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राज्य नीति |  | |
औद्योगिक नीति 1999
प्रस्तावना
भारत सरकार के उदारीकरण और आर्थिक सुधार कार्यक्रम का उद्देश्य तीव्र और ठोस आर्थिक विकास तथा एक वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ सुसंगत एकीकरण है। परिवर्तनशील वैश्विक और घरेलू वातावरण को नए रूपांतरणों को स्वीकार करने में विकास संकल्पना की पुन:स्थापन की आवश्यकता है जो औद्योगिक नीति नवाचारों को ऊंची मेहराब बनाती हुई आर्थिक विकास नीति के संदर्भ में रखते हैं।
औद्योगिक नीति वक्तव्य 19991 ने ऐसे समय औद्योगिक क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया था, जब लाइसेंसों की समाप्ति और नियंत्रणों में कमी ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि संवेग को उन्मुक्त कर दिया था। औद्योगिक नीति 1997 ने आधारभूत संरचना की ओर उन्मुख विकास को आत्मसात किया है।
यह औद्योगिक नीति पहल विगत प्रगति को समेकित करने और एक स्पंदमान अर्थव्यवस्था की नींव रखना चाहती है जो अपने नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करती है। . इसका उद्देश्य एक निवेशक सापेक्ष वातावरण सृजित करके राज्य के संपूर्ण आर्थिक विकास के संदर्भ में औद्योगिक विकास का संवर्धन करना है जिससे उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अग्रिम पायदानों की ओर दृढ़ता से बढ़ने में सुगमता हो। यह नीति राज्य की विकासात्मक प्रक्रिया में निजी क्षेत्र की पहल के एकीकरण का संवर्धन करना चाहती है।
उद्देश्य
औद्योगिक नीति के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
नए निवेश आकर्षित करके और विद्यमान उद्योगों की उन्नति के द्वारा सकल/कुल राज्य घरेलू उत्पाद में उद्योग के अंशदान को बढ़ाना।
अगले पांच वर्षों में औद्योगिक और अनुषंगी क्षेत्र में रोज़गार को 20 प्रतिशत तक बढ़ाना।
अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में निवेशों को प्रेरित करके जीवनक्षम आर्थिक विकास को प्राप्त करना।
राज्य के भीतर अधिक मूल्य संवर्धन प्राप्त करना और उसके द्वारा जीवन की उच्चतर गुणवत्ता में योगदान देना।
अभिगम
राज्य सरकार निम्नलिखित के द्वारा कथित उद्देश्यों की प्राप्ति का प्रस्ताव करती है:
अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के विकास के लिए एक समन्वित अभिगम को आत्मसात करके जो संपूर्ण रूप में आर्थिक मूल्य संवर्धन को संबोधित करता है।
सरकार के विभिन्न अंगों के मध्य समन्वय के उच्चतर स्तरों के लिए सक्षम तंत्र के सृजन पर ध्यान लगाकर।
संस्थागत तंत्र का नवीकरण करके और तीव्रता से स्वीकृतियां देने तथा निवेशक सापेक्ष वातावरण को सुनिश्चित करने के लिए उनकी भूमिका का पुन:स्थापन करके।
एक सुविधाजनक भूमिका जो उद्योगों के सुचारू और सफलतापूर्वक संचालन को सक्षम बनाए, को आत्मसात करके नियमों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
एक प्रभावी निगरानी और शिकायत निवरण तंत्र की स्थापना करके।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण।
विद्यमान आधारभूत संरचनाओं का इसके अपने संसाधनों के द्वारा सुदृढ़ीकरण और विस्तार करके तथा आधारभूत संरचना विकास में निजी क्षेत्र की सहभागिता के प्रोत्साहन द्वारा।
अपने नागरिकों के लिए उच्चतर रोज़गार सृजित करने के लिए उद्योगों और तकनीकी संस्थानों के मध्य व्यापक समन्वय के माध्यम से योजनाबद्ध मानव संसाधन विकास।
लघु और मध्यम उद्यमों के नवीकरण और अर्थव्यवस्था के उभरते हुए क्षेत्रों में नए निवेशों की चैनलिंग पर ध्यान केंद्रित करके।
भावी आर्थिक विकास के संचालक के रूप में सेवा क्षेत्र की प्रमुख भूमिका को मान्यता प्रदान करते हुए इसका विकास।
कराधान में सुधार के माध्यम से सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने में वित्तीय विवेक का प्रयोग करके।
राज्य के तीव्र विकास के लिए अधिक प्रभावी और अर्थपूर्ण बनाते हुए प्रोत्साहनों के पैकेज को तर्कसंगत बनाकर।
औद्योगिक नीति के लिए आर्थिक विकास संकल्पना
राज्य की भूमिका
राज्य सरकार राज्य के संपूर्ण और एकीकृत विकास के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक आर्थिक विकास बोर्ड (ईडीबी) की स्थापना करेगी। यह बोर्ड नीति निर्देश प्रदान करेगा और कृषि, उद्योगों और सेवाओं के समन्वित विकास के माध्यम से आर्थिक मूल्य संवर्धन की प्राप्ति के लिए राज्य की आर्थिक विकास योजना के क्षेत्रवार अंगों के कार्यान्वयन पर दृष्टि रखेगा। यह आधारभूत संरचना नवाचारों पर दृष्टि रखने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में भी कार्य करेगा।
संस्थागत तंत्र का नवीकरण
नीति में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नीति नवाचारों पर सुझाव देने, नीति के कार्यान्वयन की निगरानी और सरकार के विभिन्न विभागों के साथ समन्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाएगा।
निवेशकों को सहायता, उद्यम स्थलों के लिए सेवाएं जुटाने, निवेश नीतियों पर सूचना प्रदान करने, प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों के लिए नोडल संस्थान के रूप में कार्य करने हेतु औद्योगिक सहायता समूह (आईएजी) का उपयुक्त रूप से सुदृढ़ीकरण और पुनर्गठन किया जाएगा।
सरकार एक "स्थायी समिति" का गठन करेगी जिसमें नए उद्योग स्थापित करने से संबंधित कानूनों और प्रक्रियाओं का अध्ययन करने तथा विलंबों को दूर करने और शीघ्र संस्वीकृतियों के लिए सुधार और संशोधन सुझाने हेतु उद्योग संघों के प्रतिनिधियों को सम्मिलित किया जाएगा।
नियमों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण द्वारा सुविधा प्रदान करना
राज्य सरकार परियोजनाओं के तीव्र कार्यान्वयन के लिए मानद स्वीकृति/ अनुमोदन की एक प्रणाली को आत्मसात करेगी। जैसे ही मानद अनुमति के लिए प्रावधान बनता होता है, 30 करोड़ रुपए तक की स्थाई पूंजी निवेश वाली परियाजनाओं के लिए एकल खिड़की सेवा द्वारा मानद स्वीकृति प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। 30 करोड़ रुपए और अधिक स्थाई पूंजी निवेश वाली परियोजनाओं के लिए यह प्रमाणपत्र औद्योगिक सहायता समूह द्वारा जारी किया जाएगा।
