नागालैंड
अध्याय-1
मिशन
""राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उभरते अवसरों का लाभपूर्ण तरीके से दोहन और नागालैंड के लोगों के लिए तात्विक आय तथा रोज़गार संभावनाओं के सृजन के लिए बढ़े हुए निवेश, एक निवेशक-सापेक्ष वातावरण, आधारभूत संरचनाओं और संस्थागत समर्थन के प्रावधान, आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज और विद्यमान संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग के माध्यम से राज्य में तीव्र और जीवनक्षम औद्योगिक विकास को सुगम बनाना""
उद्देश्य
तीव्र औद्योगिक विकास और सुसंगत निवेश वातावरण के लिए परिस्थितियों का सृजन करना।
स्थानीय जनसंख्या के लिए लाभदायक रोज़गार अवसर सृजित करना।
मानव संसाधनों का विकास और जिन क्षेत्रों में राज्य को तुलनात्मक लाभ प्राप्त है, उनमें औद्योगिक उद्यमों का संवर्धन करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना।
संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्रों से सहयोग प्राप्त करके उपलब्ध मानव संसाधनों के उद्यमिता और अन्य तकनीकी कौशलों का विकास करना।
औद्यागिक इकाइयों की विशेषीकृत श्रेणियों के लिए एक सुसंबद्ध क्षेत्र में सामान्य सुविधाएं प्रदान करके चयनित क्षेत्रों में औद्योगिक संरचनाओं का विकास करना। अन्य क्रांतिक संरचनाएं जैसे विद्युत, पानी, संचार आदि प्रदान कराना।
पड़ोसी देशों में उभरते विपणन अवसरों का दोहन करने की दृष्टि से निर्यातोन्मुख उद्योगों का संवर्धन।
औद्योगिक उत्पादों के लिए विपणन सुविधाओं का विकास।
स्थानीय वातावरण और पारिस्थितिकी के सुसंगत चयनित श्रेणियों में राज्य के उपलब्ध संसाधन आधार का उपयोग करते हुए एक औद्योगिक आधार बनाने के लिए सार्वजनिक, निजी, संयुक्त और सहायताप्राप्त क्षेत्रों में बड़े और मध्यम मातृ उद्योगों को प्रोत्साहन।
बेरोज़गार युवाओं को स्वरोज़गार प्रदान करने के लिए ग्रामीण और लघु उद्योग सेवा एवं व्यवसाय उद्यमों (एसएसएसबीई) का विकास।
राज्य में पर्यटन उद्योग का विकास और संवर्धन।
राज्य में रुग्ण औद्योगिक इकाइयों का पुनर्जीवीकरण और पुनर्वास।
अग्रगामी और पश्चगामी संपर्कों की सुविधा द्वारा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विकास।
म्यांमार के साथ सीमापार व्यापार के औपचारीकरण और विकास को तीव्र करना।
प्रक्रियागत बाधाओं और कानूनी अड़चनों को दूर करके निवेशक-सापेक्ष वातावरण प्रदान करना।
नीति
औद्योगिक संस्कृति के संवर्धन और उद्यमियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण के सृजन हेतु प्रभावी कदम उठाना।
कार्यरत अभिवृद्धि केंद्रों और निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क (ईपीआईपी) परियोजनाओं को तीव्रता से पूरा करना और विद्यमान औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने हेतु उपाय करना।
एकीकृत संरचना विकास केंद्रों, खाद्य पार्कों, सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों, जैव-प्रौद्योगिकी पार्कों, शीत भंडारण श्रृंखलाओं, भांडारागारों आदि जैसे सुसंबद्ध क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण औद्योगिक संरचनाएं सृजित करना।
औद्योगिक उपयोग के लिए अन्य क्रांतिक संरचनाएं जैसे विद्युत, पानी और दूरसंचार की उपलब्धता में वृद्धि करना।
बड़े और मध्यम उद्योगों को एकल खिड़की अनुमति प्रदान करने के लिए औद्योगिक सुविधा समितियों का सृजन करना। इसी कार्यप्रणाली को जिला स्तर पर भी अपनाया जाए।
राज्य के तुलनात्मक लाभों को ध्यान में रखते हुए निवेश आकर्षित करने के लिए संवेगी क्षेत्रों का चिह्नांकन करना।
राज्य में चिह्नित अंतरराष्ट्रीय व्यापार बिंदुओं पर आवश्यक संरचनाएं प्रदान करना। व्यापार बिंदुओं की संचलनात्मकता और उन्नयन में तेज़ी लाना।
राज्य में प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क को सुदृढ़ करना और भारत सरकार, राज्य सरकार तथा निजी क्षेत्र द्वारा ऐसी सुविधाओं में निवेश को प्रोत्साहित करके संवेदनशील और विशेषीकृत व्यवसायों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुविधाओं का सृजन करना।
उद्यमियों के प्रशिक्षण के लिए उदार सहायता प्रदान करना।
नागालैंड औद्योगिक विकास निगम (एनआईडीसी) को उपयुक्त वित्तीय और नीतिगत सहायता प्रदान करके बड़ी और मध्यम औद्योगिक इकाइयों के प्रमुख संवर्धक के रूप में इसकी भूमिका को सुदृढ़ बनाना।
केंद्रीय सरकार की पूर्वोत्तर औद्योगिक नीति, 1997 में उपलब्ध प्रोत्साहनों के अलावा सब्सिडियों और रियायतों का आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज और अन्य रियायतें प्रदान करना ताकि राज्य में तात्विक निजी क्षेत्र निवेश को आकर्षित किया जा सके।
सेवा, लघु व्यवसाय और अति लघु विनिर्माण क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित करने के लिए बेरोज़गार युवाओं के लिए एक उपयुक्त स्वरोज़गार योजना तैयार करना।
औद्योगिक गतिविधियों के संवर्धन के लिए बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण उपलब्धता को सुगम बनाना।.
