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पांडिचेरी

पांडिचेरी का औद्योगिक विकास - एक दृष्टि में

सूचना स्रोत: उद्योग विभाग, पांडिचेरी सरकार

संघशासित क्षेत्र पांडिचेरी में दक्षिण भारत में चार तटीय कॉन्क्लेव हैं। पांडिचेरी चेन्नै के दक्षिण में 160 किलोमीटर दूर स्थित है। करैकल पांडिचेरी के दक्षिण में 130 किलोमीटर, यानम आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में लगभग 900 किलोमीटर और माहे केरल में पश्चिमी तट पर लगभग 650 किलोमीटर दूर है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने "भारत में फ्रांसीसी संस्कृति के झरोखे" को बनाए रखने के लिए पांडिचेरी के लिए एक विशेष स्थान की परिकल्पना की थी। जब नेहरू एक आधुनिक औद्योगिक राष्ट्र के लिए सुदृढ़ नींव रख रहे थे, पांडिचेरी ने सीमित औद्योगिक उत्तराधिकार के साथ 1954 में भारत संघ में प्रवेश किया। उस समय केवल 3 बड़ी कपड़ा मिलें और कुछ 5 लघु उद्योग संस्थान थे। तब से राज्य ने काफी प्रगति की है। इन वर्षों में पांडिचेरी ने तीव्र औद्योगिक विकास किया है और प्रभावशाली उन्नति के लिए संतुलन बनाया है। फरवरी, 1997 तक, हमारे यहां 25 बड़े उद्योग, 88 मध्यम और 5,492 छोटी इकाइयों की एक प्रभावशाली स्थापना हो गई है। इन वर्षों में, पांडिचेरी में उद्योगों की अत्यधिक उन्नति हुई है।

पचास के दशक के प्रारंभ में औद्योगिक क्षेत्र में मात्र लगभग 8000 व्यक्ति कार्यरत थे। अब, 883 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश के साथ, 64,323 व्यक्तियों को जीविका प्रदान करके उद्योग अर्थव्यवस्था का जीवन हैं।

उत्पादन के मूल्य के साथ-साथ रोज़गार सृजन में लघु उद्योगों द्वारा किया गया योगदान एक विशेष उल्लेख का पात्र है। सरकार द्वारा लघु उद्योगों के सोद्देश्य संवर्धन ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं।

इस समय 187 निवेश प्रस्ताव विचाराधीन हैं जिनमें 2,042 करोड़ रुपए का सकल परिव्यय और 19,894 व्यक्तियों को रोज़गार प्रदान करने की संभावना है। इन परियोजनाओं में से 40 प्रतिशत से अधिक कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। पांडिचेरी ने राष्ट्रीय स्तर के अनेक बड़े औद्योगिक घरानों और सुप्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय निगमों को आकर्षित किया है।

2. औद्योगिक नीति 1997

    2.1 उद्देश्य

    1. संघशासित क्षेत्र पांडिचेरी में वहनीय औद्योगिकरण का संवर्धन करना।

    2. क्षेत्र के मानव संसाधनों का लाभदायक रूप में उपयोग और रोज़गार को बढ़ाना।

    3. संघशासित क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर और गुणवत्ता का संवर्धन करना।

    4. निरंतर और तीव्र औद्योगिक उन्नति के लिए पांडिचेरी के पर्यावरण का संरक्षण करना।

    5. अधिक निर्यात और परिकल्पनात्मक आयातों से अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण में सहभागिता करना।

    6. इसकी धरोहर और संस्कृति सहित पांडिचेरी की विशेषताओं का लाभ उठाना।

    7. संघशासित क्षेत्र के सभी क्षेत्रों में संतुलित औद्योगिक विकास को सुनिश्चित करना।

3. रणनीति

उपरोक्त उद्देश्यों के अनुपालन में, पांडिचेरी प्रशासन ने निम्नलिखित रणनीतियों को आत्मसात करने का निर्णय किया है।

    3.1 संघशासित क्षेत्र पांडिचेरी में वहनीय औद्योगिकरण का संवर्धन करना।

    पर्यावरणीय संसाधनों की कम मांग के साथ उच्च उत्पादकता और सुदृढ़ वित्तीय प्रतिफल वाले उद्योगों का संवर्धन किया जाएगा।
    "वरीयताप्राप्त उद्योगों" को अनुसूची-1 में सूचीबद्ध किया गया है। संवेगी क्षेत्रों की पहचान की गई है।

