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गुजरात

लघु और मध्यम उद्यम

वर्षों से गुजरात को उद्यमों की भूमि के रूप में जाना जाता है। उद्यमिता की इसी भावना ने राज्य में अनेक लघु और मध्यम उद्योगों द्वारा विशेषीकृत किए गए एक क्षेत्र के उभरने की प्रक्रिया का संचालन किया है। किसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में लघु उद्योगों का योगदान प्रमुख होता है। उनके द्वारा अपनाई गई निवेश और प्रौद्योगिकी की प्रकृति को देखते हुए, वे रोज़गार अवसरों के लिए व्यापक संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं और इस प्रकार देश में बेरोज़गारी की प्रमुख समस्या के निवारण में सहायता करते हैं। न्यूनतम खर्चों के साथ इकाइयों को चलाने के उद्यमियों के तकनीकी कौशलों और क्षमताओं के संदर्भ में उनकी व्यावसायिक प्रखरता के कारण लंबी समयावधि के बाद यह क्षेत्र परिपक्व हो गया है। यद्यपि, भारतीय अर्थव्यवस्था की धीरे-धीरे वैश्विक वातावरण के साथ बन रही सापेक्षता के साथ ही, अब क्षमता निर्माण, संरचनात्मक सहायता, वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी उन्नयन, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों, गुणवत्ता उन्नयन, बाज़ार पहुंच जैसी आवश्यकताओं के संदर्भ में लघु और मध्यम क्षेत्र की इकाइयों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता अनुभव की जा रही है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धी अग्रताएं प्राप्त करने में सक्षम बन सकें।

क्लस्टर विकास अभिगम

बहुत बड़ी संख्या में लघु और मध्यम उद्योगों में निहित 76 चिह्नित निर्माण क्षेत्रों की सुदृढ़ उपस्थिति राज्य के लिए एक मज़बूत निर्माण आधार प्रदान करती है। इन क्षेत्रों में से प्रत्येक राज्य भर में फैले हुए क्लस्टरों में स्थित है। वैश्विकरण और उदारीकरण की बढ़ती सीमाओं के साथ, जब मानक और गुणवत्ता की अर्थव्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आधिपत्यपूर्ण भूमिका निभाएंगी, तब ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए राज्य के उद्योगों का सशक्तीकरण वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है। इसलिए चुनौतियों का सामना करने में क्लस्टरों के सशक्तीकरण के लिए क्लस्टर विकास अभिगम एक महत्वपूर्ण पहल है।

इसलिए सरकार ने चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने हेतु राज्य के विद्यमान क्लस्टरों के सुदृढ़ीकरण की योजना बनाई है। एक क्लस्टर को एक जैसे और मानार्थ उत्पादों का निर्माण करने वाले उद्योगों के समूह के रूप में परिभाषित किया जाएगा। सरकार ने एक विशेष स्थान पर 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित न्यूनतम 50 इकाइयों की क्रांतिक संख्या को एक क्लस्टर के रूप में मान्तया देने का निर्णय किया है। प्रबंधकीय और तकनीकी सक्षमता, आकार और उद्योग की प्रकृति के संदर्भ में कुछ क्षेत्रों में सरकार द्वारा 50 इकाइयों की संख्या में छूट दी जा सकती है। सरकार का लक्ष्य सुदृढ़ीकरण गतिविधियां प्रारंभ करने के लिए आवश्यकता-आधारित वित्तीय सहायता प्रदान करके क्लस्टरों को सशक्त बनाना है। इस उद्देश्य के लिए, मान्यताप्राप्त मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा तकनीकी और प्रबंधकीय क्षमता, परिपक्वता स्तर, प्रशासनिक ढांचे, पिछले ट्रैक रेकॉर्ड, संचालनों में पारदर्शिता आदि के संबंध में वैयक्तिक क्लस्टरों का मूल्यांकन किया जाएगा। वित्तीय सहायता की मात्रा का निर्णय श्रेणीकरण के आधार पर किया जाएगा। यह सहायता सामान्य संरचनात्मक सुविधाओं के उन्नयन/सृजन के अलावा उत्पाद डिज़ाइन और प्रौद्योगिकी दोनों के उन्नयन, गुणवत्ता सुधार, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों, समान ब्रांडिंग और विपणन सुविधाओं, पुस्तकालय, परीक्षण और प्रमाणन प्रयोगशालाओं, टूल रूम जैसी सामान्य सुविधाओं, सौम्य कौशल विकास, कौशल विकास और उत्पादकता के संबंध में श्रमिकों और पर्यवेक्षकों के लिए क्षमता निर्माण आदि में क्लस्टरों की सहायता के उद्देश्य से दी जाएगी। चिह्नित क्लस्टरों को सरकार की विद्यमान योजनाओं से सहायता प्रदान की जाएगी। सहायता के लिए विस्तृत दिशानिर्देश अलग से तैयार किए जाएंगे।