राज्य के संसाधन आधार को बढ़ाने के लिए खानों और खनिजों के अन्वेषण में गति लाना।
राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प विकास निगम (एनएचएचडीसी) तथा अन्य साधनों के माध्यम से हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादकों को विपणन पहुंच के साथ-साथ हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के संवर्धन के लिए प्रभावी कदम उठाना।
पर्यटन उद्योग विकसित करना और अन्य औद्योगिक गतिविधियों को उपलब्ध आवश्यक सहायता प्रदान करना।
निजीकरण और पुनर्जीवन के लिए अयोग्य रुग्ण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को बंद करने सहित राज्य के संभावित जीवनक्षम रुग्ण सार्वजनिक उपक्रमों को पुनर्जीवित करना।
संभावित घरेलू और विदेशी निवेशकों से निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष अभियानों का संचालन करना।
अध्याय-2
आधारभूत संरचना
पर्याप्त आधारभूत संरचना का प्रावधान औद्योगिक विकास के लिए एक पूर्वापेक्षा है। इसलिए राज्य उद्योगों के विकास को सुगम बनाने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना प्रदान करने का प्रयास करेगा। निजी क्षेत्र अथवा राज्य सरकार के साथ संयुक्त उद्यम में विद्युत उत्पादन, सड़कें और पुल, भांडारागारों और औद्योगिक संरचनाओं के चिह्नित क्षेत्रों में बनाओ-चलाओ-सौंपो की अवधारणा पर भी विचार किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र की बढ़ती हुई मांगों के उपयुक्त विद्यमान आधारभूत संरचनाओं को भी सुदृढ़/उन्नत किया जाएगा।
संचार:
राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 471.17 किलोमीटर और राज्य राजमार्ग की लंबाई 1050 किलोमीटर से अधिक है। सभी प्रमुख नगर और गांव अब बारहमासी सड़कों से जुड़े हैं। राज्य दीमापुर के माध्यम से रेल और वायु सेवा द्वारा जुड़ा है। कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए भारी वाहन यातायात को वहन करने के लिए सभी औद्योगिक क्षेत्रों, अभिवृद्धि केंद्रों, ईपीआईपी आदि को जाने वाली सड़कों में परिवर्तन करने के प्रयास किए जाएंगे।
विद्युत:
राज्य में वर्तमान में विद्युत की अधितकतम मांग केवल 50 मेगावॉट है। 2000 के दौरान वोखा और तिज़ित में 132/66 केवी के सबस्टेशन प्रारंभ हो जाने पर, संवर्धन और प्रणाली उन्नयन से अधिकतम मांग 80 मेगावॉट तक पहुंचने की आशा है। यहां तक कि 75 मेगावॉट के दोयांग एचईपी, 24 मेगावॉट के लिखिमरो एचईपी और 24 मेगावॉट के थर्मल पावर स्टेशन के प्रारंभ होने के बाद भी राज्य में विद्युत की कमी रहेगी। इसलिए विद्युत क्षेत्र में निवेश अवसरों की जबरदस्त संभावना है। नागालैंड में जल विद्युत उत्पादन में 2000 मेगावॉट से अधिक की संभावना है।
औद्योगिक संरचना:
राज्य में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए निम्नलिखित औद्योगिक संरचनाएं उपलब्ध हैं:
क. दीमापुर में पुराना और नया औद्योगिक क्षेत्र।
ख. पूरी होने के अंतिम चरण में आधारभूत संरचना परियोजनाएं।
- तिज़ित (मोन) और खिफिर (तुएनसांग) में मिनी औद्योगिक क्षेत्र।
- लोंगलेंग और नोक्लाक (तुएनसांग) में "कोई उद्योग नहीं जिला" के अंतर्गत अभिवृद्धि केंद्र।
- चुचुयिमलैंग (मोकोकचुंग), बागती (वोकाह) और सेरिंग (मोकोकचुंग) में जिला उद्योग केंद्र योजनाओं के अंतर्गत अभिवृद्धि केंद्र।
क. कार्यान्वयनाधीन परियोजनाएं जिनकी 2001-02 तक प्रयोग के लिए तैयार हो जाने की संभावना है।
- गणेशनगर, दीमापुर में औद्योगिक अभिवृद्धि केंद्र (प्रधानमंत्री के नवाचार के अंतर्गत)।
- निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क (ईपीआईपी), गणेशनगर, दीमापुर।
क. औद्योगिक क्षेत्र:-
निम्नलिखित क्षेत्रों को राज्य में ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है जहां स्थापित की गई औद्योगिक इकाइयां औद्योगिक नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन पैकेज की पात्र होंगी:
- भंडारी सब-डिवीजन
- दीमापुर सब-डिवीजन
- घाथाशी क्षेत्र
- औद्योगिक अभिवृद्धि केंद्र, लोंगलेंग
- औद्योगिक अभिवृद्धि केंद्र, नोक्लाक
- मिनी औद्योगिक अभिवृद्धि केंद्र, विस्वेमा
- नया औद्योगिक अभिवृद्धि केंद्र, गणेशनगर
- तिज़ित सब-डिवीजन
- वाज़ेहो क्षेत्र
- तुली क्षेत्र
- किफिर सब-डिवीजन
- लोंगनाक/लोंगथो क्षेत्र
उपरोक्त के अतिरिक्त, सरकार राज्य में एक संतुलित औद्योगिक विकास के लिए अन्य संभावित क्षेत्रों जैसे नगिनीमारा-तिरू और जलुकी घाटी में ऐसे ही क्षेत्रों को अधिसूचित करने का प्रयास करेगी। सरकार राज्य में उद्योगों की स्थापना के लिए संभावित निवेशकों/उद्यमियों को सुविधाएं प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक औद्योगिक संरचनाएं प्रदान करने हेतु राज्य में आईआईडी केंद्रों, खाद्य पार्कों और शीत भंडारण की श्रृंखला आदि भी स्थापित करेगी।
दूरसंचार:
सभी जिला मुख्यालय अब भली प्रकार जुड़े हैं और दूरसंचार विभाग राज्य में सभी चिह्नित गांवों को कवर करने के लिए अपने नेटवर्क के विस्तार की प्रक्रिया में है। राज्य सरकार ब्लॉक मुख्यालयों में भी सामुदायिक सूचना केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है और पिछड़े क्षेत्रों में डाटाबेस के प्रशिक्षण और प्रणाली उन्मुख उपयोग के लिए अधिकाधिक नए टेलीफोन एक्सचेंज भी खोल रही है। दीमापुर और कोहिमा में इंटरनेट सुविधाएं उपलब्ध हैं, ऑप्टिक फाइबर केबल बिछाने से कोहिमा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा उपलब्ध है और बहुत शीघ्र दीमापुर में प्रारंभ हो जाने की आशा है।
