राज्य
नीति

महाराष्ट्र की औद्योगिक नीति 2001


1.0प्रस्तावना
    महाराष्ट्र भारत के औद्योगिक मोर्चे पर अग्रणी रहा है। राज्य में सदैव संवाहक औद्योगिक वातावरण के सृजन द्वारा निरंतर औद्योगिक वृद्धि का विकास करने और निवेश के तीव्रतर प्रवाह को सुगमता देने का प्रयास किया गया है। महाराष्ट्र ने औद्योगिक संरचना का एक सुदृढ़ आधार, सुदृढ़ मानव संसाधन और दीर्घजीवी व बहुविध औद्योगिक आधार का विकास किया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि महाराष्ट्र ने अपनी स्थापना के समय से ही विभिन्न क्षेत्रों में अनेक नीतिगत पहल की हैं।

    1991 में देश में प्रारंभ हुए आर्थिक सुधारों ने आर्थिक उन्नति, औद्योगिकरण और आय वितरण की नीति में एक निदर्शी परिवर्तन किया। औद्योगिक नीति, कराधान, आयात-निर्यात और विदेशी निवेश के क्षेत्रों में अनेक नियंत्रणों को समाप्त कर दिया गया था। उद्योग के लाइसेंस को समाप्त करना, सार्वजनिक क्षेत्र को अनारक्षित करना, प्रतिस्पर्धी नियंत्रणों को समाप्त करना, आयात शुल्कों में कमी, ब्याज दरों का अविनियमन और पूंजी बाज़ार को खोलना उन सुधारों में शामिल हैं जो निवेश और पूंजी निर्माण के लिए प्रारंभ किए गए।

    महाराष्ट्र की औद्योगिक नीति 1993 का प्रमुख उद्देश्य प्रक्रियाओं का सरलीकरण और नियमों को तर्कसंगत बनाना था और उद्योग, व्यापार तथा वाणिज्य नीति 1995 का लक्ष्य निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान केंद्रित हुए सभी स्तरों पर लोगों का सशक्तिकरण करना था। वित्तीय क्षेत्र, मीडिया और मनोरंजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान के महत्व को दृष्टिगत करते हुए 1998 में एक समन्वित सूचना प्रौद्योगिकी नीति की घोषणा की गई।

