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राज्य नीति | ![]() |
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मध्य प्रदेश9. वाणिज्य का विकास 9.1 औद्योगिक विकास में गति लाने और उसे सदृढ़ बनाने में वाणिज्यिक गतिविधियों का विस्तार एक महत्वपूर्ण कारक है। 9.2 सरकार वाणिज्य के विकास के लिए सुविधाएं प्रदान करने हेतु उपाय करेगी। कर ढांचे को सरलीकृत किया जाएगा और कर कानूनों के प्रशासन को अनुकूलित तथा अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। 9.3 यदि आवश्यक हुआ तो निरीक्षणों और लाइसेंस की विद्यमान प्रक्रियाओं की समीक्षा करके उन्हें संशोधित किया जाएगा। 9.4 व्यापार मेले एक नियमित प्रक्रिया है। भोपाल में एक व्यापार केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके बाद क्षेत्रीय व्यापार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। 9.5 भोपाल, इंदौर और रायपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का मामला भारत सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। राज्य में अन्य शहरी केंद्रों के लिए हवाई संपर्क प्रदान करने हेतु प्रयास किए जाएंगे। 9.6 अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए संरचनात्मक सहायता को सुदृढ़ करने हेतु कंटेनर डिपो और एक एयर कार्गो कांपलेक्स की स्थापना की जाएगी। 10. उत्तरदायी प्रशासन
10.1 जिस प्रभावात्मकता और तत्परता के साथ एक नीति का कार्यान्वयन किया जाता है, वह एक सीमा तक प्रशासनिक संरचना और प्रक्रिया पर निर्भर करती है। राज्य सरकार औद्योगीकरण की आवश्यकताओं के लिए प्रशासन को और अधिक उत्तरदायी बनाएगी। 10.2 प्रशासनिक संरचना का विनियामक से सुविधाप्रदाता के रूप में परिवर्तन करने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन किए जा रहे हैं। 10.3 उद्योगों को प्रोत्साहित करने और उन्हें राहत प्रदान करने की दृष्टि से वाणिज्यिक कर (बिक्रीकर) प्रणाली में दूरगामी सुधार किए गए हैं। पहले, पंजीकरण प्राप्त करने के लिए नई औद्योगिक इकाइयों को नकद जमानत देनी पड़ती थी। इस जमानत की आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया गया है। राज्य की सीमाओं पर बिक्रीकर चैकपोस्टों को 1 अप्रैल, 1994 से हटा दिया गया है। इसने सीमाओं के पार वस्तुओं के आवागमन को सुगम बना दिया है और अब इकाइयां चैकपोस्टों पर घोषणा प्रपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता से मुक्त हैं। इसी प्रकार, बिक्रीकर विभाग के उड़न-दस्तों पर 1 अप्रैल, 1994 से रोक लगा दी गई है। औद्योगिक और वाणिज्यिक स्थापनाओं की जांच करने की बिक्रीकर निरीक्षकों और अन्य बिक्रीकर अधिकारियों की शक्तियों को वापस ले लिया गया है। अब राज्य सरकार की अनुमति के बिना ऐसे निरीक्षण नहीं किए जा सकते। मध्य प्रदेश पहला राज्य है जहां इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में "इंस्पेक्टर राज" को समाप्त किया गया है। दस लाख रुपए वार्षिक आय वाले उत्पादकों (औद्योगिक इकाइयां) को स्वमूल्यांकन की सुविधा प्रदान की गई है। औद्योगिक इकाइयों के लिए कर योग्य न्यूनतम बिक्री के स्तर को 20,000 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया है। 10.4 10.5 मामलों के तत्काल निपटान के लिए जिला उद्योग केंद्रों में एकल खिड़की प्रणाली को सुदृढ़ और सक्रिय बनाया जाएगा। उद्यमियों द्वारा दिए गए आवेदनपत्रों की प्राप्ति के समय ही जांच की जाएगी, और अधूरे होने की स्थिति में आवेदनपत्रों को पूरा करने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। 10.6 जिला उद्योग केंद्रों के सूचना कक्षों को सुदृढ़ और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए वहां कंप्यूटर लगाए जाएंगे और उन्हें राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्रों से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। 10.7 जिला उद्योग केंद्रों के प्रबंधकों को लघु उद्योग इकाइयों के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया जाएगा। ये नोडल अधिकारी "उद्योग मित्रों" के रूप में कार्य करेंगे। प्रत्येक "उद्योग मित्र" इकाई-वार एक गतिविधि चार्ट बनाएगा। ये "उद्योग मित्र" यह सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होंगे कि लघु उद्योग इकाइयों को सरकारी सुविधाएं और रियायतें प्राप्त हों और उनकी समस्याओं का समयबद्ध रूप में समाधान हो। 