(4) वित्त:
पूर्वोत्तर में सामान्यत: और नागालैंड में विशेषकर खराब ऋण:जमा अनुपात राज्य के औद्योगीकरण में एक प्रमुख बाधा रहा है। राज्य में एक उपयुक्त बैंकिंग नेटवर्क है। दीमापुर और कोहिमा में सभी प्रमुख बैंकों की शाखाएं हैं, जबकि अन्य जिलों में भारतीय स्टेट बैंक और अन्य राज्य स्तरीय बैंक हैं। औद्योगिक क्षेत्र को पर्याप्त ऋण संपर्क प्रदान करने के लिए, नागालैंड औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (एनआईडीसी) जो राज्य वित्त निगम के रूप में भी कार्य कर रहा है, को राज्य के औद्योगिक विकास के लिए ऋण चैनलिंग हेतु आईडीबीआई, सिडबी, एनईडीएफआई, एनएमडीएफसी, एनएसडीएफसी और वाणिज्यिक बैंकों की सेवाओं में उद्यमियों की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए सुदृढ़ किया जाएगा।
अध्याय-3
राज्य का संसाधन आधार
क. कृषि वन:
प्रकृति ने वर्षा और उपजाऊ भूमि तथा एक स्वास्थ्यकर वातावरण के रूप में पूरा वरदान दिया है जिसके कारण कृषि/वन संसाधनों की बहुतायत है। सर्वोच्च न्यायालय की रोक से पूर्व नागालैंड पूरे देश को लकड़ी के गोल लट्ठों, काष्ठ परतों और सॉन लकड़ी का प्रमुख निर्यातक था। विगत 10-15 वर्षों में "वृक्ष कृषि" को बड़े पैमाने पर किया गया है और निकट भविष्य में औद्योगिक गतिविधि के लिए इसके एक प्रमुख संसाधन बन जाने की आशा है।
ख. औषधीय और सुगंधित पौधे:
अनुकूल कृषि वातावरण स्थितियों के कारण, औषधीय जड़ी-बूटियां और पौधे राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बहुतायत में उपलब्ध हैं। प्रदर्शन इकाइयों के रूप में वर्तमान में सरकार द्वारा राज्य में सिट्रोनेला/यूक्लिप्टस तेल उत्पादन प्रारंभ किया गया है। निजी क्षेत्र में इस संभावना का वैज्ञानिक दोहन अच्छे परिणाम प्रस्तुत कर सकता है। एक अत्यधिक मूल्यवान औषधीय पौधा जिसे सामान्यत: जिनसेंग के नाम से जाना जाता है, भी नागालैंड में उपलब्ध है जिसमें निर्यात के लिए जबरदस्त वाणिज्यिक संभावना है।
ग. बागवानी:
भारत सरकार द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, पूर्वोत्तर क्षेत्र को अनुकूल कृषि वातावरण स्थितियों के कारण बागवानी के संवर्धन हेतु एक संभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। वर्तमान में, 42000 हैक्टेयर भूमि को बागवानी फसलों के अंतर्गत कवर किया गया है किंतु उपज से पहले और बाद की उपयुक्त संरचना प्रदान करके इस क्षेत्र को आसानी से चौगुना किया जा सकता है। राज्य को अनानास, आलूबुखारा, केला, पैशन फ्रूट और साइट्रस फ्रूट जैसे फलों तथा बम्बू शूट तथा अन्य विजातीय मसालों की उपलब्धता में एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त है। आवश्यक गुणवत्ता नियंत्रण उपायों के साथ उपयुक्त प्रौद्योगिकी और एक दक्ष विपणन नेटवर्क से औद्योगिक उछाल आ सकता है।
घ. पशुपालन और मांस प्रसंस्करण:
राज्य में चमड़ा उद्योग के लिए चमड़े और खालों के प्रसंस्करण के साथ-साथ डेयरी और अनुषंगी उतपादों के लिए उच्च संभावनाएं हैं। वर्तमान में, मुर्गी/सूअर और अन्य मांस उत्पादों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण का राज्य में अभाव है। इसलिए राज्य में आधुनिक बूचड़खाना और अन्य मांस प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए संभावना है। डेयरी उत्पादों के कोमुल ब्रांड ने राज्य में और राज्य के बाहर अच्छी बाज़ार प्रतिक्रिया प्राप्त की है। अन्य मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों के उत्पादन और विपणन के लिए जबरदस्त संभावना है। "अंगोरा ऊन" के लिए अंगोरा खरगोशों का पालन भी एक संभावना है जिसका दोहन किया जा सकता है।
ङ. रेशम-कीटपालन:
कृषि-वातावरण स्थिति राज्य में कीटपालन के विकास के लिए बहुत अनुकूल है। राज्य का कीटपालन विभाग विभिन्न कीटपालन योजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है। यहां 34 कीटपालन फार्म हैं जो तकनीकी और अन्य प्रकार की सहायता जैसे किसानों को प्रशिक्षण, पौध/बीजांकुर की उन्नत किस्मों का वितरण और रोगमुक्त अंडों की आपूर्ति आदि प्रदान करते हैं। सरकार ने अगले तीन वर्षों में एरीकल्चर के अंतर्गत 200 एकड़ भूमि लाकर राज्य में रेशम-कीटपालन के विकास के लिए संवेगी क्षेत्र के रूप में एरीकल्चर को चिह्नित किया है। इसके माध्यम से कोकूनों के उत्पादन को 80 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है।
च. पुष्पोत्पादन:
पुष्पोत्पादन को राज्य में एक बहुत जीवनक्षम उद्योग के रूप में लिया जा सकता है। राज्य में उपलब्ध आर्किड की अत्यधिक किस्मों को मूल्यवान विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए निर्यात किया जा सकता है। नागालैंड में आर्किड की बहुत सी किस्में उपलब्ध हैं जिनकी जबरदस्त वाणिजियक संभावना है। तंतुओं के जरिए आर्किड की विजातीय और नई किस्में उगाने के लिए संभावना है। गुवाहाटी को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने के कारण, राज्य से कट फ्लावर्स का भी निर्यात किया जा सकता है।
छ. खनिज संसाधन:
नागालैंड में बहुतायत में खनिज संसाधन हैं। अभी तक निम्नलिखित खनिज भंडार स्थापित किए गए हैं (1) पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, (2) निकल कोबाल्ट-क्रोमियम युक्त मैग्नेटाइट, (3) संगमरमर, आयामी/सजावटी पत्थर, (4) कोयला आदि। पूर्वी नागालैंड में उच्च रासायनिक ग्रेड लाइमस्टोन का 1000 मिलियन टन से अधिक का बड़ा भंडार निम्नलिखित उद्योगों की स्थापना के लिए एक प्रमुख संभावना है:-
