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मध्य प्रदेश

7. लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों का विकास

    7.1 देश के निर्यात प्रयासों में लघु उद्योग क्षेत्र का महत्व, संतुलित क्षेत्रीय विकास और रोज़गार अवसर प्रदान करने में इसकी भूमिका सुस्थापित है। राज्य सरकार इस क्षेत्र को अधिक गतिशील बनाने के लिए प्रयास करेगी। रुग्णता की समस्या से प्राथमिकता के आधार पर निपटा जाएगा। कर प्रोत्साहन योजना इस क्षेत्र की इकाइयों और मध्यम तथा बड़े क्षेत्र की इकाइयों के मध्य सहकारी संपर्क विकसित करने में सहायता करेगी और निकट तथा जीवनक्षम परस्पर हितों पर आधारित अनुषंगीकरण को विकसित करने में योगदान देगी। ये संपर्क रोज़गार सृजन में भी योगदान देंगे।

    7.2 लघु उद्योग क्षेत्र के लिए मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम द्वारा प्रदत्त विद्यमान विपणन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जाएगा। लघु उद्योग निगम राज्य से बाहर की चीज़ों को न खरीदकर राज्य में ही निर्मित वस्तुओं को खरीदेगा। सरकारी विभागों और निगमों पर स्टोर खरीद नियमों का कड़ाई से पालन करने का दायित्व होगा। इस संबंध में कोई भी छूट केवल मंत्रिमंडल द्वारा दी जाएगी। एक दर अनुबंध प्रणाली प्रारंभ करने के मामले की जांच की जाएगी।

    7.3 लघु उद्योग क्षेत्र के लिए एक संवर्धक और विपणन एजेंसी के रूप में लघु उद्योग निगम की भूमिका में संशोधन किया जा रहा है।

    7.4 स्थानीय स्तर पर खरीद की सुविधा के लिए, लघु उद्योग निगम के जिला स्तरीय अधिकारियों को अधिकारों का प्रत्यायोजन किया जाएगा। विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया खरीद और लघु उद्योग इकाइयों को भुगतान के लिए तंत्र को अनुकूलित करने में सहायता करेगी।

    7.5 लघु उद्योग निगम लघु उद्योग इकाइयों के उत्पादों के विपणन के लिए निजी क्षेत्र की सहायता से नई सुविधाओं का विकास करेगा।

    7.6 लघु उद्योग इकाइयों को समय पर भुगतान संबंधी प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया जाएगा। अधिकारियों और संघों के प्रतिनिधियों की एक समिति प्रत्येक तिमाही में विलंबित भुगतानों के मामलों की समीक्षा के लिए निदेशालय में बैठक करेगी। यदि आवश्यक हुआ तो ऐसे मामलों को मुख्य सचिव की जानकारी में लाया जाएगा।

    7.7 लघु उद्योग इकाइयों की स्थाई और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए वित्तीय संस्थानों द्वारा संयुक्त मूल्यांकन हेतु एक प्रणाली पर विचार किया जाएगा। लघु उद्योग क्षेत्र के लिए प्रभावी वित्तीय प्रबंध को सुनिश्चित करने की दृष्टि से, एक समिति जिसमें राज्य स्तरीय लघु उद्योग संघों के प्रतिनिधि भी होंगे, द्वारा मध्य प्रदेश वित्त निगम की कार्यशैली की आवधिक रूप से समीक्षा की जाएगी।

    7.8 अति लघु, लघु, मध्यम और बड़े उद्योग क्षेत्रों के मध्य सहकारी संपर्कों के लिए संभावनाएं हैं। मध्यम और बड़े उद्योग उन केंद्रों के रूप में कार्य कर सकते हैं जिनके आसपास अति लघु और लघु उद्योग इकाइयां विकसित हो सकती हैं। बदले में, अति लघु और लघु उद्योग क्षेत्र बड़े और मध्यम उद्योगों की कच्चे माल और माध्यमिक वस्तुओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करके उनकी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ कर सकते हैं। बड़े और मध्यम उद्योग भी अति लघु और लघु उद्योग क्षेत्र में कौशल उन्नयन से लाभान्वित हो सकते हैं। ऐसे सहकारी संपर्क उनके व्यक्तिगत प्रयासों की तुलना में औद्योगिक विकास में बहुत अधिक योगदान करेंगे। राज्य सरकार ऐसे संपर्कों के विकास और सुदृढ़ीकरण को प्रोत्साहित करेगी।

    7.9 औद्योगिक रुग्णता की समस्या पर सरकार विशेष ध्यान देगी। इस समस्या से निपटने के लिए एक विशेष योजना तैयार की जाएगी।

