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निर्माण क्षेत्र - आर्थिक विकास की रीढ़

निर्माण क्षेत्र सदैव गुजरात में आर्थिक विकास की रीढ़ रहा है। जैसाकि पहले उल्लेख किया गया है, काफी समय के बाद राज्य वस्त्र उद्योग के अपने एकमात्र निर्माण आधार को सफलतापूर्वक परिवर्तित कर सका है। आज राज्य में बहुत बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के उत्पादों का निर्माण होता है जिसका देश के उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। वास्तव में, यही वो परिपक्व निर्माण आधार है जिसने गुजरात को देश में शीर्ष औद्योगीकृत राज्य की योग्यता प्रदान की है। एक सुदृढ़ निर्माण आधार के विकास का श्रेय मुख्यत: उपलब्ध संसाधनों, प्रौद्योगिकीय कौशलों, उपयुक्त सुविकसित आधारभूत संरचना, अच्छे संस्थागत नेटवर्क, सुदृढ़ व्यापार कुशग्रता और उद्यमी प्रकृति वाले लोगों तथा सभी उत्तरोत्तर सरकारों द्वारा अपनाई गई प्रगतिशील नीतियों को जाता है।

निर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता

आकर्षक नए निवेशों की खोज में, यद्यपि राज्य विद्यमान निर्माण क्षेत्रों की अनदेखी न करना स्वीकार करता है। वास्तव में, राज्य का मानना है कि निवेशों के उभरते हुए क्षेत्रों को भी विद्यमान निर्माण खंडों के सफल अस्तित्व पर निर्भर होना चाहिए और इसीलिए गुजरात उन्हें सुदृढ़ बनाने का प्रयास करेगा क्योंकि पिछले वर्षों में मुख्यत: यही क्षेत्र राज्य के औद्योगीकरण अभियान के लिए उत्तरदायी रहे हैं। इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करेगी कि वे न केवल बने रहें अपितु आने वाले समय में फले-फूलें।

अस्सी के दशक तक भारत में कार्य वातावरण बंद अर्थव्यवस्था की छाया में था। नब्बे के दशक के प्रारंभ में भारत सरकार ने आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया प्रारंभ की, किंतु अधिकांश राज्यों में राज्य स्तरीय संचालन अधिकांशत: बंद अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अंतर्गत ही सीमित थे। आर्थिक सुधारों के प्रारंभिक चरण के दौरान, गुजरात जैसे शीर्ष औद्योगीकृत राज्य निवेशों को आकर्षित करने के संबंध में अधिकतम लाभ उठा सके क्योंकि नियंत्रित अर्थव्यवस्थाओं की पूर्व व्यवस्थाओं ने कुछ स्थल संबंधी रोक लगा रखी थीं जिन्हें 1991 से हटा दिया गया था और इसीलिए राज्य निवेशों के एक बड़े भाग को आकर्षित कर सका। किंतु पिछले दशक के अंत में सही अर्थों में उदारीकरण और वैश्विकरण का दौर प्रारंभ होने पर, अर्थव्यवस्था और निवेश के मामले में औद्योगीकृत राज्यों को कोई विशिष्ट लाभ प्राप्त नहीं हुए क्योंकि तब तक बहुत से अन्य राज्य भी आर्थिक विकास के संबंध में उन्हें आकर्षित करना प्रारंभ कर चुके थे। पुन:, वर्ष 2000 तक अधिकांश राज्य सब्सिडियों और बिक्रीकर के रूप में दिए गए प्रोत्साहनों को वापस लेने पर सहमत थे और गुजरात भी उनमें से एक था।

निदर्शी विचलन के लिए नीति

इस प्रकार नई औद्योगिक नीति में निदर्शी विचलन के एक अनिवार्य तत्व और दीर्घावधि आधार पर आवश्यकताओं को समझने की इच्छा है। यह अनुभव किया गया है कि राज्य के लिए अपनी सोच और नीति में गुणात्मक परिवर्तन लाने के लिए यही सही समय है। हम लोग भारत में सामान्यत: और गुजरात में विशेष रूप से यह मानते हैं कि हमें अपनी सुदृढ़ता का निर्माण करना चाहिए और अन्य देशों में विकसित मॉडलों....ऐसे मॉडल जिन्हें हमारी प्रणाली के अनुसार नहीं ढाला जा सकता.... की नकल नहीं करनी चाहिए। इसलिए गुजरात कौशल आधारित उद्योगों का संवर्धन करेगा और प्रचुर उत्पादन मदों की ओर नहीं जाएगा। यह पुन: इसी सच्चाई की पृष्ठभूमि में था कि राज्य तत्काल निर्माण क्षेत्र की दुर्बलता संबंधी चिंताओं से निपटेगा और तब अनुसंधान एवं विकास, डिज़ाइन नवाचारों, लागत दक्षता, कौशल उन्नयन और उत्पादकता के माध्यम से क्षमता निर्माण के विमोचन के लिए एक मार्ग तैयार करेगा। इस उद्देश्य के लिए, सरकार कुछ योजनाओं जो इसके प्रमुख निर्माण क्षेत्रों को सुदृढ़ करेंगी, को प्रारंभ करके हस्तक्षेप प्रदान करेगी। ऐसा करते समय, राज्य ऐसी सेवा क्षेत्र गतिविधियों के विकास के लिए भी कदम उठाएगा जो अपनी अधिकतम क्षमताओं के लाभ के संबंध में निर्माण क्षेत्रों के शीर्ष पर होंगी।