सीमेंट
कैल्शियम कार्बाइड
ब्लीचिंग पाउडर
हाइड्रेटिड लाइम
इस क्षेत्र में स्थापित किए जा सकने वाले अन्य उद्योग हैं:-
सफेद और हरे संगमरमर का खनन और पॉलिश
सेरेमिक ग्लेज्ड टाइलें
सेरमिक क्रॉकरी
सेरेमिक इन्स्युलेटर
भवन निर्माण सामग्री के लिए स्लेट
इस उच्च ग्रेड लाइमस्टोन को फाउंड्री, ब्लास्ट-फर्नेन्स और अन्य धात्विक तथा रासायनिक उद्योगों को निर्यात किया जा सकता है।
ज. पर्यटन:
नागालैंड के पर्वतीय राज्य का मनोरम प्राकृतिक दृश्य और इसकी बहुआयामी संस्कृतियां तथा रीति-रिवाज राज्य में पर्यटन उद्योग के विकास के लिए व्यापक संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं। 16 प्रमुख जनजातियों में से प्रत्येक की अपनी विशिष्ट बहुरंगी वेशभूषा, त्यौहार, नृत्य और संगीत है। लोगों की समृद्ध कला और संस्कृति एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। राज्य को वर्षपर्यंत स्वास्थ्यकर पर्यावरण का वरदान प्राप्त है और कोई किसी भी समय यहां आ सकता है। आरएपी जारी करने के भारत सरकार के निर्णय से पर्यटन उद्योग के विकास के नए अवसर खुलेंगे। ऐसे अवसर पर्यावरण-पर्यटन, रोमांचकारी पर्यटन, मानवविज्ञानीय पर्यटन और एथनिक सांस्कृतिक पर्यटन में विद्यमान है।
झ. मानव संसाधन:
यद्यपि राज्य की साक्षरता दर 83 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से कहीं उच्चतर है, तथापि अभी-भी राज्य में कुशल श्रमशक्ति का अभाव है। यह परिदृश्य धीरे-धीरे बदल रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में नागा युवा उच्चतर और तकनीकी शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जा रहे हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ-साथ निजी प्रशिक्षण संस्थान, विशेषकर कंप्यूटर शिक्षा में, भी उभर रहे हैं। प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों/संगठनों की सेवाओं का उपयोग करके स्थानीय लोगों के कौशलों के विकास और उन्नयन के लिए इसमें एक बड़े प्रयास की आवश्यकता है। स्थानीय युवाओं की प्रबंधकीय क्षमता का विकास सघन उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से किया जाएगा। राज्य सरकार राज्य में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए निजी निवेशकों/संगठनों को प्रोत्साहित करेगी। चूंकि इंग्लिश राज्य की राजभाषा है, इस संवर्धित लाभ को किसी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा प्रभावी रूप से प्रयोग किया जा सकता है।
अध्याय-4
संवेगी क्षेत्र
औद्योगिक विकास के लिए निम्नलिखित संवेगी क्षेत्र होंगे:-
क. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
ख. पर्यटन उद्योग
ग. कृषि आधारित उद्योग
घ. खनिज आधारित उद्योग
ङ. हथकरघा और हस्तशिल्प
च. रेशम-कीटपालन
छ. पुष्पोत्पादन
ज. इलैक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी
झ. फार्मास्युटिकल्स
ञ. पैट्रोकेमिकल्स
ट. जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग
जिला उद्योग केंद्रों का सुदृढ़ीकरण:
जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) लघु उद्योग और अति लघु क्षेत्र के उद्योगों के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार पर्याप्त सुविधाओं और नवीनतम प्रौद्योगिकी/कौशल से अनुकूलता बनाए रखने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के साथ भी जिला उद्योग केंद्रों को सुदृढ़ करेगी। नवसृजित दीमापुर जिला उद्योग केंद्र को शीघ्रातिशीघ्र संपूर्ण जिला उद्योग केंद्र के रूप में उन्नत कर दिया जाएगा। प्रत्येक जिला उद्योग केंद्र उद्योगों/उद्यमियों के चयन, परियोजना तैयार करने और परियोजनाओं के लिए वित्त की व्यवस्था सहित उद्योगों की स्थापना के मामलों में उद्यमियों के मार्गदर्शन के लिए प्रमुख एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
अनिवासी भारतीय और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश:
राज्य सरकार सक्रियतापूर्वक विद्युत, सड़कों, सामाजिक और स्वास्थ्य देखभाल जैसी सुविधाओं वाली परियोजनाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का संवर्धन करेगी। इसी प्रकार इस योजना के अंतर्गत चिह्नित संवेगी क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
व्यापार और निर्यात:
सरकार प्राथमिकता के आधार पर लोंगवा, पांगशा, मिमी, मोल्हे और आवांग्खु में सभी चिह्नित व्यापार केंद्रों में आवश्यक आधारभूत संरचनाएं प्रदान करने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी। भारत सरकार इन व्यापार केंद्रों को मणिपुर में मोरे-तामु क्षेत्र के समकक्ष दर्जे पर लाने के लिए म्यांमार के साथ व्यापार का तेज़ी से औपचारीकरण करेगी। भारत सरकार ने सभी क्लियरेंस सुविधाओं के साथ गुवाहाटी हवाई अड्डे को एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित कर दिया है किंतु अभी इसका संचालन प्रारंभ किया जाना है। एनआईडीसी, राज्य के एकमात्र घोषित निर्यात गृह, को पुन: सुदृढ़ किया जाएगा। राज्य सरकार दीमापुर हवाई अड्डे पर कार्गो संचालन सुविधाओं के उन्नयन के लिए भारत सरकार से बात करेगी। नागा हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों और प्रसंस्करित फलों तथा फूलों (ताजे और सूखे) के निर्यात की संभावना का भी पूरा दोहन किया जाएगा।
राज्य के सार्वजनिक उपक्रम:
उदारीकरण और निजीकरण की निरंतर प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम विशेषकर गैर-प्रमुख क्षेत्रों में, अपनी उपयोगिता गंवा रहे हैं। इसलिए वर्तमान प्रचलन के साथ चलते हुए, सरकार संवर्धात्मक और पूर्णत: वाणिज्यिक सार्वजनिक उपक्रमों में अंतर करेगी। संवर्धात्मक उपक्रमों को उनकी भूमिका प्रभावी रूप से निभाने के लिए सुदृढ़ किया जाएगा, जीवनक्षम वाणिज्यिक सार्वजनिक उपक्रमों की पुनर्संरचना की जाएगी ताकि उन्हें पार्श्विक समावेश के माध्यम से व्यावसायिक प्रबंध लाकर भी व्यावसायिक ढंग से चलाया जा सके। धीरे-धीरे सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय और बजटीय सहायता में कमी करना सामान्य नीति होगी ताकि वे स्वयं अपने पैरों पर खड़े हो सकें। सरकार गैर-जीवनक्षम सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने में संकोच नहीं करेगी।
औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण:
किसी भी विकासात्मक प्रक्रिया के लिए अनुकूल वातावरण सृजित करने हेतु शांति एक पूर्वापेक्षा है। इसलिए नागालैंड सरकार कानून और व्यवस्था को बनाए रखकर वहनीय वृद्धि के लिए एक अनुकूल वातावरण सृजित करने का प्रयास करेगी। राज्य सरकार औद्योगिक सुरक्षा के लिए एक समर्पित राज्य बल के प्रावधान पर विचार करेगी।
अध्याय-5
प्रोत्साहनों का पैकेज
औद्योगिक नीति संकल्पों के अनुकूल, नागालैंड सरकार ने राज्य में औद्योगिक इकाइयों के संवर्धन और स्थापना तथा रुग्ण औद्योगिक इकाइयों के पुनर्जीवीकरण के लिए प्रोत्साहनों का एक पैकेज तैयार किया है।
वैधता की अवधि:
प्रोत्साहनों का पैकेज, जिसके इसके बाद "प्रोत्साहन योजना 2000" कहा गया है, नीति की अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगा और पांच वर्षों की अवधि अथवा राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले समय तक संचालित रहेगा। सरकार योजनाओं में संशोधन करने का अधिकार भी सुरक्षित रखेगी।
प्रभावी तिथि: प्रोत्साहन योजना 2000 की प्रभावी तिथि नीति की अधिसूचना जारी होने की तिथि होगी।
परिभाषाएं:
1. अनुषंगी उद्योग से तात्पर्य एक औद्योगिक इकाई से है जो पार्ट्स, कलपुर्जों, सब- एसेंबली, टूल अथवा इंटरमीडिएट्स का विनिर्माण अथवा उत्पादन करती है अथवा करना प्रस्तावित है अथवा सेवाएं प्रदान करती है, एक अथवा अधिक अन्य औद्योगिक उपक्रमों को अपने उत्पादन अथवा सेवाओं का 50 प्रतिशत से अधिक प्रदान करती है अथवा आपूर्ति करती है अथवा प्रदान करना अथवा आपूर्ति करना प्रस्तावित है और स्वामित्व अथवा पट्टा अथवा किराया खरीद पर संयंत्र और मशीनरी में स्थाई परिसंपत्तियों में जिसका निवेश 100 लाख रुपए से अधिक नहीं है।
2. पात्र इकाई से तात्पर्य केवल नीति की अधिसूचना जारी होने की तिथि को अथवा उसके बाद स्थापित नई इकाइयों और नागालैंड राज्य में उसी स्थान पर विस्तार/ आधुनिकीरण/विविधिकरण कर रही विद्यमान इकाइयों से है, बशर्ते कि:
क) उसके पंजीकृत कार्यालय का स्थान नागालैंड राज्य के भीतर ही हो (विशेष मामलों में औद्योगिक सुविधा समिति के अनुमोदन से छूट दी जा सकती है)।
3. विद्यमान इकाई से तात्पर्य एक औद्योगिक इकाई से है जो नीति की अधिसूचना जारी होने की तिथि से पहले किसी समय वाणिज्यिक उत्पादन में है अथवा थी। ऐसी इकाई को प्रोत्साहन योजना 2000 के लिए विद्यमान इकाई माना जाएगा।
4. एक औद्योगिक इकाई के विस्तार से तात्पर्य विद्यमान इकाई के पूंजीगत निवेश के न्यूनतम 25 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त स्थाई पूंजी निवेश से है। गणना के उद्देश्य के लिए, विद्यमान इकाई की भूमि, भवन और संयंत्र तथा मशीनरी पर किए गए सभी पूंजी निवेशों के सकल मूल्य पर विचार किया जाएगा। विस्तार में अतिरिक्त रोज़गार में न्यूनतम 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ विद्यमान स्थापित क्षमता में न्यूनतम 25 प्रतिशत की वृद्धि भी सम्मिलित होगी। विस्तार पर जाने से पूर्व, इकाई विगत तीन वर्षों के दौरान न्यूनतम 80 प्रतिशत क्षमता पर संचालित होनी चाहिए और औद्योगिक नीति 2000 की संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी को इसकी पूर्व सूचना होनी चाहिए।
5. विविधिकरण से तात्पर्य नए उत्पादों के विनिर्माण के लिए परियोजना स्थापित करने हेतु स्थाई पूंजी परिसंपत्तियों में एक विद्यमान इकाई द्वारा पृथक रूप से किए गए चिह्नांकन योग्य निवेश से है, परंतु स्थाई परिसंपत्तियों में अतिरिक्त निवेश सकल स्थाई पूंजी के 25 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए और अतिरिक्त रोज़गार में न्यूनतम 10 प्रतिशत वृद्धि होनी चाहिए।
6. आधुनिकीरण से तात्पर्य एक औद्योगिक इकाई द्वारा पृथक रूप से किए गए चिह्नांकन योग्य निवेश से है जिसमें उत्पादन लागत में कमी के एक अवश्यंभावी लाभ के साथ नई/उन्नत प्रौद्योगिकी सम्मिलित है परंतु स्थाई परिसंपत्तियों में अतिरिक्त निवेश सकल स्थाई पूंजी के 25 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। विस्तार/विविधिकरण/ आधुनिकीकरण करने वाली इकाई को उपलब्ध प्रोत्साहन किए गए अतिरिक्त निवेश और/अथवा इकाई के विस्तार/विविधिकरण, जो लागू हो, के वर्ष से पूर्व उत्पादन में विगत तीन वर्षों के औसत से अधिक की वृद्धि के लिए होगा। इस योजना के प्रभावी होने से पहले विस्तार/विविधिकरण/ आधुनिकीकरण योजना प्रारंभ करने वाली इकाई को नीति के कार्यान्वयन की तिथि से तीन माह के भीतर संबंधित एजेंसी को सूचना देनी चाहिए।