परियोजना पूरी करने के लिए समय-सीमा को कम करने हेतु आवश्यक स्वीकृतियां/अनुमोदन प्रदान करने के लिए विभिन्न विभागों के लिए समय-सारणी निर्धारित की गई है (अनुबंध-1)।
अधिकांश विभागों ने क्षेत्रीय कार्यालयों को शक्तियों का प्रत्यायोजन कर दिया है। राज्य सरकार परियोजनाओं के तीव्र कार्यान्वयन के लिए अतिरिक्त अधिकारों के प्रत्यायोजन पर विचार करेगी।
औद्योगिक इकाइयों में निरीक्षकों के दौरों को केवल न्यूनतम वैधानिक आवश्यकताओं तक सीमित कर दिया गया है। राज्य सरकार स्वविनियमन को प्रोत्साहन देगी। अब औद्योगिक इकाई का निरीक्षण संबंधित उपायुक्त को पूर्व सूचना देने के बाद ही किया जाएगा। उद्योग संघों को जानकारी दी जाती रहेगी और कानून के पालन में उनकी सहायता ली जाएगी।
हरियाणा राज्य ने व्यापार और वाणिज्य से सभी भौतिक बाधाएं दूर कर दी हैं। राज्य सरकार ने चुंगीकर समाप्ति की साहसी पहल की है।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्रों और स्वीकृतियों के विनियमन की प्रक्रिया को भी पुन: सुचारू किया जाएगा।
17 अत्यधिक प्रदूषित श्रेणी के उद्योगों के अलावा, 19 प्रदूषित उद्योगों और अन्य बड़े तथा मध्यम उद्योगों को स्वीकृति तंत्र से बाहर लाया गया है। बड़े और मध्यम श्रेणी के ढांचे वाले सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगों जो अनुमोदित औद्योगिक क्षेत्रों के अंतर्गत हैं और जिनके पास सीवर कनेक्शन हैं, को भी स्वीकृति तंत्र से बाहर लाया जाएगा।
शिकायत निवारण तंत्र
संबंधित उपायुक्त एकल खिड़की सेवाओं के प्रमुख होंगे। प्रभावी रूप से अनुमोदनों की निगरानी करने, परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए सुविधाएं प्रदान करने और शिकायतों को निपटाने के लिए इसका जिला स्तरीय औद्योगिक शिकायत निवारण समिति के रूप में कार्य करने हेतु नवीकरण किया जाएगा।
उद्योग आयुक्त की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय निगरानी और शिकायत निवारण समिति (एसएलसी) की माह में एक बार बैठक होगी और इस बैठक में लिए गए निर्णय सभी विभागों पर बाध्यकारी होंगे। राज्य स्तरीय समिति उद्योगों की शिकायतों का या तो स्वयं अथवा एकल खिड़की सेवा के संदर्भ पर संज्ञान लेगी। यह समिति उन मुद्दों पर निर्णय करेगी जो औद्योगिकरण की सुचारू प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं और नीतियों में परिवर्तन पर विचार करने तथा आर्थिक विकास बोर्ड को अपनी अनुशंसाएं करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति को कहेगी।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण
सरकार निजी क्षेत्र में आधुनिकीकरण की भांति अपनी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समसामयिक परिवर्तन करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रयोग के माध्यम से अपने विभागों में आधुनिक प्रबंध संव्यवहार प्रारंभ करने हेतु पहल करेगी। प्रशासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व की भावना और दक्षता लाने के लिए ट्रांजेक्शन ऑटोमेशन और सूचना डाटाबैंकों को सृजन किया जाएगा। क्रांतिक क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए राज्य के लिए सूचना प्रौद्योगिकी योजना तैयार की जाएगी और एक समयबद्ध अवधि में इसे कार्यान्वित किया जाएगा।
संरचना विकास पहल
संरचना विकास निधि
राज्य सरकार विकासात्मक प्रक्रिया में निजी क्षेत्र की साझेदार की भूमिका को मान्यता देती है। यह संरचना में निजी क्षेत्र के निवेशों को आकर्षित करने के लिए एक केंद्रित अभिगम का अनुपालन करने का प्रस्ताव करती है। राज्य सरकार एक संरचना विकास निधि (आईडीएफ) की स्थापना करेगी जो राज्य के संरचना विकास में निजी संसाधनों के संवहन और प्रवाह के लिए प्रेरक के रूप में कार्य करेगी।
राज्य की संरचना परियोजनाओं में आईडीएफ के अनुप्रयोजन पर विचार करते समय, ईडीबी संपूर्ण विकास आयोजना, योजना तैयार करने और अनुमोदनों तथा रियायतें देने के लिए एकल खिड़की हेतु उत्तरदायी शीर्ष उच्चाधिकार प्राप्त निकाय के रूप में कार्य करेगा।
आईडीएफ की स्थापना सरकार द्वारा जुटाए गए संसाधनों द्वारा की जाएगी और इसमें संस्थागत तथा निजी क्षेत्र की सहभागिता का विकल्प होगा। इस निधि का प्रबंध इस उद्देश्य के लिए ली गई एक स्वतंत्र व्यावसायिक निकाय की परामर्शी सहायता से व्यावसायिक रूप में किया जाएगा। ईडीबी द्वारा भेजी गईं वैयक्तिक जीवनक्षम संरचना परियोजनाओं पर विशेष उद्देश्य माध्यमों (एसपीवी) द्वारा निधियां प्राप्त करने के लिए प्रयोक्ता प्रभार आधार पर विचार किया जाएगा।
राज्य की विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुकूल संरचना विकास के लिए निजी और राज्य प्रयासों में प्रभावी समन्वय के लिए एक संरचना विकास प्राधिकरण की स्थापना पर राज्य सरकार विचार करेगी।
औद्योगिक संरचना विकास नीति
राज्य अपनी विकास एजेंसियों के माध्यम से पहले ही 82 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कर चुका है। मानेसर (जिला गुड़गांव) में 1749 एकड़ क्षेत्र पर मॉडल टाउनशिप, बावल (जिला रेवाड़ी) में लगभग 1200 एकड़ क्षेत्र में अभिवृद्धि केंद्र (अभिवृद्धि केंद्र का प्रथम चरण पहले ही विकसित हो चुका है), गन्नौर (जिला सोनीपत) के निकट बढ़ी में प्रथम चरण में 270 एकड़ क्षेत्र में हौजयरी और टैक्सटाइल कॉम्पलेक्स, कुंडली में लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार का विकसित किया जा रहा है। गुड़गांव में लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में एक हाई-टेक पार्क और सिरसा में एकीकृत विकास केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।.
