राज्य
नीति

जम्मू और कश्मीर

बड़े/मध्यम/लघु और अति लघु क्षेत्र के उद्योगों के विकास के लिए प्रोत्साहन

सूचना स्रोत: जम्मू और कश्मीर राज्य औद्योगिक विभाग

जम्मू और कश्मीर राज्य में उद्योगों के विकास के लिए राज्य सरकार ने औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में बड़े/मध्य/लघु और अति लघु उद्योगों के लिए अनेक प्रोत्साहन प्रदान किए हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार ने हालही में एक आदेश जारी किया है जो राज्य प्राधिकरणों द्वारा प्रदान किए गए प्रोत्साहनों को दर्शाता है। ये प्रोत्साहन निम्नानुसार हैं:-

औद्योगिक संपदाओं/औद्योगिक संपदाओं के बाहर सरकारी भूमि के आवंटन और अन्य मामलों में लाभों को निम्न प्रकार से विनियमित किया जाएगा:-

  1. पट्टे के अवधि 90 वर्ष होगी जिसमें प्रत्येक 5 वर्ष के बाद किराए में संशोधन के लिए पट्टा करार का प्रावधान होगा। 2 प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अध्यधीन किराए में संशोधन सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुरूप होगा।
  2. भूमि पर प्रीमियम और किराया इस उद्देश्य के लिए अलग से जारी की जाने वाली सरकारी अधिसूचना के अनुसार होगा।

संभाव्यता रिपोर्ट:

एक प्रतिष्ठित एजेंसी द्वारा तैयार परियोजना रिपोर्ट और सक्षम प्राधिकरण द्वारा इसे स्वीकृत किए जाने के बाद परियोजना रिपोर्ट की लागत पर सब्सिडी के लिए अर्हताप्राप्त हो जाएगी। योजना आईटीसीओ, एसआईसीओ, लघु उद्योग सेवा संस्थान और ऐसे ही सरकारी एजेंसियों द्वारा तैयार की गई परियोजना रिपोर्टों पर समान रूप से लागू होगी। इकाई द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के बाद सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

विद्युत प्रशुल्क/डीज़ल जेनेरेशन सैट::

  1. केवल 1 मेगावाट के नए डीज़ल जेनेरेशन सैटों की खरीद पर सस्बिडी की अनुमति होगी। यह सब्सिडी 100 प्रतिशत होगी और यह इस बात की पुष्टि करने के बाद उपलब्ध कराई जाएगी कि डीज़ल सैटों को वास्तविक रूप में स्थापित कर दिया गया है। केवल प्रतिष्ठित कंपनियों से खरीदे गए डीज़ल जेनेरेटिंग सैटों पर ही सब्सिडी दी जाएगी।
  2. सरकार व्यक्ति अथवा उद्योगों के समूहों द्वारा कैप्टिव थर्मल अथवा हायडल जेनेरेटिंग सैटों की स्थापना की अनुमति देगी।
  3. डीज़ल जेनेरेटिंग सैटों पर सब्सिडी की उपलब्धता के लिए निम्नलिखित शर्तें हैं:-

    क. इस सब्सिडी की पात्रता के लिए वित्तीय संस्थान से ऋण लिया जाना होगा जिसका अर्थ है कि जो व्यवसाई स्वयं जेनेरेटिंग सैट खरीद रहे हैं, वे सब्सिडी के पात्र नहीं होंगे।

    ख. सब्सिडी की राशि सीधे व्यवसाइयों को नहीं दी जाएगी अपितु जेनेरेटरों की खरीद के लिए व्यवसाइयों के पक्ष में स्वीकृत ऋणों के समायोजन के लिए वित्तीय संस्थानों को दी जाएगी।

    ग. जेनेरेटर सैटों को उनकी स्थापना की तिथि से दस वर्षों की अवधि तक राज्य से बाहर स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। इसकी स्थापना की तिथि से दस वर्षों की निर्धारित अवधि की समाप्ति से पूर्व किसी वैध कारण से व्यवसाई द्वारा ऐसे स्थानांतरण के अनुरोध के मामले में, इकाई धारक को समय-समय पर लागू बैंक दरों पर ब्याज सहित उसे आवंटित सकल पूंजी सब्सिडी को लौटाना होगा।

मूल्य वरीयता:

  1. अगली अधिसूचना तक सभी पंजीकृत लघु उद्योग इकाइयों के लिए 12 1/2 प्रतिशत तक लागू रहेगा।
  2. सरकारी विभागों द्वारा अन्य संगठनों में कड़ाई से अनुवरण के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाओं को निर्धारित किया गया है:
  3. क. विभिन्न सरकारी विभागों सहित सार्वजनिक उपक्रमों में विभिन्न स्तरों पर सभी क्रय समितियों में उद्योग और वाणिज्य विभाग का न्यूनतम महाप्रबंधक स्तर का प्रतिनिधि निरपवाद रूप से सम्मिलित होगा।

