अधिसूचना
सिक्किम विधानसभा के निम्नलिखित अधिनियम जिसे 3 जुलाई, 2000 को राज्यपाल की सहमति प्राप्त हुई है, को सामान्य सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है।
सिक्किम औद्योगिक संवर्धन और प्रोत्साहन अधिनियम, 2000 (2000 का अधिनियम संख्या 18)
सिक्किम राज्य में स्थापित अति लघु, लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए प्रोत्साहनों का प्रावधान करने हेतु एक अधिनियम।
जबकि सिक्किम राज्य में स्थापित अति लघु, लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए प्रोत्साहनों का प्रावधान करना समीचीन है।
भारत गणराज्य के इक्वावनवें वर्ष में सिक्किम की विधानसभा द्वारा निम्नानुसार इसे अधिनियमित किया जाता है:-
लघु शीर्षक और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को सिक्किम औद्योगिक संवर्धन और प्रोत्साहन अधिनियम, 2000 कहा जाएगा।
(2) यह तत्काल रूप से प्रभावी होगा।
अनुप्रयोजन
यह अधिनियम इसके प्रारंभ होने की तिथि को विद्यमान सभी औद्योगिक इकाइयों और इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों पर भी लागू होगा। इस अधिनियम में उल्लिखित न होने के बावजूद, इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले स्थापित और किसी अधिसूचना अथवा नियमों अथवा योजनाओं के आदेशों आदि के अंतर्गत पांच वर्षों की अवधि के लिए लाभ, रियायतें, प्रोत्साहन और सब्सिडियों का कोई अन्य पैकेज आदि प्राप्त करने वाले उद्योग इस अधिनियम के अंतर्गत किन्हीं लाभों के लिए पात्र नहीं होंगे।
परिभाषाएं
(1) जब तक संदर्भ में अन्यथा वांछित न हो, इस अधिनियम में :-
क. "शिल्पकार और अति लघु उद्योग इकाइयों, लघु उद्योग इकाइयों और मध्यम/बड़ी इकाइयों" से तात्पर्य भारत सरकार द्वारा समय-समय पर परिभाषित एक औद्योगिक इकाई से है और इसमें सहकारी औद्योगिक इकाइयां भी सम्मिलित हैं।
ख. "पूंजी" से तात्पर्य अचल परिसंपत्तियों जैसे भवन आदि और सचल परिसंपत्तियों जैसे साख पर सकल निवेश से है।
ग. "कंपनी" से तात्पर्य राज्य में इस समय कंपनियों के पंजीकरण से संबंधित कानून के प्रावधान के अंतर्गत पंजीकृत एक इकाई से है।
घ. "सहकारी समिति" से तात्पर्य सिक्किम सहकारी समिति अधिनियम, 1978 के अंतर्गत पंजीकृत किसी सहकारी औद्योगिक इकाई से है।
ङ. "स्थाई निवेश" से तात्पर्य भूमि, भवन, संयंत्र और मशीनरी तथा अन्य पूंजीगत वस्तुओं में किए गए निवेश से है।
च. "साझेदारी फर्म" से तात्पर्य दो अथवा अधिक व्यक्तियों द्वारा स्थापित एक इकाई से है।
छ. "लघु उद्योग" से तात्पर्य उस औद्योगिक इकाई से है जहां संयंत्र और मशीनरी जैसी स्थाई परिसंपत्तियों (अर्थात् भूमि, भवन आदि की लागत को छोड़कर), चाहे वे स्वामित्व की शर्तों अथवा पट्टे अथवा किराया खरीद पर धारित हों, में कुल निवेश 100 लाख रुपए से अधिक नहीं है।
ज. "कार्यशील पूंजी" से तात्पर्य वस्तुओं, कच्चे माल, चल रहे कार्यों के कलपुर्जों और वेतन, विद्युत शुल्कों जैसे संचालन व्ययों तथा अन्य आवर्ती व्ययों सहित एक इकाई के दिन-प्रतिदिन के संचालन के व्यय की पूर्ति करने हेतु वांछित निधि ऋण के भाग से है।
झ. "कार्यशील पूंजी ऋण" से तात्पर्य एक ऋण से है जिसकी संचालन चक्र को पूरा करने के लिए एक औद्योगिक इकाई की दिन-प्रतिदिन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विद्यमान परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए आवश्यकता है और जिसमें औद्योगिक इकाई द्वारा वांछित नकद ऋण और ओवर ड्राफ्ट सुविधाएं तथा कोई अन्य लघु अवधि ऋण सम्मिलित हैं।
ञ. "वर्ष" से तात्पर्य अप्रैल के प्रथम दिन से प्रारंभ होकर आगामी मार्च के इकतीसवें दिन समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष से है।
अयोग्यता
जहां एक औद्योगिक इकाई कोई सूचना अथवा विशेष सामग्री अथवा रेकॉर्ड अथवा दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहती है अथवा अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध लाभों को गलत तरीके से प्राप्त करती अथवा रियायतों के लाभों का गलत प्रयोग करती पाई जाती है अथवा गलत सूचना प्रस्तुत करती है अथवा अन्यथा वास्तविक रूप में कार्य करती नहीं पाई जाती है, तो ऐसी औद्योगिक इकाई अधिनियम के अंतर्गत किन्हीं लाभों अथवा रियायतों अथवा प्रोत्साहनों को प्राप्त करने के अयोग्य होगी।