यदि क्लस्टर संघ सामान्य विद्युत संयंत्र अथवा सामान्य बहिस्राव उपचार संयंत्र अथवा अपशिष्ट चक्रण संयंत्र की स्थापना करते हैं तो सरकार ने उन्हें प्रथम पांच वर्षों की अवधि के लिए विद्युत शुल्क में छूट के रूप में रियायतें प्रदान करने का भी निर्णय किया है।

क्लस्टरों में सामान्य सुविधा केंद्रों का विकास करना

मूल्य संवर्धन और रोज़गार सृजन दोनों के संबंध में लघु उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख योगदानकर्ता सिद्ध हुए हैं, और इसीलिए उनके महत्व को कम नहीं कहा जा सकता है। यद्यपि, सरकार अनुभव करती है कि आने वाले वर्षों में लघु उद्योगों की उत्तरजीविता और समृद्धि के लिए, "समेकन" प्रमुख होगा। विषमताओं को अवसरों में परिवर्तित करने में सक्षम बनाने हेतु विद्यमान क्लस्टरों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में संबंधित क्लस्टर संघों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। निम्नलिखित गतिविधियां प्रारंभ करने के लिए संघों को प्रोत्साहित किया जाएगा:

  • अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं जैसी सामान्य सुविधाओं का सृजन जिसका लाभ सभी सहभागियों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। उन्नत प्रौद्योगिकी और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद डिज़ाइन लघु उद्योग इकाइयों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रवेश हेतु अर्हता होंगे और इस संदर्भ में संघ अपनी सदस्य इकाइयों की आवधिक समीक्षा करेंगे।


  • क्लस्टर संघ सरकारी फंड की सहायता से प्रौद्योगिकी उन्नयन में अनुसंधान एवं विकास संस्थानों को सम्मिलित करते हुए सदस्य इकाइयों की सहायता भी करेंगे।


  • ये संघ बैंक वित्त प्राप्त करने में अपनी सदस्य इकाइयों की सहायता करेंगे और उसी समय कर्ज़ की वसूली के लिए बैंकों की भी सहायता करेंगे।


  • सरकार प्रतिस्पर्धी लागत पर वित्त प्राप्त करने में सदस्य इकाइयों को सक्षम बनाने के लिए सहकारी बैंकों की स्थापना में भी क्लस्टर संघों की सहायता करेगी। इस उद्देश्य के लिए, सरकार संचालनों की सुचारू निगरानी और विनियमन, मानव संसाधन विकास और निधियों की व्यवस्था को सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक हस्तक्षेप प्रदान करेगी।


  • संघ नए बाज़ार खोजने में भी इकाइयों की सहायता करेंगे। इस उद्देश्य के लिए, वे अन्य बाज़ारों में उनके क्लस्टर उत्पादों के लिए उपलब्ध अवसरों का एक विस्तृत सूचना बैंक रखेंगे और अपनी सदस्य इकाइयों के विद्यमान बाज़ारों के सुदृढ़ीकरण के लिए भी रणनीतियां तैयार करने का प्रयास करेंगे। यदि सरकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता है तो वे सरकार को अभ्यावेदन देंगे।


  • ये संघ ब्रांड विकास और विपणन निधि के माध्यम से समान ब्रांडिंग और विपणन को प्रोत्साहन देंगे। सरकार इस पहलू को अत्यंत महत्वपूर्ण मानती है क्योंकि यह इकाइयों को एक निश्चित दिशा में अपने प्रयास करने में सक्षम बनाएगा और साथ ही गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के शीर्ष उत्पादक के रूप में गुजरात की छवि बनाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ करेगा।


