राज्य
नीति

औद्योगिक नीति - 2003
प्रमुख विशेषताएं

  1. उद्देश्य

    • आधारभूत संरचनाओं के सृजन द्वारा एक प्रेरक निवेश वातावरण सृजित करना, कम विनियम और सुविधाएं।
    • उन्नत प्रौद्योगिकी, उत्पाद गुणवत्ता और विपणन के माध्यम से विद्यमान उद्योगों, विशेषकर लघु उद्योग क्षेत्र का जीर्णोद्धार करना और उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाना।
    • उन क्षेत्रों में एक विशेष संवेग सृजित करना जहां लागत और प्रतिस्पर्धात्मकता के संबंध में पंजाब को अग्रता प्राप्त है।

  2. मुख्य आधार स्तंभ

    • सरकार के साथ बाधामुक्त व्यवहार
    • ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
    • एकमुश्त निपटान योजना
    • कर प्रशासन का नवीकरण
    • विद्यमान उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में बढ़ोतरी
    • रुग्ण लघु उद्योग इकाइयों का पुनर्जीवन
    • पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम (पीएसआईडीसी), पंजाब वित्त निगम (पीएफसी) और पीएसआईईसी की भूमिका को पुन: परिभाषित करना
    • नए निवेशों को आकर्षित करने के लिए उपाय

  3. सरकार के साथ बाधामुक्त व्यवहार

    3.1  निम्नलिखित के लिए सरकारी इंस्पेक्टरों के स्थान पर चार्टर्ड इंजीनियरों द्वारा प्रमाणन/निरीक्षण/सत्यापन के लिए वैकल्पिक योजना:

    • भारतीय बॉयलर्स अधिनियम, 1923 के अंतर्गत बॉयलर्स
    • भार और माप (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 के मानकों के अंतर्गत भार और माप
    • भारतीय विद्युत नियम, 1956 के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों के एकनिष्ठ संबंध में विद्युत स्थापना
    • जल (प्रदूषण से सुरक्षा और नियंत्रण) अधिनियम, 1974, वायु (प्रदूषण से सुरक्षा और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत संचालन के लिए स्वीकृति प्रदान करने हेतु औद्योगिक इकाइयां
    • श्रम और रोज़गार विभाग के विभिन्न अधिनियमों से संबंधित स्वयं प्रमाणन योजना।


    3.2  ट्रक यूनियनों की मनमर्जी के स्थान पर बाज़ार चालित दरों को सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक सामान के सहज आवागमन के लिए उपाय

    3.3  निगरानी समितियां

    • औद्योगिक नीति के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए उद्योग और वाणिज्य मंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति
    • पर्यावरणीय, स्थान संबंधी और अन्य पक्षों की स्वीकृति/अनुमति की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति
    • समयबद्ध रूप में स्वीकृतियां/अनुमतियां प्रदान करने की निगरानी के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति

  4. विद्युत क्षेत्र में सुधार

    • नियंत्रित प्रयोग के लिए विद्युत सृजन को मुक्त रूप में अनुमति दी जाएगी।
    • स्वयं उपयोग के लिए सृजित नियंत्रित विद्युत हेतु विद्युत शुल्क से छूट।
    • एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक इकाइयों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित नियंत्रित विद्युत संयंत्रों को उन्हीं इकाइयों द्वारा स्वयं उपयोग की अनुमति दी जाएगी।
    • पीईआरसी/सीईआरसी द्वारा अनुमोदित शर्तों और निबंधनों पर किसी भी स्रोत से भारी मात्रा में विद्युत लेने की अनुमति होगी।
    • आपूर्ति के स्टैंडबाई स्रोत के रूप में 10 किलोवाट तक के डीजी सैटों के लिए किसी पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं है।
    • एकल तुलन पत्र वाली एक कंपनी की इकाइयों को नियंत्रित विद्युत के उपयोग की अनुमति होगी, चाहे वे कुछ दूरी पर स्थित हों।
    • सीपी/सीओ-जेनेरेशन की स्थापना के लिए दोहरे चरण वाले अनुमति शुल्क के स्थान पर 50 रुपए प्रति केवीए की एकसमान दर।
    • सीपीपी/सीओ-जेनरेशन के लिए मासिक समानांतर संचालन शुल्क 7.1/2 प्रतिशत के स्थान पर टीजी सैट की स्थापना क्षमता के 5 प्रतिशत पर 200 रुपए प्रति केवीए की दर पर होगा।
    • 1 एमवीए के रूप में निर्धारित न्यूनतम स्थापित क्षमता को हटाते हुए सीपीपी के रूप में संयंत्र की किसी भी क्षमता की अनुमति।