    संवेगी क्षेत्र

    कुछ चिह्नित संवेगी क्षेत्रों की पांडिचेरी के साथ स्पष्ट संगतता के लिए उन पर विशेष ध्यान देने हेतु ठोस और सुसमन्वयकारी प्रयास किए जाएंगे।

    क. समुद्री उत्पादों सहित कृषि प्रसंस्करण

    हमारे तटीय क्षेत्रों की शक्ति विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में निहित है जो वैज्ञानिक कृषि की प्रतीक्षारत् है। नैसर्गिक प्रवृत्ति में क्षेत्र के सीमित भूभाग को समुद्र आधारित गतिविधियों को प्रारंभ करने के लिए आधार के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए। उद्योग और कृषि के मध्य एक सहजीवन को बनाए रखने के लिए प्रभावी अग्रगामी और पश्चगामी संपर्कों की आवश्यकता है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कृषि में उत्पादकता को रूपांतरित कर सकते हैं।

    ख. इलैक्ट्रॉनिक और साफ्टवेयर विकास

    इक्कीसवीं शताब्दी का यह "सनराइज़ उद्योग" चहुंमुखी विकास और विकास प्रवृत्ति में गुणात्मक परिवर्तन के लिए एक उत्प्रेरक सिद्ध होगा। स्थानीय रूप से उपलब्ध तकनीकी श्रमशक्ति के साथ यह उच्च मूल्य - न्यून परिमाण उद्योग में प्रचुर प्रतिस्पर्धी धार है।

    ग. चर्म उत्पाद और जूते-चप्पल

    परंपरागत रूप से दक्षिण भारत को चर्म प्रसंस्करण और चमड़े की वस्तुओं के लिए जाना जाता है। पांडिचेरी ने इस उप-क्षेत्र में पहले ही उल्लेखनीय शुरूआत कर दी है। इस क्षेत्र से निर्यात की दूसरी सबसे बड़ी मद चमड़े का सामान है। यद्यपि, इस श्रम सघनता वाले उद्योग को अत्यधिक मूल्य-संवर्धन, बेहतर विपणन और गुणवत्तापूर्ण संवर्धन की आवश्यकता है। पांडिचेरी में निर्मित चमड़े के सामान की पूरी दुनिया में अत्यधिक मांग है। इसके अंतर्निहित लाभ अभी तक पूरी तरह प्रकट नहीं हुए हैं।

    घ. वाहनों के कलपुर्जों सहित हल्की इंजीनियरिंग

    हमारे नि:शेष उपभूमि जल पर अनुपयुक्त मांग न करते हुए और थोड़े से वायु और जल प्रदूषण खतरों के साथ, हल्की इंजीनियरिंग और वहनों के कलपुर्जों का विनिर्माण पांडिचेरी के सौम्य पर्यावरण के लिए काफी उपयुक्त है। हमारे देश का बढ़ता हुआ परिवहन क्षेत्र में वाहनों के कलपुर्जों की काफी खपत है।

    ङ. परिधानों सहित वस्त्र उद्योग

    जिस समय बड़ी संयुक्त टैक्सटाइल मिलें संघर्ष कर रही हैं, आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ सुप्रबंधित संहत लघु स्तरीय स्पिनिंग और पावरलूम इकाइयां अच्छा व्यवसाय कर रही हैं। श्रम-बहुलता वाला परिधान निर्माण उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर हावी हो सकता है। हमें नवीनतम फैशन, सुरक्षा आवश्यकताओं और उपभोक्ता-संवेदनशीलताओं के प्रति अद्यतन रहने की आवश्यकता है।

    वहनीय औद्योगिकरण के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों के क्षेत्रीकरण पर अनुच्छेद-8 में चर्चा की गई है।

    स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    अत्यधिक प्रदूषित और खतरनाक उद्योगों का संवर्धन नहीं किया जाएगा।

    3.2 क्षेत्र के मानव संसाधनों का लाभदायक रूप में उपयोग और रोज़गार को बढ़ाना।

    श्रम-बहुलता वाले व्यवसायों को प्राथमिकता दी जाएगी। जो उद्योग विभिन्न स्तरों पर स्थानीय लोगों को रोज़गार देंगे, उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा।