2.0   उद्देश्य:
    दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधारों के चरण में, महाराष्ट्र औद्योगिक नीति 2001का उद्देश्य पुन: उद्योग और आधारभूत संरचना में निवेश के प्रवाह को गति प्रदान करना, सूचना प्रौद्योगिकी, उच्च-प्रौद्योगिकीय, ज्ञान आधारित और जैव-प्रौद्योगिकीय उद्योगों का संवर्धन, राज्य की औद्योगिक इकाइयों से निर्यातों को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय योजना को सुनिश्चित करते हुए बड़ी संख्या में रोज़गार अवसरों का सृजन करना है।
3.0   अभिगम
    नीति का अभिगम वित्तीय प्रोत्साहनों के स्थान पर राज्य में संवाहक औद्योगिक वातावरण का सृजन करते हुए उच्च-प्रौद्योगिकीय और अन्य उद्योगों के विकास के लिए बिक्रीकर आधारित प्रोत्साहनों को समाप्त करने की राष्ट्रीय सहमति के प्रकाश में संरचनात्मक परिवर्तनों को प्रारंभ करके वहनीय औद्योगिक विकास को सुनिश्चित करना है और उसके द्वारा राज्य के उद्योगों को एक तीक्ष्ण प्रतिस्पर्धात्मक धार प्रदान करना है।
4.0   महाराष्ट्र का सुदृढ़ पक्ष
    4.1   आर्थिक संकेतक
  • राज्य के घरेलू उत्पाद के मामले में महाराष्ट्र प्रमुख राज्यों में प्रथम स्थान पर है और राष्ट्रीय आय का 15 प्रतिशत सृजित करता है। इसकी प्रति व्यक्ति आय 23,849 रुपए है जो राष्ट्रीय औसत से 60 प्रतिशत उच्चतर है और राज्यों में सर्वाधिक है (वर्तमान मूल्यों पर - आधार वर्ष 1998-99)।
  • औद्योगिक और सामाजिक संरचना के विकास के लिए सार्वजनिक निधियों का अन्य राज्यों के मध्य सर्वाधिक हिस्सा - राज्य नीति का एक प्रमाण-चिह्न।
  • संगठित औद्योगिक क्षेत्र में भारत के सकल मूल्य संवर्धन का 22 प्रतिशत योगदान करता है। भारत के 40 प्रतिशत इंटरनेट प्रयोक्ता महाराष्ट्र में हैं और सॉफ्टवेयर निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत राज्य से किया जाता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक के लगभग सभी केंद्रीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों के मुख्यालयों सहित भारत के शेयर बाज़ारों का 70 प्रतिशत लेनदेन राज्य की राजधानी और भारत की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई में होता है।
    4.2    4.2 प्रशासन
  • कानून और व्यवस्था बनाए रखने की पूर्ण वचनबद्धता के साथ विकासकारक और उत्तरदायी प्रशासन।
  • विद्युत शुल्कों के पारदर्शी और वैज्ञानिक निर्णय के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण की स्थापना की गई है।
  • विद्यमान गतिमान स्थिति में उद्योगों की सहायता के लिए एक सुस्थापित तंत्र तैयार है।
    4.3   आधारभूत संरचना
      4.3.1   भौतिक
  • 14,000 मेगावॉट से अधिक पर देश में सर्वाधिक विद्युत उत्पादन क्षमता।
  • देश के सबसे बड़े औद्योगिक संरचना प्रदाता महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) द्वारा विकसित 9 पंचतारा औद्योगिक क्षेत्रों सहित 215 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र और 63 अभिवृद्धि केंद्र। इनके अतिरिक्त, रणनीतिक स्थानों पर रसायन, वस्त्र, चमड़ा और रत्न तथा आभूषणों के लिए विशेषीकृत औद्योगिक क्षेत्र।
  • राज्य में नागपुर, औरंगाबाद और अन्य स्थानों के साथ-साथ मुंबई, नवी मुंबई और पुणे के मध्य "नॉलेज कॉरीडोर" सहित सूचना प्रौद्योगिकी के लिए देश की सबसे बड़ी और सर्वाधिक विविधतापूर्ण आधारभूत संरचना।
  • चार घरेलू हवाई अड्डों के अलावा दो अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों और एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ भली प्रकार फैला हुआ सड़कों और रेलवे का नेटवर्क कार्यरत है। नवी मुंबई और पुणे में दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नागपुर में एक अंतरराष्ट्रीय यात्री और कार्गो हॅब विचाराधीन हैं।
      4.3.2   सामाजिक
  • शैक्षिक संस्थानों के मामले में सर्वाधिक सुदृढ़ मानव संसाधन विकास संरचना - प्रतिवर्ष 1,60,000 टैक्नोक्रेट तैयार करने वाले 301 इंजीनियरिंग डिग्री/डिप्लोमा कॉलेज, 616 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान।
  • सी-डैक, जिसने भारत का सुपर कंप्यूटर विकसित किया है, मुंबई और पुणे विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, विक्टोरिया जुबली इंस्टिट्यूट ऑफ टैक्निकल, विश्वविद्यालय रसायन प्रौद्योगिकी विभाग और शीर्ष स्तर के प्रबंध संस्थानों जैसे संस्थानों का घर।
  • महाराष्ट्र उद्यमिता विकास केंद्र, औरंगाबाद द्वारा प्रतिवर्ष स्वरोज़गार के लिए 50,000 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • 75 प्रतिशत की काफी ऊंची साक्षरता दर।
  • देश में नवाचार को गति प्रदान करने के लिए राज्य में सर्वाधिक संख्या में पेटेंट क्षेत्र।
  • सकारात्मक कार्य संस्कृति के साथ भली प्रकार विविधिकृत और उच्च उत्पादकता वाला औद्योगिक आधार।
    4.4   अग्रगामी साझेदारियां
    नवीकृत वित्तीय प्रणालियां और अग्रगामी साझेदारियां स्थापित की गई हैं।
  1. निजी क्षेत्र के साथ कोंकण क्षेत्र में स्वतंत्रता के बाद देश की पहली प्रमुख नई रेल लाइन।
  2. सड़कों (मुंबई और पुणे के मध्य देश के पहले एक्सप्रेवे सहित), फ्लाइओवरों और पुलों की निर्माण में निजी क्षेत्र के साथ।
  3. बंदरगाहों के विकास के लिए।
  4. उच्च संपर्कों और एलएनजी पाइपलाइन जैसी अन्य आधारभूत संरचनाओं के संवर्धन के लिए।
    4.5   अग्रगामी साझेदारियां
    औद्योगिक, शहरी और पर्यावरणीय योजना के उपाय के रूप में मुंबई महानगरीय क्षेत्र में प्रदूषणमुक्त और उच्च-प्रौद्योगिकीय क्षेत्रों तक औद्योगिकरण को सीमित रखने वाली एक औद्योगिक स्थल नीति के साथ उद्योगों के फैलाव और पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए महाराष्ट्र ने प्रोत्साहनों का एक पैकेज प्रारंभ किया है। प्रोत्साहनों की उत्तरोत्तर पैकेज योजनाओं का प्रमुख अंग राज्य के विकासशील और पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों को बिक्रीकर का लाभ प्रदान करना था। एक राष्ट्रीय सहमति के अनुपालन में पूर्ववर्ती बिक्रीकर लाभों को छोड़कर, 1993 में घोषित प्रोत्साहन योजना के संशोधित पैकेज को पिछली बार 31 मार्च 2001 तक बढ़ाया गया था।
5.0   नीतियां:
    राज्य उद्योगों के संवर्धन और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों के अतिरिक्त संरचनात्मक परिवर्तनों पर बल देते हुए दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधारों के चरण में प्रवेश कर गया है। इसके साथ बढ़ती हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और तीव्र प्रौद्योगिकीय परिवर्तन जुड़े हैं जिन्होंने उद्योगों के लिए नई चुनौतियां प्रस्तुत कर दी हैं। नीचे वर्णित औद्योगिक नीति 2001 निरंतर वृद्धि और रोज़गार तथा जीविका अवसरों में विस्तार के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इस संदर्भ में तैयार की गई है। यह पूर्व में घोषित की गईं सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रवार नीतियों के प्रावधानों की अनुपूरक है। इस नीति में व्याप्त नई प्रोत्साहन पैकेज योजना के घटक 1 अप्रैल, 2001 से 31 मार्च 2006 तक जारी रहेंगे।
    5.1   नीतियां:
    सी, डी और डी+ क्षेत्रों तथा बिना उद्योग वाले जिलों में स्थापित होने वाले नए उद्योगों को 15 वर्षों की अवधि के लिए विद्युत शुल्क के भुगतान से मुक्त रखा गया है। राज्य के अन्य भागों में, निर्यातोन्मुख इकाइयों, सूचना प्रौद्योगिकी ओर जैव-प्रौद्योगिकी इकाइयों, और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में स्थापित होने वाले उद्योगों तथा इलैक्ट्रॉनिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्कों को 10 वर्षों की अवधि के लिए विद्युत शुल्क के भुगतान से मुक्त रखा जाएगा।
    5.2   स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क की छूट : वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों में
    स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क में छूट: वर्तमान में, सार्वजनिक सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों में सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों को 31 मार्च, 2006 तक स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क में छूट दी गई है। अब सभी नई औद्योगिक इकाइयों (सूचना प्रौद्योगिकी और जैव-प्रौद्योगिकी सहित) और उनके विस्तारों को सी, डी और डी+ क्षेत्रों तथा बिना उद्योग वाले जिलों में 31 मार्च, 2006 तक स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क के भुगतान से छूट प्राप्त रहेगी। यद्यपि, राज्य के "ए" और "बी" श्रेणियों के तालुकाओं/क्षेत्रों में अन्य सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों में स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों को स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
    5.3   Octroi Refund
    प्रोत्साहन पैकेज योजना, 1993 में प्रदत्त चुंगीकर वापसी की योजना को उसी पैटर्न पर 31-3-2006 तक नई योजना में सम्मिलित किया जाएगा। जहां चुंगीकर के स्थान पर खाता-आधारित उपकर अथवा अन्य प्रभार लिए जाते हैं, चुंगीकर की भांति ये परिवर्तन भी वापसी के योग्य होंगे।.
    5.4   लघु उद्योग इकाइयों को प्रोत्साहन
      5.4.1   लघु उद्योग इकाइयों को विशेष पूंजी प्रोत्साहन: राज्य के विभिन्न भागों में स्थापित होने वाले नए लघु उद्योग (सूचना प्रौद्योगिकी और जैव-प्रौद्योगिकी इकाइयों सहित) निम्न प्रकार पूंजी सब्सिडी के लिए पात्र होंगे:
तालुका/क्षेत्र वर्गीकरण स्थाई पूंजी निवेश के
प्रतिशत के रूप में सीमा
वित्तीय सीमा
(लाख रुपए में)
- -
बी - -
सी 20 10
डी 30 20
डी+ 35 25
बिना उद्योग वाले जिले 40 35
      सब्सिडी को 5 वर्षों तक समान वार्षिक किश्तों में संवितरित किया जाएगा। विद्यमान लघु उद्योग और लघु सूचना प्रौद्योगिकी तथा जैव-प्रौद्योगिकी इकाइयां उपरोक्तानुसार 25 प्रतिशत अथवा अधिक अतिरिक्त निवेश करके विस्तार, विविधिकरण अथवा आधुनिकीकरण के लिए सब्सिडी के 75 प्रतिशत हेतु पात्र होंगी।
      5.4.2   नई वस्त्र, हौजियरी और निटवेयर लघु उद्योग इकाइयों को ब्याज सब्सिडी: राज्य के विभिन्न भागों में स्थापित होने वाली नई वस्त्र, हौजियरी और निटवेयर लघु उद्योग इकाइयां भी स्थाई पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए सावधि ऋण पर वित्तीय संस्थान/बैंक को वास्तविक रूप में प्रदत्त ब्याज पर, नीचे सारणी में दर्शाए गए अनुसार 5 प्रतिशत वार्षिक की दर पर देय ब्याज के बराबर ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र होंगी। वित्तीय सीमा पात्रता की संपूर्ण अवधि के लिए लागू रहेगी।
तालुका/क्षेत्र वर्गीकरण वित्तीय सीमा
(लाख रुपए में)
अधिकतम अवधि
(वर्षों में)
- -
बी - -
सी 10 4
डी 20 5
डी+ 25 6
बिना उद्योग वाले जिले 35 7
    5.5   गैर-परंपरागत ऊर्जा का विकास:गैर-परंपरागत ऊर्जा के विकास को संवेग प्रदान करने के क्रम में, नई प्रोत्साहन पैकेज योजना के अंतर्गत ऐसी परियोजनाएं लाभ की पात्र होंगी।
    5.6 तालुकाओं/क्षेत्रों का वर्गीकरण:विकास के स्तर के आधार पर राज्य में ए, बी, सी, डी और डी+ श्रेणियों में विभिन्न तालुकाओं/क्षेत्रों का वर्तमान वर्गीकरण प्रोत्साहन पैकेज योजना, 1993 में सम्मिलित है और फिलहाल जारी रहेगा। क्षेत्र वर्गीकरण में संशोधन के मामले पर उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा अलग से विचार किया जाएगा। विकास स्तर में परिवर्तनों के आधार पर तालुकाओं के मध्यावधि पुनर्वर्गीकरण के लिए मानदंडों पर भी विचार किया जाएगा और बिना उद्योग वाले जिलों को अलग से श्रेणीबद्ध किया जाएगा।
    5.7 पैकेज योजना के अंतर्गत पूंजी प्रोत्साहनों का वित्तपोषण और वापसी:विगत वचनबद्धताओं की पूर्ति और नई योजना के अंतर्गत प्रोत्साहनों के लिए 2001-2002 से आगे प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 200 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया जाएगा। पिछली योजनाओं के अंतर्गत बिक्रीकर पुनर्भुगतान से संबद्ध बांड्स के माध्यम से अतिरिक्त संसाधन भी जुटाए जाएंगे।
    5.8 खादी और ग्रामोद्योग के लिए बिक्रीकर से छूट:24 खादी और ग्रामोद्योगों को वार्षिक टर्नओवर पर कुछ सीमा तक बिक्रीकर से छूट प्राप्त है। रोज़गार सृजन और ग्रामीण औद्योगिकरण के लिए इस क्षेत्र की संभाव्यता को ध्यान में रखते हुए, 72 शेष उद्योगों के संबंध में उनके 20 लाख रुपए प्रति वर्ष तक टर्नओवर के लिए भी बिक्रीकर में छूट दी जाएगी। यह रियायत महाराष्ट्र राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड से पंजीकृत और सहायताप्राप्त खादी और ग्रामोद्योगों को उपलब्ध होगी।
    5.9सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों पर बिक्रीकर:31 मार्च, 2006 तक, सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों पर बिक्रीकर की दरों, जहां लागू हों, को न्यूनतम स्तर की दरों पर बनाए रखा जाएगा। कोई टर्नओवर कर, अतिरिक्त बिक्रीकर, सरचार्ज अथवा बिक्रीकर से संबंधित कोई अन्य अतिरिक्त कर सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों पर लागू नहीं किया जाएगा।
    5.10 रुग्ण लघु उद्योग इकाइयां:रुग्ण लघु उद्योग इकाइयों के पुनर्वास से संबंधित मामलों की राज्य स्तरीय अंतर-सांस्थानिक समिति और भारतीय रिज़र्व बैंक की उप-समिति, तथा जिला स्तर समिति जिसे जिला उद्योग मित्र के अनुबद्ध के रूप में स्थापित किया गया है, में समीक्षा की जाती है। सरकारी और विद्युत देयताओं के बकाए के पुनर्निर्धारण के लिए ली गईं रुग्ण लघु उद्योग इकाइयों को 13 प्रतिशत ब्याज पर 36 मासिक किश्तों में पुनर्भुगतान करना होगा। राज्य के "ए" क्षेत्रों के अलावा सभी क्षेत्रों में पुनर्निर्धारित बकाए पर ब्याज दर अब घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगी। ऐसे बकाए के पुनर्भुगतान को 60 मासिक किश्तों में करने की अनुमति होगी।
    5.11 निगमित पुनर्संरचना पर स्टाम्प शुल्क:आयकर अधिनियम, 1961 के अनुच्छेद 2(19-एए) के अंतर्गत दी गई परिभाषा के अनुसार कंपनियों के विच्छेद पर स्टाम्प शुल्क को कंपनी अधिनियम, 1956 के अनुच्छेद 394 के अंतर्गत उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश के अधीन कंपनियों के विल्लंगम के लिए लागू स्टाम्प शुल्क ढांचे की भांति लागू किया जाएगा।
