राज्य
नीति

मध्य प्रदेश

5. कर रियायतें और अन्य सुविधाएं

    5.1 औद्योगीकरण की गति को तेज़ करने के लिए संरचनाओं और मानव संसाधनों की गुणवत्ता में निरंतर सुधार एक अनिवार्य तत्व है। औद्यागीकरण के लिए प्राथमिकताएं निर्धारित करने में कर रियायतों और अन्य सुविधाओं की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।

    5.2 विद्यमान योजनाओं के अंतर्गत सुविधाएं और रियायतें प्राप्त कर रहीं औद्योगिक इकाइयां इन योजनाओं के प्रावधानों के अनुसार पात्रता की शेष अवधि में ये सुविधाएं और रियायतें प्राप्त करती रहेंगी। बिक्रीकर की समाप्ति के बाद, पात्र इकाइयां अपनी पात्रता के अनुसार विद्यमान योजनाओं की शेष अवधि के लिए वाणिज्यिक कर की वही रियायतें प्राप्त करती रहेंगी। जब तक औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 द्वारा स्पष्ट रूप से संशोधित न किया जाए, औद्योगिक इकाइयों को वर्तमान में प्राप्त सुविधाएं और रियायतें लागू रहेंगी।

    5.3 राज्य पूंजीगत निवेश सब्सिडी योजना, 1989 लघु उद्योगों के लिए उपलब्ध रहेगी। संयंत्र और मशीनरी में न्यूनतम एक करोड़ रुपए के निवेश और न्यूनतम एक सौ व्यक्तियों की सदस्यता वाली सहकारी क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयां भी पात्र होंगी।

    5.4 नीति में घोषित सुविधाएं और रियायतें उन औद्योगिक इकाइयों को प्राप्त होंगी जो औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 की घोषणा की तिथि के बाद वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करती हैं। जिन औद्योगिक इकाइयों ने इस नीति की घोषणा से पूर्व निर्धारित प्रभावी कदम उठा लिए हैं, उनके लिए नई नीति और कार्य योजना के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं के स्थान पर पिछली योजनाओं के प्रावधानों के अंतर्गत विभिन्न सुविधाएं प्राप्त करने का विकल्प होगा, बशर्ते कि इन इकाइयों ने 1-4-95 से पूर्व वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ कर दिया हो। वे बड़ी और मध्यम औद्योगिक इकाइयां, जिन्होंने वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ नहीं किया है किंतु तत्कालीन राज्य पूंजीगत निवेश सब्सिडी योजना के अंतर्गत अग्रिम सब्सिडी प्राप्त कर ली है, यदि वे औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 के अंतर्गत सुविधाएं प्राप्त करने की इच्छुक हैं तो उन्हें 1-4-95 से पूर्व प्राप्त की गई सब्सिडी की राशि राज्य सरकार को लौटानी होगी।

    5.5 "प्रभावी कदम" से तात्पर्य निम्नलिखित शर्तों में से न्यूनतम दो शर्तों को पूरा करना है:

      क.    भूमि का कब्जा प्राप्त कर लिया है।

      ख.    परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, भवन पर अनुमानित व्यय का न्यूनतम 50 प्रतिशत व्यय कर दिया गया है।

      ग.    परियोजना रिपोर्ट के अनुसार अनुमानित संयंत्र और मशीनरी के न्यूनतम 50 प्रतिशत का पक्का आदेश दिया जा चुका है।

    5.6 उद्योगों को निम्नलिखित बिक्रीकर/वाणिज्यिक कर रियायतें उपलब्ध होंगी:

    जैसाकि उपरोक्त कॉलम में उल्लेख किया गया है, लाभ की अधिकतम राशि को अचल परिसंपत्तियों में पूंजीगत निवेश की प्रतिशतता तक सीमित किया जाएगा।

      क.    इस समय अचल परिसंपत्तियों में दस लाख रुपए तक के पूंजीगत निवेश वाली इकाइयां स्थाई पूंजीगत निवेश के 90 प्रतिशत की सीमा तक कर रियायतें प्राप्त करती हैं। नई योजना में सीमा को छूट के लिए 100 प्रतिशत तक और आस्थगन सुविधा के लिए 150 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।.

