कृषि प्रसंस्करण उद्योग
यह एक स्पष्ट और सर्वसम्मत स्वीकारोक्ति है कि गुजरात राज्य देश के सर्वाधिक औद्योगीकृत राज्यों में से एक है। कृषि उत्पादन और कृषि उत्पादों के प्रबंध में भी राज्य देश में अग्रणी के रूप में अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए अपनी गति को बढ़ा रहा है। इस क्षेत्र में अत्यधिक विविधिकृत कृषक समुदाय के साथ सुदृढ़ आधार है जो कृषि संबंधी प्रौद्योगिकियों और कार्यों में परिवर्तनों के प्रति उत्तरदायी है। राज्य में हवाई अड्डों, समुद्री बंदरगाहों और विस्तृत सड़क तथा रेल तंत्र जैसी शानदार संभारतंत्रीय संरचनाओं जैसी अन्य सुदृढ़ताएं हैं।
राज्य इस तथ्य को स्वीकार करता है कि हमारे समाज का एक बड़ा वर्ग इस क्षेत्र से अपनी जीविकोपार्जन करता है और यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में एक तृतीयक की भूमिका निभाता है। लाभ के लिए यह शानदार संभावनाएं प्रस्तुत करता है। राज्य में उत्पादित होने वाली प्रमुख फसलों में चावल, गेहूं, मक्का, तैलीय बीज, रुई, सब्जियां और मसाले शामिल हैं। बागवानी में केला, आम, चीकू और पपीता बहुतायत में उगाया जाता है। वास्तव में, गुजरात का केला उत्पादन में तीसरा, आम उत्पादन में छठा, पपीता और चीकू उत्पादन में दूसरा स्थान है।
एक पूर्णतावादी नीति अपनाकर, विद्यमान संभारतंत्रीय ढांचे और प्रसंस्करण श्रृंखला में अपना स्थान बनाते हुए अधिकाधिक कृषि-क्षेत्र के उत्पादन को सुनिश्चित करके आधुनिक तकनीकों और उपकरणों का प्रयोग करते हुए सरकार ने गुजरात के विद्यमान कृषि आधार को सुदृढ़ बनाने का निर्णय किया है। सरकार विश्व बाज़ारों में कृषि-आधारित लघु इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुधारने और मूल्य वर्धित कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में सहायता प्रदान करते हुए एक विश्वस्तरीय आपूर्ति श्रृंखला बनाने, कृषि उद्योगों के विकास के लिए महतवपूर्ण संरचनाओं का संवर्धन एवं अनुसंधान, विस्तार और उद्योगों सहित कृषि क्षेत्र के कृषकों के मध्य निकटतम संवाद सुनिश्चित करने का प्रयास भी करेगी। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर इस तथ्य के प्रकाश में कि सरदार सरोवर नर्मदा परियोजना पूरी होने के करीब है और नहरों, पाइपलाइनों तथा नदियों के व्यापक जाल के माध्यम से नर्मदा का पानी कच्छ सहित राज्य के विभिन्न भागों में बहना प्रारंभ हो गया है। पूरी हो जाने पर यह परियोजना 1.8 मिलियन हैक्टेयर भूमि की सिंचाई करेगी जो हरे सोने के माध्यम से संपन्नता के एक नए युग को प्रारंभ करने के लिए कृषि क्षेत्र के विकास को जबरदस्त गति देगी।
सरकार की भूमिका
गुजरात कृषि उद्योग नीति 2000 में प्रतिज्ञापित निम्नलिखित वित्तीय और गैर-वित्तीय योजनाएं जारी रहेंगी:
- कृषि औद्योगिक इकाइयों और कृषि संरचना परियोजनाओं को ब्याज सब्सिडी
- परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए सहायता
- उत्कृष्टता केंद्र/विशिष्ट फसल विकास संस्थान की स्थापना के लिए सहायता
- गुणवत्ता प्रमाणन और पेटेंट पंजीकरण के लिए सहायता
- हवाई मालभाड़े में सब्सिडी
- अनुसंधान एवं विकास के लिए सहायता
- संयुक्त क्षेत्र की परियोजनाओं में इक्विटी सहभागिता
भूमि
राज्य सरकार उत्कृष्टता केंद्रों सहित कृषि उद्योगों और कृषि संरचना परियोजनाओं को रियायती दरों पर दीर्घावधि पट्टा आधार पर कृषि फार्मों सहित सरकारी भूमि प्रदान करेगी।
जोखिम पूंजी फंड
जिन भावी उद्यमियों ने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, बागवानी, एक्वाकल्चर, रेशम कीट-पालन, उच्च प्रौद्योगिकीय कृषि और ऐसी ही अन्य कृषि आधारित परियोजनाओं में अद्वितीय प्रौद्योगिकियां विकसित अथवा अधिग्रहीत की हैं, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक जोखिम फंड की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, राज्य सरकार वित्तीय संस्थानों/बैंकों आदि के सहयोग से कृषि उद्योगों के लिए एक जोखिम फंड सृजित करेगी।