    5.12 ग्रेटर मुंबई में कपड़ा मिलों की भूमि पर सूचना प्रौद्योगिकी/जैव-प्रौद्योगिकी इकाइयों की स्थापना: ग्रेटर मुंबई में कपड़ा मिलों की भूमि की बिक्री की अनुमति देते समय, आवासीय उपयोग के लिए महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएचएडीए) को उपलब्ध होने वाली भूमि को स्वयं एमएचएडीए अथवा एमआईडीसी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी और जैव-प्रौद्योगिकी उद्योगों के विकास के लिए प्रयोग करने की भी अनुमति होगी।
    5.13सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों के लिए फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई):सार्वजनिक निकायों द्वारा संवर्धित सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों में स्थापित की जाने वाली सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों के कुछ प्रकारों के लिए अनुमेय फ्लोर स्पेस इंडेक्स के दोगुने की अनुमति दी गई है। इन इकाइयों को शहरों के अविकसित क्षेत्रों में भी एफएसआई के 0.2 की अनुमति दी गई है। अब इन इकाइयों को अविकसित क्षेत्रों में स्थापना के लिए 1.0 के बढ़े हुए एफएसआई की अनुमति दी जाएगी।
    5.14 नए औद्योगिक टाउनशिप:महाराष्ट्र ने कई दशक पहले प्रजातांत्रिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्वशासन के संस्थानों की स्थापना प्रारंभ कर दी थी। हाल ही में, स्वतंत्र औद्योगिक टाउनशिपों की स्थापना करने के लिए वैधानिक संशोधनों के माध्यम से इन अवधारणाओं का विस्तार किया गया है। प्रथम चरण में, स्रोत उत्पन्न करने और उनका उपयोग करने के निर्णय की शक्ति के साथ स्वशासन औद्योगिक टाउनशिपों को राज्य के बारह स्थानों यथा विले-भागड़ (रायगढ़), आइरोली (ठाणे), तालेगांव (पुणे), हिंजेवाड़ी-मान (पुणे), शेंद्रे (औरंगाबाद), अतिरिक्त लातूर (लातूर), नंदगांव पेठ (अमरावती), अतिरिक्त यवतमाल (यवतमाल), तडाली (चन्द्रपुर), बूटीबोरी (नागपुर), अतिरिक्त सिन्नार (नासिक) और नरधना (धुले) में एमआईडीसी द्वारा विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा। स्थापित किए गए औद्योगिक टाउनशिप प्रारंभिक 5 वर्षों की अवधि के लिए अपने राजस्व के 25 प्रतिशत का भुगतान संबंधित ग्राम पंचायतों अथवा स्थानीय निकायों को करेंगे।
    5.15 विशेष आर्थिक क्षेत्र:भारत सरकार की नवीनतम नीति के अंतर्गत विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना की अनुमति दी गई है। भारत के सर्वाधिक सफल निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (एसईईपीज़ेड), जिसका संवर्धन लगभग तीन दशक पहले मुंबई में राज्य सरकार द्वारा किया गया था, को देश के प्रथम विशेष आर्थिक क्षेत्रों में से एक में परिवर्तित कर दिया गया है। एक अन्य विशेष आर्थिक क्षेत्र को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के निकट द्रोणगिरि में नगरीय और औद्योगिक विकास निगम (सिडको) द्वारा विकसित किया जा रहा है। सार्वजनिक निकायों द्वारा संवर्धित ऐसे विशेष आर्थिक क्षेत्रों को प्रदत्त सभी रियायतें, लाभ और सुविधाएं अन्य पक्षकारों द्वारा स्थापित विशेष आर्थिक क्षेत्रों को भी प्रदान की जाएंगी। औरंगाबाद और नागपुर में भी विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना का प्रस्ताव भारत सरकार को दिया जाएगा।
    5.16   विशेषीकृत औद्योगिक क्षेत्र:विगत कुछ वर्षों में, राज्य एजेंसियों ने सूचना प्रौद्योगिकी, चमड़ा, रसायन आदि विभिन्न क्षेत्रों में विशेषीकृत औद्योगिक संरचनाओं का विकास किया है। अभी हाल ही में, टैक्सटाइल और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों की स्थापना का कार्य प्रारंभ किया गया है। राज्य के विभिन्न भागों में कृषि-उद्योग की संभावनाओं और आवश्यकताओं के दृष्टिगत, एमआईडीसी नासिक और सांगली में "ग्रेप वाइन पार्कों", संतरा प्रसंस्करण के लिए "ओरेंज सिटी पार्क", उपयुक्त स्थानों पर पुष्पोत्पादन कॉम्पलेक्स और जैव-प्रौद्योगिकी पार्कों सहित इस क्षेत्र के लिए नए कॉम्पलेक्सों की स्थापना करेगा।
    5.17 शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों का संवर्धन:विश्व स्तरीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों सहित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों के शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों को औद्योगिक क्षेत्रों/संपदाओं में मामूली अथवा रियायती दरों पर भूमि प्रदान की जाएगी।
    5.18 नियंत्रित ऊर्जा सृजन:राज्य भर में उद्योगों को सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों के संबंध में नियंत्रित ऊर्जा सृजन, और सह-सृजन के मामले में हाइड्रोइलैक्ट्रिक ऊर्जा तथा गैर-परंपरागत ऊर्जा के सृजन की अनुमति है। इस समय नए उद्योगों और डी+ तथा जनजातीय क्षेत्रों के संबंध में अन्य प्रकार की नियंत्रित ऊर्जा सृजन की अनुमति है। डी और डी+ क्षेत्रों तथा बिना उद्योग वाले जिलों में नए और विद्यमान उद्योगों को भी नियंत्रित ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की अनुमति है। सार्वजनिक निकाय अथवा उनके द्वारा संवर्धित संयुक्त उद्यम सूचना प्रौद्योगिकी और जैव-प्रौद्योगिकी पार्क तथा उनके द्वारा संवर्धित विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए ऊर्जा के एकनिष्ठ प्रावधान हेतु "स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक" स्थापित कर सकते हैं।
    5.19 गैस सहयोग करार:गैस उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण ईंधन और कच्चा माल है। चूंकि मुंबई हाई ने गैस आपूर्ति से इंकार कर दिया है, तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की वाणिज्यिक आपूर्ति औद्योगिक इकाइयों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। राज्य में गैस आपूर्ति संरचना के योजनाबद्ध विकास को सुगम बनाने के लिए, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल), एमआईडीसी और महाराष्ट्र पैट्रोकेमिकल्स कारपोरेशन लिमिटेड (एमपीसीएल) ने हाल ही में एक गैस सहयोग करार किया है। गैस संरचना और संबद्ध सुविधाओं के विकास के लिए गेल द्वारा एक संभाव्यता अध्ययन प्रारंभ किया गया है, जिसमें राज्य और विभिन्न आपूर्ति विकल्पों की मध्यम और दीर्घावधि गैस आवश्यकताओं का मूल्यांकन सम्मिलित है।
    5.20 श्रम कानून और प्रक्रियाएं:राज्य सरकार ने नई आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में उद्योगों और श्रमिकों को सक्षम बनाने के लिए केंद्रीय विधानों सहित श्रम कानूनों और प्रक्रियाओं की एक समीक्षा प्रारंभ की है। समीक्षा का उद्देश्य अतिरिक्त रोज़गार सृजन के हतोत्साहन को दूर करना, बढ़ती हुई वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में पुनर्संरचना और प्रौद्योगिकीय विकास को सुगम बनाना, औद्योगिक फैलाव को संवेग प्रदान करना और सक्षम स्तरों पर उत्पादन का संवर्धन करना है। इसका उद्देश्य श्रमिक हितों की सुरक्षा करना और पुनर्संरचना के दौरान श्रमिकों को अधिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना भी है। इस समीक्षा के प्रथम चरण के परिणामों के अनुसार, निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:-