10.8 औद्योगिक केंद्र विकास निगमों के प्रबंध निदेशक विकास केंद्रों में स्थापित की जा रहीं मध्यम इकाइयों के लिए नोडल अधिकारी होंगे। विकास केंद्रों के बाहर इन इकाइयों के लिए क्षेत्रीय उद्योग अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे। नोडल अधिकारी उद्यमियों को पूरी की जाने वाली औपचारिकताओं की जानकारी देंगे और उन्हें वो प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे जो उन्हें भरने हैं। वे इन प्रपत्रों को संबंधित विभागों को अग्रेषित करेंगे और समयबद्ध रूप में उनका अनुसरण भी करेंगे। नोडल अधिकारी केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं अपितु राज्य सरकार के स्तर पर भी मामलों का अनुसरण करेंगे। यदि राज्य सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक हुआ तो नोडल अधिकारी सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग की अध्यक्षता में अंतर विभागीय सहायता समूह के समक्ष मामले को प्रस्तुत करेंगे। यदि इस समिति में मामले का समाधान नहीं होता तो इसे तत्काल मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष रखा जाएगा। संपूर्ण प्रक्रिया समयबद्ध रूप से चलाई जाएगी। 10.9 पर्यावरणीय अनुमतियों से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल, तीव्र और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। आवेदन पत्रों पर एक समय-सीमा में निर्णय लिया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो तीव्र निपटान की दृष्टि से विभिन्न एजेंसियों को प्रस्तुत आवेदन पत्रों की संयुक्त रूप से जांच की जाएगी। 10.10 जनजातियों की विशेष समस्याओं, उनकी संस्कृति और प्रस्तावित पुनर्वास के संदर्भ में, जनजातीय बहुलता वाले जिलों में प्रस्तावित बहुत बड़ी औद्योगिक इकाइयों के स्थापना-पूर्व प्रभावों के विशेष मूल्यांकन के लिए प्रबंध किए जाएंगे। 10.11 पर्यावरणीय अनुमतियों के नवीकरणों और आवेदनपत्रों के सरलीकरण के लिए अवधि को पुनर्परिभाषित करने हेतु कार्रवाई की जाएगी। 10.12 तीन माह से अधिक से लंबित पर्यावरणीय अनुमतियों के मामलों के निपटान के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया गया है। 10.13 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरणीय योजना और समन्वय संगठन तथा नगर एवं ग्रामीण योजना विभाग पर्यावरणीय अनुमतियां प्राप्त करने के लिए आवश्यकताओं का विवरण देते हुए विस्तृत मार्गदर्शिकाओं का संयुक्त रूप से प्रकाशन करेंगे। 10.14 प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अनुकूलित और सरलीकृत करने और उनमें पारदर्शिता को सुनिश्चित करने की दृष्टि से उनकी निरंतर समीक्षा की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति गठित की गई है। इस समिति में उद्योग संघों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हैं। 10.15 हथकरघा निदेशालय के अंतर्गत जिला और संभाग स्तरीय हथकरघा अधिकारियों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। 10.16 कुटीर और ग्रामीण उद्योगों के विकास को सुदृढ़ करने और जिला स्तर पर इन्हें पर्याप्त प्रशासनिक सहायता देने के लिए, जिला उद्योग केंद्र के एक अधिकारी को अतिरिक्त महाप्रबंधक (ग्रामोद्योग) के रूप में नामित करने और उसे जिला स्तर पर कुटीर और ग्रामोद्योगों के विकास की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय किया गया है। औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रगति के संदर्भ में राज्य में औद्योगिक विकास को नई उत्प्रेरणा प्रदान करेगी। यह क्षेत्रीय संतुलित विकास को प्रोत्साहित करेगी। यह कुटीर और ग्रामोद्योगों, लघु उद्योग क्षेत्र और बड़े तथा मध्यम उद्योगों के मध्य नए और सुदृढ़ संपर्कों की स्थापना में सहायता करेगी और नए रोज़गार अवसरों के सृजन में भी सहायता करेगी। यह नीति दस्तावेज उद्योग संघों और उद्यमियों के साथ निरंतर अंत:क्रिया द्वारा चिह्नित कार्य संस्कृति की स्थापना में योगदान देगा। औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 राज्य के औद्योगीकरण पर मध्य प्रदेश शासन की दीर्घावधि घोषणा है। यह पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी। |