7. 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाई से तात्पर्य एक औद्योगिक इकाई से है जो समय-समय पर भारत सरकार द्वारा अनुमेय छूटों के अधीन वस्तुओं के संपूर्ण उत्पादन का निर्यात करती है।
8. तैयार उत्पादों से तात्पर्य संबंधित सावधि ऋण प्रदाता एजेंसी और/अथवा कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा अनुमोदित परियोजना/योजना के अंतर्गत विचारानुसार पात्र इकाई द्वारा विनिर्मित मद से है। इसमें वे उप-उत्पाद/स्क्रैप भी शामिल हैं जो मुख्य उत्पादन गतिविधि के दौरान संयोगवश सृजित हो सकते हैं।
9. स्थाई पूंजी से तात्पर्य भूमि, कारखाना शेड सहित भवन, गोदाम, प्रयोगशाला, संयंत्र और मशीनरी की लागत, उत्पादन गतिविधियों से प्रत्यक्ष रूप में संबंधित इलैक्ट्रिकल और अन्य उपकरणों के स्थापना प्रभारों और संचालन-पूर्व व्ययों से है।
10. सरकार से तात्पर्य नागालैंड सरकार से है।
11. नई इकाई से तात्पर्य उस औद्योगिक इकाई से है जिसने नीति की अधिसूचना जारी होने की तिथि को अथवा उसके बाद वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया है।
12. अपात्र इकाई से तात्पर्य उन सभी औद्योगिक इकाइयों से है जिनका इस नीति की अनुसूची-1 में अपात्र के रूप में उल्लेख किया गया है।
13. कच्चे माल से तात्पर्य एक पात्र इकाई द्वारा विनिर्माण प्रक्रिया में वांछित कलपुर्जों, इंटरमीडिएट वस्तुओं, तत्वों, उपभोज्य वस्तुओं और पैकिंग के लिए प्रयुक्त पैकिंग सामग्री से है।
14. राहत प्राप्त करने वाली इकाई से तात्पर्य उस औद्योगिक इकाई से है जिसे नागालैंड सरकार ने राहत प्राप्त करने वाली इकाई के रूप में घोषित किया है अथवा वे इकाइयां जो सरकार की किसी अन्य योजना/अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकार/उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक द्वारा रुग्ण इकाई घोषित की गई हैं।
15. अनुसूची से तात्पर्य इस योजना की एक अनुसूची से है।
16. लघु उद्योग (एसएसआई) से तात्पर्य एक औद्योगिक इकाई से है जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश 1.00 करोड़ रुपए से अधिक नहीं है।
17. लघु उद्योग सेवा व्यवसाय उद्यम से तात्पर्य एक उद्यम से है जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश 25 लाख रुपए से अधिक नहीं है।
18. अति लघु उद्योग से तात्पर्य एक औद्योगिक इकाई से है जहां स्थाई पूंजीगत निवेश 25 लाख रुपए से अधिक नहीं है।
19.निर्यातोन्मुख इकाई से तात्पर्य एक इकाई से है जो अपने सकल उत्पादन का न्यूनतम 35 प्रशित निर्यात करती है।
20. राज्य से तात्पर्य नागालैंड राज्य से है।
पात्रता:
अनुसूची-1 के उद्योगों के अलावा सभी उद्योग प्रोत्साहन योजना 2000 के अंतर्गत सहायता के पात्र हैं।
प्रोत्साहन योजना 2000 के अंतर्गत निजी क्षेत्र, संयुक्त क्षेत्र, राज्य सार्वजनिक क्षेत्र और सहकारिता क्षेत्र को प्रोत्साहन उपलब्ध हैं। योजना के अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम किसी प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं होंगे।
सभी नई इकाइयां प्रोत्साहन योजना 2000 के लिए पात्र होंगी।
राहत प्राप्त/रुग्ण इकाइयां अधिकतम 3 (तीन) वर्षों के लिए प्रोत्साहन योजना 2000 के अंतर्गत प्रोत्साहनों हेतु पात्र होंगी।
विस्तार/विविधिकरण/आधुनिकीकरण कर रही इकाइयां केवल अतिरिक्त निवेश अर्थात् विद्यमान इकाई के विस्तारित/विविधिकृत/आधुनिकीकृत भाग के लिए ही प्रोत्साहनों हेतु पात्र होंगी।
पात्रता प्रमाणपत्र:
पात्रता प्रमाणपत्र वह प्रमाणपत्र है जो औद्योगिक सुविधा समिति द्वारा मध्यम और बड़े उद्योगों को, उद्योग और वाणिज्य निदेशालय द्वारा लघु उद्योग इकाइयों को और जिला उद्योग केंद्रों द्वारा लघु उद्योग सेवा व्यवसाय उद्यम/कुटीर तथा अति लघु उद्योग क्षेत्र को जारी किया जाएगा। इसे यह सुनिश्चित करने के बाद जारी किया जाएगा कि संबंधित औद्योगिक सुविधा समितिकी पूर्ण संतुष्टि तक पात्रता के सभी मानदंडों को पूरा किया जा चुका है।
मात्र इस तथ्य द्वारा कि इकाई ने अपने स्तर पर योजना की सभी शर्तों को पूरा कर लिया है, योजना के अंतर्गत किन्हीं प्रोत्साहनों के लिए कोई अधिकार अथवा दावा मान्य नहीं होगा और प्रोत्साहनों/सब्सिडियों पर अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता है।
कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा योजना के अंतर्गत "पात्रता प्रमाणपत्र" जारी करने और संबंधित एजेंसी और इकाई द्वारा पात्रता प्रमाणपत्र की शर्तों का पालन करने के बाद ही योजना के अंतर्गत प्रोत्साहनों के लिए दावा किया जा सकता है।
सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों के अध्यधीन, इस बारे में कार्यान्वयन एजेंसी का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा।
रोज़गार का प्रमाणन:
रोज़गार का प्रमाणन उस जिले के उपायुक्त और जिला रोज़गार अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से दिया जाता है जिसमें औद्योगिक इकाई स्थापित है। जहां औद्योगिक इकाई का कार्यालय और उत्पादन केंद्र एक से अधिक जिलों में स्थित है, वहां रोज़गार और हस्तशिल्पकार प्रशिक्षण निदेशक रोज़गार का प्रमाणपत्र जारी करेंगे।
कार्यान्वयन एजेंसी:
प्रोत्साहन योजना 2000 में बड़े और मध्यम तथा लघु उद्योग क्षेत्र के संबंध में उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक तथा अति लघु और लघु उद्योग सेवा व्यवसाय उद्यम के लिए जिला उद्योग केंद्र कार्यान्वयन एजेंसी होंगे।
प्रोत्साहनों के संवितरण की प्रक्रिया:
आवेदन प्रपत्रों के साथ पात्रता प्रमाणपत्र और प्रोत्साहनों के संवितरण के लिए प्रक्रियाओं हेतु अलग से दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
संवितरण हेतु प्राथमिकता:
कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा प्रोत्साहनों का संवितरण अनुमोदित दावों के कालक्रमानुसार किया जाएगा। यद्यपि संवेगी क्षेत्रों में लघु उद्योग इकाइयों और 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन इकाइयों को वरीयता दी जाएगी जिनमें 50 प्रतिशत कर्मचारी स्थानीय जनजातीय युवा होंगे।
व्याख्या:
इस नीति संकल्प/प्रोत्साहन योजना की व्याख्या के संबंध में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, नागालैंड सरकार का निर्णय अंतिम होगा। कोई और प्रोत्साहन, अथवा नए दिशा-निर्देश घोषित करने अथवा नीति के प्रावधानों के अंतर्गत समय-समय पर उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक होने पर किन्हीं प्रोत्साहनों/सब्सिडियों को वापस लेने सहित किन्हीं प्रावधानों में संशोधन करने का अधिकार राज्य सरकार के पास सुरक्षित है।
सरकार का अधिकार:
राज्य सरकार ने पात्र औद्योगिक इकाइयों को सब्सिडी/प्रोत्साहनों की स्वीकृति/संवितरण से संबंधित मामलों की समीक्षा का अधिकार सुरक्षित रखा है और इस संबंध में राज्य सरकार का निर्णय अंतिम होगा।
प्रोत्साहन:
निम्नलिखित श्रेणियों की पात्र इकाइयों को प्रोत्साहन उपलब्ध होंगे:
लघु उद्योग इकाइयां
अति लघु इकाई
लघु उद्योग सेवा एवं व्यवसाय उद्यम (एसएसएसबीई)
3 वर्ष की अधिकतम अवधि के अध्यधीन रुग्ण इकाइयां/राहत प्राप्त उपक्रम
बड़े और मध्यम क्षेत्र की इकाइयां
निर्यातोन्मुख इकाइयां
विस्तार/विविधिकरण/आधुनिकीकरण कर रही इकाइयां
पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा प्रदत्त निम्नलिखित प्रोत्साहन पूर्वोत्तर औद्योगिक नीति 1997 के प्रावधानों के अनुसार चिह्नित क्षेत्रों में स्थित पात्र औद्योगिक इकाइयों के लिए उपलब्ध होंगे।
क. पूंजी निवेश सब्सिडी
ख. परिवहन सब्सिडी
ग. कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज सब्सिडी
घ. कर अवकाश
उपरोक्त के अतिरिक्त, राज्य सरकार नीति की अधिसूचना की तिथि के बाद स्थापित औद्योगिक इकाइयों के लिए "प्रोत्साहन योजना 2000" के अंतर्गत निम्नलिखित अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान करेगी।
प्रोत्साहन निम्न प्रकार हैं:
क. विद्युत सब्सिडी
ख. विविध सहायता जिसमें विद्युत लाइन बिछाने हेतु सब्सिडी, एनआरडीसी प्रौद्योगिकी प्राप्त करने के शुल्क और गुणवत्ता नियंत्रण उपायों के लिए सब्सिडी
ग. संभाव्यता अध्ययन लागत में योगदान
घ. स्थानीय रोज़गार संवर्धन के लिए श्रमशक्ति सब्सिडी
ङ. 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाई के लिए विशेष प्रोत्साहन
च. 7 वर्षों के लिए बिक्रीकर से छूट
छ. नई इकाइयों के लिए स्टाम्प शुल्क से छूट
ज. 15 प्रतिशत मूल्य वरीयता और सरकारी स्टोर खरीद कार्यक्रम की सभी निविदाओं में धरोहर राशि से छूट
झ. न्यूनतम 3 माह की अवधि के विशेष उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के लिए छात्रवृत्ति सहायता
अध्याय-6
केंद्रीय सरकार की पूर्वोत्तर औद्योगिक नीति 1997 की विशेषताएं
पूंजी निवेश सबिसडी: अधिकतम 30.00 लाख रुपए की सीमा के अध्यधीन, संयंत्र और मशीनरी पर 15 प्रतिशत की दर से पूंजी निवेश सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
- परिवहन सब्सिडी:
- निकटतम रेलहैड से सिलीगुड़ी तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए 90 प्रतिशत
- पूर्वोत्तर क्षेत्र के अंतर्गत कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए 50 प्रतिशत
- वायु परिवहन द्वारा इलैक्ट्रॉनिक कलपुर्जों और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए 75 प्रतिशत
ब्याज सब्सिडी: दस वर्षों की अवधि के लिए कार्यशील पूंजी ऋणों पर 3 प्रतिशत ब्याज सबिसडी।
कर अवकाश:
अध्याय-7
प्रोत्साहन योजना 2000 (राज्य योजना) के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहन
विद्युत सबिसडी:
विद्युत शुल्कों पर 2 लाख रुपए प्रतिवर्ष की अधिकतम सीमा के अध्यधीन, 2 मेगावॉट और2 मेगावॉट से अधिक कनेक्टिड लोड के लिए क्रमश: 30 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की दर से सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह आवश्यक विवरण के साथ प्रमाणीकृत विनिर्माण प्रक्रिया के लिए विद्युत के वास्तविक उपभोग पर प्रतिपूर्ति योजना होगी।
विद्युत लाइन बिछाना:
पात्र औद्योगिक इकाई तक33/11 केवी लाइन को बिछाने की लागत के लिए 2.00 लाख रुपए की अधिकतम सीमा के अध्यधीन, प्रतिपूर्ति की जाएगी बशर्ते कि वह स्थान अधिसूचित विकसित संरचना से बाहर हो और सरकार द्वारा अनुमोदित हो। यह सब्सिडी पात्र इकाई को केवल एक बार ही दी जाएगी।
संभाव्यता अध्ययन के लिए सब्सिडी:
1.00 लाख रुपए की सीमा के अध्यधीन, विस्तृत परियोजना रिपोर्टों की लागत के 50 प्रतिशत की दर पर सब्सिडी उपलब्ध होगी जो केवल संयंत्र और मशीनरी में 25 लाख रुपए से अधिक के निवेश वाली नई इकाइयों के लिए पात्र होगी बशर्ते कि रिपोर्ट सरकार द्वारा अनुमोदित एक औद्योगिक परामर्शदाता ने तैयार की हो।
श्रमशक्ति सब्सिडी:
