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गुजरात

ऊर्जा: विद्युत तथा गैस

वर्तमान परिदृश्य में, जबकि ऊर्जा क्षेत्र में नए आविष्कार औद्योगिक क्षेत्र द्वारा वाणिज्यिक दोहन के लिए प्रतीक्षा में हैं और जबकि गुजरात एक गैस-आधारित अर्थव्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है, सरकार ने उद्योगों को प्रतिस्पर्धी, स्वच्छ और दक्षतापूर्ण ऊर्जा स्रोतों के साथ सक्षम बनाने हेतु जबरदस्त कदम उठाए हैं। इस उद्देश्य के लिए, गुणवत्तापूर्ण ऊर्जा की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए कुछ कदमों को इस अध्याय के बाद वाले भाग में प्रतिज्ञापित किया गया है। हाल ही में लाए गए केंद्रीय विद्युत विधेयक, 2003 के प्रावधानों के अनुसार, सकल विद्युत उत्पादन में वृद्धि के लिए, अपनी सदस्य इकाइयों के लिए उद्योगों/संघों के एक समूह द्वारा विद्युत उत्पादन की प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य में विकसित की जा रही गैस और पाइपलाइन संरचनाओं की उपलब्धता के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, गैस-आधारित विद्युत उत्पादन के साथ-साथ वैयक्तिक उद्योगों द्वारा कच्चे माल और ईंधन के रूप में गैस के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। यह उद्योगों को ईंधन के दक्षतापूर्ण और विश्वसनीय स्रोत की आपूर्ति के साथ-साथ एक स्वच्छ पर्यावरण के संवर्धन के दोहरे उद्देश्य की पूर्ति करेगा। सरकार का विश्वास है कि ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार की प्रक्रिया को ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों के मार्ग में किसी प्रकार की बाधाएं उत्पन्न नहीं करनी चाहिए। इस प्रकार, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा आदि जैसे ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों को भी बड़ी मात्रा में प्रोत्साहित किया जाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र सुधारों की दिशा में

उद्योगों को सुविधाएं प्रदान करने के लिए ऊर्जा और पैट्रोरसायन विभाग ने भी कुछ नए कदम उठाए हैं। नीतिगत पहलों पर चर्चा करने से पूर्व इन उठाए गए कदमों के विवरण को संक्षेप में दोहरा लेना बेहतर होगा:

  • नौंवी योजना के दौरान, 2108 मेगावॉट विद्युत उत्पादन क्षमता को प्रणाली में जोड़ा गया था और अब 2002-03 के अंत में स्थापित क्षमता 8576 मेगावॉट तक पहुंच गई है। दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान, राज्य ने 4000 मेगावॉट से अधिक विद्युत क्षमता को जोड़ने की योजना बनाई है।


  • उत्पादन और दक्षता में वृद्धि के लिए अच्छी रखरखाव प्रणाली को अपनाने के साथ-साथ पुनरोद्धार और आधुनिकीकरण के उपायों द्वारा विद्यमान विद्युत स्टेशन के प्लांट लोड फैक्टर को बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए थे। वर्ष 2002-03 के अंत तक गुजरात विद्युत बोर्ड ने प्लांट लोड फैक्टर को 69.69 प्रतिशत प्राप्त कर लिया है जो अब तक सर्वाधिक है।


  • राज्य की कैप्टिव विद्युत नीति, 1998 को जबरदस्त प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ है। इस समय स्वीकृत कैप्टिव विद्युत क्षमता 3500 मेगावॉट से अधिक है जिसमें से लगभग 2200-2500 मेगावॉट विद्युत का वर्तमान में उत्पादन किया जा रहा है। गुजरात विद्युत बोर्ड जब कभी आवश्यकता होती है, अधिशेष विद्युत प्राप्त करता है और इकाइयों को भी अपनी सहयोगी इकाइयों को विद्युत आपूर्ति की अनुमति दी जाती है।


  • विद्युत क्षेत्र सुधारों में, विद्युत शुल्कों के निर्णय के लिए राज्य ने पहले ही गुजरात विद्युत नियामक आयोग की स्थापना कर दी है। इससे भी बढ़कर, विद्युत उद्योग के अधिक सुचारू और तीव्रतर पुनर्गठन तथा तर्कसंगतता के लिए गुजरात विद्युत उद्योग (पुनर्गठन और विनियमन) अधिनियम, 2003 को भी अधिनियमित किया गया है। गुजरात विद्युत बोर्ड का पेशेवर प्रबंधन के साथ एक उत्पादन कंपनी, एक ट्रांसमीशन कंपनी और चार वितरण कंपनियों में पुनर्गठन करने का निर्णय भी किया गया है। राज्य के प्रमुख नगरों के लिए पृथक वितरण कंपनियों का गठन भी किया गया है। विद्युत का मुक्त उत्पादन, खुली पहुंच और तीसरे पक्षकार को बिक्री, नियामक प्राधिकरण द्वारा विनियमन पर विद्युत अधिनियम, 2003 के विभिन्न प्रावधान भी निकट भविष्य में राज्य में विद्युत क्षेत्र का संवर्धन करेंगे।