  5. एकमुश्त निपटान योजना

    • पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम और पंजाब वित्त निगम उदार ओटीएस का विस्तार करेंगे।

  6. कर प्रशासन का नवीकरण

    • 1.4.2003 से मूल्य संवर्धित कर (वैट) की शुरूआत।
    • वैट के अंतर्गत सभी इकाइयां निवेश कर ऋण के लिए पात्र होंगी।
    • एक वैधानिक फॉर्म एसटी-XXXVI को लागू करके फॉर्म एसटी-XXIV और एसटी- XXIV-क को समाप्त करना।
    • चुंगी और प्रवेश कर का एकल बिंदु स्थानीय क्षेत्र विकास कर (एलएडीटी) से स्‍थानापन्न जिसे स्थानीय निकायों को ऑनलाइन स्थानांतरित किया जाएगा। इसके कारण दो वर्षों तक राजस्व में होने वाली किसी कमी की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।

  7. विद्यमान उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में बढ़ोतरी

    • हल्की इंजीनियरिंग, टैक्सटाइल, हौजरी, निटवेयर, खेल का सामान, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में विद्यमान लघु उद्योग इकाइयों को एफसीआई के 25 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी दी जाएगी जो अधिकतम 25 लाख रुपए प्रति इकाई होगी। यह योजना दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान संचालित होगी और इसके लिए 25 करोड़ रुपए का बजट आवंटन किया जाएगा।
    • सामान के निर्यात मूल्य के 1 प्रतिशत तक मालभाड़ा सब्सिडी। 50 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का बजट आवंटन किया जाएगा।
    • सीआईआई के साथ प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए केंद्र की स्थापना की जाएगी। 1 करोड़ रुपए का आवंटन पंजाब सरकार द्वारा किया जाएगा।

  8. रुग्ण लघु उद्योग इकाइयों का पुर्जीवन

    • प्रधान सचिव, उद्योग और वाणिज्य की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय औद्योगिक पुनर्जीवन फोरम का गठन किया जाएगा।

      निम्नलिखित रियायतें दी जा सकती हैं:

      • बिक्रीकर, क्रय कर, विद्युत शुल्क, ऊर्जा शुल्क, आवास कर, भवन कर की वसूली को आस्थगित करना।
      • विद्युत कनेक्शन काटने से छूट और बंदी की अवधि के दौरान न्यूनतम प्रभार।
      • अधिशेष भूमि की बिक्री की अनुमति।
      • छंटनी/काम-बंदी की अनुमति।
      • पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड को विलंबित भुगतान पर ब्याज को कम करके 12 प्रतिशत करना।
      • पुनर्जीवन की लागत का 20 प्रतिशत स्वामी द्वारा वहन किया जाएगा।

  9. पीएसआईडीसी, पीएफसी और पीएसआईईसी की भूमिका को पुन: परिभाषित करना

    • पीएसआईडीसी और पीएफसी की भावी भूमिकाओं के लिए उनका पुन:पूंजीकरण।
    • संरचना विकास, एकल बिंदु बैंकिंग, उद्यम फंडिंग, एक ही स्थान पर एकल खिड़की सुविधा।
    • एकल टीयर 10 प्रतिशत साधारण ब्याज दर प्रदान करने वाली एक आकर्षक एकमुश्त नीति के माध्यम से संयुक्त/सहायता प्राप्त क्षेत्र और प्रत्यक्ष अभिदान कंपनियों का विनिवेश। प्रारंभिक चरण में 10 प्रतिशत राशि और बकाया 10 प्रतिशत ब्याज सहित 60 दिनों में अथवा 5 प्रतिशत छूट सहित 120 दिनों में अथवा बिना छूट के 120 दिनों के बाद भुगतान करने का विकल्प। सीमावर्ती जिलों में ब्याज दर 8 प्रतिशत होगी।

  10. संरचना विकास

    • पर्याप्त आधारभूत संरचना के सृजन के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित किया जाएगा।
    • एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक पार्कों का संचालन और रखरखाव।
    • निम्नलिखित के लिए केंद्रीय सरकार से सहायता प्राप्त की जाएगी:

      • विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड)
      • अपैरल पार्क
      • बटाला में मशीन टूल्स, लुधियाना में साइकिलें और उनके पुर्जे तथा गोविंदगढ़ में री-रोलिंग स्टील मिलों के लिए क्लस्टर विकास।
      • टैक्सटाइल केंद्रों की आधारभूत संरचना का विकास।