औद्योगिक क्षेत्र
राज्य में औद्योगिक क्षेत्रों को पूरी तरह हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम (एचएसआईडीसी) द्वारा अथवा निजी क्षेत्र के साथ संयुक्त उद्यम में एचएसआईडीसी द्वारा अथवा निजी क्षेत्र द्वारा राज्य क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप और सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्कों सहित औद्योगिक संरचना में निजी क्षेत्र के निवेश को विनियमित और प्रोत्साहित करने के लिए उपयुक्त लाइसेंसिंग नीति अधिसूचित की जाएगी। विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में अनुभव किए गए अंतरों को भरने के लिए विद्यमान संरचनाओं के उन्नयन हेतु भी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
एचएसआईडीसी द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को संरचनाओं के स्तर के अनुसार श्रेणीबद्ध किया जाएगा और तदनुसार मूल्यांकित किया जाएगा।
उच्च सघनता वाले संरचनात्मक औद्योगिक क्षेत्र
इन क्षेत्रों में निर्मित शेड, औद्योगिक भूखंड, आंतरिक सड़कें और पार्किंग सुविधा, जलापूर्ति, सीवर और स्टोर्म वाटर डिस्पोजल सिस्टम, आंतरिक विद्युतीकरण, दूरसंचार सुविधाएं, ठोस मल निपटान प्रणाली, मनोरंजन केंद्र और पार्क, बैंक, डाकघर तथा चिकित्सा सुविधाएं आदि होंगी।
मध्यम सघनता वाले संरचनात्मक औद्योगिक क्षेत्र
इन क्षेत्रों में औद्योगिक भूखंड, आंतरिक सड़कें, जलापूर्ति, खुली निकास प्रणाली और बाह्य स्रोतों से विद्युत आपूर्ति होगी।
न्यून सघनता वाले संरचनात्मक औद्योगिक क्षेत्र
ये क्षेत्र प्राथमिक रूप में बड़ी इकाइयों के लिए बनाए जाएंगे और इनमें केवल पहुंच सड़कों और बाह्य स्रोतों से विद्युत आपूर्ति प्रदान की जाएगी। ऐसे क्षेत्रों में भूमि का मूल्य बहुत कम रखा जाएगा और इकाइयों को अपनी स्वयं की आंतरिक सेवाएं विकसित करने की अनुमति दी जाएगी।
मध्यम और न्यून संरचनात्मक क्षेत्रों में क्षेत्र आयोजना के प्रमुख सिद्धांतों का अनुपालन करने के बाद भूखंड काटे जाएंगे और क्षेत्र में जनसंख्या में वृद्धि के साथ-साथ संरचना के आवश्यकता-आधारित उन्नयन पर विचार किया जाएगा।
आधुनिक सुविधाओं के साथ औद्योगिक मॉडल टाउनशिप, अभिवृद्धि केंद्रों, प्रौद्योगिकी पार्कों और एकीकृत संरचना विकास केंद्रों पर सरकार का विशेष ध्यान रहेगा।
विशेषीकृत औद्योगिक क्षेत्रों जो प्रारूपिक उद्योगों की आवश्यकताओं से संबद्ध हैं, का भी सरकारी और निजी क्षेत्र में संवर्धन किया जाएगा।
राज्य एजेंसियों द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों की देखभाल और नियमित रखरखाव के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित किया जाएगा। उद्योग के परामर्श से सेवाओं के निजीकरण और विनियामक रूपरेखा विकसित करने की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।
क्षेत्र प्रबंध प्रक्रियाओं का सरलीकरण
संरचनाओं के बेहतर उपयोग और तीव्र औद्योगिकरण के लिए, इकाई की स्थापना के लिए एक उपयुक्त मूल्य पर उद्यमियों को भूमि प्रदान करने का राज्य का प्रयास रहेगा। निरंतर आधार पर उद्यमियों को भूखंड आवंटन करने के लिए भूखंड आवंटन नीति का सरलीकरण और उदारीकरण किया जाएगा तथा भुगतान की शर्तों को तर्कसंगत और नरम बनाया जाएगा।
अनिवासी भारतीयों, न्यूनतम 33 प्रतिशत निर्यात आदेशों वाली निर्यातोन्मुख इकाइयों और न्यूनतम 33 प्रतिशत विदेशी इक्विटी वाली इकाइयों के लिए आरक्षण किया जाएगा।
30 करोड़ रुपए और अधिक के स्थाई पूंजी निवेश वाली प्रतिष्ठित परियोजनाओं के लिए भूमि का आवंटन उद्योग सचिव की अध्यक्षता के अंतर्गत एक समिति द्वारा तत्काल किया जाएगा।
अनिवासी भारतीयों के लिए आरक्षित भूखंडों का आवंटन औद्योगिक सहायता समूह (आईएजी) द्वारा किया जाएगा।
भूमि लागत पर उन उद्यमियों को उपयुक्त छूट दी जाएगी जो औद्योगिक भूखंडों के कब्जे के 3 वर्षों के अंदर अपनी इकाइयों में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने का प्रस्ताव करेंगे।
एचएसआईडीसी, हुडा और उद्योग विभाग द्वारा सृजित औद्योगिक संरचनाओं के अधिकतम उपयोग की प्राप्ति के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक भूखंडों के हस्तांतरण/लीज़िंग आदि की विद्यमान निषेधात्मक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर स्थापित उद्योगों के लिए सुविधाएं
केवल 9.5 प्रतिशत क्षेत्र ही नियंत्रित क्षेत्र और शहरी क्षेत्र है, राज्य का 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र सरकार द्वारा प्रवर्तित अधिनियमों के नियंत्रणों से मुक्त है।
नियंत्रित क्षेत्र से बाहर खरीदी गई भूमि को भू-उपयोग में किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है। यद्यपि, जहां-कहीं आवश्यक है, भू-उपयोग में परिवर्तन के लिए प्रक्रिया को मानद अनुमोदनों की एक समयबद्ध प्रणाली के साथ सरलीकृत और विकेंद्रित किया जाएगा।
राज्य में उन क्षेत्रों को चिह्नित करने के लिए जिन्हें औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में सुविधाएं प्रदान करने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में अधिसूचित किया जाएगा, उद्योग और नगरीय एवं ग्रामीण आयोजना विभागों का एक कार्यदल स्थापित किया जाएगा। राज्य अथवा निजी पहल द्वारा भविष्य में संरचनाएं प्रदान करने के लिए इन क्षेत्रों की आयोजना की जाएगी।
इस प्रकार औद्योगिक उद्देश्य के लिए भू-उपयोग में परिवर्तन के सभी मामले उद्योग विभाग में निपटाए जाएंगे। चिह्नित औद्योगिक क्षेत्रों में भू-उपयोग की अनुमति उद्योग निदेशक द्वारा दी जाएगी जिसमें उद्योग आयुक्त के समक्ष अपील करने का प्रावधान होगा।
विद्युत
राज्य सरकार उद्योगों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण विद्युत प्रदान करने का प्रयास करेगी।