  • स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिए क्लस्टर संघ एक अभियान प्रारंभ करेंगे। इस उद्देश्य के लिए, प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों पर प्रशिक्षण सहित परामर्श और मार्गदर्शन हेतु सूचना प्रदान करने के लिए व्यवस्था की जाएगी।
  • ये क्लस्टर संघ सदस्य इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों के लिए उत्पादकता उन्नयन सहित क्षमता विस्तार कार्यक्रमों के लिए भी व्यवस्था करेंगे।


  • क्लस्टर संघ ऊर्जा और जल स्रोतों के संरक्षण के उद्देश्य के लिए इनके उपभोग की समीक्षा करने हेतु भी सदस्य इकाइयों को प्रेरित करेंगे। इसके लिए, संचालन स्थितियों में परिवर्तन के लिए प्रक्रिया डिज़ाइन में मामूली संशोधन के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता उपकरणों के प्रयोग के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा।


  • क्लस्टर संघ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों में सामूहिक सहभागिता के लिए व्यवस्था कर सकते हैं।


लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र

उपरोक्त क्लस्टर विकास अभिगम के अतिरिक्त, विद्यमान लघु और मध्यम उद्यम इकाइयों के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण है। यद्यपि, ऐसी सहायता इस प्रकार दी जानी चाहिए कि प्रबंधकीय और वित्तीय रूप से सुदृढ़ अच्छी और स्वस्थ इकाई निष्पादन की मान्यता द्वारा प्रोत्साहित अनुभव करे। वास्तविक रूप में रुग्ण और कमज़ोर इकाइयों की भी सहायता की जानी चाहिए। ऋण और निष्पादन मूल्यांकन की एक अवधारणा से सरकार ऐसी इकाइयों की सहायता कर पाएगी। यह अवधारणा इकाई को भी उपयुक्त ब्याज दरों पर ऋण लेने के लिए मनी मार्केट से संपर्क करने में सक्षम बना देगी। बैंकिंग संस्थानों और रुग्ण राज्य वित्त निगमों द्वारा लघु उद्योगों की सामान्यत: उपेक्षा की भावना के कारण यह बहुत ही उपयोगी होगी।

प्रौद्योगिकी उन्नयन हेतु सहायता

आने वाले वर्षों में, किसी उद्योग में निर्माण क्षेत्र पर प्रौद्योगिकी का स्वामित्व होगा। अंतत: लागत प्रभावी रूप में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने की योग्यता से सुसज्जित उन्नत प्रौद्योगिकी वाले उद्योगों को ही अग्रता प्राप्त होगी। जबकि आज विश्व में "प्रौद्योगिकी परिवर्तन" की प्रक्रिया एक अनियंत्रित प्रक्रिया बन गई है, यह अत्यंत अनिवार्य है कि उद्योग प्रौद्योगिकी में तीव्रता से परिवर्तन की गति को बनाए रखने, उन्हें चिह्नित करने और जो उनकी व्यवस्था के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हो, उसे अपनाने का प्रयास करें। सरकार इस तथ्य को स्वीकार करती है और इसीलिए, सरकार ने अपनी विद्यमान प्रौद्योगिकी के उन्नयन की दिशा में सोचने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इस उद्देश्य के लिए सरकार ने लघु और मध्यम क्षेत्र की इकाइयों को प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए स्थापित किए जाने के लिए आवश्यक सभी पूंजीगत उपकरणों की खरीद पर 5 वर्षों की अवधि के लिए 3 प्रतिशत की दर से ब्याज सब्सिडी, जो प्रतिवर्ष अधिकतम 3 लाख रुपए के अध्यधीन होगी, प्रदान करने की योजना प्रारंभ करने का निश्चय किया है।

