राज्य
नीति

मध्य प्रदेश

6. कुटीर और ग्रामोद्योग

    6.1 कुटीर और ग्रामोद्योग क्षेत्र औद्योगिक विकास का मूलाधार है। यही वह क्षेत्र है जो दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों के औद्योगीकरण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विविधिकरण, भूमि पर दबाव को कम करने और बेरोज़गारी तथा अर्ध-बेरोज़गारी की चुनौती का प्रभावी रूप से मुकाबला करने के लिए इस क्षेत्र का विकास महत्वपूर्ण है।

    6.2 ब्लॉक, जिला और संभागीय स्तरों पर कार्य समूह गठित किए जाएंगे। सरकारी और गैर-सरकारी सदस्यों के इन कार्य समूहों में प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ-साथ उद्यमियों और पंचायतों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे। ये समूह एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे, सूचनाओं का आदान-प्रदान और उद्यमियों में उनका प्रचार-प्रसार करेंगे तथा ग्रामीण औद्योगीकरण की सुविधा और सुदृढ़ीकरण के लिए उपाय सुझाएंगे। संभाग स्तरीय कार्य समूह नई प्रौद्योगिकी, संपर्कों, निर्यात संभावनाओं और कुटीर तथा ग्रामीण औद्योगिक इकाइयों जैसे मामलों पर राज्य सरकार और भारत सरकार की एजेंसियों के साथ-साथ स्वैच्छिक संगठनों के भी संपर्क में रहेंगे। संभाग स्तरीय कार्य समूह जिला और ब्लॉक स्तरीय कार्य समूहों के साथ निकट और निरंतर संपर्क रखेंगे और समय-समय पर उनके कार्यों की समीक्षा करेंगे।

    6.3 आगामी तीन वर्षों में चार हजार व्यक्तियों को खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र, हथकरघा, हस्तशिल्पों और चर्मशिल्पों में प्रशिक्षित किया जाएगा। रोज़गार प्राप्त करने में उनकी सहायता के लिए उन्हें आवश्यक औज़ार और उपकरण प्रदान किए जाएंगे।

    6.4 सरकार का प्रयास एक लाख अस्सी हजार व्यक्तियों को ग्रामोद्योगों में प्रत्यक्ष रोज़गार प्रदान करना होगा।

    6.5 ग्रामीण औद्योगीकरण को सुचारू करने की दृष्टि से परियोजना आधारित एक नीति को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए, नाबार्ड की जिला ग्रामीण उद्योग परियोजना को चरणबद्ध रूप में कार्यान्वित करने के प्रयास किए जाएंगे। जनजातीय जिलों में परियोजना के कार्यान्वयन के प्रयास किए जाएंगे।

    6.6 कच्चे माल के स्रोतों, विपणन दुकानों और वित्तीय संस्थानों के कुटीर और ग्रामोद्योगों के साथ व्यापक संपर्क बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

    6.7 कुटीर और ग्रामोद्योगों के उत्पादों के लिए मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम विपणन संभावनाओं को खोजेगा। स्टोर खरीद नियमों में संशोधन किया जाएगा और चयनित मदों को कुटीर और ग्रामोद्योग क्षेत्र के लिए आरक्षित किया जाएगा।

    6.8 यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी प्रकार के कपड़ों की सरकारी खरीद मध्य प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड, मध्य प्रदेश हथकरघा सहकारी समिति और मध्य प्रदेश राज्य वस्त्र निगम से की जाए।

    6.9 कुटीर और ग्रामोद्योग क्षेत्र में उद्यमियों को विपणन सहकारिताएं बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    6.10 सरकार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों से संबंधित उद्यमियों द्वारा उत्पादन और विपणन गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए विशेष योजनाएं तैयार करेगी।