राज्य की स्थापित क्षमता इसके गठन के समय 343 मेगावॉट से बढ़कर 2392.7 मेगावॉट हो गई है और यह वृद्धि लगभग 700 प्रतिशत है। आगामी 2-3 वर्षों में 1800 मेगावॉट की अतिरिक्त विद्युत उत्पादन क्षमता सृजित की जा रही है। आगामी आठ से दस वर्षों में पुनर्वास और विद्युत ट्रांसमीशन तथा वितरण के लिए लगभग 8000 करोड़ रुपए के व्यापक निवेश की योजना बनाई गई है।
विद्युत उत्पादन जो अभी तक केवल सरकारी क्षेत्र में ही किया जा रहा था, को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है। विभिन्न लोड केंद्रों पर निजी क्षेत्र में 25 मेगावॉट के तरल ईंधन आधारित 43 लघु कैप्टिव स्टेशनों की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। राज्य सरकार ऐसे निजी क्षेत्र के उत्पादन स्टेशनों की स्थापना में सुविधा प्रदान करेगी।
राज्य सरकार ने विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए अनेक परियोजनाएं प्रारंभ की हैं। इनमें कोयला आधारित ताप परियोजनाएं, गैस आधारित ताप परियोजनाएं और जल विद्युत परियोजनाएं तथा हाइड्रोकार्बन आधारित लघु संयुक्त चक्रीय विद्युत परियोजनाएं सम्मिलित हैं।
इन परियोजनाओं में व्यापक निवेश की पूर्ति के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा।
सुविधाएं
विद्युत वितरण एजेंसियों के साथ उद्योग के इंटरफेस के उन्नयन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
राज्य सार्वजनिक अथवा निजी क्षेत्र में विकसित किए जा रहे सभी संभावित औद्योगिक क्षेत्रों में समर्पित विद्युत संयंत्रों को सुविधाएं प्रदान करेगा।
औद्योगिक क्षेत्र के भीतर विद्युत के वितरण के लिए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कर रही एजेंसियों अथवा निजी व्यक्तियों को वितरण लाइसेंस दिए जाएंगे।
सरकार एचएसआईडीसी/निजी पार्टियों को औद्योगिक क्षेत्र के भीतर विद्युत के वितरण के लिए लाइसेंस के साथ औद्योगिक क्षेत्रों के लिए निजी कैप्टिव विद्युत सृजन को प्रोत्साहित करेगी।
जेनरेटर सैटों की स्थापना के लिए वितरण एजेंसी को किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी और केवल सूचना देना ही पर्याप्त होगा।
सरकार एक चरणबद्ध रूप में सभी औद्योगिक इकाइयों को ग्रामीण फीडर से शहरी/औद्योगिक फीडरों तक जोड़ने का प्रयास करेगी।
लोड में कमी और अनुबंध मांग की मुक्त रूप में अनुमति होगी।
पहले छ: महीनों के लिए, नए औद्योगिक उपभोक्ताओं से वास्तविक उपभोग अथवा न्यूनतम शुल्क के 50 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, का प्रभार लिया जाएगा।
लोड बढ़ाने के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाएगा।
राज्य स्तरीय समिति में लिए गए निर्णयों को प्राथमिकता के आधार पर कार्यान्वित किया जाएगा।
100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश परियोजनाओं को विद्युत कनेक्शन जारी करने के लिए पृथक प्राथमिकता सूची बनाई जाएगी।
विद्युत कनेक्शनों जारी करने के लिए एक समयबद्ध तालिका सुनिश्चित की जाएगी।
परिवहन
राज्य सरकार तीव्रतर वाहनीय यातयात के लिए एक्सप्रेस राजमार्गों और मुक्त मार्गों के निर्माण का प्रयास करेगी। सरकार चार लेन आरओबी सहित बनाओ-चलाओ-सौंपो आधार पर सड़कों के उन्नयन और आरओबी के निर्माण के लिए इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करेगी।
वित्तीय संरचना
हरियाणा वित्त निगम (एचएफसी) और हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम मध्यम और लघु उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने कार्यों में तेज़ी लाएंगे। राज्य सरकार सूचना प्रौद्योगिकी पर निर्भरता और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुकूल वृहत्तर व्यावसायिक तरीके से इन संस्थानों के कार्यों के आधुनिकीकरण को सुनिश्चित करेगी। उद्यम पूंजी, लघु और मध्यम व्यवसाय नवीकरण और निवेशक सुरक्षा सेवाओं पर ध्यान देने की उनकी भूमिका का पुनर्निर्धारण अनिवार्य होगा।
मानव संसाधन विकास
औद्योगिक विकास के वर्तमान प्रचलन और भावी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, उद्योग संघों के परामर्श से दीर्घावधि मानव संसाधन विकास योजना तैयार की जा रही है। राज्य में आने वाली औद्योगिक इकाइयों से विभिन्न कौशलों की क्षेत्र विशिष्ट आवश्यकातओं को प्रक्षेपित करने के लिए कहा जा रहा है। उन्हें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निकों में पाठ्यक्रमों को अंतिम रूप देने में सम्मिलित किया जाएगा ताकि स्थानीय युवाओं के लिए उपयुक्त पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें।
अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों और गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को उद्यमिता प्रदान करने पर विशेष बल दिया जाएगा।
संवेगी क्षेत्र
राज्य में औद्योगिक निवेश के संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने निम्नलिखित संवेगी क्षेत्रों को चिह्नित किया है:
कृषि आधारित और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग।
इलैक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार।
ऑटोमोबाइल, ऑटोमोटिव कंपोनेंट और हल्की तथा मध्यम इंजीनियरिंग।
हैंडलूम, होजियरी, टैक्सटाइल और परिधान निर्माण।
निर्यातोन्मुख इकाइयां।
इन संवेगी क्षेत्रों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उद्योग निदेशालय में विशेष कक्ष स्थापित किए जाएंगे। इन कक्षों को बाह्य विशेषज्ञ सहायता प्रदान की जाएगी।
संवेगी क्षेत्रों की सहायता के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
इलैक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार
दूरसंचार नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता को केंद्रीय सरकार द्वारा पहले ही अनुमति दी जा चुकी है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्र में इन प्रणालियों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी। राज्य सरकार अर्थव्यवस्था में दक्षता को बढ़ाने के लिए आधुनिक संचार नेटवर्कों के अन्य प्रकारों की संभावना को स्वीकार करते हुए उनकी स्थापना के लिए भी सुविधाएं प्रदान करेगी।