    उद्योगों की श्रमिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्कूलों में व्यावसा‍यिक पाठ्यक्रमों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कौशल सृजन पाठ्यक्रमों, पॉलीटेक्निकों में तकनीकी शिक्षा और व्यवसायिक संस्थानों में तकनीकी शिक्षा को सुग्राही बनाया जाएगा। शैक्षिक कार्यक्रमों और उत्पादक श्रमशक्ति सृजन के मध्य उपयुक्त संगतता के लिए उद्योग-शिक्षा एकीकरण को संवर्धित किया जाएगा।

    उत्पादकता के उन्नयन के लिए कौशल और ज्ञान के उन्नयन हेतु एप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम, अंत:संयंत्र और कार्य के साथ प्रशिक्षण को संवर्धित किया जाएगा।

    प्रोमोटरों, कार्यकारियों, ट्रेड यूनियनों और कर्मचारियों तथा पांडिचेरी उत्पादकता परिषद्, सामुदायिक पॉलिटेक्निक आदि जैसे संगठनों को सम्मिलित करते हुए प्रशिक्षण और अभिमुखीकरण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। दक्षता और गुणवत्ता के उन्नयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सम्मिलित किया जाएगा।

    3.3. संघशासित क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर और गुणवत्ता का संवर्धन करना।

    उच्च वेतन प्रतिपूर्तियां प्रदान करने वाले और बहुगुणक लाभ सृजित करने वाले उद्योगों का स्वागत और पोषण किया जाएगा। जहां तक संभव हो, उद्योगों को स्थानीय लोगों को रोज़गार देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जहां आवश्यक हो, स्थानीय रूप से उपलब्ध श्रमशक्ति के ज्ञान और कौशल के उन्नयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    बाल श्रमिकों को उद्योगों, यहां तक कि गैर-खतरनाक उद्योगों में भी, और व्यवसायों में रोज़गार देना अनुचित होगा।

    बेहतर समझ और उद्योगों के सुचारू विकास के लिए उद्योगपतियों, पर्यावरणविदों, उपभोक्ताओं, श्रमिकों और अन्य के मध्य नियमित संवाद के लिए एक परामर्शी मंच का गठन किया जाएगा।

    3.4 निरंतर और तीव्र औद्योगिक उन्नति के लिए पांडिचेरी के पर्यावरण का संरक्षण करना।

    पर्यावरण-सापेक्ष उद्योगों को वरीयता दी जाएगी। उद्योगों को नवीनतम प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियों को अपनान के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। प्रदूषण संभाव्यता वाले विद्यमान उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों को उन्नत करने और प्रदूषण की नियमित निगरानी करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा।

    अर्थव्यवस्था के हित में सामान्य बहि:स्रावी उपचार प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। अपशिष्टों के पुनर्चक्रण और बहि:स्रावों के दक्षतापूर्ण उपचार के लिए आधारभूत संरचना के साथ औद्योगिक क्षेत्रों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

    जहां-कहीं संभव होगा, प्रभावी बहि:स्रावी उपचार प्रणालियों की स्थापना और पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपायों के द्वारा पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

    सामुदायिक उपचार और बहि:स्रावों के निपटान के लिए निजी क्षेत्र द्वारा किए गए निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    3.5 अधिक निर्यात और परिकल्पनात्मक आयातों से अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण में सहभागिता करना।

    प्राचीन काल से ही पांडिचेरी रेशम, मोती, मूल्यवान पत्थर और हाथी-दांत उत्पादों के निर्यात के लिए प्रसिद्ध रहा है। उस समय "आरिकामेडु" एक प्रसिद्ध प्रवेश बंदरगाह और मोती निर्माण का एक प्रसिद्ध स्थल था। 1954 तक, पांडिचेरी एक मुक्त बंदरगाह था और यहां एक समृद्ध आयात-निर्यात व्यापार था।

    1989-90 के दौरान, निर्यात 35 करोड़ रुपए तक था जो 1995-96 में बढ़कर 240 करोड़ रुपए हो गया। वस्त्र, चमड़े का सामान, सिलेसिलाए परिधान, हस्तकला, सॉफ्टवेयर, मूल्यवान पत्थर और आभूषण, पॉलिशयुक्त ग्रेनाइट, समुद्री खाद्य आदि वे मदें हैं जिनके निर्यात की संभावनाएं हैं।