क. विधानसभा के अनुमोदन और भारत सरकार की सहमति के अध्यधीन, औद्योगिक विवाद अधिनियम को इसके अध्याय 5-बी की अनुप्रयोज्यता को वर्तमान में 100 श्रमिकों के स्थान पर 300 अथवा अधिक श्रमिकों वाले उद्योगों तक सीमित करने के लिए संशोधित किया जाएगा। अनुच्छेद 25-एन के अंतर्गत छंटनी के लिए सरकार की पूर्वानुमति की शर्त को उन मामलों में हटा दिया जाएगा जहां छंटनी किए गए श्रमिकों को वास्तविक रूप में उच्चतर वित्तीय भुगतान किया गया है अर्थात् विद्यमान छंटनी प्रतिपूर्ति से तीन गुना (उन मामलों में चार गुना जहां "सबसे बाद में आओ - सबसे पहले जाओ" के सिद्धांत का पालन नहीं किया जाता है)। अनुच्छेद 25-एम जिसमें कामबंदी के लिए सरकार की पूर्वानुमति का प्रावधान है, को समाप्त करने का प्रस्ताव है, और ऐसे मामलों में कामबंदी का विनियमन अनुच्छेद 25-सी के प्रावधानों द्वारा किया जाएगा। परिवर्तन का नोटिस देने की आवश्यकता को समाप्त करने के लिए अनुच्छेद 9-ए में संशोधन किया जाएगा, जब तक कि ऐसे परिवर्तन कार्य की संख्या अथवा घंटों, अवकाशों अथवा श्रमिकों के वेतन पर विपरीत प्रभाव न डालते हों। बढ़े हुए वेतन स्तरों को ध्यान में रखते हुए, वर्तमान में 1,600 रुपए प्रतिमाह की आय के स्थान पर 6,500 रुपए प्रति माह वेतन पाने वाले पर्यवेक्षक कार्मिकों को अधिनियम के कार्यक्षेत्र में लाया जाएगा।

