21.12.1999 से लघु औद्योगिक उपक्रम के रूप में श्रेणीबद्ध होने के लिए एक औद्योगिक उपक्रम को निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
एक औद्योगिक उपक्रम जिसमें संयंत्र और मशीनरी में अचल सम्पदाओं चाहे वह लीज़ पर स्वामित्व की शर्तों पर हो अथवा किराया खरीद पर, में 10 मिलियन से अधिक निवेश नहीं होना चाहिए।
(बशर्ते कि इकाई किसी अन्य औद्योगिक उपक्रम के स्वामित्व और नियंत्रण में अथवा उसकी सहायक न हो)
स्पष्टीकरण : इस नोट के उद्देश्य के लिए :-
(क)
"स्वामित्व" का अर्थ वही होगा जो वर्णित अधिनियम के खंड 3 की धारा (1) में निर्धारित "स्वामी" अभिव्यक्ति की परिभाषा में उदधृत किया गया है।
(ख)
"सहायक" का अर्थ वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के खंड 4 के साथ पठित खंड 2 की धारा (47) में दिया गया है।
(ग)
"अन्य औद्योगिक उपक्रमों द्वारा नियंत्रित" अभिव्यक्ति का निम्नलिखित अर्थ है :-
(1)
एक मालिक के रूप में एक ही व्यक्ति द्वारा दो या अधिक औद्योगिक उपक्रम स्थापित किए जाते हैं, ऐसे प्रत्येक औद्योगिक उपक्रम अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों द्वारा नियंत्रित माने जाएंगे।
(2)
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 1) के अंतर्गत दो अथवा अधिक औद्योगिक उपक्रम भागीदारी फर्म के रूप में स्थापित किए जाएं और एक अथवा अधिक भागीदार ऐसी फर्मों में सामूहिक भागीदार हों, ऐसे प्रत्येक उपक्रम अन्य उपक्रम अथवा उपक्रमों द्वारा नियंत्रित माने जाएंगे।
(3)
जहां कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अंतर्गत कंपनियों द्वारा औद्योगिक उपक्रम स्थापित किए जाते हैं, एक औद्योगिक उपक्रम अन्य औद्योगिक उपक्रम द्वारा नियंत्रित माना जाएगा
यदि -
(क)
अन्य कंपनी द्वारा इसमें शेयरधारिता उसकी अपनी कुल शेयरधारिता के चौबीस प्रतिशत से अधिक हो जाती है; और
(ख)
एक उपक्रम का प्रबंधकीय नियंत्रण प्रथम उल्लिखित उपक्रम के प्रबंध निदेशक जो अन्य औद्योगिक उपक्रम में भी प्रबंध निदेशक अथवा निदेशक हों, के माध्यम से अन्य औद्योगिक उपक्रम को दे दिया जाता है अथवा प्रथम उल्लिखित उपक्रम के निदेशक मंडल की बहुसंख्या निम्नलिखित उप-धारा (4) की मद (क) और (ख) के प्रावधानों के संदर्भ में अन्य उपक्रम में शेयरधारक हों
(4)
उपर्युक्त उप-धारा (3) के अनुसार अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रम में निकायों की शेयर सहभागिता की सीमा निम्न प्रकार से तय की जाएगी :-
(क
अन्य उपक्रम द्वारा शेयर सहभागिता में विदेशी एवं घरेलू दोनों प्रकार के शेयर शामिल होंगे
(ख)
अन्य औद्योगिक उपक्रम द्वारा शेयर सहभागिता का अर्थ होगा अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों, चाहे वे लघु हों अथवा अन्य, द्वारा औद्योगिक उपक्रम में धारित कुल शेयर। इसमें उन व्यक्तियों द्वारा धारित शेयर भी शामिल हैं जो अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों में निदेशक हों, चाहे संबंधित व्यक्ति अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों में निदेशक भी है।
(ग)
विशेष तकनीकी योग्यता और अनुभव वाला व्यक्ति जिसे लघु उद्योग उपक्रम में निदेशक नियुक्त किया गया है, के द्वारा योग्यता शेयर की सीमा, यदि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में ऐसा दिया गया हो, तक धारित शेयरों की अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों द्वारा धारित शेयरों में गणना नहीं की जाएगी चाहे संबंधित व्यक्ति अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों में भी निदेशक हो।
(5)