    परंपरागत विदेशी व्यापार कौशल के पुनर्जीवन और पांडिचेरी के लोगों की सामाजिक-आर्थिक समृद्धि की पुनर्प्राप्ति की लिए प्रयास किए जाएंगे।

    निर्यातोन्मुख इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जाएगा और उन्हें समर्थन दिया जाएगा। उद्योग विभाग में एक "निर्यात संवर्धन कक्ष" का गठन किया जाएगा।

    निर्यातों के सरल संचालन के संवर्धन के लिए, पांडिचेरी, करैकालैंड माही में बंदरगाहों को सुदृढ़ बनाया जाएगा। कंटेनर संचालन सुविधाओं और भंडारण की आधारभूत संरचनाओं के साथ पांडिचेरी बंदरगाह का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

    संघशासित क्षेत्र में निर्यात प्रसंस्करण ज़ोन की स्थापना के लिए कदम उठाए जाएंगे। सिंगापुर और हांगकांग में विद्यमान तरीके के अनुसार, खरीदारी और व्यापार के लिए पांडिचेरी को एक स्वर्ग के रूप में बनाया जाएगा।

    3.6 इसकी धरोहर और संस्कृति सहित पांडिचेरी की विशेषताओं का लाभ उठाना।

    संपूर्ण फ्रांसीसी भारत की राजधानी रहने के कारण, पांडिचेरी की विरासत में एक विशेष सुगंध है जो भारतीय उप-महाद्वीप में और कहीं नहीं पाई जाती।

    पांडिचेरी अंतरराष्ट्रीय रूप में अपनी वास्तुकला, नगर नियोजन, आध्यात्मिक और यौगिक संस्थानों तथा अंतरराष्ट्रीय भ्रातृत्व के केंद्रों के लिए जाना जाता है। दक्षिण भारतीय मंदिर, कैथोलिक तीर्थस्थल, सन सैंड और सर्फ सभी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए एक उत्पादक पैकेज का संवर्धन करते हैं। होटलों, बीच रिसोर्टों, ध्यान केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, मौज-मस्ती, मनोरंजन गतिविधियों, खेलों और रोमांचक खेलों में महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं।

    फ्रांस, फ्रांसीसी भाषा बोलने वाले देशों और संपूर्ण फ्रांसीसी कॉलोनियों के साथ परंपरागत संबंधों को सुदृढ़ बनाया जाएगा। विदेशी व्यापार के संवर्धन और निवेश तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए उनके ऐतिहासिक संबंधों, संस्कृति और भाषाई समानता के सामान्य गुणों का दोहन किया जाएगा।

    पांडिचेरी की औद्योगिक और वाणिज्यिक धरोहर को बनाए रखा जाएगा और औद्योगिक संग्रहालय तथा प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

    3.7 संघशासित क्षेत्र के सभी क्षेत्रों में संतुलित औद्योगिक विकास को सुनिश्चित करना।

    पांडिचेरी सरकार ने पांडिचेरी और यानम क्षेत्रों को "औद्योगिक पिछड़ा-ख" के रूप में श्रेणीबद्ध किया है जबकि करैकल और माही क्षेत्रों को "औद्योगिक पिछड़ा-क" का स्तर दिया गया है। संतुलित औद्योगिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए, करैकल और माही क्षेत्रों में और अधिक रियायतें तथा प्रोत्साहन दिए गए हैं।

    करैकल में एक अभिवृद्धि केंद्र और सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क विकसित किया जाएगा, पांडिचेरी और यानम में भी अभिवृद्धि केंद्रों को विकसित किया जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों में संरचनात्मक सुविधाओं के विकास और उन्नयन के लिए पर्याप्त निधियां प्रदान की जाएंगी।

    सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर संवाद हेतु सचिव (उद्योग) की अध्यक्षता और दूरस्थ क्षेत्रों के क्षेत्रीय कार्यकारी अधिकारियों, उद्योग निदेशक, पीआईपीडीआईसी के प्रबंध निदेशक आदि की सदस्यता में एक समिति का गठन किया जाएगा।