सरकारी हस्तक्षेप

निर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के क्रम में, सरकार ने निम्न प्रकार से हस्तक्षेप प्रदान करने का निर्णय किया है:

ध्यानांतर्गत क्षेत्र

सरकार ने वैश्विक संदर्भ में राज्य में उपलब्ध रणनीतिक तुलनात्मक अग्रताओं के दृष्टिगत विशिष्ट क्षेत्रों पर तत्काल ध्यान केंद्रित करने का निर्णय किया है। इस उद्देश्य के लिए, सरकार एक मिशन मॉड एप्रोच अपनाने का प्रस्ताव करती है।

वस्त्र

वस्त्रों के मामले में, जिन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है, वे हैं: रुई की उत्पादकता में सुधार, आगामी पांच वर्षों में रुई और हस्तनिर्मित धागे के वर्तमान उपभोग को दोगुना करना, वस्त्र उत्पादन में वृद्धि, बड़ी मात्रा में कताई और बुनाई गतिविधियों का संवर्धन करना आदि। सभी संबंधित मुद्दों का अध्ययन करने के लिए एक कोर ग्रुप का गठन किया जाएगा जिसकी अनुशंसाओं पर सरकार प्रभावी हस्तक्षेप प्रदान करेगी।

वस्त्र पार्क

निर्यात और घरेलू उपभोग दोनों के लिए वस्त्रों के उत्पादन में वृद्धि हेतु सूरत और अहमदाबाद में वस्त्र पार्क स्थापित किए जाएंगे। पार्कों की स्थापना और मान्यताप्राप्त निजी प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के संबंध में समयबद्ध रूप से हस्तक्षेप किए जाएंगे।

रत्न और आभूषण पार्क

सूरत, अहमदाबाद, भावनगर, राजकोट और भुज में रत्न व आभूषण पार्क स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ-साथ, सरकार निजी क्षेत्र में भी ऐसे पार्कों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी। प्रशिक्षण देने के लिए मान्यताप्राप्त निजी प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी।

अनुसंधान एवं विकास संस्थान और उत्कृष्टता केंद्र

इक्कीसवीं शताब्दी नवाचार, अनुसंधान एवं विकास का युग है जहां दिमाग के उत्पाद कारखानों के उत्पादों से अधिक धन सृजित करेंगे। डिज़ाइन के क्षेत्र, उत्पाद विकास, लगातार नवाचार, बाह्य निर्माण के वैश्विक नेटवर्क के माध्यम से नई प्रौद्योगिकियों का विकास और उनका वाणिज्यीकरण भावी विकास की वचनबद्धता बनाए रखेंगे। यह इसी संदर्भ में है कि तुलनात्मक अग्रताओं के क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास का महत्व गुजरात के लिए आवश्यक हो गया है। उद्योगों के सहयोग से सरकार उद्योगों से प्राप्त समकक्ष निधियों से नए अथवा विद्यमान प्रयोगशालाओं/संस्थानों में अनुसंधान के लिए विशेष केंद्रों का सृजन करके इंजीनियरिंग, रसायनों, वस्त्रों, परिधानों, फार्मास्युटिकल, प्लास्टिक, कृषि खाद्य जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना को सहायता देना चाहेगी। यह महत्वपूर्ण है कि अपने भावी प्रौद्योगिकीय विकास के लिए गतिविधियों की अवधारणा बनाने और कार्यसूची तैयार करने में उद्योगों को शीर्ष वरीयता प्राप्त है। इस संबंध में सरकार विभिन्न उद्योगों और उनके संघों से प्रस्ताव आमंत्रित करती है।

उत्कृष्टता हेतु राज्य पुरस्कार

सरकार उन संस्थानों की योग्यता का भी सम्मान करना चाहती है जिन्होंने उत्पादों और नई प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए सफलतापूर्वक चुनौतियों का सामना किया है। इसके लिए, सरकार ऐसे संस्थानों के लिए गुजरात के उद्योगों के समर्थन से विधिवत् रूप में उत्कृष्टता हेतु राज्य पुरस्कारों की स्थापना करेगी।