गुड़गांव में पहले से विद्यमान हार्डवेयर टैक्नॉलॉजी पार्क, सॉफ्टवेयर टैक्नॉलॉजी पार्क और इलैक्ट्रॉनिक्स सिटी के उन्नयन के लिए, सरकार उपयुक्त संरचनाओं के सृजन के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को सुविधाएं प्रदान करेगी।
हरियाणा राज्य इलैक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (हरट्रॉन) की कार्यशैली को इस क्षेत्र की उभरती आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपयुक्त रूप से पुनर्निधारित किया जाएगा।
राज्य के पॉलिटैक्निकों में विशेषीकृत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे।
सॉफ्टवेयर उद्योगों के लिए तीन शिफ्टों की अनुमति दी जाएगी।
तीव्र गति डाटा संचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए गुड़गांव में एक समर्पित अर्थ स्टेशन की स्थापना की जाएगी।
ऑटोमोबाइल और ऑटोमोटिव कंपोनेंट आदि
आईएमटी मानेसर में एक विशेषीकृत औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
विशेषीकृत सुविधाएं प्रदान करने के लिए उद्योग के सहयोग से गुड़गांव/फरीदाबाद में एक अनुसंधान और विकास केंद्र स्थापित किया जाएगा।
नवीनतम प्रौद्योगिकीय डिज़ाइनों के अनुसार परीक्षण/सामान्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र में फरीदाबाद और गुड़गांव में गुणवत्ता निर्माण केंद्रों और हीट ट्रीटमेंट केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
कृषि-आधारित और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
हैंडलूम, हौजियरी, टैक्सटाइल और परिधान
इस क्षेत्र के लिए एक विशेषीकृत औद्योगिक क्षेत्र ग्राम बढ़ी, गन्नौर में विकसित किया जा रहा है। सरकार सुनिश्चित करेगी कि इस क्षेत्र का विकास प्राथमिकता के आधार पर हो।
एक परिधान और डिज़ाइन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा।
विशेष उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
परिधान उद्योग के लिए कंप्यूटरीकृत वैश्विक बाज़ार सूचना डाटा और डिज़ाइन केंद्र के सृजन के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाएगा।
परिधान उद्योग को कुशल श्रमिक प्रदान करने के लिए इस क्षेत्र में तकनीकी संस्थानों का उपयुक्त रूप में उन्नयन और विस्तार किया जाएगा।
निर्यातोन्मुख इकाइयां
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली के निकट सैटेलाइट फ्राइट सिटी की स्थापना के लिए भारत सरकार से विचार-विमर्श किया जाएगा। इस शहर का विकास एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा विदेशी एयरलाइनों के सहयोग से किया जाएगा। आगे चलकर यह उत्तरी क्षेत्र से एयर कार्गो की तीव्र क्लियरेंस में सहायक होगा।
निर्यात मदों को कार्गो कॉम्पलेक्सों/बंदरगाहों तक परिवहन की सुविधा प्रदान करने के लिए वेयरहाउसिंग कारपोरेशन और निजी क्षेत्र के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो की स्थापना के लिए राज्य सरकार प्रयास करेगी। यह रेवाड़ी और फरीदाबाद में पहले से विद्यमान सुविधाओं और मुरथल में योजनाबद्ध उद्यम का अनुपूरक होगा।
वेयरहाउसिंग कारपोरेशन एपीडा के सहयोग से कांडला में भी एक कार्गो संचालन सुविधा की स्थापना कर रहा है।
केवल निर्यातोन्मुख इकाइयों, अनिवासी भारतीयों और विदेशी इक्विटी सहभागिता वाली इकाइयों के लिए 10 प्रतिशत भूखंड आरक्षित रखे जाएंगे।
विद्युत कनेक्शन जारी करने और क्षेत्र में उपलब्धता के अनुसार बिना किसी कटौती के विद्युत आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।
राज्य विचार करेगा कि नकारात्मक सूची को 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों पर लागू न किया जाए।
हरियाणा राज्य लघु उद्योग एवं निर्यात निगम (एचएसएसआई एंड ईसी) को निर्यात गृह का दर्जा दिया गया है। यह निगम राज्य से विशेषकर चावल, हैंडलूम, हस्तशिल्प, ऑटो पार्ट्स आदि जैसी मदों के निर्यात को बढ़ाने का प्रयास करेगा। निगम विदेशी मेलों में भी सक्रिय भागीदारी करेगा और निर्यातों को बढ़ाने के लिए राज्य की छवि बनाएगा।
100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों में हड़तालों को रोकने के लिए, राज्य सरकार ने सभी 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों को सार्वजनिक उपयोगिता के अंतर्गत लाने की अधिसूचना जारी कर दी है।
प्रोत्साहन योजना
प्रोत्साहनों के विशेष पैकेज
30 करोड़ रुपए अथवा अधिक की प्रतिष्ठित परियोजनाओं के िलए प्रोत्साहनों और रियायतों का विशेष पैकेज प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक मामले में पैकेज के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की जाएगी।
बिक्रीकर रियायतें
बिक्रीकर रियायतों का लाभ पात्र इकाई के विकल्प पर ग्रेडिड स्केल अथवा स्थाई स्लैब स्केल पर नई इकाइयों के लिए उपलब्ध होगा।
बिक्रीकर रियायत प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा:
श्रेणी "क" गुड़गांव शहर की नगरपालिका सीमाओं के भीतर के क्षेत्र।
गुड़गांव जिले का गुड़गांव ब्लॉक (मानेसर के अलावा), फरीदाबाद नगरपालिका कॉम्पलेक्स की नगरपालिका सीमाएं, फरीदाबाद जिले के फरीदाबाद और बल्लभगढ़ ब्लॉक।
श्रेणी "ख" कुंडली, बहादुरगढ़ और पानीपत नगरों के नियंत्रित क्षेत्र, आईएमटी मानेसर तथा पंचकुला अर्बन एस्टेट।
श्रेणी "ग" उपरोक्त के अलावा राज्य के शेष क्षेत्र।
लघु उद्योग इकाइयों में नई इकाइयों और बड़ी तथा मध्यम इकाइयों के लिए बिक्रीकर रियायतों की अधिकतम सीमा और छूट की अधिकतम अवधि जिसके लिए लाभ उपलब्ध है, निम्नानुसार हैं:-
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श्रेणी |
रियायत की सीमा |
समय सीमा |
रियायत का पैमाना |
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लघु उद्योग |
मध्यम/बड़े उद्योग |
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क |
स्थाई पूंजी निवेश का 125% |
स्थाई पूंजी निवेश का 100% |
9 वर्ष |
पहले वर्ष से नौवें वर्ष तक 50% छूट |
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ख |
