- पृष्ठभूमि
1971 में राज्य का दर्ज़ा प्राप्त करने के बाद से ही, हिमाचल प्रदेश ने अंतर-क्षेत्रीय विकास की संतुलित नीति को अपनाया है जिससे राज्य की जनता के जीवन स्तर को बढ़ाने और संपूर्ण संपन्नता के उद्देश्य को प्राप्त किया जाए। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने की नीति ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। राज्य के तीव्र कृषि और बागवानी विकास ने अर्थव्यवस्था और जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज राज्य में अन्न उत्पादन 14 लाख टन प्रतिवर्ष से अधिक है। सब्जियों का उत्पादन लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष है। फल उत्पादन ने भी काफी वृद्धि दर्ज़ की है और यह 5 लाख टन प्रतिवर्ष है। परिणामस्वरूप, राज्य में प्रति व्यक्ति आय 1980-81 में 1704 रुपए से बढ़कर 1992-93 में 2012 रुपए हो गई है। आज गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों का प्रतिशत 30 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत की तुलना में केवल लगभग 9 प्रतिशत है। ऊर्जा क्षेत्र जिसे विकास के लिए एक संवेगी क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है, में आज राज्य हाइड्रोइलैक्ट्रिक ऊर्जा का सृजन कर रहा है। इसके साथ-साथ, वर्ष 2000 तक लगभग 2000 मेगावॉट अतिरिक्त हाइड्रोइलैक्ट्रिक ऊर्जा का सृजन किया जाएगा। राज्य में यातयात के योग्य सड़कों की लंबाई बढ़कर 19000 किलोमीटर से अधिक हो गई है और अन्य सड़कों के साथ आज राज्य के 7521 से अधिक गांव जुड़े हैं। राज्य का साक्षरता प्रतिशत अब 63.86 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राज्य में कार्यरत् एक क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज सहित 37 तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान हैं। राज्य में आने वाले पर्यटकों की बहुसंख्या को देखते हुए पर्यटन क्षेत्र में भी आगामी वृद्धि की संभावना है। इस प्रकार तीव्र कृषि और औद्योगिक विकास, लाभदायक रोज़गारों के लिए तेजी से बढ़ते अवसरों, गरीबी में कमी और उसे मिटाने तथा सामाजिक व आर्थिक असमानताओं को कम करने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक सुदृढ़ आधार सृजित किया गया है।
- औद्योगिक नीति 1991:
हिमाचल प्रदेश की पिछली औद्योगिक नीति की घोषणा 1991 में की गई थी। तब से लेकर अब तक, देश में आर्थिक नीति वातावरण में काफी परिवर्तन हो गए हैं। इसलिए, विद्यमान औद्योगिकी नीति की समीक्षा करना और परिवर्तित आर्थिक परिदृश्य में औद्योगिकी विकास की राज्य सरकार की नीति की स्पष्ट व्याख्या करना आवश्यक हो गया है। 1991 के औद्योगिक नीति कथन में निम्नलिखित उद्देश्यों को रखा गया है:
क. सकल घरेलू उत्पाद में औद्योगिक क्षेत्र का अधिक भाग
ख. योजनाओं में औद्योगिक क्षेत्र को उच्चतर प्राथमिकता
ग. रोज़गार के नए क्षेत्रों का सृजन
घ. संसाधनों और स्थानीय कच्चे माल का अधिकतम उपयोग
ङ. उद्योगों का भौगोलिक फैलाव
च. सार्वजनिक/निजी क्षेत्र की भूमिका
छ. अन्य क्षेत्रों के विकास के साथ एकीकृत औद्योगिक विकास
ज. उत्पादकता उन्नयन, प्रौद्योगिकीय उन्नयन और अनिवासी भारतीयों द्वारा निवेश
- वर्तमान स्थिति::
भारत सरकार द्वारा जुलाई 1991 में प्रारंभ की गई आर्थिक सुधार की प्रक्रिया और लाइसेंसराज की समाप्ति तथा चिह्नित क्षेत्रों में विदेशी निवेश के स्वयंमेव अनुमोदनों के रूप में परिणामिक औद्योगिक नीति सुधारों/पहलों ने महत्वपूर्ण निवेशक हितों का सृजन किया है। हिमाचल प्रदेश में औद्योगिकरण की प्रगति को निम्नलिखित आंकड़ों से मापा जा सकता है: