अन्य नई पहल
निवेश के लिए एक प्रेरक वातावरण सृजित करना
निवेश प्रस्तावों पर विचार करते समय, आज भावी निवेशकों के पास विभिन्न स्थलों में से चुनने के लिए अनेक विकल्प हैं। चूंकि अब निवेश आकर्षित करने के लिए बिक्रीकर प्रोत्साहन का हथियार नहीं रहा, अत: यह आवश्यक है कि राज्यों को निवेशकों को उनकी आवश्यकतानुसार प्रस्ताव देकर एक सर्वाधिक प्रेरक वातावरण सृजित करने का प्रयास करना चाहिए। आज के समय में उद्योग उस राज्य में जाते हैं जो उन्हें वैश्विक शर्तों और सुविधा स्तर पर सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करता है। प्रत्येक राज्य की भिन्न विशेषताएं होंगी और इसीलिए गुजरात अपनी अद्वितीय विशेषताओं को चिह्नित करेगा और उनके अनुसार विपणन नीति तैयार करेगा। इसके अतिरिक्त, राज्य उन क्षेत्रों की पहचान करेगा जहां निरंतर प्रगति के लिए गुणात्मक निवेश को आकर्षित किया जा सके। राज्य जबरदस्त विपणन अभियान चलाएगा। पुन:, चूंकि औद्योगिक विकास के विषय की प्रकृति बहुआयामी है, अत: राज्य सभी संबंधित विभागों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए संवेदनशील बनाएगा। जहां तक सुविधा स्तर का संबंध है, गुजरात ने बड़ी परियोजनाओं को एकल खिड़की तंत्र के रूप में अनुमतियां प्रदान करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त गुजरात औद्योगिक संवर्धन बोर्ड का पहले ही गठन कर दिया है। सरकार के सभी विभागों के सहयोग से इस तंत्र को और भी सुदृढ़ किया जाएगा और संभवत: एकल खिड़की अनुमति तंत्र को सभी परियोजनाओं पर लागू किया जाएगा। गुजरात, राज्य में निवेश के लिए आने वाले नए निवेशकों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। आने वाले समय में परियोजना प्रस्तावों को सुचारू और बिना किसी कठिनाई के साकार करने के लिए इस हस्तग्राही नीति को कड़ाई से पालन करते हुए जारी रखा जाएगा।
अनिवासी भारतीयों से निवेशों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का संवर्धन
राज्य अनिवासी भारतीयों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश आकर्षित करने के महत्व को स्वीकार करता है। यह प्रौद्योगिकी स्थानांतरण के द्वारा प्रौद्योगिकीय मानकों के उन्नयन, निर्यातों को बढ़ाने, नवीनतम निर्माण पद्धतियों को प्रारंभ करने, आधारभूत संरचनाओं के विकास और रोज़गार अवसरों के सृजन में राज्य की सहायता करेगा।
सरकार अनिवासी भारतीयों द्वारा राज्य में निवेश करते समय उनकी समस्याओं और चिंताओं को भी समझती है। वास्तव में, वे राज्य से उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने की अपेक्षा करते हैं। इस उद्देश्य के लिए, सरकार उन विभिन्न विकल्पों को खोज रही है जो अनिवासी भारतीयों की आकांक्षाओं और राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करेंगे। अनिवासी भारतीयों की स्वयं-वास्तविककरण आवश्यकताओं और राज्य की विकास आवश्यकताओं के मध्य अंतरों को पाटने के लिए, भारत सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद सरकार एक अनिवासी भारतीय निवेश ट्रस्ट बैंक की स्थापना पर विचार कर रही है।
गुजरात राज्य की प्रतिस्पर्धी अग्रताओं को ध्यान में रखते हुए और उत्पाद-देश मैट्रिक्स के आधार पर, निवेश को आकर्षित करने के लिए गुजरात सरकार सम्मेलनों के आयोजन और समय-समय पर सरकारी अधिकारियों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के विदेशी दौरों को प्रायोजित करने सहित ठोस प्रयास करेगी।
पत्तन-चलित विकास
गुजरात में इस समय 41 पत्तनों के साथ देश में 1600 किलोमीटर की सबसे लंबी तटरेखा है जिनमें से कांडला एक प्रमुख पत्तन है। राज्य सरकार हरित् स्थलों पर 10 पत्तनों का विकास कर रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार संपर्कों की प्रभावी रूप से स्थापना के लिए इतनी लंबी समुद्री सीमा की क्षमता का दोहन करने हेतु, सरकार ने राज्य में पत्तन-चलित औद्योगीकरण की प्रक्रिया की सहायता करने का निर्णय किया है। इस उद्देश्य के लिए, विद्यमान पत्तन स्थलों की पत्तन संरचनाओं के उन्नयन के अलावा, पत्तनों के साथ सड़क, रेल और वायु संपर्कों के रूप में संरचनात्मक सुविधाओं का विकास करने की योजना है। उन उत्पादों जिनका राज्य में प्रचुरता में उत्पादन किया जाता है और जिनमें अच्छी निर्यात संभावना है, के लिए कुछ स्थानों पर उत्पाद-विशिष्ट घाटों का विकास करने की योजना भी गतिमान है। पुन:, राज्य अंत:पृष्ठीय यातायात की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए क्षेत्रीय आधार पर पत्तन विकास की आवश्यकताओं के अध्ययन का निष्पादन भी करेगा। इसके अतिरिक्त, कुछ महत्वपूर्ण पत्तन स्थलों पर औद्योगिक एस्टेटों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों की योजना भी बनाई गई है।
क्षेत्रीय विकास
लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति और औद्योगीकरण के लाभ राज्य के दूरदराज क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए, विशेषकर जब राज्य के विभिन्न भागों में नर्मदा का पानी बहना शुरू हो जाएगा, सरकार ने राज्य में तीन आर्थिक गलियारों का विकास करने का निर्णय किया है। इन गलियारों में भरूंच-दाहेज-अंबरगांव, वडोदरा-मेहसाणा-पालनपुर और सुरेंद्रनगर-राजकोट-मोरबी-कांडला के आसपास के क्षेत्र सम्मिलित हैं। इस उद्देश्य के लिए, सरकार ने बहुत शीघ्र संभाव्यता अध्ययन रिपोर्टों के संकलन के लिए प्रतिष्ठित परामर्शदाताओं को नियुक्त करने की योजना बनाई है। इन अध्ययनों के प्रमुख उद्देश्यों में प्राकृतिक संसाधनों का मूल्यांकन, उपलब्ध विद्यमान संरचनाएं, औद्योगीकरण की वर्तमान स्थिति, आगामी विकास के लिए वांछित अतिरिक्त संरचनात्मक सुविधाएं, औद्योगिक निवेश के लिए नए क्षेत्रों की पहचान, प्रत्येक गलियारे की क्षमता के अनुसार वांछित नीतिगत हस्तक्षेप और इन गलियारों के आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए एक कार्य योजना सम्मिलित हैं। सरकार ने इन गलियारों की क्षमता के आक्रामक विपणन के लिए पूरे विश्व के निवेशकों, जो बदले में इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का उन्नयन करेंगे, के लिए योजना बनाई है।
अन्य अध्ययन
इसके अतिरिक्त, सरकार निम्नलिखित के लिए भी अध्ययन कराएगी:
- मत्स्य-पालन विकास पर अध्ययन।
- जनजातियों के अपने क्षेत्रों में रोज़गार अवसरों में बढ़ोतरी करके उनके सशक्तीकरण के दृष्टिकोण से जनजातीय क्षेत्रों पर अध्ययन।
- कच्छ के विकास के लिए समेकित अध्ययन।
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