ख. विधानसभा के अनुमोदन और भारत सरकार की सहमति के अध्यधीन, कुछ गतिविधियों जैसे साफ-सफाई सेवाओं, माल और वस्तुओं को लादना और उतारना, कैंटीन सेवाओं, डाक वितरण, बागवानी आदि को अनुबंध श्रमिक (विनियम और हटाना) अधिनियम के कार्यक्षेत्र से बाहर करने के लिए इसमें संशोधन किया जाएगा। उन संदर्भों को ध्यान में रखते हुए जिनमें 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयां कार्यरत हैं, ऐसी इकाइयों को भी अधिनियम के कार्यक्षेत्र से बाहर किया जाएगा।

ग. महाराष्ट्र रेकग्निशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स एंड प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर लेबर प्रैक्टिसेज़ (एमआरटीयू और पीयूएलपी) अधिनियम की व्यापक समीक्षा के लिए उद्योग और श्रमिकों के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करते हुए, एक समिति का गठन किया जाएगा।

घ. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत विभिन्न उद्योगों और प्रत्येक उद्योग के भीतर भी निहित न्यूनतम मजदूरी की विविधताओं को तर्कसंगत और कम करने के क्रम में, अनुसूचित उद्योगों को कुछ समूहों में समूहबद्ध करने और ऐसे प्रत्येक उद्योग समूह में एकल न्यूनतम मजदूरी की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

ङ. विभिन्न श्रम कानूनों के अंतर्गत निरीक्षणों की प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाया जाएगा और ऐसे निरीक्षणों की संख्या को कम तथा विनियमित किया जाएगा।

च. विभिन्न श्रम कानूनों के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों के लिए आवश्यक कागज़ी कार्रवाई को कम किया जाएगा। औद्योगिक स्थापनाओं से वांछित 46 रजिस्टरों, प्रपत्रों और रिटर्नों को हाल ही में समूहबद्ध, प्रतिस्थापित अथवा समाप्त कर दिया गया है।

छ. सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों के कार्यों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए शिफ्टों में काम करने, महिलाओं को रोज़गार आदि से संबंधित "मुंबई दुकानें और स्थापनाएं अधिनियम" के प्रावधानों में इन इकाइयों के लिए छूट दी गई है।