स्वीकृति, वसूली, प्रतिपूर्ति आदि
इस अधिनियम के अंतर्गत लाभों/प्रोत्साहनों के लिए स्वीकृति देने वाले प्राधिकरण को राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाएगा और जो ऐसे प्रोत्साहनों अथवा लाभों के लिए सभी आवेदनपत्र प्राप्त करने के लिए भी अधिकृत होगा और वसूली, प्रतिपूर्ति अथवा समायोजन के किसी मामले को भी निपटाएगा।
कार्यशील पूंजी पर ब्याज की सब्सिडी
जहां एक उद्योग ने ब्याज पर सब्सिडी प्राप्त की है अथवा उसके लिए पात्र है, तो ऐसी सब्सिडी कार्यशील पूंजी ऋण पर औद्योगिक इकाई द्वारा देय ब्याज के 14 प्रतिशत से अधिक ब्याज के लिए होगी और ऋण प्राप्त करने की तिथि से उद्योगों की विभिन्न श्रेणियों के लिए निम्नलिखित प्रकार से पांच वर्षों की अवधि के लिए उपलब्ध होगी :-
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शिल्पकार और अति लघु इकाइयां |
लघु उद्योग इकाइयां |
मध्यम/बड़ी इकाइयां |
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10,000.00 रुपए (दस हजार रुपए) अथवा ब्याज में वास्तविक अंतर, जो भी कम हो। |
50,000.00 (पचास हजार रुपए) अथवा ब्याज में वास्तविक अंतर, जो भी कम हो। |
1,00,000.00 रुपए (एक लाख रुपए) अथवा ब्याज में वास्तविक अंतर, जो भी कम हो। |
मूल्य वरीयता
सिक्किम राज्य के क्षेत्र के अंतर्गत स्थापित लघु अथवा बड़ी औद्योगिक इकाइयां राज्य के बाहर से लाए गए समान अथवा समकक्ष गुणवत्ता वाले समान उत्पाद के लिए बताए गए मूल्य की दरों पर 15 प्रतिशत तक मूल्य वरीयता प्राप्त करेंगी।
विद्युत पर सब्सिडी
50,000.00 रुपए प्रतिवर्ष तक विद्युत उपभोग करने वाली एक औद्योगिक इकाई 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति के लिए पात्र होगी।
सुरक्षा जमा और/अथवा पेशगी राशि पर छूट
औद्योगिक इकाई को ऋणदाताओं अथवा सरकारी विभाग द्वारा वस्तुओं की खरीद के लिए कोटेशनों के संबंध में सुरक्षा जमा और/अथवा पेशगी राशि के भुगतान से छूट प्राप्त होगी।
अंतरराष्ट्रीय मानक संगठन/भारतीय मानक संस्थान प्रमाणन
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए अपने उत्पादों के संबंध में औद्योगिक इकाई भारतीय मानक संस्थान/अंतरराष्ट्रीय मानक संगठन से प्रमाणपत्र प्राप्त करेगी और इसके लिए पंजीकरण शुल्कों, परीक्षण शुल्कों, वार्षिक लाइसेंस शुल्कों, परीक्षण उपकरणों की खरीद पर हुए व्यय के 100 प्रतिशत की राज्य सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी, परंतु प्रतिपूर्ति के रूप में देय अधिकतम राशि 25,000.00 रुपए से अधिक नहीं होगी।
संवर्धन परिषद, भारतीय मानक संस्थान, कमोडिटी बोर्ड, चैंबर ऑफ कॉमर्स के पंजीकरण शुल्क पर सब्सिडी
अधिकतम 10,000.00 रुपए (दस हजार रुपए) अथवा वास्तविक पंजीकरण शुल्क, जो भी कम हो, के अध्यधीन, संवर्धन परिषद, भारतीय मानक संस्थान, कमोडिटी बोर्ड, चैंबर ऑफ कॉमर्स आदि के साथ पंजीकरण प्राप्त करने में एक औद्योगिक इकाई द्वारा व्यय की गई राशि की इकाई को प्रतिपूर्ति की जाएगी।
कराधान मामले
अधिसूचना संख्या 2/टीआईसी दिनांक 16 फरवरी, 1974 के अंतर्गत छूट जारी रहेगी।
छूट की अवधियां
इस अधिनियम में सम्मिलित लाभ, रियायतें और छूट स्वीकृति प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित अवधि के लिए होंगी। स्वीकृति प्राधिकरण समय-समय पर सरकार के अनुमोदन से औद्योगिक इकाइयों पर लागू होने वाले ऐसे अतिरिक्त लाभों, रियायतों और छूटों को अधिसूचित करेगा जो वांछनीय समझे जाएंगे।
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी बनाने में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों के संगत न होने पर, ऐसी कठिनाइयों को दूर कर सकती है।
निरस्त करना
अति लघु, लघु दोनों अथवा मध्यम/बड़ी औद्योगिक इकाइयों को लाभ/प्रोत्साहन/ रियायतें प्रदान करने के उद्देश्य हेतु समय-समय पर जारी सभी अधिसूचनाओं, आदेशों, निर्देशों, परिपत्रों, योजनाओं आदि को एतद् द्वारा दोहराया जाता है।.
राज्यपाल के आदेश द्वारा
टी.डी. रिनज़िंग
सचिव, सिक्किम सरकार
विधि विभाग
फाइल संख्या 16(82)एलडी/2000