प्रौद्योगिकी अधिग्रहण और पेटेंट ट्रैकिंग फंड

प्रौद्योगिकी अधिग्रहण: प्रौद्योगिकी का अधिग्रहण भी एक जटिल प्रक्रिया है। संभवत: वैयक्तिक लघु उद्योग इकाइयों के लिए अपने बल पर प्रौद्योगिकी का अधिग्रहण संभव न हो। इसलिए सरकार उद्योग आयुक्तालय में एक प्रशासनिक व्यवस्था सृजित करने पर विचार कर रही है जिसमें उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के स्रोत, मूल्यांकन और अधिग्रहण के लिए प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ होंगे। इस उद्देश्य के लिए सरकार ने एक प्रारंभिक आवृत्ति निधि स्थापित करने का निर्णय किया है। यह प्रशासनिक व्यवस्था प्रौद्योगिकी प्राप्त करेगी और उपयुक्त मूल्य पर वैयक्तिक इकाइयों को इसका हस्तांतरण करेगी। इसमें वे प्रौद्योगिकियां भी सम्मिलित होंगी जो उत्पादक प्रकृति की हैं और जो मुख्यत: लघु उद्योग इकाइयों के लिए ड्राइंगों और डिज़ाइनों के रूप में संपूर्ण क्लस्टर के लिए उपयोगी हों। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में प्रशिक्षण पक्ष भी सम्मिलित होगा। मान्यताप्राप्त क्लस्टरों को इसका लाभ प्रदान किया जाएगा।

पेटेंट ट्रैकिंग: परिवर्तनशील व्यवसाय वातावरण जिसका गुजरात से निर्यात अभियान पर प्रभाव पड़ने की संभावना है, में वैश्विक रूप में हो रहे पेटेंट पंजीकरणों के विवरण पर निकट से दृष्टि रखना आवश्यक है। गुजरात में उद्योगों की सूचना संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पेटेंट पंजीकरणों और उनके प्रोफाइलों पर निगरानी रखने और आवधिक ट्रैकिंग रिपोर्टें उपलब्ध कराने के लिएव्यावसायिक एजेंसियों की नियुक्ति करने के लिए भी इस निधि का उपयोग किया जाएगा। मान्यताप्राप्त क्लस्टरों को इसका लाभ प्रदान किया जा सकता है। इसका विवरण तैयार किया जाएगा और अलग से अधिसूचित किया जाएगा।

गुणवत्ता उन्नयन योजना

नए उभरते हुए परिदृश्य में, प्रत्येक उद्योग चाहे वह लघु अथवा मध्यम अथवा बड़े क्षेत्र में हो, को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए गुणवत्ता उन्नयन करना अनिवार्य है। गुजरात सरकार भी इस प्रमुख कारक के महत्व को अनुभव करती है और इसीलिए, सरकार ने किए गए व्ययों, जिनमें मान्यताप्राप्त अनुसंधान एवं विकास संस्थानों/फर्मों को भुगतान किए गए प्रतिपूर्ति शुल्कों सहित गुणवत्ता उन्नयन से संबंधित परीक्षण और अनुसंधान एवं विकास के लिए वांछित उपकरणों और गुणवत्ता चिह्नों की प्राप्ति की लागत सम्मिलित है, की प्रतिपूर्ति के लिए गुणवत्ता उन्नयन की अपनी विद्यमान योजना को जारी रखने का निर्णय किया है। आईएसओ 9000 और आईएसओ 14000 की प्राप्ति के लिए भी यह सहायता प्रदान की जाएगी। विभिन्न अन्य योजनाओं जिनमें जीएमपी, सिक्स सिग्मा, एचएसीसीपी, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, सकल उत्पादकता रखरखाव/प्रबंध (टीपीएम), जस्ट इन टाइम (जेआईटी), सीआरएम/एससीएम/बीपीआर पैकेज और समय-समय पर अधिसूचित अन्य क्षेत्रगत कार्यक्रम सम्मिलित हैं, के लिए भी सहायता दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पांच वर्षों में एक बार, 1 लाख रुपए प्रति लघु उद्योग इकाई की सकल सीमा के साथ वैयक्तिक इकाइयों के अंशदान के समकक्ष निधि के आधार पर सरकारी अनुदान के रूप में प्रति योजना अधिकतम 25,000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। चिह्नित क्लस्टर भी अपनी इकाइयों के लिए इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

औद्योगिक रुग्णता

औद्योगिक रुग्‍णता भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की एक प्रमुख किंतु खराब विशेषता है। औद्योगिक अर्थव्‍यवस्‍था के तीव्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए, रुग्‍णता का उपचार करते हुए इसे समाप्‍त करना होगा। सरकार अध्‍ययनों के माध्‍यम से एक निश्चित समयावधि में संपूर्ण रूप में एक विशेष औद्योगिक क्षेत्र की संभावित रुग्‍णता के कारणों का पता लगाने के लिए एक तंत्र की स्‍थापना पर विचार कर रही है ताकि रुग्‍ण होने वाले क्षेत्र को बचाने के लिए समय पर सरकारी हस्‍तक्षेप हेतु ये रिपोर्टें अग्रिम रूप में चेतावनी के तौर पर कार्य कर सकें।

