राज्य
नीति

मध्य प्रदेश

3.   उद्योग के लिए विद्युत नीति

    3.1   विद्युत आपूर्ति, विशेषकर उद्योगों को, में मात्रात्मक और गुणात्मक कमी को दूर करने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएंगे। विद्युत उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों में निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    3.2   कैप्टिव डीज़ल जेनरेटिंग सैट अथवा 25 मेगावॉट क्षमता की कैप्टिव थर्मल जेनरेशन इकाई (जो अपशिष्टों का भी उपयोग कर सकती है) स्थापित करने के इच्छुक उद्यमी को निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन, विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 और भारतीय विद्युत नियम, 1956 के प्रावधानों के अनुसार मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड और मुख्य अभियंता, विद्युत सुरक्षा/मुख्य विद्युत निरीक्षक को संपूर्ण सूचना के साथ एक आवेदन पत्र प्रस्तुत करने पर पंद्रह दिनों के भीतर अनुमति दे दी जाएगी:

    क.   अपनी स्वयं की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए एक कैप्टिव जेनरेटिंग सैट की स्थापना करने के इच्छुक उद्यमी को एक आवेदन पत्र प्रस्तुत करने पर अनुमति दी जाएगी।
    ख.   अपनी स्वयं की आवश्यकताओं की आंशिक पूर्ति करने के लिए एक कैप्टिव जेनरेटिंग सैट की स्थापना करने के इच्छुक उद्यमी को एक आवेदन पत्र प्रस्तुत करने पर अनुमति दी जाएगी, किंतु इस मामले में मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड से कुछ शर्तों पर उसे विद्युत उपलब्ध कराई जाएगी।

    3.  3 25 मेगावॉट क्षमता से अधिक के थर्मल जेनरेटिंग सैट की स्थापना के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, भारत सरकार की अनुमति आवश्यक है। ऐसे मामलों में आवेदन पत्र और परियोजना रिपोर्टें उद्यमियों द्वारा उनकी प्रस्तुति के पंद्रह दिनों के भीतर मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड द्वारा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को अग्रेषित की जाएंगी और प्राधिकरण से यथाशीघ्र अनुमति प्राप्त करने के प्रयास किए जाएंगे।

    3.4   अपने स्वयं के उपयोग के लिए अति लघु अथवा लघु जल-विद्युत अथवा गैर परंपरागत विद्युत उत्पादन इकाइयों (जैसे पवन ऊर्जा, सौर फोटो-वोल्टाइक, बायोगैस आदि) की स्थापना करने के इच्छुक उद्यमी को मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम को पूरी जानकारी के साथ अपना आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के पंद्रह दिनों के भीतर अनुमति दे दी जाएगी।

    3.5   यदि एक उद्यमी डीज़ल/थर्मल/लघु और अति लघु जल-विद्युत जेनरेटिंग सैटों अथवा गैर-परंपरागत ऊर्जा उत्पादन के लिए उपकरणों की स्थापना करता है और आसपास के अन्य उद्यमियों को अधिशेष विद्युत की आपूर्ति करने का इच्छुक है, अथवा केवल अन्य उद्यमियों को विद्युत बेचने की इच्छा से किसी भी प्रकार का विद्युत उत्पादन संयंत्र लगाता है तो उसे आवेदनपत्र प्रस्तुत करने के पंद्रह दिनों के भीतर मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड द्वारा विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत अनुमति दी जाएगी। यद्यपि, ऐसे उद्यमी को भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 के प्रावधानों के अंतर्गत मुख्य अभियंता, विद्युत सुरक्षा/मुख्य विद्युत निरीक्षक के माध्यम से राज्य सरकार से भी अनुमति प्राप्त करनी आवश्यक होगी।

    3.6   यदि कोई उद्यमी, जैसा कि ऊपर बताया गया है, अपने स्वयं के उपयोग के लिए आवश्यक क्षमता से अधिक के डीज़ल/थर्मल/लघु-अति लघु जल-विद्युत जेनरेटिंग सैट की स्थापना करता है और कुछ दूरी पर स्थिति अपने स्वामित्व वाली इकाई को विद्युत आपूर्ति करना चाहता है, अथवा कुछ दूरी पर अन्य उद्यमियों को अधिशेष विद्युत की आपूर्ति करना चाहता है, अथवा केवल अन्य उद्यमियों को विद्युत बेचने की मंशा से किसी प्रकार के संयंत्र की स्थापना करता है और मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड के वितरण तंत्र का उपयोग करना चाहता है तो उसे बोर्ड द्वारा निम्नलिखितानुसार व्हीलिंग प्रभारों/ट्रांसमीशन हानियों के लिए भुगतान की शर्त पर अनुमति दी जाएगी:

    क. 40 किलोमीटर की दूरी तक कुल विद्युत आपूर्ति का 10 प्रतिशत
    ख. 60 किलोमीटर की दूरी तक कुल विद्युत आपूर्ति का 12 प्रतिशत
    ग. 100 किलोमीटर की दूरी तक कुल विद्युत आपूर्ति का 17 प्रतिशत
    घ. 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए कुल विद्युत आपूर्ति का 20 प्रतिशत।