महत्वपूर्ण पहल
- आगामी पांच वर्षों में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण को दुगना करना: कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में निरंतरता के संदर्भ में तेजी से व्यवसायीकृत होते जा रहे कृषि बाज़ारों सहित वैश्विक बाज़ारों के साथ, यह सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता अनुभव की जा रही है कि अधिकाधिक कृषि उत्पादन प्रसंस्करण श्रृंखला से गुजरें। यह उत्पादों की दीर्घजीविता को सुनिश्चित करेगा जो विशेष रूप से जल्दी खराब हो जाने वाले खाद्यों के लिए अनिवार्य है। इस प्रकार राज्य आगामी पांच वर्षों के समय में प्रसंस्करण श्रृंखला से गुजरने वाले खाद्यों के वर्तमान स्तर जो इस समय लगभग 1 प्रतिशत है, की संख्या को दुगना करने का प्रयास करेगा।
- दाहेज और हज़ीरा में एलएनजी की शीत ऊर्जा का प्रयोग करके अंतरराष्ट्रीय मानकों के खाद्य पार्कों की स्थापना करना: सरकार विशेष रूप से खाद्य पार्क के लाभ के लिए और क्षेत्र के कृषक समुदाय के व्यापक लाभ के लिए दाहेज और हज़ीरा में एलएनजी के पुन:गैसीयकरण से सृजित "शीत ऊर्जा" के प्रयोग की संभावनाएं खोजने की प्रक्रिया में है। इसलिए इन दोनों स्थानों पर खाद्य पार्कों की स्थापना का प्रस्ताव है।
- कृषि निर्यात क्षेत्रों की घोषणा: पेरीशेबल कार्गो परियोजना के लिए कृषि उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा स्वीकृत प्याज, आम और अन्य सब्जियों सहित 12 उत्पादों के लिए कृषि निर्यात: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने हेतु गुजरात के कृषि उत्पादों को गति प्रदान करने के लिए, राज्य कृषि निर्यात क्षेत्रों की घोषणा करने का प्रस्ताव करता है। प्रारंभ में, प्याज, आम और कुछ अन्य सब्जियों सहित पेरीशेबल कार्गो परियोजना के लिए एपीडा द्वारा स्वीकृत 12 उत्पादों को संवेग प्रदान किया जाएगा।
- पश्चगामी और अग्रगामी संपर्क: सरकार स्वीकार करती है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए प्रभावी और दक्षतापूर्ण पश्चगामी तथा अग्रगामी संपर्क महत्वपूर्ण विभेदकारी कारक हो सकते हैं। इसलिए राज्य प्रमाणित बीज वितरण, उपज पूर्व और पश्चात प्रबंध प्रणालियों, प्रशीतन-श्रृंखला संपर्कों सहित उपज पश्चात सुविधाओं जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन देगा। ये उपाय लागतों को कम करने, डिलीवरी समय में संगतता और उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के क्रम में एक संगठन को लाभ प्रदान करेंगे।
- गुणवत्ता प्रणाली को प्रारंभ करना: जैसाकि नीति के पहले भाग में उल्लेख किया गया है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता का सर्वाधिक महत्व है। अच्छी कृषि प्रणालियों, बेहतर स्वास्थ्यकर और स्वच्छता प्रणालियों तथा आपद् विश्लेशण व क्रांतिक नियंत्रण बिंदुओं जैसी महत्वपूर्ण पहलों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- मूंगफली, चीनी, चावल और अन्य बागवानी उत्पादों की ऑर्गेनिक फार्मिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- जैव ईंधन: गुजरात में औद्योगीकरण अभियान के कारण, ईंधन की मांग में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है। पुन: उपयोग न किए जा सकने वाले ईंधन की उपलब्धता में अनुभव की गई कमी और बढ़ती लागतों के दृष्टिगत, सरकार ने जैव ईंधन के रूप में ऊर्जा के कृषि आधारित नवीकरण-योग्य स्रोतों को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है।
- विदेशों में प्रदर्शनियों में सहभागिता और गुजरात के कृषि उत्पादों के लिए एक ब्रांड छवि सृजित करना: चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार क्रेताओं और विक्रेताओं के एक विस्तृत फलक को एक साथ ले आया है, अत: आज के समय में विपणन और संवर्धन एक महत्वपूर्ण पक्ष बन गया है। इस बिंदु पर विपणन विकास और संवर्धन के अगले अध्याय में विस्तृत चर्चा की गई है।