    6.11 रेशम उद्योग के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भूमि से रेशम की नीति को व्यापक सुदृढ़ आकार देने के लिए, मलबरी पौधरोपण, रेशम-कीट पालन और कोकूनों को अलग करने जैसे प्रत्येक पहलू के लिए सभी संभव सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। मलबरी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा। लोगों को अधिक रोज़गार अवसर प्रदान करने के लिए रेशम उद्योग की रोज़गार संभावनाओं का दोहन किया जाएगा। राज्य में स्थापित रेशम केंद्रों का तकनीकी सेवा केंद्रों, विस्तार केंद्रों और बीज उत्पादन केंद्रों के रूप में उपयोग किया जाएगा। रेशम उद्योग के विकास में ग्राम पंचायतों को सक्रिय रूप से सम्मिलित किया जाएगा। निजी क्षेत्र में कोकूनों के उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए किसानों को सब्सिडी और ऋण दिए जाएंगे। जब तक निजी क्षेत्र में कोकूनों की खरीद के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो जाती, किसानों से समर्थन मूल्य पर कोकूनों की खरीद की जाएगी। समर्थन मूल्य के निर्धारण के लिए एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में सरकारी सदस्यों के साथ-साथ कोकून उत्पादकों के प्रतिनिधि भी होंगे। कोकूनों को अलग करने वाली इकाइयों की स्थापना में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाएगा। रेशम-कीट पालन निदेशालय की रीलिंग योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को हाथ और चरखों तथा कुटीर कुंडियों से कोकूनों को अलग करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। रीलिंग इकाइयों के लिए कोकूनों के मूल्य पर निर्णय हेतु एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया जाएगा। केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा किए गए अनुसंधान के परिणामों की इंदौर और बस्तर के अनुसंधान केंद्रों में जांच की जाएगी। रेशम उद्योग के संपूर्ण विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त किया जाएगा।

    6.12 टसर बीज केंद्रों को सुदृढ़ किया जाएगा। टसर कीट-पालन को बढ़ाने के लिए, वन विभाग की सहायता से साजा और अर्जुन के पौधों का व्यापक पौधरोपण किया जाएगा। प्राकृतिक टसर कोकून की रैली किस्म का न केवल बस्तर अपितु साल वनों वाले अन्य जिलों में भी उत्पादन किया जाएगा। ग्रामीण महिलाओं को मशीन पर टसर निकालने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य के हथकरघा बुनकरों को वस्त्र बुनाई के लिए टसर धागे के प्रयोग हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। टसर कोकून उत्पादकों को भुगतान किए जाने वाले समर्थन मूल्य के निर्धारण के लिए एक अंतर-विभागीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में सरकारी सदस्यों के अलावा टसर कोकून उत्पादकों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे। यह समिति प्रतिवर्ष जून माह में समर्थन मूल्य का निर्धारण करेगी। बुनकरों को टसर कोकून के बिक्री मूल्य के निर्धारण के लिए भी एक अंतर-विभागीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में बुनकरों के प्रतिनिधियों को भी सम्मिलित किया जाएगा।

    6.13 Tखादी और ग्रामोद्योगों की जीवनक्षमता बढ़ाने के लिए उनकी प्रौद्योगिकी का उन्नयन किया जाएगा। कुटीर उद्योगों की परंपरागत प्रौद्योगिकी का आधुनिकीकरण किया जाएगा। मध्य प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड ग्रामोद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराएगा और उनके उत्पादों के विपणन की व्यवस्था भी करेगा। मध्य प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से प्रतिवर्ष एक हजार आठ सौ इकाइयों की स्थापना का प्रयास किया जाएगा।

    6.14 सरकार हथकरघा क्षेत्र के विकास पर पैनी नज़र रखेगी। बुनकरों को उचित मूल्य पर धागा उपलब्ध कराया जाएगा और हथकरघों के आधुनिकीकरण के कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा। बुनकरों को सहकारी समितियों के माध्यम से पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। बुनकरों के लिए सामान्य बीमा योजना, बचत योजनाओं और स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार किया जाएगा।

    6.15 भारत सरकार की नीति के अनुसार, जनता कपड़े के उत्पादन में लगे पांच हजार हथकरघा बुनकरों को आठवीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे उच्च गुणवत्तापूर्ण वस्त्रों का उत्पादन कर सकें।