    3.7   यदि कोई उद्यमी अपने कैप्टिव जेनरेटिंग सैट/संयंत्र से मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड को अधिशेष विद्युत की बिक्री करने का इच्छुक है, अथवा मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड को विद्युत की बिक्री करने के लिए किसी प्रकार का उत्पादन संयंत्र स्थापित करता है, तो ऐसे उद्यमी को विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत अनुमति प्रदान की जाएगी। ऐसी विद्युत की आपूर्ति के लिए शुल्कों का निर्धारण विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 और केंद्रीय/राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर बनाए गए नियमों के अंतर्गत उद्यमी और मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड के मध्य परस्परस करार के अनुसार निम्नलिखित समय खंडों के लिए किया जाएगा:

    क.   सायं 10.00 बजे से आगामी प्रात: 6.00 बजे तक
    ख.   प्रात: 6.00 बजे से सायं 10.00 बजे तक

    3.8   उद्यमी मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड की वितरण प्रणाली को विद्युत आपूर्ति के लिए अपने स्वयं के व्यय पर इंटरकनेक्शन अथवा सिंक्रोनाइजेशन के लिए सुविधाएं स्थापित करेगा।

    3.9   विकास केंद्रों और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित उद्यमियों को उपरोक्तानुसार विद्युत उत्पादन सैटों/संयंत्रों की स्थापना के लिए संघ बनाने की अनुमति प्रदान की जाएगी।

    3.10   उपरोक्त सभी स्थितियों में, उद्यमी को अन्य एजेंसियों जैसे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, कोल लिंकेज कमेटी, नागर विमानन मंत्रालय, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि से आवश्यक अनुमतियां अथवा अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने आवश्यक होंगे।

    3.11   उपरोक्त अनुच्छेद 3.2 से 3.7 के अनुसार उद्यमियों द्वारा स्थापित डीज़ल/ थर्मल/अति लघु अथवा लघु जल-विद्युत उत्पादन संयंत्रों अथवा गैर-परंपरागत विद्युत उत्पादन स्रोतों को नए उद्योगों की श्रेणी में रखा जाएगा और उन्हें नियमानुसार उद्योगों को प्रदान की जाने वाली सभी सुविधाएं दी जाएंगी।

    3.12   नए उद्योगों को उद्यमी द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी करने, लाइन विस्तार आदि का कार्य पूरा होने और परीक्षण रिपोर्ट की प्रस्तुति पर पंद्रह दिनों के भीतर विद्युत कनेक्शन दे दिया जाएगा।

    3.13   विकास केंद्रों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए, चयनित विकास केंद्रों में, यदि पहले न की गई हो तो संभागीय अभियंताओं की नियुक्ति की जाएगी ताकि विद्युत आपूर्ति से संबंधित उद्यमियों की समस्याओं का निराकरण स्थानीय स्तर पर ही हो जाए और उन्हें बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकें।

    3.14   उद्योग में नई विद्युतीय स्थापनों के लिए अनुमोदित प्रारूप के अनुसार कार्य पूरा होने के बाद उद्यमियों द्वारा कार्य संपन्न/परीक्षण प्रमाणपत्रों की प्रस्तुति पर सात दिनों के भीतर निरीक्षण प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाएंगे।

    3.15   125 केवीए से अधिक कैप्टिव जेनरेटिंग सैटों/उपकरणों पर, बिना समय-सीमा के, विद्युत शुल्क से छूट प्रदान करने की दिनांक 6-11-1992 की अधिसूचना के अनुसार विद्यमान सुविधा प्रभावी बनी रहेगी।

    3.16   शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों और निरंतर प्रक्रिया इकाइयों को यथासंभव विद्युत कटोती से मुक्त रखा जाएगा।

4.   मानव संसाधन

    4.1   मध्य प्रदेश में औद्योगिक श्रमदिवसों की हानि देश में सबसे कम है।

    4.2   उद्योगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव संसाधन आधार की गुणवत्ता का निरंतर उन्नयन किया जाएगा।

    4.3   उद्योग संघों के करीबी परामर्श से मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, मध्य प्रदेश उद्यमिता विकास संस्थान और मध्य प्रदेश परामर्शी संगठन उद्यमियों के लिए उपयुक्त अनुकूलन कार्यक्रमों के विकास के लिए एक समन्वित नीति लागू करेंगे। अनुसूचित जातियों और जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और गरीबी रेखा से नीचे के लोगों में उद्यमिता के संवर्धन पर विशेष बल दिया जाएगा। विशेष रूप से महिलाओं पर केंद्रित उद्यमी विकास कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन प्रयासों के समन्वय के लिए सरकारी और गैर-सरकारी सदस्यों की एक समिति गठित की जाएगी।

    4.4   प्रयोक्ताओं के परामर्श से पॉलिटेक्निकों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में पाठ्यक्रमों को अधिक प्रयोक्ता-सापेक्ष बनाया जाएगा।

    4.5   औद्योगिक विकास की विद्यमान प्रणाली और भावी संभावना को ध्यान में रखते हुए अगले दस वर्षों के लिए मानव संसाधन आवश्यकताओं का आकलन और विकास किया जाएगा।

    4.6   स्थापित हो रहे उद्योगों में स्थानीय लोगों को रोज़गार के लिए एक योजना तैयार की जाएगी ताकि औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप उन्हें अधिक रोज़गार प्राप्त हो। कर्मचारियों/श्रमिकों जो राज्य के मूल निवासी हैं, को प्रशिक्षण के लिए औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षु अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत प्रशिक्षण अवसरों का पूरा उपयोग किया जाए ताकि अधिकाधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा सके।