राज्य
नीति

गुजरात

कार्यान्वयन की निगरानी

कार्यान्वयन - कुंजी

किसी भी सार्थक नीति का सार-तत्व प्रतिबद्धताओं के प्रभावी कार्यान्वयन में निहित होता है। बाधाओं के बावजूद, संभवत: इस क्षेत्र में गुजरात अन्य अनेक से आगे है। अत: इस नीति का कार्यान्वयन एक समयबद्ध रूप में सुनिश्चित करने का विचार उपयुक्त ही है ताकि इक्कीसवीं सहस्राब्दी के प्रथम दशक में ही गुजरात देश के औद्योगीकृत राज्यों की सूची में शीर्ष पर हो।

प्रथम चरण

निगरानी समिति

इस उद्देश्य के लिए, माननीय उद्योग राज्य मंत्री की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का गठन किया जाएगा जिसके सदस्य-सचिव उद्योग आयुक्त होंगे। यह समिति नियमित अंतरालों पर नीति के कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी और नीति के तीव्र कार्यान्वयन के मार्ग में आने वाली सभी संभव कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास करेगी। सभी संबंधित विभागों और उद्योगों के प्रतिनिधि इस समिति सदस्य होंगे।

द्वितीय चरण

क्षेत्रवार नीति तैयार करना

जैसाकि पहले उल्लेख किया गया है, सरकार की योजना विद्यमान विनिर्माण क्षेत्रों को इस प्रकार सुदृढ़ करने की है कि वे राज्य में औद्योगीकरण की भावी प्रक्रिया का मार्गदर्शन कर सकें। इस उद्देश्य के लिए ऐसे सभी विनिर्माण क्षेत्रों राज्य में जिनकी नींव सुदृढ़ है, को विशेषज्ञों की सहायता से चिह्नित किया जाएगा और आगामी 15-20 वर्षों में इन क्षेत्रों के विकास के लिए नीतिगत रूपरेखा तैयार करने हेतु विकास परिषदों जिनमें मुख्यत: उद्योग के विशेषज्ञ होंगे, का गठन किया जाएगा। इन क्षेत्रवार परिषदों में इंजीनियरिंग, रसायन, पैट्रो-रसायन, ड्रग्स और फार्मास्युटिकल्स, वस्त्र, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, खनिज आधारित उद्योग, ज्ञानाधारित उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र आदि सम्मिलित होंगे। ये परिषदें अपने गठन से छ: माह की अवधि के भीतर विकास के लिए ठोस अनुशंसाओं के साथ अपने संबंधित क्षेत्रों पर रिपोर्टें तैयार करेंगी।