    ख. यदि स्थानीय लघु उद्योग इकाई के उत्पाद की गुणवत्ता निस्संदेह है अथवा इसे संबंधित गुणवत्ता चिह्न, उदाहरणार्थ आईएसआई पीपीएस आदि, प्राप्त है और यदि दर कोटेशन 12 1/2 प्रतिशत के अंतर्गत है, तो क्रय समिति के लिए लघु उद्योग इकाइयों द्वारा उल्लिखित दरों पर कथित लघु उद्योग इकाई को अपने प्रतिनिधि यदि यह सिडको है, के माध्यम से क्रयादेश देना आवश्यक होगा।

    ग. यदि लघु उद्योग इकाई द्वारा उल्लिखित दरें प्राप्त निम्नतम् प्रस्ताव के 12 1/2 प्रतिशत के अंतर्गत नहीं है, तब भी लघु उद्योग क्षेत्र को प्रथम वरीयता पर पेशकश करना क्रय समिति के लिए अनिवार्य होगा। केवल तभी प्रक्रिया के अनुसार अन्य पक्षकारों को क्रयादेश दिए जा सकते हैं जब लघु उद्योग इकाई मांग की पूर्ति करने की सीमा तक मांग की पूर्ति करने में असमर्थ हो।

    घ. स्थानीय लघु उद्योग इकाई की किसी निविदा को तत्काल निरस्त नहीं किया जाएगा और प्रशासकीय विभाग अर्थात् उद्योग और वाणिज्य विभाग को संदर्भित किए बिना और उनकी सहमति के बिना उद्योग और वाणिज्य विभाग के प्रतिनिधि की राय का नकारा नहीं जा सकता।

    ङ. यदि कोई ऐसी लघु उद्योग इकाई है जिसने आपूर्ति एवं निपटान महानिदेशालय अथवा राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के साथ दर अनुबंध किया है, तो यह क्रय पर बाध्य होगा। समिति/विभाग उन्हें अनुमोदित दर अनुबंध पर सीधे क्रयादेश देंगे।

    च. किसी भी लघु उद्योग इकाई के लिए एसआईसीओपी के माध्यम से आना अथवा एसआईसीओपी के माध्यम से आपूर्ति आदेश चाहना अथवा विभाग के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करने के लिए एसआईसीओपी से अनुरोध करना/प्राधिकृत करना कानूनसम्मत होगा और ऐसे मामलों में एसआईसीओपी को मूल लघु उद्योग इकाई के रूप में माना जाएगा।

    छ. जिस इकाई ने पहले ही बीआईएस/आईएसओ 9000 स्पष्टीकरण प्राप्त कर लिए हैं, कोई क्रय विभाग/समिति ऐसी संबंधित लघु उद्योग इकाई को अतिरिक्त गुणवत्ता परीक्षण के लिए बाध्य नहीं करेंगे।

    ज. यदि विभाग लघु उद्योग इकाई को केवल परिवर्तन के लिए कच्चे माल की आपूर्ति करता है, केवल तभी लघु उद्योग इकाइयों के लिए उपलब्ध मूल्य वरीयता दर पर विचार करने के बाद उसी प्रकार परिवर्तन दरें लागू की जा सकती हैं जैसे इकाइयों को केवल परिवर्तन प्रभारों के स्थान पर विभाग को तैयार माल की आपूर्ति की जानी थी।

    झ. जहां मिलों द्वारा निर्मित सामानों के लिए बाज़ार मूल्य विधिक आदेशों जो लघु उद्योग इकाइयों पर लागू नहीं होते हैं, द्वारा नियंत्रित हैं, तो किन्हीं मदों के लिए मूल्य वरीयता पर ऐसी विधिक दरों के आधार पर विचार किया जा सकता है।

पेशगी राशि/प्रतिभूति जमा:

  1. लघु उद्योग इकाइयों को निविदा सूचना में निर्धारित पेशगी राशि/प्रतिभूति जमा का केवल 5 प्रतिशत अथवा 5000/- रुपए, जो भी अधिक हो, का भुगतान करना है।
  2. लघु उद्योग इकाइयों को आपूर्ति किए गए निविदा प्रलेख प्रत्येक मामले में 10/- रुपए से अधिक मूल्य के नहीं होंगे।
  3. सरकारी विभागों के समक्ष निविदा करने के उद्देश्य से एसआईसीओपी को लघु उद्योग इकाइयों के समकक्ष माना जाएगा।