स्थाई पूंजी निवेश का 125% |
स्थाई पूंजी निवेश का 100% |
10 वर्ष |
पहला वर्ष 80%
दूसरा वर्ष 60%
तीसरा वर्ष 60%
चौथा वर्ष 50%
पांचवां वर्ष 50%
छठा वर्ष 50%
सातवां वर्ष 50%
आठवां वर्ष 40%
नौवां वर्ष 30%
दसवां वर्ष 20% |
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ग |
स्थाई पूंजी निवेश का 150% |
स्थाई पूंजी निवेश का 125% |
11 years |
पहला वर्ष 80%
दूसरा वर्ष 60%
तीसरा वर्ष 60%
चौथा वर्ष 50%
पांचवां वर्ष 50%
छठा वर्ष 50%
सातवां वर्ष 50%
आठवां वर्ष 40%
नौवां वर्ष 30%
दसवां वर्ष 30%
ग्यारहवां वर्ष 20% |
टिप्पणी 1: बिक्रीकर रियायतों का लाभ नकारात्मक सूची में आने वाली इकाइयों को देय नहीं होगा(अनुबंध-2)।
टिप्पणी 2: बिक्रीकर छूट का लाभ प्राप्त करने के बाद श्रेणी "ख" और "ग" में सभी नई औद्योगिक इकाइयां न्यूनतम अगले पांच वर्षों तक अपना उत्पादन जारी रखेंगी जो पिछले पांच वर्षों के औसत उत्पादन के स्तर से कम नहीं होगा।
टिप्पणी 3: श्रेणी "ख" और "ग" में आने वाली नई औद्योगिक इकाइयां श्रेणी "क" की इकाइयों पर लागू होने वाले स्थाई स्लैब स्केल पर रियायतों के स्केल का चयन कर सकती हैं। इस विकल्प के मामले में, उपरोक्त टिप्पणी 2 की शर्त लागू नहीं होगी।
टिप्पणी 4: पात्र इकाइयों को अनुप्रयोज्य बिक्रीकर एकत्र करने और राज्य सब्सिडी के रूप में अनुमेय लाभ अपने पास रखने का अधिकार होगा।
टिप्पणी 5: स्थाई पूंजी निवेश की गणना के लिए भूमि और भवन में निवेश संयंत्र और मशीनरी में निवेश से अधिक नहीं होगा।
टिप्पणी 6: कृषि-आधारित इकाइयों को रियायतों की अधिकतम सीमा स्थाई पूंजी निवेश की 250 प्रतिशत होगी और सूचना प्रौद्योगिकी/सॉफ्टवेयर/इलैक्ट्रॉनिक्स के लिए स्थाई पूंजी निवेश की 300 प्रतिशत होगी।
टिप्पणी 7:पिछली नीतियों के अंतर्गत बिक्रीकर छूट/आस्थगन प्राप्त कर रही विद्यमान इकाइयों को बकाया पात्रता/अवधि के लिए इस नीति के अनुसार कर प्रोत्साहन प्राप्त करने का विकल्प होगा।
विस्तार/विविधिकरण पर बिक्रीकर रियायतें
विस्तार/विविधिकरण कर रहीं औद्योगिक इकाइयों को उपरोक्त स्केल के अनुसार बिक्रीकर छूट का लाभ केवल संयंत्र और मशीनरी में निवेश पर प्रदान किया जाएगा। इस लाभ को 50 प्रतिशत स्थाई स्लैब स्केल तक सीमित किया जाएगा और पांच वर्षों के लिए दिया जाएगा।
विद्युत शुल्क के भुगतान से छूट
उद्योगों की नकारात्मक सूची के अलावा सभी नई औद्योगिक इकाइयों को पूरे राज्य में 5 वर्षों की अवधि के लिए विद्युत शुल्क के भुगतान से छूट दी जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में अति लघु इकाइयों को प्रोत्साहन
ग्रामीण उद्योग योजना के अंतर्गत स्थापित औद्योगिक इकाइयां निम्नलिखित लाभों के लिए पात्र होंगी:
क) लघु उद्योग क्षेत्र की अन्य इकाइयों के समकक्ष विद्युत शुल्क छूट और बिक्रीकर रियायतें।
ख) 10 प्रतिशत मूल्य वरीयता।
ग) विपणन सहायता।
रुग्ण इकाइयों को प्रोत्साहन
राज्य सरकार उन रुग्ण और संभावित रुग्ण औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीविकरण के लिए आवश्यक कदम उठाएगी जिन्हें जीवनक्षम बनाने में सहायता दी जा सकती है। यदि इकाइयों को जीवनक्षम बनाया जा सकता है तो बिक्रीकर रियायतों की स्वीकृति के लिए गठित उच्चतर स्तरीय स्क्रीनिंग समिति को रुग्ण/संभावित रुग्ण इकाइयों को तीन वर्षों की अवधि के लिए नई इकाइयों के समकक्ष बिक्रीकर रियायतें प्रदान करने का अधिकार दिया जाएगा।
राज्य वित्त संस्थानों द्वारा वित्तपोषित किसी औद्योगिक इकाई से व्यतिक्रम के लिए दंडात्मक जुर्माना नहीं लिया जाएगा, यदि वह प्रबंधन को संतुष्ट कर दे कि व्यतिक्रम जानबूझकर नहीं किया गया था।
अनिवासी भारतीयों द्वारा निवेशों का संवर्धन
अनिवासी भारतीयों से निवेशों को प्रोत्साहित करने के लिए, निम्नलिखित विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी:
औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में आरक्षण।
अनुरक्षण सेवाएं।
संयुक्त उद्यमों/एचएसआईडीसी, हरट्रॉन और एचएसएआईसी द्वारा सहायताप्राप्त क्षेत्र की परियोजनाओं में वरीयता।
एकल संपर्क बिंदु सेवाएं और औद्योगिक सहायता समूह के माध्यम से समयबद्ध क्लियरेंस।
आवासीय भूखंडों के आवंटन में प्राथमिकता।
लघु उद्योग क्षेत्र का विकास
• राज्य सरकार का प्रयास लघु और मध्यम उद्यमों के विकास को अत्यधिक महत्व प्रदान करना होगा।
• स्वास्थ्यकर और संतुलित विकास को सुनिश्चित करने के लिए अनुषंगियों का विकास एक प्राथमिक क्षेत्र होगा।
• लघु उद्योग/ग्रामीण उद्योग क्षेत्र को प्रभावी विपणन सहायता प्रदान करने के लिए एचएसएसआई एंड ईसी और कॉनफेड की भूमिका का अनुकूलन किया जाएगा।
• लघु उद्योग इकाइयों को समयबद्ध भुगतान से संबंधित प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
• गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के उत्पादन में सक्षम बनाने के लिए लघु उद्योग इकाइयों को उपयुक्त लागत पर परीक्षण और सामान्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
• नवीनतम विपणन प्रचलनों पर तकनीकी सूचना प्रदान करने के लिए विभिन्न विषयों पर सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
लघु और मध्यम उद्यम नवीकरण फंड
उदारीकरण के बाद के परिदृश्य में लघु और मध्यम उद्यमों ने अधिकतम चुनौतियों का सामना किया है। सरकार लघु और मध्यम उद्यमों के निष्पादन के उन्नयन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उन्हें सक्षम बनाने के लिए कदम उठाएगी। निम्नलिखित के लिए लघु और मध्यम उद्यम नवीकरण फंड स्थापित किया जाएगा:
प्रौद्योगिकी उन्नयन
गुणवत्ता जागरुकता उत्पन्न करना
उन्नत विपणन के लिए ब्रांडिंग का संवर्धन
उन्नत प्रबंधकीय संव्यवहारों को अपनाना
क्षमता निर्माण