  • विद्युत विक्रय पर कर ढांचे को तर्कसंगत बनाने के लिए, यह जान लेना बेहतर होगा कि गुजरात ने 1 अप्रैल, 2002 से विद्युत विक्रय पर बिक्रीकर समाप्त कर दिया है, और इस प्रकार सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को प्रतिवर्ष 260 करोड़ रुपए तक की राहत प्रदान की है।


  • इसके साथ ही नई औद्योगिक इकाइयों को भी 5 वर्षों की अवधि के लिए विद्युत शुल्क के भुगतान से छूट दी गई है। अपनी स्वयं की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विद्युत उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाइयों को भी 5 वर्षों की प्रारंभिक अवधि के लिए विद्युत शुल्क से छूट प्रदान की गई है।


  • ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति करने की दृष्टि से, राज्य ने चालू वित्त वर्ष से ज्योति ग्राम योजना नामक योजना प्रारंभ की है जो ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर और कृषि उद्योगों का संवर्धन करेगी।

      क. एचटी उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन योजना: इस योजना के अंतर्गत, अगस्त 2002 से जुलाई 2003 की अवधि के दौरान वर्ष 2001-02 की उसी अवधि की तुलना में बढ़ा हुआ उपभोग, आधार वर्ष में ऐसी बढ़ोतरी पर निर्भर करते हुए 5 से 15 प्रतिशत की छूट के लिए पात्र था। इससे औद्योगिक उपभोक्ताओं को 36 करोड़ रुपए से अधिक की कुल छूट के साथ 2280 उपभोक्ताओं को लाभ हुआ।



      ख. एलटी उपभोक्ताओं को रात के समय एकनिष्ठ विद्युत उपयोग के लिए एलटीपी 4 के अंतर्गत रियायती शुल्क।



      ग. क्षतियों में कमी और वितरण गतिविधियों के लिए औद्योगिक एस्टेटों में भारी छूट की योजना - गुजरात विद्युत नियामक आयोग से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया है।



      घ. कनेक्शन जारी करने के लिए प्रक्रिया समय में कमी - भुगतान की तिथि से 60/70 दिनों की तुलना में अब 45 दिन। उच्च विकास क्षेत्रों जैसे दक्षिणी गुजरात में इस अवधि को कम करके 30 दिन किया गया है। आवेदन की तिथि से कनेक्शन जारी करने के लिए, औसत समय को अब 133 दिनों से घटाकर 100 दिन कर दिया गया है।



      ङ. (क) गुजरात विद्युत बोर्ड ने 8 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से सूरत के निकट लस्काना और पाल में तथा अहमदाबाद के निकट भाट में 66- केवी के तीन सब-स्टेशन भी स्थापित किए हैं। इसके अतिरिक्त, 15 करोड़ रुपए की लागत से मार्च 2004 तक दक्षिणी गुजरात में चार और कच्छ में दो नए सबस्टेशनों की योजना बनाई गई है।



      च. प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाना।


  • विद्युत शुल्क की शीर्ष दर को 60 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है जिसके परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष 62 करोड़ रुपए का कर भार कम हुआ है।

विद्युत शुल्कों को तर्कसंगत बनाना

इस समय अंतरराष्ट्रीय विद्युत शुल्क 3.50/केडब्ल्यूएच पर निर्धारित हैं। यदि गुजरात के उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धी बनाना है तो इनकी उत्पादन लागत को यथासंभव नीचे लाने का प्रयास करना होगा। आज के संदर्भ में विद्युत ऊर्जा औद्योगीकरण का वाहक है और सौभाग्य से राज्य में निकट भविष्य में तैयार होने वाले दो एलएनजी टर्मिनलों के अतिरिक्त गुजरात में गैस के विशाल भंडार खोज लिए गए हैं, जो सस्ते विद्युत उत्पादन में सहायता कर सकते हैं। सरकार उद्योगों को प्रतिस्पर्धी शुल्कों पर विद्युत आपूर्ति के तथ्य को स्वीकार करती है और इसीलिए आने वाले वर्षों में विद्युत उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस का प्रयोग करके विद्युत शुल्कों सहित ऊर्जा शुल्कों को यथासंभव तर्कसंगत बनाने के प्रयास करेगी। इस उद्देश्य के लिए राज्य विद्युत बोर्ड लागत कम करने हेतु अपनी ओर से कड़ा प्रयास करेगा।