      ख.    ये रियायतें तैयार उत्पादों, सह-उत्पादों, अपशिष्ट उत्पादों, कच्चे माल, अनुषंगी वस्तुओं और पैकिंग सामग्री पर उपलब्ध होंगी।

      ग.    कर के भुगतान को पांच वर्षों की अवधि के लिए आस्थगित किया जाएगा। छठे वर्ष में, आस्थगित राशि नियमानुसार बिना किसी ब्याज के देय होगी। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आस्थगित राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो शेष अवधि के लिए इकाई की पात्रता रद्द की जा सकती है और ऐसी राशि पर नियमानुसार ब्याज वसूला जाएगा।

      घ.    महिला उद्यमियों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़े वर्गों के सदस्यों द्वारा स्थापित इकाइयां एक वर्ष की अतिरिक्त रियायतों के लिए पात्र होंगी।

      ङ.    सभी विशेष पात्रताओं की गणना करने के बाद, एक इकाई सामान्यत: उपलब्ध रियायतों के अलावा, अधिकतम पांच अतिरिक्त वर्षों तक लाभ प्राप्त करेगी।

      च.    वाणिज्यिक/बिक्रीकर रियायतों की मात्रा पर सीमा लगाने के लिए, अचल परिसंपत्तियों में पूंजीगत निवेश को परिभाषित करना आवश्यक हो गया है। अचल परिसंपत्तियों में पूंजीगत निवेश को निम्न प्रकार परिभाषित किया गया है:

      1. भूमि, भवन, संयंत्र और मशीनरी, विद्युत स्थापनाओं और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों में किया गया निवेश।
      2. भूमि और भवन में किए गए निवेश के 10 प्रतिशत तक भूमि विकास पर व्यय।
      3. प्रयोगशाला, अनुसंधान के लिए और प्रशासनिक भवन पर किया गया निवेश।
      4. प्रयोगशाला और अनुसंधान के लिए मशीनरी तथा उपकरणों पर किया गया निवेश।
      5. रेलवे साइडिंग की स्थापना पर किया गया पूंजीगत निवेश।
      6. गोदाम, भंडारण टंकी आदि पर व्यय।
      7. उत्पादन के लिए वांछित पट्टे पर ली गई मशीनरी और उपकरण का मूल्य (इस संबंध में विस्तृत परिभाषा अलग से जारी की जाएगी)।
      8. मद संख्या 5 से 7 के अलावा, सभी मदों पर लघु उद्योग क्षेत्र के लिए विचार किया जाएगा।
      9. एक सौ करोड़ रुपए तक निवेश वाली बड़ी और मध्यम इकाइयों के लिए अधिकतम अनुमेय कर रियायतों की गणना के लिए, वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के तीन वर्षों के भीतर उनके द्वारा किए गए निवेश पर भी विचार किया जाएगा। एक सौ करोड़ रुपए से अधिक के निवेश वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए, वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के पांच वर्षों के भीतर उनके द्वारा किए गए निवेश भी विचार किया जाएगा।

    5.7 संतुलित क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से, राज्य के सभी जिलों के "बिना उद्योग वाले प्रखंडों" में स्थापित लघु, मध्यम और बड़ी इकाइयां "ग" श्रेणी के जिलों में उपलब्ध समान वाणिज्यिक कर रियायतें पर छूट अथवा आस्थगन प्राप्त करेंगी। "ग" श्रेणी के पिछड़े जिलों के "बिना उद्योग वाले प्रखंडों" में एक वर्ष की अतिरिक्त रियायतें उपलब्ध होंगी। "बिना उद्योग वाले प्रखंड" वे हैं जिनमें औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 की घोषणा की तिथि को कोई बड़ी अथवा मध्यम इकाई नहीं है। औद्यागिक नीति और कार्य योजना, 1994 की घोषणा की तिथि के बाद वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने वाली ऐसी लघु उद्योग इकाइयां (संयंत्र और मशीनरी में पांच लाख रुपए से अधिक के निवेश वाली) और मध्यम तथा बड़ी इकाइयां "बिना उद्योग वाले प्रखंडों" में उपलब्ध कराई जा रही विशेष सुविधाओं के लिए पात्र होंगी।

    5.8 वे औद्योगिक इकाइयां जो बड़े बांधों और परियोजनाओं के कारण आप्लावन द्वारा विस्थापित व्यक्तियों के लिए पुनर्वास क्षेत्रों के रूप में घोषित क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी, "ग" श्रेणी के जिलों की इकाइयों को उपलब्ध समान रियायतें प्राप्त करेंगी। "ग" श्रेणी के जिलों के ऐसे क्षेत्रों में स्थापित होने वाली इकाइयों को दो अतिरिक्त वर्षों के लिए रियायतें प्रदान की जाएंगी। इन इकाइयों को एक निर्धारित संख्या में विस्थापित लोगों को रोज़गार प्रदान करना होगा।