लघु और मध्यम उद्यम नवीकरण फंड की स्थापना राज्य एजेंसियों द्वारा बेचे गए औद्योगिक भूखंडों के बिक्री मूल्य पर 5 प्रतिशत प्रभार लगाकर की जाएगी। यह फंड वित्तीय और प्रबंधकीय क्षमता, प्रौद्योगिकी उन्नयन, लघु तथा मध्यम उद्यमों की ब्रांडिंग के संवर्धन और क्षमता निर्माण आवश्यकताओं के लिए प्रयोग किया जाएगा। यह फंड लघु और मध्यम उद्यमों तथा राष्ट्रीय, द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय सहायता संस्थानों में निवेशों के स्रोतों के मध्य इंटरफेस के रूप में कार्य करेगा।
उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी)
राज्य के तीव्र औद्योगिकरण के लिए राज्य उद्यमिता संवर्धन हेतु प्रभावी उपाय करेगा। ग्रामीण युवाओं और महिलाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों को अंतिम रूप देने तथा उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का आयोजन करने में गैर-सरकारी संगइनों और उद्योग संघों को पूर्णत: सम्मिलित किया जाएगा।
ग्रामीण औद्योगिकरण
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि के विविधिकरण, भूमि पर दबाव कम करने और बेराज़गारी तथा अर्धबेरोज़गारी की चुनौती से निपटने के लिए ग्रामीण औद्योगिकरण को विशेष महत्व दिया जाएगा। खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड, हरियाणा हथकरघा और हस्तशिल्प निगम, एचएसएसआई और ईसी जैसी विभिन्न एजेंसियों तथा गैर-सरकारी संगठनों को इस काम में प्रभावी रूप से सम्मिलित किया जाएगा।
प्रौद्योगिकी उन्नयन, प्रशिक्षण, डिज़ाइन और विकास तथा विपणन के क्षेत्रों पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। क्लस्टर अभिगम को अपनाने के प्रयास किए जाएंगे ताकि डिज़ाइन और विकास सहायता, कच्चा माल आदि जैसी सामान्य सेवाएं प्रभावी रूप से प्रदान की जा सकें।
सरकार हथकरघा क्षेत्र के विकास पर पूरा ध्यान देगी। बुनकरों को उचित मूल्य पर धागा उपलब्ध कराया जाएगा और हथकरघों के आधुनिकीकरण के कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा। बुनकरों को कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे उच्च गुणवत्तापूर्ण हथकरघा वस्त्रों का उत्पादन करने में सक्षम हो सकें।
सेवा क्षेत्र का विकास
राज्य में सेवा क्षेत्र में वृद्धि आर्थिक विकास के स्तर के साथ नहीं चल पाई है। उच्च मूल्य रोज़गार अवसरों और कम निवेश सघनता के कारण सरकार सेवा क्षेत्र के विकास के लाभ को समझती है। राज्य सरकार कृषि और निर्माता के साथ अंतर-संपर्कों का विकास करने के लिए इस क्षेत्र के विकास को बढ़ाने का प्रस्ताव करती है। इस क्षेत्र में सरकारी नीतियों का ध्यान परिवहन के विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, व्यापार और विपणन पर रहेगा।
विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उपभोक्ता बाज़ारों के विकास, फल, सब्जियों, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के विपणन, जन परिवहन प्रणालियों और इलैक्ट्रॉनिक डाटा प्रोसेसिंग में सेवाओं को सुविधा प्रदान की जाएगी। राज्य के शेष क्षेत्रों के साथ भी उपयुक्त संपर्क विकसित किए जाएंगे।
कृषि क्षेत्र में विविधिकरण
राज्य सरकार कृषि क्षेत्र जो राज्य घरेलू उत्पाद में सर्वाधिक योगदान देता है और इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, में मूल्य संवर्धन के महत्व को समझती है। कृषि क्षेत्र से प्रसंस्करण तक अग्रगामी संपर्कों को एक केंद्रित अभिगम द्वारा विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार फसल पद्धति में उपयुक्त परिवर्तन, उच्च मूल्य फसलों और कृषि संबंधी आधुनिक प्रणालियों की शुरूआत के लिए अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करते हुए कृषि का विविधिकरण करने की अपनी वचनबद्धता को जारी रखेगी।
कर सुधार और वित्तीय अनुशासन
सभी उत्तरी राज्य इस क्षेत्र में कर की दरों में समानता लाने और उपयुक्त रूप से वस्तुओं को समूहबद्ध करके स्लैबों की संख्या कम करके सरलीकृत प्रणाली लाने के लिए सहमत हो गए हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनुवर्ती उपाय किए जाएंगे।
उद्योगों और राजस्व एकत्र करने वाली एजेंसियों के मध्य संबंधों को सुधारने के लिए राज्य सरकार द्वारा 50 लाख रुपए से अधिक के टर्नओवर वाली विनिर्माण इकाइयों/व्यापारियों के लिए स्व आकलन योजना, कुछ विधिक प्रपत्रों की समाप्ति, विवादों के निपटाने की योजनाओं, डाटाबैंक का कंप्यूटरीकरण आदि की शुरूआत जैसे अन्य उपायों पर विचार किया जाएगा।
राज्य सरकार अपनी निवेश नीतियों की प्राथमिकता को राज्य की विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप करने का प्रयास करेगी।
बचत
अन्य कोई मामला, जिसे इस योजना के अंतर्गत विशेष रूप से सम्मिलित नहीं किया गया है अथवा जिस पर कोई स्पष्टीकरण अथवा छूट की आवश्यकता है, को निर्णय/ स्पष्टीकरण के लिए सरकार को भेजा जाएगा और उस पर सरकार का निर्णय नीति का एक भाग बन जाएगा।
अनुबंध-1
विभिन्न सक्षम प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदनों/अनुमतियों के लिए निर्धारित समय-तालिका निम्न प्रकार है:-
क्रमांक |
संबंधित विभाग/
संगठन
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वांछित अनुमति/ अनुमोदन/पंजीकरण |
समय
सीमा
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टिप्पणी |
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1. |
उद्योग |
) एलओआई/आईएल हेतु भारत सरकार को अनुशंसा |
15 दिन |
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2) लघु उद्योग के रूप में अनंतिम पंजीकरण |
24 घंटे |
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3) लघु उद्योग के रूप में स्थाई पंजीकरण |
7 दिन |
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4) बिक्रीकर रियायतों का लाभ प्रदान करना |
90 दिन |
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2. |
एचएसआईडीसी/ एचएफसी |
ऋण की स्वीकृति |
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1) स्थानीय स्तर पर स्वीकृति |
30 दिन |
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2) मुख्यालय स्तर पर स्वीकृति |