- कृषि उत्पादक विपणन समिति का नवीकरण करना: बाज़ार और किसानों के मध्य एक संवाद-मंच के रूप में कृषि उत्पादक विपणन समितियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। बेहतर प्रबंधन प्रणालियों के साथ आधुनिक प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग करने का प्रस्ताव किया जाता है। निम्नलिखित नई शुरूआतों की योजना बनाई गई है:
- मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंजों के साथ संपर्क स्थापित करके वर्तमान व्यवस्था का उन्नयन किया जाएगा।
- कृषि उत्पादों के लिए भावी बाज़ार को पुन: सुदृढ़ किया जाएगा।
- किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सक्षम बनाने हेतु, स्थानांतरण श्रृंखला को प्रत्यक्ष बनाकर मध्यस्थों को हटाने के लिए बेहतर प्रबंध व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
- ई-कॉमर्स के माध्यम से लेनदेन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- सरकार आदर्श कृषि उत्पादक विपणन समितियों के सृजन का प्रयास करेगी जो राज्य में अन्य कृषि उत्पादक विपणन समितियों के प्रेरणा स्रोत के रूप में कार्य करेंगी।
- कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और कृषकों के मध्य प्रभावी और निरंतर संपर्क: आगामी वर्षों में राज्य के कृषि क्षेत्र का भाग्य चमकाने में अनुसंधान एवं विकास निस्संदेह एक प्रमुख भूमिका निभाएंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य हरसंभव स्तर पर हस्तक्षेप करेगा कि कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और कृषकों के मध्य सुदृढ़ संपर्क हों और वे राज्य में हरे सोने के लाभदायक उपयोग के हित में मिलकर कार्य करें।
विशेष क्षेत्रों पर संवेग
जहां तक गुजरात का संबंध है, सरकार ने दो विशिष्ट कृषि उत्पादों की वैश्चिक संदर्भ में रणनीतिक तुलनात्मक अग्रताओं के दृष्टिगत तत्काल ध्यान केंद्रित करने का निर्णय किया है। इस उद्देश्य के लिए, सरकार एक मिशन मोड एप्रोच को अपनाने का प्रस्ताव करती है। इस परियोजना के संचालन के लिए प्रत्येक उत्पाद हेतु एक कोर ग्रुप का गठन किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए निम्नलिखित उत्पादों को लिया जाएगा:
- अरंडी का बीज
विश्व और भारत में अरंडी के बीजों के उत्पादन के लगभग 67 प्रतिशत का योगदान गुजरात द्वारा किया जाता है। गुजरात का योगदान 82 प्रतिशत जितना उच्च होता है। पूरे विश्व में, लगभग 140 वस्तुओं को अरंडी के बीजों के आधार पर विकसित किया जाता है। आगामी पांच वर्षों में गुजरात में ऐसी न्यूनतम 50 वस्तुओं के विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- ईसबगोल की भूसी
जहां तक ईसबगोल की भूसी का संबंध है, गुजरात विश्व उत्पादन के 35 प्रतिशत का योगदान करता है। इस उत्पाद के मामले में, यह पाया गया है कि फर्मास्युटिकल/दवा संरचनाओं, कब्ज़ से संबंधित रोगों के उपचार, खाद्य और पेयपदार्थ बनाने आदि में इसके प्रयोगों पर विदेशी कंपनियों द्वारा बहुत बड़ी संख्या में पेटेंटों का दावा किया जा रहा है। यह अनुभव किया जा रहा है कि इन उत्पादों (विदेशी कंपनियों द्वारा मामूली परिवर्तन करके विकसित किए गए) की बड़ी संख्या को सरलता से गुजरात में विकसित किया जा सकता है और कुछ मामलों जहां पहले ही पेटेंट प्रदान कर दिए गए हैं, में विद्यमान पूर्व कला अर्थात् जनसमुदाय में पहले ही प्रचलित ज्ञान और संव्यवहार के कारण चुनौती दी जानी चाहिए। एक उपयुक्त अनुसंधान नीति/तंत्र भी विकसित किया जाएगा ताकि ईसबगोल के निर्यात के माध्यम से सृजित धन के एक विशिष्ट भाग का बौद्धिक संपदा अधिकारों के सृजन और सुरक्षा में निवेश किया जा सके।
उच्च-प्रौद्योगिकीय कृषि से संबंधित कृषि प्रसंस्करण उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
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