    5.9 राज्य सरकार के अनुमोदन से मध्य प्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगमों द्वारा विकसित विकास केंद्रों, जहां आधारभूत संरचना के विकास पर व्यय किया गया है, में स्थापित की जाने वाली इकाइयां दो वर्षों की अतिरिक्त अवधि के लिए छूट अथवा आस्थगन के माध्यम से समय-समय पर वाणिज्यिक कर रियायतों की पात्र होंगी। ये रियायतें भविष्य में अनुमोदित होने वाले विकास केंद्रों में भी उपलब्ध होंगी।

    5.10 विकास केंद्र के भीतर भूमि की अनुपलब्धता के कारण विकास केंद्र की सीमा से पांच किलोमीटर के भीतर स्थापित की जाने वाली इकाइयां उस क्षेत्र में सामान्यत: अनुमेय अवधि से एक वर्ष अधिक तक अतिरिक्त कर रियायतों के लिए पात्र होंगी।

    5.11 औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 की घोषणा के बाद वाणिज्यिक उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाइयों को "नई इकाइयों" के रूप में परिभाषित किया गया है।

    5.12 राज्य के मूल निवासियों को रोज़गार के अधिकाधिक अवसर प्रदान करने की दृष्टि से एक नई योजना प्रारंभ की जाएगी जिसके लिए उद्योगों को अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। जिन औद्योगिक इकाइयों के लिए विशेष रूप से भूमि अधिग्रहीत की गई है, उन पर उस परिवार के एक सदस्य को रोज़गार प्रदान करने का उत्तरदायित्व होगा जिनकी भूमि अधिग्रहीत की गई है, बशर्ते कि उस भूमि पर परिवार का न्यूनतम बीस वर्षों से स्वामित्व हो। इसके लिए अलग से नियम बनाए जाएंगे।

    5.13 मानव संसाधन विकास के लिए, उन इकाइयों को विशेष वित्तीय रियायतें प्रदान की जाएंगी जो राज्य के मूल निवासियों को प्रशिक्षण और रोज़गार प्रदान करेंगी। इन इकाइयों को शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को रोज़गार देने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।

    5.14 "संवेगी क्षेत्र" की व्यापकता का विस्तार किया गया है। अब संवेगी क्षेत्र में ऑटोमोबाइल, कृषि औज़ार, कृषि आधारित उद्योग, कृषि संबंधी उपकरण, खनिज संसाधन आधारित उद्योग, जीवन रक्षक दवाएं, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, मछलियों की डिब्बाबंदी, वाहनों के कलपुर्जे, प्रशीतन वस्तुएं, दूरसंचार और पैट्रो-रसायन अधोगामी परियोजनाएं, सिलेसिलाए परिधान, खेल का सामान और चमड़ा तथा रेशम उद्योग सम्मिलित होंगे। समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा इस संवेगी क्षेत्र के अंतर्गत सम्मिलित किए गए उद्योगों की सूची की घोषणा की जाएगी। ऐसे उद्योगों को उपलब्ध कर रियायतों की मात्रा पर कोई सीमा नहीं होगी, बशर्ते कि उन्होंने संयंत्र और मशीनरी में न्यूनतम एक करोड़ रुपए का निवेश किया हो।

    5.15 संयंत्र और मशीनरी में न्यूनतम एक करोड़ रुपए के निवेश तथा न्यूनतम सौ व्यक्तियों की सदस्यता के साथ सहकारी क्षेत्र में स्थापित नई औद्योगिक इकाइयां तीन वर्षों के लिए छूट अथवा आस्थगन की अतिरिक्त वाणिज्यिक कर रियायतों के लिए पात्र होंगी।

    5.16 विस्तार करने वाली इकाइयों का अतिरिक्त निवेश उसी अवधि और उसी सीमा तक वाणिज्यिक कर रियायतों के लिए पात्र होगा, जो नई इकाइयों पर लागू होती है। यह सुविधा दस लाख रुपए से अधिक निवेश वाली इकाइयों को उपलब्ध होगी। लघु उद्योग इकाइयों से विद्यमान संयंत्र और मशीनरी में किए गए निवेश के अतिरिक्त संयंत्र और मशीनरी में 50 प्रतिशत निवेश करना वांछित होगा। विस्तार के लिए रियायतें प्राप्त करने हेतु, दस करोड़ रुपए तक निवेश वाली बड़ी और मध्यम इकाइयों को संयंत्र और मशीनरी में न्यूनतम एक करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश करना होगा। दस करोड़ रुपए से अधिक निवेश वाली इकाइयों को न्यूनतम पांच करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश करना होगा। उपरोक्त सुविधाएं स्थापित क्षमता से 100 प्रतिशत अधिक उत्पादन के लिए उपलब्ध होंगी।