    5.21 फिल्म उद्योग:महाराष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक जीवन में फिल्म उद्योग की एक महत्वपूर्ण स्थिति है और मुंबई देश की मनोरंजन राजधानी है। केंद्रीय सरकार ने फिल्म क्षेत्र को उद्योग का दर्जा प्रदान कर दिया है। इस क्षेत्र में आगामी विकास और रोज़गार सृजन की संभावनाओं को देखते हुए, उद्योग मंत्री राज्य सरकार से संभव सहायता के लिए फिल्म उद्योग के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करेंगे।
6.0 समीक्षा और निगरानी:
    उद्योगों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने की दृष्टि से आवश्यक सुविधाओं के लिए उपयुक्त स्तरों पर नीति निर्णयों के कार्यान्वयन की आवधिक समीक्षा की जाएगी।

उपयोगी पते


सचिव (उद्योग), महाराष्ट्र सरकार
कक्ष संख्या 114, एनेक्स, प्रथम तल
मंत्रालय, मुंबई-400032, भारत
दूरभाष : (91-22) 2025393 / 2027281
फैक्स. : (91-22) 2824446
ई-मेल :vsdhumal@midcindia.org

विकास आयुक्त (उद्योग), महाराष्ट्र
उद्योग निदेशालय, नया प्रशासनिक भवन, दूसरा तल
मंत्रालय के सामने, मुंबई-400032, भारत
दूरभाष : (91-22) 2028616 / 2023584
फैक्स : (91-22) 2026826
ई-मेल : dcind@vsnl.com

महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी)
उद्योग सारथी, महाकाली गुफा रोड, अंधेरी (पूर्व)
मुंबई-400093, भारत
दूरभाष : (91-22) 8325451 / 52 / 53
फैक्स : (91-22) 8221487
ई-मेल : reach@midcindia.com
इंटरनेट : www.midcindia.com

महाराष्ट्र राज्य वित्त निगम (एमएसएफसी)
न्यू एक्सेलसियर बिल्डिंग, ए.के. नायक मार्ग, फोर्ट
मुंबई-400001, भारत
दूरभाष : (91-22) 2077711-12 / 2077786 - 87 / 2078504
फैक्स : (91-22) 2049902 / 2070113
ई-मेल : msfcho@bom7.vsnl.net.in

महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड (एमएसईडी)
प्रकाशगढ़, प्लॉट नं. जी-9, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई-400051, भारत
दूरभाष : (91-22) 6422211 / 6422131 / 6443740 / 2619400
फैक्स : (91-22) 6428511
ई-मेल : chairman@msebindi.com

महाराष्ट्र शहरी एवं औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (सिडको)
मुंबई
निर्मल, दूसरा तल, नरीमन प्वाइंट
मुंबई-400021, भारत
दूरभाष : (91-22) 2022420 / 2481
फैक्स : (91-22) 202509

नवी मुंबई
सिडको भवन, दूसरा तल, बेलापुर (सीबीडी)
नवी मुंबई-400614, भारत
दूरभाष : (91-22) 7571375 / 7571547
फैक्स : (91-22) 7571023
ई-मेल : cidsys@giasbm01.vsnl.net.in

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (एमएसआरडीसी)
नेपियन सी रोड, प्रियदर्शिनी पार्क
मुंबई-400036, भारत
दूरभाष : (91-22) 3696109 / 368612 / 3693671 / 73
फैक्स : (91-22) 3684943 / 3691031
ई-मेल: msrde@bom3.vsnl.net.in
इंटरनेट: www.msrdc.org

महाराष्ट्र लघु उद्योग विकास निगम लिमिटेड (एमएसएसआईडीसी)
कृपानिधि, 9, वालचंद हीराचंद मार्ग
मुंबई-400001, भारत
दूरभाष : (91-22) 2611121-24 / 2617567 / 2614824
फैक्स : (91-22) 2612594 / 2620623
ई-मेल : md@mssidc.com

सिमको लिमिटेड
निर्मल, नरीमन प्वाइंट, मुंबई-400021, भारत
दूरभाष : (91-22) 2023018 / 2883579
फैक्स : (91-22) 2882895 / 2825781
ई-मेल: sicom.fin@vsnl.com
वेबसाइट : www.sicomindia.com

सॉफ्टवेयर टैक्नॉलॉजी पार्क ऑफ इंडिया
मुंबई
टावर नं.7, तल 6,
इंटरनेशनल इनफोटेक पार्क
वाशी स्टेशन कॉम्पलेक्स
नवी मुंबई-400614, भारत
दूरभाष : (91-22) 7812102 / 7812103
फैक्स : (91-22) 7812034
ई-मेल: sak@stpp.soft.net
वेबसाइट: www.stpmum.soft.net

पुणे
पहला व तीसरा तल, कुबेर चैम्बर्स
डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड
शिवाजी नगर
पुणे-411005, भारत
दूरभाष : (91-2139) 32644 / 45
फैक्स : (91-2139) 32639
ई-मेल : sushil@stpp.soft.net
stpp@stpp.soft.net
वेबसाइट : www.stpp.soft.net

सांताक्रूज़ इलैक्ट्रॉनिक्स निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (एसईईपीजेड)
अंधेरी (पूर्व), मुंबई-400096, भारत
दूरभाष : (91-22) 8367143
फैक्स : (91-22) 8321169
ई-मेल : dcseepz@vsnl.com