    7.10 सिलेसिलाए परिधानों का उद्योग इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग की भांति न केवल श्रम बहुलता वाला उद्योग है, अपितु इसमें मध्य प्रदेश को विश्व के निर्यात मानचित्र में स्थान दिलाने की क्षमता भी है। इस उद्योग के विकास के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाया जाएगा।

    7.11 लघु उद्योगों के प्रौद्योगिकीय उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्हें आधुनिक प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रयास किए जाएंगे।

    7.12 भारत सरकार, प्रौद्योगिकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों द्वारा लघु उद्योगों के लिए स्थापित विभिन्न अनुसंधान केंद्रों की सहायता से लघु उद्योग इकाइयों को तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए विभिन्न विषयों पर सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

    7.13 आर्थिक उदारीकरण के संदर्भ में, भारत सरकार ने मध्य प्रदेश के लघु उद्योगों की स्थिति पर एक विशेष अध्ययन कराया है। इस अध्ययन के परिणामों और निष्कर्षों से पूरा लाभ उठाने के सभी प्रयास किए जाएंगे।

    7.14 लघु उद्योगों के विकास की गति को तीव्र करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार-प्राप्त समिति गठित की जाएगी।

    7.15 आगामी पांच वर्षों के लिए एक लाख नए उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    7.16 मध्यम और बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के लिए, राज्य सरकार बेहतरीन संरचना सुविधाएं और रियायतें प्रदान करने के साथ-साथ सुविधाप्रदाता तंत्र को भी सुदृढ़ करेगी।

    7.17 गुणवत्ता और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता के अध्यधीन, जो वस्तुएं अति लघु और लघु उद्योग क्षेत्र के लिए आरक्षित नहीं हैं, उन वस्तुओं को राज्य सरकार के विभागों द्वारा राज्य में स्थापित मध्यम और बड़ी इकाइयों से खरीदा जाएगा।

    7.18 सरकार रुग्ण कपड़ा मिलों की समस्या पर विशेष ध्यान देगी। रुग्ण कपड़ा मिलों पर मंत्रिमंडलीय उप-समिति की रिपोर्ट शीघ्र ही प्रस्तुत की जाएगी। सरकार अन्य क्षेत्रों पर अनुप्रयोज्यता के लिए भी इस रिपोर्ट में दिए गए बिंदुओं की जांच करेगी।

    7.19 मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम राज्य के बड़े और मध्यम उद्योगों के विकास के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। यह निगम औद्योगिक केंद्र विकास निगम के निष्पादन और अभिवृद्धि केंद्रों में संरचनात्मक विकास तथा उसके विस्तार व उन्नयन की समीक्षा के लिए उत्तरदायी होगा। मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम निजी क्षेत्र और उद्योग संघों की साझेदारी में अभिवृद्धि केंद्रों में औद्योगिक संरचनाओं के विकास को प्रोत्साहन देने के लिए एक समन्वयक की भूमिका निभाएगा। मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम सहायता-प्राप्त और संयुक्त क्षेत्रों की रूपरेखा के भीतर बड़े और मध्यम उद्योगों में इक्विटी सहभागिता के लिए प्रस्तावों पर विचार करेगा।

    7.20 आगामी पांच वर्षों के लिए चार सौ नए बड़े और मध्यम उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

8. चयनित महत्वपूर्ण उद्योगों के लिए विशेष सुविधाएं

    8.1 संवेगी क्षेत्र उद्योगों पर विशेष बल दिया जाएगा।

    8.2 राज्य सरकार इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग में उच्च प्रौद्योगिकी और अग्रगामी क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष प्रयास करेगी।

    8.3 इंदौर में इलैक्ट्रॉनिक्स परीक्षण और विकास केंद्र कुछ ही महीनों में पूर्णत: संचालित हो जाएगा।

    8.4 इलैक्ट्रॉनिक्स की उच्च प्रौद्योगिकी और अग्रगामी क्षेत्रों में संलिप्त इकाइयों के लिए एक प्रौद्योगिकी पार्क विकसित किया जाएगा।

    8.5 इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग की अत्यधिक गतिशील और तीव्रता से परिवर्तित होने वाली प्रकृति को देखते हुए, अधिकारियों और इलैक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञों के एक कार्यदल का गठन किया जाएगा। इस समूह की प्रत्येक तिमाही में बैठक होगी, यह सूचना का आदान-प्रदान करेगा और राज्य में इलैक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के भावी विकास के लिए उपाय सुझाएगा।