प्रतिवर्ष 1.00 लाख रुपए की अधिकतम सीमा के अध्यधीन, सरकार नियुक्ति की तिथि से तीन वर्षों तक पात्र इकाइयों द्वारा नियुक्त स्थानीय जनजातीय कर्मचारियों के लिए वास्तविक वेतन बिल के 25 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति करेगी। यह अनुदान ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति की तिथि से पांच वर्षों की अवधि के लिए होगा और केवल उन्हीं इकाइयों को प्रदान किया जाएगा जिन्होंने संयंत्र और मशीनरी में 10.00 लाख रुपए से अधिक का निवेश किया है और इकाई में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या 20 (बीस) से अधिक है और जहां कर्मचारियों में न्यूनतम 50 प्रतिशत स्थानीय जनजातीय युवा हैं। इस योजना के अंतर्गत सब्सिडी प्राप्त कर रही इकाइयां पांच वर्षों की अवधि तक स्थानीय जनजातीय युवाओं को 75 प्रतिशत रोज़गार सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रभावी कदम उठाएंगी। यह सब्सिडी केवल उन कर्मचारियों जो इकाई में एक वर्ष का नियमित रोज़गार पूरा कर चुके हैं, के लिए प्रतिपूर्ति आधार पर अनुमेय होगी।
100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों (ईओयू) के लिए विशेष प्रोत्साहन:
अधिकतम 3.00 लाख रुपए की सीमा के अध्यधीन, एक अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजी निवेश सब्सिडी। एक वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए बिक्रीकर में छूट।
गुणवत्ता नियंत्रण उपायों के लिए सब्सिडी:
गुणवत्ता नियंत्रण के उद्देश्य के लिए प्रयोगशाला उपकरणों और आईएसआई/बीआईएस/ आईएसओ9000 प्रमाणन की लागत की प्रतिपूर्ति की जाएगी। जहां यह लघु उद्योगों के लिए परियोजना लागत का भाग नहीं है, वहां इसके लिए 50,000 रुपए और बड़ी तथा मध्यम इकाइयों के मामले में 1.00 लाख रुपए की अधिकतम सीमा होगी।
बिक्रीकर छूट:
चयनित उद्योगों में सभी नई इकाइयों को 7 वर्षों की अवधि के लिए बिक्रीकर पर छूट अनुमेय होगी और वित्त विभाग के परामर्श से उद्योग विभाग द्वारा इसकी गणना की जाएगी।
स्टाम्प शुल्क छूट:
अचल परिसंपत्तियों के बंधक सहित वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने के लिए स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क में 5 (पांच) वर्षों की अवधि के लिए स्टाम्प शुल्क अधिनियम से 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
15 प्रतिशत मूल्य वरीयता और सरकारी स्टोर खरीद कार्यक्रम में धरोहर राशि से छूट:
सरकारी स्टोर खरीद कार्यक्रम के अंतर्गत सभी पात्र इकाइयों को सभी खरीदों के लिए 15 प्रतिशत की दर पर मूल्य वरीयता अनुमेय होगी।
उद्यमिता विकास कार्यक्रम के लिए छात्रवृत्ति सहायता:
इस शर्त के अधीन कि प्रशिक्षण अवधि 3 माह से कम नहीं होगी, सरकार से अनुमोदित/मान्यताप्राप्त संस्थानों द्वारा संचालित किए जाने वाले विशेष उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष 100 युवाओं के प्रशिक्षण हेतु 500 रुपए प्रतिमाह प्रति प्रशिक्षार्थी की दर पर छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
प्रोत्साहन योजना 2000 के अंतर्गत राज्य सार्वजनिक उपक्रम सहायता के लिए पात्र नहीं होंगे।
अध्याय-8
कार्यान्वयन और निगरानी के लिए प्रक्रिया
राज्य में सुचारू औद्योगीकरण के लिए सभी सेवाओं के उपयुक्त संचालन को सुनिश्चित करने हेतु, राज्य, निदेशालय/जिला स्तर पर एक तीन स्तरीय निकाय जिसे "औद्योगिक सुविधा समिति" कहा जाएगा, की स्थापना की जाएगी। इन समितियों का उद्देश्य उद्यमियों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान करना और उद्यमियों तथा परियोजनाओं का शीघ्रता से चिह्नांकन, पंजीकरण के लिए मार्गदर्शन, पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया, प्रस्तावों की निगरानी, वित्तीय संस्थानों द्वारा वित्त की व्यवस्था, प्रोत्साहनों का संवितरण, परियोजनाओं के तीव्र कार्यान्वयन के अनुवर्तन आदि को सुनिश्चित करना है।
"औद्योगिक सुविधा समिति" के कार्य:
प्रोत्साहन योजना के लाभ प्राप्त करने के लिए उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के साथ-साथ औद्योगिक नीति का उपयुक्त और पर्याप्त प्रचार।
निवेश की विभिन्न श्रेणियों में संभावित उद्यमियों की पहचान, डाटा प्रोजेक्ट प्रोफाइल तैयार करना।
औद्योगिक नीति के अंतर्गत आवेदन पत्रों की प्राप्ति और पात्रता प्रमाणपत्र जारी करना।
वित्तीय प्रस्तावों का संसाधन और अग्रेषण सहित संबंधित एजेंसियों/ प्रशासनिक विभागों के साथ समन्वय करना।
सभी प्रोत्साहन योजनाओं का उपयुक्त और प्रभावी कार्यान्वयन तथा उनकी संस्वीकृतियां जारी करना।
नीति के कार्यान्वयन से संबंधित किसी मामले के लिए सरकार अथवा उसके अधीन समितियों के समक्ष सभी संबंधित मुद्दों को उठाना।
पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया:
पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन पत्र सीधे निम्नलिखित कार्यान्वयन एजेंसियों को दिए जाएंगे:
अध्याय-9
अनुसूची-1
राइस हॅलर्स, राइस मिल और आटा चक्की
- भंडारण (शीत भंडारण के अलावा)
- ईंट निर्माण इकाइयां (मैकेनाइज्ड ईंट इकाई के अलावा)
- सॉ मिल
- स्टील फैब्रिकेशन इकाई
- स्टील ट्रंक इकाई
- टायर रीट्रिडिंग
- वे ब्रिज़ (मापतौल ब्रिज़)
- रोल पेपर से पेपर कटिंग
- जेरॉक्स इकाइयां
- एक्स-रे और पैथॉलॉजिकल इकाइयों सहित स्वास्थ्य सेवाएं
- नर्सिंग होम, हस्पताल और मेडिकल अनुसंधान केंद्र
- इकाई जिसका पंजीकृत कार्यालय नागालैंड राज्य में नहीं है।
(विशेष मामलों में राज्य स्तरीय औद्योगिक सुविधा समिति के अनुमोदन से उपयुक्त छूट दी जा सकती है।)
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