सेंटर फॉर डवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक)
पुणे विश्वविद्यालय परिसर, गणेश खंड
पुणे-411007, भारत
दूरभाष : (91-22) 5651683/85
फैक्स : (91-22) 567964
ई-मेल: rkarora@cdac.ernet.in
यूआरएल : www.cdacindia.com

दूरसंचार विभाग
महाराष्ट्र टेलीकॉम सर्किल
फाउंटेन टेलीकॉम बिल्डिंग नं.2, आठवां तल
एम.जी. रोड, फोर्ट, मुंबई-400001, भारत
दूरभाष : (91-22) 2620690 / 0236, 262 0266/37.
फैक्स : (91-22) 2662220
ई-मेल: cgmmhtc@bom3.vsnl.net.in
यूआरएल : www.maharashtracircle.com

महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड
17वां तल, टेलीफोन हाउस, वी.एस. मार्ग, दादर (पश्चिम)
मुंबई-400028, भारत
दूरभाष : (91-22) 4376599 / 4373430
फैक्स : (91-22) 430 6000
यूआरएल : www.nic.in/mtnl

महाराष्ट्र कृषि उद्योग विकास निगम लिमिटेड (एमएआईडीसी)
राजन हाउस, तीसरा तल, प्रभादेवी
मुंबई-400025, भारत
दूरभाष : (91-22) 4308211
फैक्स : (91-22) 4308618
ई-मेल: maidc@vsnl.com

महाराष्ट्र चमड़ा उद्योग विकास निगम (लिडकॉम)
बॉम्बे लाइफ बिल्डिंग, 5वां तल, 45, वीर नरीमन रोड
मुंबई-400001, भारत
दूरभाष : (91-22) 2047157 / 2049103
फैक्स : (91-22) 2835881
ई-मेल: lidecom@vsnl.com

मुंबई मैट्रोपोलिटन क्षेत्र विकास निगम लिमिटेड (एमएमआरडीए)
प्लॉट नं. 14/15, बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई-400051, भारत
दूरभाष : (91-22) 6523536-43 / 6542197
फैक्स : (91-22) 6541062
ई-मेल: mmrda@giasbm01.vsnl.net.in

महाराष्ट्र आवास व क्षेत्र विकास प्राधिकरण (महाडा)
गृह निर्माण भवन, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई-400051, भारत
दूरभाष : (91-22) 6428331-5 / 6426411-15
फैक्स : (91-22) 6402058
ई-मेल: mahada@bom3.vsnl.net.in

महाराष्ट्र कृषि विकास एवं उर्वरक संवर्धन निगम (एमएएफसीओ)
मिनिस्ट्री भवन, 6ठा तल, डी. वाछा रोड
मुंबई-400020, भारत
दूरभाष : (91-22) 2822244 / 2820443
फैक्स : (91-22) 2046893
ई-मेल: mafco@bom3.vsnl.net.in

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी)
श्री छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूनिसिपल मार्केट बिल्डिंग, चौथा तल
मुंबई-400001, भारत
दूरभाष : (91-22) 2692345 / 2614348 / 2659107 / 2614343 / 2671356
फैक्स : (91-22) 2612320

महाराष्ट्र राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (एमएसकेवीआईबी)
19-21, मनोहरदास स्ट्रीट, फोर्ट
मुंबई-400001, भारत
दूरभाष : (91-22) 2617641-43 / 2964720
फैक्स : (91-22) 696808
ई-मेल: mskvib@bom8.vsnl.net.in

महिला आर्थिक विकास महामंडल (एमएवीआईएम)
गृह निर्माण भवन (महाडा), गोरेगांव (पूर्व)
मुंबई-400065, भारत
दूरभाष : (91-22) 6435574 / 6435629 / 6435728
फैक्स : (91-22) 6435728/6435574.

महाराष्ट्र चलचित्र, रंगमंच और सांस्कृतिक विकास निगम
फिल्म सिटी, गोरेगांव (पूर्व)
मुंबई-400065, भारत
दूरभाष : (91-22) 8401533-1755 / 840 0267.
फैक्स : (91-22) 8400734
ई-मेल : filmcityfilmcity@hotmail.com

महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (एमटीडीसी)
एक्सप्रैस टावर, नौवां तल, नरीमन प्वाइंट
मुंबई-400021, भारत
दूरभाष : (91-22) 2024482-4584-4514
फैक्स : (91-22) 2024521
वेबसाइट : mtdcindia.com

हाफ़किन बायो-फार्मास्युटिकल कारपोरेशन
आचार्य डोंडे मार्ग, परेल
मुंबई-400012, भारत
दूरभाष : (91-22) 4129320-22 / 4129252 / 4129224
फैक्स : (91-22) 4168578
ई-मेल: haffkine@bom2.vsnl.net.in
यूआरएल : www.vaccinehaffkine.com

उद्योग मित्र
12वां तल, निर्मल, नरीमन प्वाइंट
मुंबई-400021, भारत
दूरभाष : (91-22) 2023018 / 2023787
फैक्स : (91-22) 2023787.
ई-मेल: udyogmitra5@hotmail.com

महाराष्ट्र उद्यमिता विकास केंद्र (एमसीईडी)
ए-38, एमआईडीसी रेलवे स्टेशन
औरंगाबाद-431005, भारत
दूरभाष : (91-22) 332563 / 334425
फैक्स : (91-22) 341719
ई-मेल: mcedho@bom4.vsnl.net.in