    6.16 जिन हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों की ऋण सीमा समाप्त हो चुकी हैं और जो अपने सदस्यों को रोज़गार अवसर प्रदान नहीं कर पा रही हैं, उनका पुनर्वास किया जाएगा ताकि वे पुन: जीवनक्षम हो सकें और अपने सदस्यों को रोज़गार के अवसर प्रदान कर सकें।

    6.17 बुनकरों की सघनता वाले क्षेत्रों में यार्न डिपो स्थापित किए जाएंगे ताकि बुनकरों को वर्ष भर उचित मूल्य पर धागा उपलब्ध हो सके।

    6.18 हथकरघा वस्त्रों के लिए राज्य में रंगाई और छपाई सुविधाओं का विकास किया जाएगा ताकि इन क्षेत्रों में लगे लोगों के लिए और अधिक रोज़गार अवसर सृजित हो सकें।

    6.19 राज्य के राजकीय हथकरघा प्रशिक्षण केंद्रों का विकास एवं अनुसंधान केंद्रों के रूप में विकास किया जाएगा। प्रशिक्षण के स्तर का उन्नयन किया जाएगा।

    6.20 पुराने हथकरघों के आधुनिकीकरण का कार्य जारी रहेगा। परंपरागत इकाइयों के प्रौद्योगिकीय उन्नयन के प्रयास किए जाएंगे।

    6.21 मध्य प्रदेश हथकरघा विकास निगम ग्रामीण दस्तकारों के लिए गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह निगम आधुनिक औज़ार खरीदने और आधुनिक कर्मशालाओं की स्थापना में दस्तकारों की सहायता करेगा। निगम कच्चे माल की नियमित आपूर्ति और उनके उत्पादों के लिए विपणन सुविधाओं के विस्तार को सुनिश्चित करेगा।

    6.22 हस्तशिल्पों के विकास के लिए मध्य प्रदेश हस्तशिल्प विकास निगम नोडल एजेंसी होगा। प्रत्येक शिल्पी को एक पासबुक दी जाएगी जिसमें उन्हें दिए गए अनुदान, ऋण, प्रशिक्षण और औज़ारों का विवरण दर्ज किया जाएगा।

    6.23 कालीन उद्योग के विकास की दृष्टि से, ऊन और रंगाई संयंत्रों की स्थापना के लिए निजी उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    6.24 कौशल उन्नयन, नई तकनीकों को अपनाने और नए डिज़ाइनों के विकास के लिए हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वे बाज़ार मांगों के अनुरूप उपयोगी और कलात्मक हस्तशिल्पों का उत्पादन कर सकें।

    6.25 राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चर्मशिल्पों के विकास के लिए अत्यधिक संभावनाएं हैं। चमड़ा उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विकास के नए आयाम खोल सकती हैं। ग्रामीण चर्मकारों के उत्पादों की विपणन क्षमता में बढ़ोतरी में सहायता के लिए उन्हें प्रशिक्षित करने हेतु एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। मध्य प्रदेश चर्म विकास निगम कलेक्शन केंद्रों और विपणन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करेगा और आधुनिक चर्मशोधन शालाओं के तंत्र की स्थापना करेगा।

    6.26 बुरहानपुर, जबलपुर और अन्य नगरों में पावरलूम उद्योग की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और इस क्षेत्र के विकास के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार की जाएगी।

    6.27 अपने खेतों और घरों में उगे बांस को काटने के लिए अभी तक किसानों को वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती थी। इस रोक को अब हटा लिया गया है। अब किसान वन विभाग की अनुमति के बिना अपने खेतों ओर घरों में उगे बांसों को काट सकते हैं। जिन 23 जिलों में बांस प्राकृतिक रूप से उगते हैं, उनमें उत्पादों के परिवहन के लिए अब ग्राम पंचायत अनुमति देगी। अन्य 22 जिलों में, रेंजरों द्वारा अनुमति दी जाएगी। इससे बांस आधारित शिल्पों को बहुत प्रोत्साहन मिलेगा।

    6.28 आप्लावित क्षेत्रों से विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए, विस्थापित लोगों की इच्छानुसार उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनकी अपनी ग्रामीण औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए सहायता और प्रोत्साहन दिया जाएगा।