    5.17 पात्रता की अवधि के दौरान, आधुनिकीकरण/विविधिकरण और नई वस्तुओं का उत्पादन करने वाली इकाइयां भी पात्रता की शेष अवधि के लिए नई वस्तुओं पर कर रियायतों के लिए पात्र होंगी।

    5.18 अनुषंगी वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं को भी प्रवेश कर रियायतों के अंतर्गत लाया जाएगा।

    5.19 शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। ये इकाइयां दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए वाणिज्यिक कर रियायतें और आठ वर्षों की अवधि के लिए प्रवेश कर के भुगतान से छूट प्राप्त करेंगी। अनिवासी भारतीयों द्वारा न्यूनतम दो करोड़ रुपए के पूंजीगत निवेश से स्थापित की जा रही औद्योगिक इकाइयां भी शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों को उपलब्ध समान रियायतें प्राप्त करेंगी, बशर्ते कि संवर्धक द्वारा इक्विटी निवेश का न्यूनतम 50 प्रतिशत अनिवासी भारतीय निवेश हो।

    5.20 विद्युत सब्सिडी योजना, 1989 को समाप्त कर दिया गया है और इस प्रकार बचाए गए वित्तीय संसाधनों को संरचना विकास पर व्यय किया जाएगा।

    5.21 औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 की घोषणा की तिथि से, लघु उद्योगों पर अनुप्रयोज्य ब्याज सब्सिडी योजना के अंतर्गत सामान्य उद्यमियों के लिए अधिकतम सीमा को वर्तमान में दस हजार रुपए प्रतिवर्ष से बढ़ाकर पच्चीस हजार रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया है। इस समय अनुसूचित जातियों और जनजातियों से संबंधित उद्यमियों को 4 प्रतिशत की दर पर ब्याज सब्सिडी उपलब्ध है। औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 की घोषणा की तिथि से, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के उद्यमियों के लिए ब्याज सब्सिडी की दर को बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया जाएगा और पहले के मामलों की भांति इसकी कोई सीमा नहीं होगी।

    5.22 बड़ी और मध्यम इकाइयों को अनुषंगी इकाइयों के संवर्धन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए एक आकर्षक योजना की घोषणा की जाएगी।

    5.23 निर्यात में बढ़ोतरी के लिए राज्य में निर्मित उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी होने की आवश्यकता है। सुनिश्चित गुणवत्ता प्रतिस्पर्धात्मकता की कुंजी है। आईएसओ 9000 प्राप्त करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संदर्भ में, राज्य सरकार एक मान्यताप्राप्त प्रमाणन संस्थान को भुगतान किए गए शुल्क के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति करके सहायता प्रदान करेगी।

    5.24 राज्य सरकार तीव्र औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण सुरक्षा की आवश्यकता के प्रति पूर्णत: जागरुक है। पर्यावरणीय सुरक्षा उपकरणों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए, इन उपकरणों को वाणिज्यिक करों से मुक्त किया जाएगा।

    5.25 विभिन्न सुविधाओं और रियायतों के लिए अपात्र इकाइयों की वर्तमान सूची को संशोधित किया जाएगा।

    5.26 बड़े निवेशों को आकर्षित करने के लिए रियायतों के विशेष पैकेज तैयार किए जाएंगे।

    5.27 पांच सौ करोड़ रुपए अथवा अधिक के निवेश वाली सभी प्रकार की नई इकाइयों के लिए एक विशेष प्रोत्साहन योजना तैयार की जाएगी। राज्य पूंजीगत निवेश सब्सिडी और भूमि आवंटन की संशोधित शर्तों आदि को छोड़कर, एक हजार करोड़ रुपए से अधिक के पूंजीगत निवेश वाले एकीकृत इस्पात संयंत्रों की स्थापना के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना की भांति इस योजना के अंतर्गत प्रोत्साहनों के रूप में रियायतें प्रदान की जाएंगी।

    5.28 दस करोड़ रुपए से अधिक और एक सौ करोड़ रुपए तक निवेश के साथ स्थापित सभी प्रकार की नई इकाइयों के लिए रियायतों का एक विशेष पैकेज और एक सौ करोड़ से अधिक किंतु पांच सौ करोड़ से कम निवेश वाली नई इकाइयों के लिए एक अन्य पैकेज तैयार किया जाएगा।

    5.29 कृषि और शहरी अपशिष्टों का प्रसंस्करण करने वाले संयंत्रों की स्थापना के लिए एक विशेष योजना तैयार की जाएगी।