सामान्‍य अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए नकद सब्सिडी

वर्षों तक अपना अस्तित्‍व बनाए रखने और उन्‍नति के लिए, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियां किसी भी उद्योग का एक अभिन्‍न अंग बन जाएंगी। सरकार उद्योगों में अनुसंधान एवं विकास के महत्‍व को स्‍वीकार करती है और इसीलिए सरकार ने विशेष रूप से लघु और मध्‍यम क्षेत्रों में व्‍यापक स्‍तर पर इनके संवर्धन का निर्णय किया है। सरकार ने अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए किए गए आवश्‍यक व्‍ययों हेतु अधिकतम 5 लाख रुपए के अध्‍यधीन 50 प्रतिशत की दर पर नकद सब्सिडी के रूप में सहायता प्रदान करने की विद्यमान योजना को जारी रखने का निर्णय किया है। चिह्नित क्‍लस्‍टर भी इस योजना के अंतर्गत सामूहिक अनुसंधान एवं विकास कार्य कर सकते हैं।

ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा समीक्षा की आवश्‍यकता

सरकार ऊर्जा समीक्षा करवाने के लिए लघु और मध्‍यम उद्योगों को सब्सिडी प्रदान करके व्‍यापक स्‍तर पर ऊर्जा समीक्षा को प्रोत्‍साहित करने की योजना बना रही है। यह सामान्‍यत: मूल्‍यवान ऊर्जा के संरक्षण में सहायता करेगा और संचालन लागत के संदर्भ में इकाई भी इससे लाभान्वित होगी। इस उद्देश्‍य के लिए, सरकार ने ऊर्जा समीक्षा सब्सिडी प्रस्‍तुत करने का निर्णय किया है। यद्यपि यह सब्सिडी इकाई द्वारा अध्‍ययन रिपोर्ट में सुझाए गए ऊर्जा संरक्षण उपायों को लागू करने के बाद ही संवितरित की जाएगी। इसके लिए, सरकार मान्‍यताप्राप्‍त समीक्षा एजेंसियों का एक बड़ा समूह नियुक्‍त करेगी।

जल उपभोग का मूल्‍यांकन

हाल ही के वर्षों में, जल भी, विशेष रूप से गुजरात के संदर्भ में, एक महत्‍वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इसलिए सरकार जल, जिसे अन्‍य उद्देश्‍यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है, के संरक्षण में उद्योगों को सक्षम बनाने के लिए उद्योगों की जलीय आवश्‍यकताओं के उपयुक्‍त मूल्‍यांकन को प्रोत्‍साहन देना चाहती है। अत: सरकार ने विद्यमान उद्योगों में जल उपभोग के मूल्‍यांकन के लिए नकद सब्सिडी देने का निर्णय किया है। यद्यपि यह सब्सिडी इकाई द्वारा मूल्‍यांकन एजेंसी की अनुशंसाओं के अनुसार जल संरक्षण उपाय लागू करने के बाद ही संवितरित की जाएगी। इसके लिए, सरकार मान्‍यताप्राप्‍त एजेंसियों की नियुक्ति करेगी।

ब्‍याज सब्सिडी

लघु उद्योग इकाइयों को ब्‍याज सब्सिडी प्रदान करने की विद्यमान योजना को भी ब्‍याज दरों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए संशोधनों के साथ जारी रखा जाएगा। योजना के अंतर्गत, एक नई लघु उद्योग इकाई को इस शर्त के अधीन कि इकाई प्रतिवर्ष न्‍यूनतम 5 प्रतिशत ब्‍याज का भुगतान करेगी, 5 प्रतिशत अथवा 5 लाख रुपए वार्षिक, जो भी कम हो, की दर पर ब्‍याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह लाभ 25 लाख रुपए की सकल सीमा के अध्‍यधीन, पांच वर्षों की अवधि के लिए दिया जाएगा।