    8.6 इलैक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के बढ़ते हुए उपयोग को देखते हुए, उनके रखरखाव और मरम्मत के लिए प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि बेरोज़गारों के लिए रोज़गार अवसर सृजित किए जा सकें। रोज़गार अवसरों को अधिकतम करने की दृष्टि से उन्हें शिक्षित बेरोज़गार युवाओं के लिए प्रधानमंत्री रोज़गार योजना, नेहरू रोज़गार योजना और ट्राइसेम के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    8.7 कृषि आधारित उद्योगों में अधिक लोगों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सहकारी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे न केवल रोज़गार अवसरों में बढ़ोतरी होगी, अपितु इससे किसानों को बेहतर आर्थिक प्रतिफल भी सुनिश्चित होंगे। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन और अपनी सिफारिशें करने तथा आवश्यक हो तो नियमों और विनियमों में परिवर्तन के लिए सुझाव देने हेतु मंत्रिमंडल की एक उप-समिति गठित की जाएगी। छोटे वन उत्पादों और बागवानी पर आधारित उद्योगों के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएंगी।

    8.8 खाद्य प्रसंस्करण और कृषि उद्योगों पर सरकार विशेष ध्यान देगी। एक योजना प्रारंभ की जाएगी जिसके द्वारा एक औद्योगिक इकाई एक पूरी तहसील को अपनाएगी और अपने लिए कच्चे माल के अबाधित संपर्क सुरक्षित करेगी। योजना की विस्तृत शर्तों और निबंधनों के अध्यधीन, ऐसी इकाइयों को उस एक क्षेत्र से कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस व्यवस्था का विवरण औद्योगिक इकाई, जिला प्रशासन और उद्योग विभाग द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन में दिया जाएगा। इस ज्ञापन में अन्य बातों के अलावा, इकाई द्वारा सामान्य उपयोग के लिए विकसित की जाने वाली सामाजिक संरचनात्मक सुविधाओं के साथ-साथ उस तरीके का विवरण होगा जिसके आधार पर वर्ष दर वर्ष कच्चे माल का मूल्य निर्धारित किया जाएगा।

    8.9 सोया प्रसंस्करण उद्योग की जबरदस्त संभावनाएं बनी हुई हैं। सोया प्रसंस्करण इकाइयों को संवेगी क्षेत्र के अंतर्गत उद्योगों को प्रदत्त सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए, तेल निकले हुए केक से प्रोटीन और तेल का उत्पादन करने वाली इकाइयों को विशेष सुविधाएं दी जाएंगी। मालसूची पर लगाई गई रोक को समाप्त कर दिया जाएगा। सोया प्रसंस्करण इकाइयों से वांछित लाइसेंसों की जटिलता के प्रश्न पर विचार करने और तर्कसंगत उपाय सुझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। कच्चे माल के ग्रेडेशन के प्रश्न की भी इस समिति द्वारा जांच की जाएगी।

    8.10 कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास को गति देने की दृष्टि से, बंजर भूमि खेती में निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। भूमि सीमा अधिनियम के अंतर्गत ऐसी इकाइयों के लिए आवश्यक प्रावधान करने के प्रश्न की जांच की जाएगी।

    8.11 निजी क्षेत्र को वाणिज्यिक वानिकी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसे औद्योगिक उपयोग के लिए समर्पित वानिकी प्रारंभ करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

    8.12 संवेगी क्षेत्र में होने के कारण खनिज आधारित उद्यागों को विशेष रियायतें दी जाएंगी। खनन में निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। एक "डायमंड पार्क" की स्थापना की जाएगी। यह राज्य में डायमंड पॉलिशिंग और प्रसंस्करण उद्योग की भावी संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता करेगा। खनिज आधारित उद्योगों के रोज़गार और राजस्व सृजन क्षमता के संपूर्ण दोहन के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।

    8.13 परिधान, चमड़ा और रेशम उद्योग को संवेगी क्षेत्र में रखा गया है ताकि उनकी निर्यात और रोज़गार क्षमताओं का पूरा दोहन किया जा सके। इंदौर में सिलेसिलाए परिधानों के कांपलेक्स के विकास में तेज़ी लाई जाएगी। उपभोक्ता रुचि में तेज़ी से हो रहे परिवर्तनों और परिवर्तनों के साथ इन क्षेत्रों की गति बनाए रखने की आवश्यकता के कारण, अधिकारियों और इन क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करते हुए एक कार्यदल का गठन किया जाएगा। यह कार्यदल प्रत्येक तीन माह में बैठक करेगा और इन क्षेत्रों के आगामी विकास के लिए नीतियां तैयार करेगा तथा सरकार को अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगा।

    8.14 भारत पैट्रोलियम द्वारा सागर जिले के बीना में स्थापित किए जा रहे तेलशोधक कारखाने पर आधारित अधोगामी परियोजनाओं के लिए एक योजना तैयार की जाएगी।

    8.15 कृषि और शहरी अपशिष्टों से उर्वरक बनाने वाली इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। ये इकाइयां स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों को कम करने में सहायता करने के अलावा किसानों को प्रत्यक्ष लाभ भी पहुंचाएंगी।