उप-धारा (1), (2) अथवा (3) के संदर्भ में जहां एक औद्योगिक उपक्रम किसी अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों की एक सहायक, अथवा उनके स्वामित्व में, अथवा उनके द्वारा नियंत्रित है और यदि एक साथ मिलाकर प्रथम उल्लिखित औद्योगिक उपक्रम और अन्य औद्योगिक उपक्रम अथवा उपक्रमों के संयंत्र और मशीनरी में निश्चित सम्पदा में कुल निवेश इस अधिसूचना के अनुच्छेद (1) अथवा (2) में उल्लिखित निवेश की सीमा से अधिक होता है, चाहे जो भी मामला हो, इन औद्योगिक उपक्रमों में से किसी को भी एक लघु अथवा अनुषंगी औद्योगिक उपक्रम नहीं माना जाएगा।
नोट 2 -
(क)
इस अधिसूचना के अनुच्छेद (1) और (2) के उद्देश्यों के लिए संयंत्र और मशीनरी के मूल्य की गणना में, चाहे संयंत्र और मशीनरी नई हो अथवा पुरानी, मूल मूल्य को ही माना जाएगा।
(ख)
संयंत्र और मशीनरी के मूल्य की गणना करने में निम्नलिखित को सम्मिलित नहीं किया जाएगा :-
(1)
रखरखाव के लिए उपकरणों यथा औजारों, जिग्स, सांचों, मोल्ड्स और पुर्जों की लागत तथा उपभोज्य भंडारों की लागत।
(2)
संयंत्र और मशीनरी की स्थापना की लागत।
(3)
अनुसंधान और विकास उपकरण तथा प्रदूषण नियंत्रण उपकरण की लागत।
(4)
राज्य विद्युत बोर्ड के विनियमों के अनुसार उपक्रम द्वारा स्थापित जेनेरेटर सेटों और अतिरिक्त ट्रांस्फॉर्मर की लागत।
(5)
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम अथवा राज्य लघु उद्योग निगम को भुगतान किए गए बैंक शुल्क और सेवा शुल्क।
(6)
केबल्स, तार, बस बार्स, इलैक्ट्रिकल कंट्रोल पैनलों ( वे नहीं जो मशीनों पर विशेष रूप से लगाए गए हैं), ऑइल सर्किट ब्रेकर्स अथवा मिनिएचर सर्किट ब्रेकर्स जो संयंत्र और मशीनरी को विद्युत शक्ति प्रदान करने हेतु प्रयोग के लिए अथवा सुरक्षा उपायों के लिए आवश्यक हैं, की प्राप्ति अथवा स्थापना में सम्मिलित लागत।
(7)
गैस उत्पादक संयंत्र की लागत
(8)
निर्माण स्थल से कारखाना स्थल तक देशी मशीनरी के लिए परिवहन शुल्क (बिक्री कर और उत्पाद शुल्क को छोड़कर)।
(9)
संयंत्र और मशीनरी की स्थापना के लिए तकनीकी जानकारी हेतु भुगतान किए गए शुल्क।
(10)
ऐसे भंडारण टैंकों की लागत जो केवल कच्चे माल, तैयार माल का भंडारण करते हैं और निर्माण प्रक्रिया से संबद्ध नहीं हैं, और
(11)
अग्नि शमन उपकरणों की लागत।
(ग)
आयातित मशीनरी के मामले में, मूल्य की गणना करने के लिए निम्नलिखित को शामिल किया जाएगा :-
(1)
आयात शुल्क (विविध व्ययों जैसे बंदरगाह से कारखाना स्थल तक परिवहन, बंदरगाह पर भुगतान किया गया विलम्ब-शुल्क शामिल नहीं है)
(2)
जल परिवहन शुल्क
(3)
कस्टम से छुड़ाने का शुल्क, और
(4)
बिक्री कर
प्रत्येक औद्योगिक उपक्रम जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा उल्लिखित अधिनियम के खंड 10 के अंतर्गत पंजीकरण प्रमाणपत्र अथवा उल्लिखित अधिनियम के खंड 11, 11क और 13 के अंतर्गत लाइसेंस जारी किया गया है और जो अनुषंगी अथवा लघु उद्योग उपक्रम से संबंधित उपर्युक्त अनुच्छेद (1) और (2) के प्रावधानों के अंतर्गत कवर किए गया है, को स्वामी के विवेक पर सरकारी गज़ट में इस अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से एक सौ अस्सी दिनों की अवधि के भीतर पंजीकृत कराया जा सकता है।
अति लघु उद्यम
अति लघु उद्योगों के मामले में इकाई के स्थान पर विचार किए बिना संयंत्र और मशीनरी में निवेश की सीमा रुपये 2.5 मिलियन है।
महिला उद्यमी
एक अथवा अधिक महिलाओं द्वारा मालिकाना रूप में प्रबंधित एक लघु उद्योग इकाई/उद्योग सम्बद्ध सेवा और व्यवसाय उद्यम अथवा जिसमें वह/वे व्यक्तिगत रूप से अथवा सामूहिक रूप से भागीदारों/शेयरहोल्डरों/प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशकों/सहकारिता सोसाइटी के सदस्यों के रूप में 51 प्रतिशत से कम शेयर पूंजी नहीं रखती हैं।
लघु उद्योग सेवा और व्यवसाय (उद्योग संबद्ध) उद्यम
भूमि और भवन को छोड़कर, अचल संपदाओं में रुपये 500,000 तक निवेश के साथ लघु उद्योग सेवा और व्यवसाय उद्यम की औद्योगिक संबद्ध सेवा/व्यवसाय को लघु उद्योग सेवा/व्यवसाय उद्यम कहा जाता है। सितम्बर, 2000 से इस सीमा को बढ़ाकर रुपये 1 मिलियन कर दिया गया है।