर्कसंगत बनाने पर सहमत है। श्रम कानूनों के कार्यान्वयन की लागत वहन करने के लिए बहुत बड़ी इकाइयों के पास आवश्यक संसाधन हैं। इसलिए बड़ी इकाइयों का वर्ष में केवल एक बार दौरा किया जा सकता है और उनकी वार्षिक समेकित रिटर्न ही पर्याप्त होनी चाहिए। जहां तक लघु और मध्यम उद्यमों का संबंध है, भारत सरकार ने स्व-प्रमाणन की एक धारा के साथ पहले ही एक विधेयक परिचालित कर दिया है। लघु और मध्यम उद्यमों के संबंध में भी सरकार वर्ष में केवल एक बार निरीक्षण की योजना बना रही है।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों में श्रम कानूनों में छूट
गुजरात सरकार ने हाल ही में विशेष आर्थिक क्षेत्रों और औद्योगिक पार्कों की स्थापना के लिए एक अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार, औद्योगिक विवाद अधिनियम के अनुच्छेदों 5(क), 5(ख), 5(ग) और 5(घ) के अंतर्गत श्रम कानूनों के अनुपालन में कुछ छूट दी गई हैं। औद्योगिक इकाइयों और पार्कों जो अपने श्रमिकों के लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करेंगे और इन अनुच्छेदों के अन्य प्रावधानों का ध्यान भी रखेंगे, को स्व-प्रमाणन के आधार पर श्रम विभाग की आवश्यकताओं के अनुसार रिटर्न दाखिल करने से छूट दी जाएगी।
प्रस्तावित अन्य नवीन कदम
सरकार कुछ नवीन कदम उठाने पर भी विचार कर रही है, जैसे:
- प्रत्येक एस्टेट में, एक पैनल रखा जाएगा जिस पर इकाइयां श्रमिकों के लिए अपनी आवश्यकताओं को चिपका सकती हैं। बोर्ड पर अपनी आवश्यकताओं को चिपकाने की इच्छुक इकाई को बोर्ड पर अपनी उपस्थिति को अधिकतम सात दिनों की अवधि की अनुमति दी जाएगी। यह नई पहल विभिन्न किस्म के कौशलों वाले श्रमिकों के एक पूल और विशिष्ट प्रकार के कौशल वाले श्रमिकों को नियुक्त करने की इच्छुक इकाइयों को निकट लाने में सहायता करेगी।
- रोज़गार और प्रशिक्षण निदेशालय उद्योगों से उनकी श्रमशक्ति संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी एकत्र कर रहा है और इसे उनकी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाता है। बेरोज़गार युवाओं द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण की एक प्रणाली भी कार्यरत है।
- बॉयलर की तकनीकी विशिष्टताओं पर निर्भर करते हुए, दौरों की आवृत्ति को वर्ष में एक बार से घटाकर चार वर्षों में एक बार करने के लिए बॉयलर अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।
- सरकार मानती है कि आउटसोर्सिंग वैश्विक व्यापार गतिविधि का एक अभिन्न अंग बन गई है। लागत प्रभावी प्रबंध को सुविधाजनक बनाने के लिए, अनुबंध अधिनियम के उदार प्रवर्तन के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर विचार किया जाएगा।
स्व-प्रमाणन: इंस्पेक्टर राज की समाप्ति की दिशा में एक कदम
विभिन्न कानूनों और संवैधानिकताओं के अंतर्गत वैयक्तिक औद्योगिक इकाइयों द्वारा वांछित सभी तकनीकी मानदंडों के लिए स्व-प्रमाणन की अवधारणा को प्रारंभ किया जाएगा। कानून के विभिन्न प्रावधानों के लिए विभिन्न प्रकार के निरीक्षणों से उद्योगपतियों को बचाने के लिए, एक एकल व्यवसाय अधिनियम बनाने पर विचार किया जाएगा। इस एकल व्यवसाय अधिनियम में उद्योगों से संबंधित लगभग सभी आधारभूत कानूनों के सार को एक छत्र के अंतर्गत परिवृत करने का विचार है। इस उद्देश्य के लिए, कानून की आवश्यकतानुसार विशेष इकाइयों के निरीक्षण और आवश्यक प्रमाणपत्र जारी करने का कार्य करने हेतु संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञों सहित निजी एजेंसियों के एक पूल को मान्यता प्रदान की जाएगी। यद्यपि, विभिन्न विभागों के सरकारी निरीक्षकों की एक संयुक्त टीम वर्ष में केवल एक बार ही इकाई का निरीक्षण करेगी। गड़बड़ी करने वालों के साथ-साथ झूठे प्रमाणपत्र जारी करने वाली मान्यताप्राप्त एजेंसियों को लाइसेंस निरस्त करने सहित कड़े दंड दिए जाएंगे। स्व-प्रमाणन की प्रणाली सरकार और उद्योग दोनों के लिए सुखद स्थिति होगी क्योंकि यह सरकार के लिए प्रणाली में पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगी और उद्योग के लिए यह उपयुक्त समयांतरालों पर पेशेवर निरीक्षण संव्यवहारों का मामला होगा। इस अवधारणा को समयबद्ध रूप में कार्यान्वित करने के लिए माननीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति गठित की जाएगी।
उपरोक्त का संक्षिप्तिकरण करते हुए, उद्योगों का आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निम्नलिखित नई पहलें सरकार के विचाराधीन हैं:
क. नियमों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण के लिए एकल व्यवसाय अधिनियम लाना।
ख. स्व-प्रमाणन की अवधारणा और मान्यताप्राप्त परामर्शदाताओं द्वारा लेखापरीक्षा सिद्धांत को प्रारंभ करना तथा जानबूझकर उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान/
ग. सरकारी अधिकारियों द्वारा वर्ष में एक बार केवल एक समेकित दौरा जिन्हें इकाई के कार्य के पैमाने के आधार पर चिह्नित किया जाएगा।
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