45 दिन |
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3) भूखंड का आवंटन |
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3. |
एचवीपीएनएल |
क) 20 कि.वॉ. तक लोड हेतु |
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1) मांग नोटिस जारी करना |
15 दिन |
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2) कनेक्शन जारी करना |
21 दिन |
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3) कनेक्शन जारी करना |
यदि कोई संवर्धन वांछित न हो तो 30 दिन |
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ख) 70 कि.वॉ. तक लोड हेतु |
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1) मांग नोटिस जारी करना |
21 दिन |
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2) कनेक्शन जारी करना |
45 दिन |
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ग) 250 कि.वॉ. से अधिक लोड हेतु |
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i1) मांग नोटिस जारी करना |
30 दिन |
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i2) कनेक्शन जारी करना |
60 दिन |
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घ) 1 मेगावॉट से अधिक लोड हेतु |
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1) अनुमोदन जारी करना |
15 दिन |
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2) मांग नोटिस |
30 दिन |
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3) कनेक्शन जारी करना |
60 दिन |
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ङ) लोड का विस्तार |
यदि कोई संवर्धन वांछित न हो तो 30 दिन |
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च) लोड में कमी |
15 दिन |
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4. |
एचपीसीबी |
1) अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करना |
7 दिन |
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2) 17 अत्यधिक प्रदूषित उद्योगों के अलावा परीक्षण उत्पादन हेतु स्वीकृति |
15 दिन |
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3) 17 अत्यधिक प्रदूषित उद्योगों के अलावा संचालन की स्वीकृति |
21 दिन |
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|
4) खतरनाक अपशिष्टों के भंडारण /एकत्रीकरण के लिए अनुमति |
30 दिन |
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5) स्वीकृति का नवीकरण |
30 दिन |
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5. |
शहरी और ग्रामीण आयोजना |
1) औद्योगिक क्षेत्र में भू-उपयोग में परिवर्तन |
30 दिनs |
मानद |
30 दिन के बाद |
अनुमोदन |
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|
2) औद्योगिक क्षेत्र के अलावा नियंत्रित क्षेत्रों में भू-उपयोग में परिवर्तन |
60 दिन |
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3) शहरी क्षेत्र अधिनियम के अंतर्गत औद्योगिक इकाई स्थापित करने हेतु अनापत्ति प्रमाणपत्र |
15 दिन |
मानद |
15 दिन के बाद |
अनुमोदन |
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4) भवन आयोजना का अनुमोदन |
30 दिन |
मानद |
30 दिन के बाद |
अनुमोदन |
6. |
पर्यावरण विभाग |
भारत सरकार द्वारा चिह्नित 17 अत्यधिक प्रदूषित उद्योगों के लिए स्थल की अनुमति |
60 दिन |
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श्रम विभाग/ कारखानों के मुख्य निरीक्षक |
1) कारखाना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत कारखाने का अनुमोदन |
30 दिन |
मानद |
30 दिन के बाद |
अनुमोदन |
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2) कारखाना चलाने हेतु लाइसेंस |
15 दिन |
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7. |
बॉयलरों का निरीक्षणालय |
1) बॉयलर का पंजीकरण |
15 दिन |
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2) बॉयलर चलाने के लिए अंनतिम आदेश |
15 दिन |
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| |
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3) अंतिम आदेश |
30 दिन |
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8. |
स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय |
ड्रग लाइसेंस |
30 दिन |
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9. |
बिक्रीकर |
1) डीलर के रूप में बिक्रीकर पंजीकरण |
15 दिन |
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2) नई इकाइयों का बिक्रीकर पंजीकरण |
90 दिन |
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अनुबंध-2
नकारात्मक सूची
कंपोजिट इकाई सहित ऑयल एक्सपैलर्स, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन संयंत्र, तेलशोधक (खाद्य और अखाद्य), वनस्पति घी।
दाल मिल और चावल मिल
स्टोन क्रशर
रीफ्रैक्टरी ईंटों के अलावा ईंटें
चूना भट्ठी
थिनर और वार्निश
0.6 एमटी क्षमता से अधिक की इंडक्शन और एआरसी फर्नेन्स
आटा चक्की और सभी प्रकार की आटा मिलें
रूई ओटाई और दबाना
उत्पादन के लिए उद्योगों को प्रत्यक्ष रूप में सेवा प्रदान न करने वाली सभी सेवा इकाइयां
सॉफ्ट ड्रिंक (गैसयुक्त पानी)
बर्फ संयंत्र
चीनी
सल्फ्यूरिक एसिड
तांबा प्रगालक
दवाओं, सौंदर्य-प्रसाधनों, कीटनाशकों, जड़ी-बूटी से बनी दवाओं और खाद्य उत्पादों सहित वस्तुओं की पैकिंग
जिंक प्रगालक, जिंक राख, कचरा और अपशिष्ट से जिंक धातु की प्राप्ति
डाइयां और डाई इंटरमीडिएट्स
अन्य तंबाकू उत्पादों सहित तंबाकू से निर्मित सिगार और तंबाकू की सिगरेटें
रद्दी ऊन का धागा
कच्चे तेल का शोधन
उपयोगी तेल का शोधन
सीआर शीटों, गैल्वेनाइज्ड शीटों और कास्टिंग के निर्माण के लिए लोहे और इस्पात का द्वितीय प्रसंस्करण
इथाइल एल्कोहल का निर्माण/डिस्टलरी/फर्मेन्टेशन/ब्रुअरी
खांडसारी इकाई
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