    • औद्योगिक पार्कों/क्षेत्रों/कृषि पार्कों/सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों के विकास में निजी क्षेत्र का निवेश।

      • पंजाब अपार्टमेंट और संपत्ति विनियमन अधिनियम, 1995 से छूट।
      • डवलपर द्वारा विकसित संरचना की प्रथम बिक्री/हस्तांतरण पर कोई स्टाम्प शुल्क नहीं।

    • मल्टीप्लेक्स कॉम्पलेक्सों का विकास

      • न्यूनतम 20 करोड़ के निवेश के साथ 4000 वर्ग गज क्षेत्र में स्थापित मल्टीप्लेक्स कॉम्पलेक्सों को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा।
      • प्रवेश की दरें निर्धारित करने के लिए नि:शुल्क लाइसेंस।
      • पहले पांच वर्षों के लिए मनोरंजन कर में 100 प्रतिशत छूट।
      • मल्टीप्लेक्स कॉम्पलेक्स में परिवर्तित विद्यमान सिनेमा हॉल भी पहले पांच वर्षों के लिए 100 प्रतिशत छूट के पात्र होंगे।
      • शॉपिंग क्षेत्र की प्रथम बिक्री पर लागू होने वाले स्टाम्प शुल्‍क के अलावा कोई हस्तांतरण शुल्क नहीं।

  11. नए निवेशों को आकर्षित करने के लिए उपाय

    • विशेष महत्व की परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहनों के विशेष पैकेज पर विचार करने हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त समिति। ऐसी परियोजनाओं के लिए एफसीआई की सीमाओं को 25 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए और अधिक किया जाएगा (सीमावर्ती जिलों के अलावा जहां यह सीमा 25 करोड़ रुपए होगी।)।
    • सीमावर्ती जिलों में औद्योगिक इकाइयों को एफसीआई के 30 प्रतिशत की दर पर पूंजीगत सब्सिडी जो अधिकतम 30 लाख रुपए प्रति इकाई है, प्रदान की जाएगी। 25 करोड़ रुपए का आवंटन किया जाएगा।


    11.1  चीनी उद्योग का विकास

    • ऊर्जा के सह-सृजन, एथनॉल का विनिर्माण और डिस्टिलरियों की स्थापना के लिए चीनी मिलों को स्वत: अनुमति।
    • अधिशेष विद्युत को अन्य उद्योगों/पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड को देने की अनुमति होगी।


    11.2  निम्नलिखित रियायतों के माध्यम से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विकास

    • गेहूं और धान के अलावा किसी भी वस्तु पर कोई बाज़ार शुल्क और ग्रामीण कर नहीं।
    • 30 करोड़ रुपए और अधिक के एफसीआई सहित एकीकृत धान प्रसंस्करण संयंत्र के लिए बाज़ार शुल्क और अनुसंधान तथा विकास उप-कर में छूट दी जाएगी।
    • कृषि संबंधी उत्पादों की किसानों से सीधी खरीद।
    • पैकेजिंग सामग्री पर बिक्री कर न्यूनतम दरों पर।
    • गेहूं और धान जहां यह सुविधा न्यूनतम 50 करोड़ रुपए की एफसीआई वाली इकाइयों के लिए होगी, के अलावा सभी इकाइयों के लिए निवेश कर ऋण।


    11.3   विशेष पैकेज के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी वाली सेवाओं, इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग, नॉलेज पार्क और जैव-प्रौद्योगिकी का विकास, जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं:

    • सूचना प्रौद्योगिकी और जैव-प्रौद्योगिकी पर बिक्री दरें निम्नतम स्तर पर।
    • सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं, इलैक्ट्रॉनिक्स और जैव-प्रौद्योगिकी पर कोई चुंगीकर नहीं।
    • स्थान की पाबंदी के बिना 10 केवीए तक के इलैक्ट्रिक पॉवर ट्रांस्फॉर्मरों की स्थापना की अनुमति।
    • 5 वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट।
    • विद्युत कटौती से छुटकारा।
    • 3 वर्षों तक स्टाम्प शुल्क में छूट।
    • भूमि और भवन कर में छूट।
    • तीन शिफ्टों में काम करने और महिला कर्मचारियों की नियुक्ति करने की सामान्य अनुमति।
    • शहरों में फ्लोर स्पेसिंग इन्डेक्स में 50 प्रतिशत तक छूट।

विस्तृत विवरण के लिए   http://punjabgovt.nic.in/ind policy.htm