गैस वितरण में सरकार की भूमिका

गुजरात में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता से राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में एक जबरदस्त उछाल आने की संभावना है। सरकार मानती है कि कच्चे माल अथवा ईंधन के रूप में गैस का प्रयोग उत्पादन लागत में कमी करके उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाता है जोकि वर्तमान समय की आवश्यकता है। इस परिस्थिति में, यह प्रासांगिक है कि वितरण के संदर्भ में सरकार को निजी क्षेत्र की तुलना में अपनी भूमिका को स्पष्ट करना चाहिए। इसलिए सरकार ने राज्य में गैस वितरण तंत्र के विकास में सहायता के लिए एक अंतरिम गैस वितरण नीति बनाई है। यह विद्युत उत्पादन की लागत को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विद्युत परियोजनाओं हेतु गैस की पर्याप्त उपलब्धता और स्वच्छ पर्यावरण के संवर्धन को सुनिश्चित करेगी। प्राकृति गैस की उपलब्धता के साथ, सरकार ने पूरे राज्य में एक गैस ग्रिड बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की है। जहां सरकार अपनी भूमिका को मुख्य पाइप लाइन बिछाने तक सीमित करेगी, वहीं गैस वितरण का कार्य निजी क्षेत्र पर छोड़ दिया जाएगा। वास्तव में, गैस की उपलब्धता गुजरात के लिए एक अद्वितीय विक्रय प्रस्ताव (यूएसपी) सिद्ध होगी जो इसे भारत और विदेश दोनों में अनेक स्थानों की तुलना में सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी स्थान के रूप में प्रतिष्ठित करेगी। इसलिए सरकार ने आने वाले समय में औद्योगीकरण के संवर्धन के लिए गुजरात के पक्ष में इस अग्रता का लाभ उठाने का निर्णय किया है।

गैस की आपूर्ति के लिए सरकार समय-सूची अधिसूचित करेगी

गुजरात में गैस ग्रिड के माध्यम से गैस की उपलब्धता अप्रैल 2004 से प्रारंभ होने की आशा है और राज्य के अधिकांश भागों को कवर करते हुए अप्रैल 2007 तक परियोजना के पूरे हो जाने की संभावना है। सरकार बहुत शीघ्र गैस की सुनिश्चित मात्रा को उपलब्ध कराने और स्थानों के विवरण के साथ राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों को वितरण के लिए पाइप गैस की आपूर्ति की समय-सूची के लिए एक ठोस योजना बनाएगी ताकि उद्योग तदनुसार अपनी ऊर्जा प्रबंध योजनाएं तैयार कर सकें।

राज्य नीतियों को केंद्रीय विद्युत अधिनियम, 2003 के सापेक्ष बनाना

केंद्रीय विद्युत अधिनियम की एक उल्लेखनीय विशेषता "मुक्त पहुंच प्रणाली" है जिसके अंतर्गत उपभोक्ताओं का एक समूह बड़े उपभोक्ताओं के रूप में सीधे उत्पादन कंपनी से अथवा व्यापारियों और वितरण कंपनियों जैसे माध्यस्थों के जरिए विद्युत खरीद कर सकता है। केंद्रीय विद्युत अधिनियम, 2003 के अनुपालन में, राज्य ने ऐसी नीतियों को अपनाने का निर्णय किया है जो राज्य में औद्योगिक वृद्धि और ऊर्जा क्षेत्र में विकास के लिए प्रेरक हों।

प्राकृतिक गैस पर कर में कमी

ऊर्जा दक्षता और प्रदूषण मुक्त ईंधन तथा आने वाले वर्षों में गुजरात में प्रचुर मात्रा में उपलब्धता के कारण निश्चित तौर पर भविष्य में गुजरात में प्राकृतिक गैस की मांग बढ़ेगी। अन्य राज्यों को बिक्रीकर जो 10 प्रतिशत से अधिक है, के बोझ के अतिरिक्त परिवहन शुल्कों को भी वहन करना पड़ेगा और उनके यहां एलएनजी टर्मिनल भी नहीं हैं। आने वाले वर्षों में अधिकतम लाभ के लिए राज्य में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक गैस के संवर्धन के लिए, सरकार उपयुक्त समय पर प्राकृतिक गैस पर बिक्रीकर शुल्क में कमी करने और प्राकृतिक गैस की मात्रा और मूल्य में बढ़ोतरी पर निर्भर करते हुए राजस्व निरपेक्ष तरीके पर विचार कर सकती है।

ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों को प्रोत्साहन

साथ ही साथ, सरकार की पवन, सौर और ज्वार-तरंगीय ऊर्जा जैसे गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने की इच्छा है। ऐसी सभी परियोजनाओं की स्थापना के लिए सरकार सुविधाएं प्रदान करेगी और उपयुक्त क्षेत्रगत नीतियां तैयार करेगी।